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सुख-दुख

वहाँ आपने यदि चड्ढी पहन रखी है तो लोग एलजीबीटी समझ लेते हैं!

नितिन त्रिपाठी-

मियामी साउथ बीच में मैं और मेरा मित्र स्विमिंग कर रहे थे. एक जलपरी तैर कर बाहर निकली. तैर वह टॉप लेस रही थी. बाहर निकलते ही उसने माइक्रोकिनी पहन ब्रेस्ट पार्शियली कवर कर लिए. मेरा मित्र बोलता बहुत संस्कारी घरों की है यह लड़की. सही भी था, ज़्यादातर लड़कियाँ वहाँ टॉप लेस थीं और नो वन केयर्स. हाँ वहाँ पटरे वाला जाँघियाँ पहने अंकिल जी या मैक्सी पहने आंटी जी दिखाई देतीं तो पक्का सब लोग घूरते.

अमेरिका में जिम में लॉकर रूम्स होते हैं. जैसे ही लॉकर रूम में जाते हैं सब टोटली न्यूड हो जाते हैं. कल्चरल शॉक है एडजस्ट होने में टाइम लगता है. अग़ल बग़ल नहाते हुवे, साउना में सिकाइ करते हुवे सब पूरी तरह से न्यूड लोग बैठे हैं. वहाँ आपने यदि चड्ढी पहन रखी है तो लोग एलजीबीटी समझ लेते हैं. कल्चर है. इन्हीं नंगे लोगों में कोई कॉर्पोरेट सीईओ भी होगा. लॉकर से निकलते हुवे टाई सूट में आ जायेगा.

पश्चिम में न्यूडिटी का विशेष हो हल्ला नहीं होता पर वहाँ भी अंडरस्टुड होता है कि हर जगह का एक ड्रेस कोड है. मियामी बीच में टॉपलेस टहल रही युवती के इतनी समझ होती है कि जब वह कार शॉप में सेल्स गर्ल बन कर जाये तो प्रॉपर परिधान में हो.

हिन्दी में भी है जैसा देश वैसा भेष.

भारत में भी नाईट क्लब / पब में कोई लड़की माइक्रो स्कर्ट में भी है तो माइंड नहीं करना चाहिए. इतना माइंड करने वाले हो तो यहाँ क्यों आये हो. स्विमिंग पूल में स्विमिंग कॉस्ट्यूम में ही जाना है, इतनी हया शर्म है तो यहाँ आने के लिए डॉक्टर ने थोड़े ही बोला था. ऑफिस जाना हो तो ऑफिस ड्रेस में ही जाना है. साड़ी, सलवार सूट, शर्ट पेंट. मंदिर जाना हो साड़ी पहन जाना चाहिए, वर्स केस में सलवार सूट चुन्नी के साथ.

समस्या यह है कि हम अर्थात् हम सब सोसली पर्वर्ट समाज बन गये हैं. यक़ीन मानिए भारत के रेडिट ग्रुप्स में ही सबसे ज्यादा लड़कियों की छिप कर खींची गई फ़ोटो / वीडियो होते हैं. लंबे समय तक अनुशासन का पहरा रहा और अकस्मात् इंटरनेट आते ही सीधे स्कैंडवियन कल्चर दिखने लग गया. लड़कियों को प्रसिद्धि का सबसे सस्ता साधन दिखता है बग़ैर कपड़े पहन बाहर निकल जाना और अधिसंख्य लड़कों को भी इतनी समझ नहीं होती कि न्यूड गर्ल्स देखनी हों तो बीच पर जायें, ऑफिस में/ मेट्रो में कोई कम कपड़े में दिखे तो उसे भाव न दें. हो सके तो विरोध करें – वहीं पर.

यक़ीन मानिए यह जो कल्चर लॉस हो रहा है यहाँ का यह विश्व का सबसे ड्रास्टिक फाल है कल्चरली.

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