
जगह नहीं भी हो तो फोटो घुसेड़ कर पांव छूने का प्रचार पूरा है लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही सुवेन्दु ने चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक को सलाहकार नियुक्त कर लिया – खबर, हिन्दी अखबारों में तो ढूंढ़नी पड़ रही है।
संजय कुमार सिंह
वैसे तो आज शुवेन्दु अधिकारी के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनने की खबर कुछेक अखबारों में लीड नहीं है। हालांकि, लीड नहीं है तो सेकेंड लीड है। कुल मिलाकर, नरेन्द्र मोदी और भाजपा समर्थक अखबारों ने इसे इतना महत्व दिया है जैसे बहुत ही योग्य हों या किसी योग्यता के बगैर बना दिए गए हों। अखबारों में खबरें तुलनात्मक होती हैं। लीड वही खबर बनती है जो सबसे महत्वपूर्ण होती है या मानी जाती है। कोलकाता के टेलीग्राफ के लिए नया मुख्यमंत्री बनना ही लीड है लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही सुवेन्दु अधिकारी ने चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक को सलाहकार नियुक्त कर लिया तो यह भी खबर है। मुझे लगता है कि शुवेन्दु का मुख्यमंत्री बनना तो तभी तय हो गया था जब लॉजिकल डिसक्रिपेंसी और मतदाताओं के लिए ट्रिब्यूनल बने, पहले दिन काम शुरू नहीं हुआ और अभी तक पता नहीं है कि बाकी के ट्रिब्यूनल ने कितने लोगों के मामले निपटाए। ऐसे में कल शपथग्रहण औपचारिकता थी और दूसरी बड़ी खबर होती तो यह लीड नहीं बनती है। इसे लीड बनाने का मतलब है, लीड बनाने लायक जो दूसरी खबरें हैं उन्हें संपादक जी इस लायक नहीं मानते हैं। कारण चाहे जो हो। गोदी में होना एक हो सकता है पर वह सब अलग मुद्दा है। तथ्य यह है कि फिल्म अभिनेता टी विजय के मुख्यमंत्री बनने की खबर ज्यादा बड़ी, महत्वपूर्ण या नई है। मनी कंट्रोल में सारिका शर्मा की एक खबर के अनुसार, तमिलनाडु चुनावों में शानदार जीत के बाद विजय का सात साल पुराना वीडियो वायरल है। इसमें तमिल सुपरस्टार और टीवीके प्रमुख विजय अपनी फिल्म ‘सरकार’ के ऑडियो लॉन्च के मौके पर मंच पर मौजूद एक अभिनेता से कहते हैं: “मैं सीएम की तरह एक्टिंग नहीं करूंगा, बल्कि सीएम बनूंगा।” भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए भाजपा में शामिल होकर, अपनी ही ‘दीदी’ की पीठ में घोंपकर मुख्यमंत्री बनने के मुकाबले, कहकर मुख्यमंत्री बनना ज्यादा महत्वपूर्ण है। दोनों को अपने मंजिल तक पहुंचने में समय भी लगभग बराबर लगा है। ऐसे में भाजपा, नरेन्द्र मोदी या शुवेन्दु अधिकारी का प्रचार नहीं करना हो तो यह खबर लीड नहीं है। ठीक है कि टी विजय का शपथग्रहण नहीं हुआ है लेकिन उन्होंने राज्यपाल की शर्तें पूरी कर दी हैं और उनका मुख्यमंत्री बनना तय है। भारतीय जनता पार्टी के साथ द्रमुक को बुरा लगने के बावजूद।
तमिलनाडु में टी विजय के मुख्यमंत्री बनने में कांग्रेस की अपनी भूमिका है और जो राजनीति समझते हैं, उसे देख पा रहे हैं। दूसरी ओर, लॉजिकल डिसक्रिपेंसी के नाम पर लाखों वोटर को हटा कर, सुप्रीम कोर्ट के ज्ञात या अज्ञात सहयोग से और उसके बनाए ट्रिब्यूनल से जुड़े रहस्यों के बीच भारतीय जनता पार्टी बंगाल चुनाव जीत गई है तो यह कोई अजूबा नहीं है। कल बहुप्रचारित शपथग्रहण हो गया और मुख्यमंत्री वही बना जो कुछ साल पहले भाजपा में आया था। अपनी पूर्व या पुरानी दीदी को हराकर नारी शक्ति वंदन करने वालों का साथ दे रहा है और भ्रष्टाचार के आरोप में नरेन्द्र मोदी के निशाने पर भी रह चुका है। वाशिंग मशीन पार्टी के मुखिया ने रात साढ़े बारह बजे एक्स पर कहा है, कांग्रेस के लिए पीठ में छुरा घोंपना स्वाभाविक है। देखिए तमिलनाडु में क्या हुआ…। नरेन्द्र मोदी देश के उन दुर्लभ प्रधानमंत्रियों में हैं जो अपना काम या अपने लोगों का काम नहीं बताते हैं, कांग्रेस की ही आलोचना करते हैं। भले खुद वही काम कर रहे हों। मोदी जी ने भी अटल बिहारी वाजपेयी की सहयोगी रही ममता बनर्जी की पीठ में छुरा ही घोंपा है। इंडिया गठबंधन का उन्होंने कितना साथ दिया औऱ क्यों दिया उससे किसे फायदा हुआ – सब जानने के बावजूद वे ममता बनर्जी को लगभग जबरदस्ती हराकर, शुवेन्दु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस की आलोचना कर रहे हैं। सीधे मुख्य न्यायाधीश तथा मुख्य चुनाव आयुक्त का अहसान जताने की बजाय जनशक्ति का सम्मान करने के लिए उनके आगे नतमस्तक हुए जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए या जिनके बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगली बार वोट दे लेंगे। कुल मिलाकर नरेन्द्र मोदी के शासन में व्यवस्था ने एंटायर पॉलिटिकल साइंस की एक वास्तविक विसंगति पर ध्यान नहीं दिया लेकिन लाखों तर्क संगत विसंगतियों पर ध्यान दिया। इस चक्कर में लाखों लोग मतदान के अधिकार और कर्तव्य से वंचित कर दिए गए। लेकिन पीठ में छुरा घोंपना कांग्रेस के लिए स्वाभाविक है। इतना सब करके बंगाल के नए मुख्यमंत्री के बारे में कुछ कहा बताया हो तो मुझे पता नहीं चला।
