संजय कुमार सिंह
आज मेरे अखबारों में भाजपा का फाल्टा जीतना तो खबर है लेकिन सीबीएसई की साइट पांच दिन से खराब है, यह खबर नहीं है। होर्मुज पर खबरों की गंभीरता का आलम यह है कि टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, “अमेरिका, ईरान होर्मुज करार के ‘करीब’ हैं, परमाणु चर्चा चलती रह सकती है”। इस खबर का इंट्रो है, अच्छी खबर कुछ घंटों में आ सकती है। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, “ईरान सौदा होने ही वाला है, लेकिन ट्रम्प ने कहा ‘कोई जल्दी नहीं’ है”। द हिन्दू ने इस खबर को लीड नहीं बनाया है क्योंकि ‘खबर’ ही ऐसी है। अंदर के पन्ने पर इस खबर का शीर्षक है – “ट्रम्प ने कहा, (होर्मुज में) रोक जारी रहेगी, जल्दबाजी में करार नहीं करूंगा”। दि एशियन एज में यह खबर लीड नहीं है और पहले पन्ने पर दो कॉलम में छपी इस खबर का शीर्षक है, “अमेरिका जल्दबादी में करार नहीं करेगा, गलतियों की गुंजाइश नहीं है : ट्रम्प”। इंडियन एक्सप्रेस और द टेलीग्राफ में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। अंतरराष्ट्रीय महत्व की इस खबर के मुकाबले नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के बीच सीबीएसई की परीक्षा के नतीजों में गड़बड़ी और पुनर्मूल्यांकन से संबंधित खुलासे सरकारी व्यवस्था की पोल खोलने वाले हैं जो डिजिटल इंडिया का सच भी है। सरकार ने जो भी किया है, जल्दबाजी में, आधा-अधूरा और पारदर्शिता के बिना। आप जानते हैं कि नोटबंदी के साथ अचानक पेटीएम और भारत लगभग एक झटके में डिजिटल लेन-देन करने लगा। पी. चिदंबरम ने कई तकनीकी और व्यवहारिक चुनौतियों की चर्चा की थी। वे अब भी हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक उसकी खिल्ली उड़ाते हैं। उनकी मुख्य आशंका यह थी कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्वभाव से ‘नकद-आधारित’ है और इसे जबरन डिजिटल बनाना गरीबों और छोटे व्यापारियों के लिए परेशानी पैदा करेगा। उन्होंने डिजिटल लेन-देन में डेटा सुरक्षा और साइबर फ्रॉड के खतरों पर भी चिंता जताई थी। मुझे लगता है कि चिदंबरम की चिन्ता वाजिब थी। साइबर फ्रॉड और उपभोक्ताओं की परेशानी के ढेरों किस्से हैं। सरकार को फर्क नहीं पड़ता है वह अलग बात है।
मेरा मानना है कि बैंकिंग और पैसों के मामले में सरकार का यह हाल है तो डिजिटल वोटर लिस्ट नहीं देना और परीक्षा की कॉपी स्कैन करके मशीन से जांचना तथा उसमें गलती होना, सरकार के सामान्य रवैये का परिचायक है। इसपर खूब खबरें होनी चाहिए थीं पर जो हैं वो भी दबाई-छिपाई जा रही हैं। दूसरी ओर, सरकार की जबरदस्ती और दावों के बावजूद तथ्य है कि डिजिटल बैंकिंग बढ़ने के बावजूद बाजार में नकद भी सर्वकालिक उच्च स्तर पर है। नकदी बरामद हो ही रही है। यह सही है कि डिजिटल भुगतान, विशेषकर यूपीआई आधारित लेनदेन, पिछले वर्षों में तेज़ी से बढ़े हैं। यह भी तथ्य है नोटबंदी के समय जहाँ लगभग 18 लाख करोड़ रुपये नकदी प्रचलन में थी, वहीं बाद में यह बढ़कर (2021 में) 28.5 लाख करोड़ रुपये हो गई, इसलिए “कैशलेस” या “लेस-कैश” अर्थव्यवस्था का दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता। ऐसी हालत में खबर उड़ती है कि आईरटीआई सूचना के अनुसार रिजर्व बैंक ने जो नोट छापे और आरबीआई के पास जितने नोट हैं उनमें तालमेल नहीं है। ना खाऊंगा ना खाने दूंगा वाले डिजिटल इंडिया में नकदी को लेकर इस तरह की गड़बड़ी के प्रति गंभीरता नहीं है तो परीक्षा, नंबर और लीक की क्या बात होगी लेकिन यही चिन्ता का विषय है।
आज अमर उजाला में टॉप पर पांच कॉलम में छपी खबर का शीर्षक है, सीबीएसई 12वीं के विद्यार्थियों को लौटाएगा अतिरिक्त राशि। उपशीर्षक है, कम नहीं हो रहीं समस्याएं : पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियां। इसमें यह नहीं बताया गया है कि साइट पांच दिन से खराब है जबकि कल दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, पांच दिन से साइट डाउन है। डिजिटल इंडिया में नीट के पर्चे लगातार तीसरी बार लीक होने की शंका है और सीबीएसई की साइट पांच दिन से खराब है – लेकिन खबर फाल्टा जीतने की है जबकि तृणमूल के उम्मीदवार ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा पहले