जुलाई 2008 में आजतक से जुड़े थे अशोक सिंघल. मैनेजिंग एडिटर (पॉलिटिक्स) के पद पर काम करते हुए अठारह साल की लंबी पारी को विराम दिया. वे जल्द ही एक बड़े मीडिया संस्थान के साथ नई शुरुआत करने वाले हैं।
अशोक सिंघल ने अपने जीवन में बहुत उतार चढ़ाव देखा है लेकिन उन्होंने सफलता मिलने पर भी अपनी डिग्निटी और फाइटर स्पिरिट को मरने नहीं दिया। ख़बरों को पकड़ने और विरोधी मीडिया हाउसों को पछाड़ने में वे सदैव आगे रहे। उन्होंने फील्ड में हमेशा ख़ुद को और अपने मीडिया हाउस को चैंपियन बनाए रखा। प्रतिद्वंदी पत्रकार नज़र बनाये रखते थे कि अशोक सिंघल कहीं कोई ऐसी ख़बर ब्रेक न कर दे जो उन्हें न पता हो।
हरियाणा के जींद के नरवाना इलाके के रहने वाले इस नौजवान ने तब जनसत्ता जैसे प्रतिष्ठत अखबार से मीडिया में कदम रखा। उन दिनों ओम थानवी चण्डीगढ में और प्रभाष जोशी दिल्ली में संपादक हुआ करते थे। बाद में अशोक सिंघल राष्ट्रीय सहारा अख़बार से जुड़ गए। उसके बाद टीवी में कुछ माह एनडीटीवी में रहे। फिर बारह साल तक ज़ी न्यूज़ के साथ काम किया। उसके बाद आजतक से जुड़े तो यहीं के होकर रह गए।
सोशल मीडिया से दूर रहने वाले इस शख्स ने सिर्फ़ अपने काम को ही अपना खुदा माना और देश के करोड़ों लोगों के दिलों पर राज किया। संसद और पीएमओ की हजारों ख़बरें ब्रेक करने वाले अशोक सिंघल टीवी न्यूज़ मीडिया के मैदान में अब भी चमक रहे हैं जबकि उनके साथ के ज्यादातर पत्रकार परिदृश्य से गायब हो चुके हैं।
तीस साल के टीवी मीडिया के करियर में अशोक सिंघल ने एक दिन के लिए भी जॉब से मुक्ति नहीं ली। अब जाकर उन्होंने एक ब्रेक लिया है और फिर कुछ दिन बाद नई पारी का आगाज करेंगे।
आज जब मीडिया वाले तरह तरह से बनाम किए जा रहे और ख़ुद अपनी करनी से हो भी रहे हैं, अशोक सिंघल का दामन किसी किस्म के दाग से अनछुआ है। उन पर एक पैसे का भी कोई आरोप नहीं लगा सकता। उनके विरोधी भी उनकी ईमानदारी की दाद देते हैं!
पिछली यादों की कुछ तस्वीरें-