ऐसे में आज देशबन्धु में तमिलनाडु की खबर लीड है जबकि पश्चिम बंगाल में शुवेन्दु की सरकार के शपथग्रहण करने की खबर सेकेंड लीड है जो लीड के बिल्कुल बराबर में लगभग बराबर शीर्षक और उपशीर्षक के साथ छपी है। नवोदय टाइम्स का पहला पन्ना विज्ञापनों से भरा है। खाली जगह में संपादक जी ने शुभेन्दु सरकार को बैठा या लिटा दिया है। छोटी सी जगह में प्रधानमंत्री की फोटो भी है जिसमें वे मंच पर खड़े नेताओं से अलग, मंच की जमीन पर माथा टेककर किसी का अहसान उतार रहे हैं। दूसरे या असली पहले पन्ने पर लीड का शीर्षक है, विजय आज लेंगे शपथ। अमर उजाला में लीड का शीर्षक है, बंगाल में अब शुभेन्दु सरकार। पहले पन्ने की सेकेंड लीड का शीर्षक है, आप सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा गिरफ्तार। आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी की सरकार विपक्षी नेताओं को ईडी-सीबीआई के जरिए परेशान करती रही है और भाजपा में शामिल हो जाने वालों के लिए न सिर्फ विशेष राहत पैकेज है बल्कि वाशिंग मशीन की धुलाई भी जनता देख रही है तब ऐसी गिरफ्तारियों का कोई मतलब नहीं है। हालांकि मंत्री की गिरफ्तारी खबर भी है ही। अमर उजाला में खबरों की यह जोड़ी भाजपाई लगती है और तमिलनाडु की खबर नहीं होना भाषाई पक्षपात हो तो ठीक कहा जा सकता है। पर ऐसा हो तो बंगाल की खबर को भी इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए था। जो भी हो, अमर उजाला भाजपाई खबरों को जरूरत से ज्यादा महत्व देता दिखता रहा है।
अंग्रेजी अखबारों में टाइम्स ऑफ इंडिया, दि इंडियन एक्सप्रेस, दि एशियन एज और द टेलीग्राफ ने शुवेन्दु अधिकारी के बंगाल का सीएम होने की खबर को लीड बनाया है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि शुवेन्दु बंगाल के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री बने तो एनडीए ने शक्ति प्रदर्शन किया। दि इंडियन एक्सप्रेस की लीड शुवेन्दु के मुख्यमंत्री बनने की तो है ही उनका प्रचार भी है कि हर किसी के मुख्यमंत्री होंगे। विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट जीतने के बाद बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने एक विवादास्पद बयान दिया कि उन्होंने हिंदुओं के वोटों से जीत हासिल की है और वे केवल हिंदुओं के लिए काम करेंगे, न कि उन मुसलमानों के लिए जिन्होंने टीएमसी को वोट दिया। हो सकता है यह बयान विधायक के रूप में उनके काम के लिए हो और मुख्यमंत्री के रूप में वे सबके लिए समान काम करने की बात कर रहे हों। द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक है, शुवेन्दु का बंगाल। दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, भाजपा के अधिकारी बंगाल के नए मुख्यमंत्री हैं। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, विजय आज पदभार ग्रहण करेंगे; तमिलनाडु में गठबंधन की सरकार होना तय। हिन्दुस्तान टाइम्स में भी विजय को बहुमत मिलने और राज्यपाल द्वारा स्वीकार किए जाने की खबर लीड है। शुवेन्दु को शपथ दिलाए जाने की खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में भी सेकेंड लीड है। अखबार ने अपनी इस खबर के साथ ही बताया है कि मुख्यमंत्री बनते ही सुवेन्दु ने चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक को सलाहकार नियुक्त कर लिया। वरिष्ठ पत्रकार, विनोद शर्मा ने लिखा है, लोगों को यह जानने का हक है कि यह विवादास्पद निर्णय एसआईआर प्रक्रिया और हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के दौरान दी गई सेवाओं का इनाम है? यह बात लोकतंत्र, देश की सर्वोच्च अदालत, न्याय व्यवस्था और लोगों के अपनी सरकार चुनने के अधिकार के हित में लिखी जा रही है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।




NEERAJ
May 10, 2026 at 9:16 pm
सुवेंदु ,शुवेन्दु, सुवेन्दु EK NAM EK ARTICLE ME TIN TARAH SE LIKHA HAI. WITTER HI CONFUSED HO TO READER KA KYA HOGA