ही कर दी थी। पूरी संभावना है कि ऐसा डर और दबाव में हुआ है तथा आज छपी खबर के अनुसार यह ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक का गढ़ है। जाहिर है, भाजपा का प्रचार नहीं करना हो तो खबर सीबीएसई की है खासकर इसलिए कि हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन वाले पोर्टल की गड़बड़ियां ठीक करने के लिए आईआईटी मद्रास और कानपुर से कहा है। खबर के अनुसार शिक्षा मंत्रालय ने प्रोफेसर और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को निर्देश दिया है कि वे सीबीएसई की सहायता करें। खबर में आगे लिखा है, यह घटनाक्रम छात्रों और अभिभावकों की कुछ विषयों में दिए गए अंकों के संबंध में शिकायतों के बाद सामने आया है। कई छात्रों ने संदेह व्यक्त किया है कि क्या उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के तहत सही ढंग से किया गया था। जाहिर है, सरकार ने कोई नई व्यवस्था की है और वह ठीक नहीं है। नीट के प्रश्नपत्रों के मामले में मीडिया का वही रुख है अब इस मामले में अमर उजाला की ‘खबर’ तो सीबीएसई की विज्ञप्ति लगती है। वह भी तब जब दैनिक भास्कर ने कल ही लिखा था, भविष्य से ऐसा खिलवाड़? कहीं 2-2 पेज गायब तो कहीं 2-2 पेज रिपीट हैं।

इसके बावजूद अमर उजाला की खबर बताती है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कहा है कि 12वीं के नतीजे के बाद पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों के कारण जिन बच्चों से अधिक शुल्क लिया गया है उन्हें अतिरिक्त राशि लौटाई जाएगी। ऐसे जैसे कोई अहसान किया जाएगा। इस सूचना के जरिए मूल शिकायत को कमजोर किया गया है और कम महत्व दिया गया है। भले खबर पुरानी हो चुकी हो। अखबार ने लिखा है, शिक्षा मंत्रालय ने पुनर्मूल्यांकन के दौरान बच्चों व अभिभावकों की तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतों पर सीबीएसई से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। इसमें यह नहीं बताया है कि परीक्षा के लिहाज से गड़बड़ी कितनी भयंकर या बेवकूफाना है। परीक्षा के प्रश्नपत्रों की जांच में ऐसी चूक कल्पनातीत है और यह सिस्टम की ऐसी गलती है जो होनी ही नहीं चाहिए थी। जाहिर है, जो व्यवस्था की गई है वह घटिया और अविश्वसनीय है लेकिन खबर ऐसे लिखी गई है जैसे उसकी तारीफ की जा रही हो कि पैसे लौटाने की मेहरबानी तो कर रहा है। अमैजन से लेकर बैंकों तक से लेन-देन में गड़बड़ी की शिकायत बहुत कम सुनने में आती है। परीक्षा की कॉपी के साथ यह चूक उस सिस्टम ने की है जो प्रश्नपत्रों की लीक नहीं रोक पा रहा है और इस आधार पर कहा जा सकता है कि नाकारा है। पर खबर ऐसे लिखी गई है जैसे नाकारा लिखने या चूक बताने की जरूरत ही नहीं है। बोर्ड ने यह भी बताया कि ऐसे सभी मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए दोबारा आवेदन की जरूरत नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने सर्वर डाउन होने, पेमेंट गेटवे में गड़बड़ी और प्रक्रिया के दौरान सामने आई अन्य तकनीकी खामियों पर संज्ञान लिया था। कहने की जरूरत नहीं है कि इसमें यह नहीं बताया गया है कि सिस्टम पांच दिन से खराब है और ठीक करने में मदद के लिए आईआईटी से कहा गया है।
अखबार ने सीबीएसई की नालायकी बताने की बजाय उसकी मेहरबानी ही बताई है। लिखा है, आज रात तक कर सकेंगे आवेदन। सीबीएसई ने 12वीं की उत्तर पुस्तिका की स्कैन प्रति हासिल करने के लिए आवेदन की तिथि एक दिन और बढ़ा दी है। अब 25 मई को रात 11:59 तक आवेदन किए जा सकेंगे। आगे यह भी बताया है कि, डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर व्यापक विरोध व विद्यार्थियों की बढ़ती चिंता के बीच शिक्षा मंत्रालय 12वीं के नतीजों पर सतर्कता से नजर बनाए हुए है। सीबीएसई को इसमें प्रशासनिक निगरानी भी मुहैया करा रहा है। इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के बाद सामने आई विसंगतियों और पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों के बाद मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया है। प्रशासनिक निगरानी का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी बाधाओं के कारण कॉलेज में दाखिले के दौरान विद्यार्थियों को