दैनिक जागरण प्रबंधन की प्रताड़ना से परेशान और मजीठिया वेज बोर्ड न मिलने से दुखी मीडियाकर्मी ने आत्महत्या की

लुधियाना से एक बुरी खबर आ रही है. पता चला है कि दो दशक से ज्यादा समय से दैनिक जागरण के साथ कार्यरत मीडियाकर्मी अतुल सक्सेना ने आत्महत्या कर लिया है. कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि उन्हें जहर देकर मारा गया है क्योंकि उन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड का केस वापस लेने के प्रबंधन के दबाव में आने से इनकार कर दिया था. अतुल ने मजीठिया वेज बोर्ड का हक पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस कर रखा था और इस मामले में फैसला आने में हो रही देरी से दुखी थे. उन पर दैनिक जागरण प्रबंधन लगातार दबाव बनाए हुए था कि वह केस वापस लें अन्यथा उनका दूरदराज तबादला कर दिया जाएगा.

अतुल दैनिक जागरण लुधियाना में दो दशक से ज्यादा समय से पीटीएस डिपार्टमेंट में कार्यरत थे. अतुल की पूरी गृहस्थी लुधियाना में सेटल है. उनकी पत्नी म्यूजिक टीचर के रूप में शहर के एक स्कूल में कार्यरत हैं. जागरण प्रबंधन के लगातार दबाव बनाने और मजीठिया वेज बोर्ड के तहत लाभ न दिए जाने से दुखी अतुल सक्सेना करीब पंद्रह दिनों से घर बैठे हुए थे. वे प्रबंधन के दबाव व प्रताड़ना से बेहद परेशान और डरे हुए थे. बताया जाता है कि उन्होंने कल घरवालों से कहा था कि वह अगले दिन यानि आज दैनिक जागरण आफिस जाकर इस्तीफा दे देंगे. उनकी पत्नी रोजाना की तरह आज स्कूल पढ़ाने चली गई थीं. जब वह शाम को लौटीं थी अतुल सक्सेना बेहोश हालत में मिले.

उन्हें तुरंत दयानंद मेडिकल कालेज ले जाया गया जहां डाक्टर उन्हें बचा नहीं सके. उन्हें जहर देकर मारा गया या उन्होंने खुद जहर खाया, यह पता नहीं चल पाया है. उनकी बाडी को फिलहाल मेडिकल कालेज के पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया है. दैनिक जागरण प्रबंधन के लोग इस मामले में लीपापोती के लिए सक्रिय हो चुके हैं. वहीं दैनिक जागरण कर्मियों की यूनियन के लोग भी अतुल सक्सेना के घर के लिए रवाना हो चुके हैं. मीडिया एक्टिविस्ट और पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव भी दिल्ली से लुधियाना के लिए चल चुके हैं. अभिषेक ने बताया कि अभी तक जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक ये सारा मामला पुलिस केस का है. इस आत्महत्या या हत्या जो भी है, के लिए पूरी तरह दैनिक जागरण प्रबंधन जिम्मेदार है.

ज्ञात हो कि दैनिक जागरण प्रबंधन ने हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-नोएडा के सैकड़ों मीडियाकर्मियों को नौकरी से इसलिए बर्खास्त कर दिया है क्योंकि उन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड के तहत सेलरी व अन्य लाभ पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मानहानि का केस कर रखा है. दर्जनों ऐसे लोग जो अब भी जागरण में नौकरी कर रहे हैं, उन्हें केस वापस लेने हेतु प्रबंधन के बनाए फार्मेट पर हस्ताक्षर करने या फिर तबादले जैसी प्रताड़ना झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है. इसी किस्म की प्रताड़ना अतुल सक्सेना झेल रहे थे. वह अत्यधिक दबाव, प्रताड़ना, उपेक्षा और अलगाव झेल नहीं पाए.

दैनिक जागरण लुधियाना के मीडियाकर्मियों का कहना है कि इस खून के लिए पूरी तरह दैनिक जागरण प्रबंधन जिम्मेदार है. दैनिक जागरण कर्मचारी यूनियन के लोग जल्द इस पूरे प्रकरण पर अपनी जांच रिपोर्ट जारी करने वाले हैं और आगे की कार्रवाई का ऐलान करने वाले हैं.

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अतुल सक्सेना के खून के छींटे जागरण के मालिकों के माथे से लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्याय के तराजू और नरेंद्र मोदी के अच्छे दिनों के नारे तक पर पड़े हैं

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