असुविधा न हो। कहने की जरूरत नहीं है कि कॉपी चेकिंग ठीक नहीं हुई, पुनर्मूल्यांकन ढंग से हो नहीं रहा है और इससे ज्यादा असुविधा कुछ हो नहीं सकती है लेकिन सीबीएसई और अमर उजाला यह आश्वासन देने में लगे हैं कि कॉलेज में दाखिले में दिक्कत न हो। सबतो पता है कि दिल्ली में दाखिले बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंक के आधार पर होते हैं और एक-एक नंबर में कई उम्मीदवार होते हैं। यहां कॉपी के पन्ने चेक ही नहीं होने की खबर है। लेकिन यह सब बड़ी बात तब होती जब फाल्टा में चुनाव ठीक से हुए होते। सबको पता है कि भाजपा विरोधियों को डरा-धमका कर अपने पाले में कर लेती है। अब अगर 34 साल में पहली बार तृणमूल की जमानत जब्त हो गई है तो खबर वह भी है। देशबन्धु के अनुसार ममता बनर्जी ने कहा है कि वोट लूटकर सत्ता में बैठे हैं लोग। लेकिन यह खबर भी ढूंढ़ने पर दिख रही है। नीट पेपर लीक पर राहुल गांधी ने कहा है, 22 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर है। फिर भी खबर ढूंढ़नी पड़ रही है जबकि एक और छात्रा ने आत्महत्या कर ली है और पेपर लीक के बाद मरने वाले बच्चों की संख्या पांच हो गई है। इसके बावजूद नवोदय टाइम्स में फाल्टा में भाजपा की जीत तो तीन कॉलम में है लेकिन नीट या सीबीएसई वाली खबर पहले पन्ने पर नहीं है।
द टेलीग्राफ की लीड पश्चिम बंगाल सरकार के उस आदेश की खबर है जिसके अनुसार, अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्या प्रवासियों लिए ‘होल्डिंग सेंटर स्थापित किए जाने हैं। इनमें वे भी शामिल हैं जो जेलों से रिहा कर दिए गए हैं और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह मुख्यमंत्री द्वारा घोषित ‘पता लगाओ, हटाओ, निर्वासित करो’ नीति के क्रम में है। यह खबर आज दूसरे अखबारों में भी है और पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद अब फाल्टा में भी जीत मिलने के बाद यह सब होना ही था। दि एशियन एज में बुलडोजर राजनीति की आलोचना और पश्चिम बंगाल के चुनाव में हड़बड़ी के आरोप हैं। सीबीएसई का प्रचार छोटी सी खबर के रूप में है कि वह पैसे वापस कर देगा। सरकारी प्रचार के इस माहौल में अमेरिका ने दावा किया है और आज यह देशबन्धु में भी लीड है कि, भारत हमारा (अमेरिका का) अहम राणनीतिक साझेदार है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा है कि दोनों देश लोकतांत्रिक हैं इसलिए सार्वजनिक निगरानी व जवाबदेही को समझते हैं। यह आपको बता दूं कि (2014 से) पहले प्रधानमंत्री विदेश जाते थे तो उनके साथ पत्रकारों का दल होता था और लौटते समय वे विमान में ही प्रेस कांफ्रेंस करते हैं। लौटकर प्रधानमंत्री राष्ट्रपति से भी मिलते थे। अब जो हो रहा है उसमें प्रधानमंत्री के इटली के चॉकलेटी दौरे के बाद वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली दौरे को लेकर दावा किया कि यह यात्रा कूटनीतिक नहीं थी, बल्कि इटली में रोके गए भारतीय जहाजों के विवाद को दबाने के लिए की गई थी। उनके अनुसार, भारत से इजराइल जा रहे चार जहाजों को इटली के बंदरगाहों (जियोइया टॉरो और काग्लियारी) पर रोक दिया गया था। इनमें मिलिट्री-ग्रेड स्टील होने का अनुमान है। 800 टन मिलिट्री-ग्रेड स्टील का इस्तेमाल कथित तौर पर गाजा में बरसाने वाले गोले बनाने में किया जाना था। लेबर यूनियनों के दबाव के कारण इटली ने इन्हें रोका था। प्रकाश आंबेडकर ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण के कारण ईरान नाराज हो गया और उसने भारत को होने वाली तेल की आपूर्ति कम कर दी, जिसके परिणामस्वरूप भारत को विवाद छिपाने के लिए यह कदम उठाना पड़ा। प्रकाश आंबेडकर ने यह आरोप दो दिन पहले लगाया था। कल रात उनके इंस्टाग्राम हैंडल पर वीडियो और तथ्य दोनों थे। भारत सरकार ने अभी तक इसपर कुछ नहीं कहा है। मुख्य धारा की मीडिया में गजब का सन्नाटा है और इस तथ्य के बाद है कि एपस्टीन फाइल के तथ्यों के मद्देनजर प्रधानमंत्री कंप्रोमाइज्ड हैं और फिर हरदीप पुरी से संबंधित खुलासे बताते हैं कि उन्हें पद पर बने रहने देने के मायने हैं। लेकिन सरकार, मीडिया, सुप्रीम कोर्ट या राष्ट्रपति इन तथ्यों के बेपरवाह हैं।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


