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सुख-दुख

अपने समूह संपादक की आत्महत्या पर भास्कर ग्रुप चुप्पी क्यों साधे है?

अपने आप को देश का सबसे बड़ा समाचार समूह बताने वाला दैनिक भास्कर ग्रुप अपने समूह संपादक कल्पेश याग्निक की सुसाइड पर कई तरह के सवालों से घिर गया है. दैनिक भास्कर खुद को विश्वसनीय होने का दावा करता है, पर कल्पेश याग्निक द्वारा सुसाइड किया जाने की खबर को बदलकर छापना इस दावे को झुठलाने के लिए काफी है. दैनिक भास्कर ने कल्पेश याग्निक की आत्महत्या से मौत को हार्टअटैक बता दिया. मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि खुदकुशी थी. ऐसे में दैनिक भास्कर क्यों इस सच से दूर भाग रहा है, यह बड़ा सवाल है!

दैनिक भास्कर समूह के ग्रुप एडिटर कल्पेश याग्निक दुनिया से चले गये लेकिन भास्कर इसे प्राकृतिक मौत करार दे रहा है. बाक़ी सभी मीडिया हाऊस और मिले फ़ुटेज इसे आत्महत्या बतला रहे हैं. अगर ये आत्महत्या है तो सवाल ये है कि आख़िर इतने सालों तक भास्कर को भास्कर बनाने वाले कल्पेश की मौत की सच्चाई को भास्कर सहज तरीके से डील क्यों नहीं कर रहा है? कल्पेश द्वारा सुसाइड किए जाने की घटना की जाँच में भास्कर सच बताकर सहायता क्यों नहीं कर रहा है? क्या मीडिया में अच्छा ख़ासा नाम बना चुके कल्पेश की सुसाइड की ये ख़बर मीडिया की कड़वी हकीकत को बयां नहीं करती?

कल तक एक पत्रकार के तौर पर भास्कर की ख़बरों और कई पत्रकारों की श्रद्धांजलि पढ़ मुझे भी ये हार्ट अटैक से मौत लग रही थी. पर कल रात से अभी तक जितना पढ़ा, वो कई सवाल पैदा करते हैं. संत, महात्मा के साथ छात्रों और पत्रकारों की आत्महत्या की ख़बरों का पोस्टमार्टम करने वाला मीडिया हाउस अपने ही समूह संपादक के सुसाइड के इस मामले में शांतचित्त है? आप मुंह में राम बगल में छुरी रख पाठकों के हित में गाल बजाएं, ये बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

इस घटना ने एक बार फ़िर बहस को जन्म दे दिया है कि क्या मीडिया दूसरों के गम में ही मातम मनाना और उसका एनालिसिस करना जानती है? ख़ुद पर बला आते देख प्रबंधन को सांप क्यों सूंघ जाता है! कल्पेश जी के परिजनों से पूछताछ जारी है. हो ना हो, हो सकता है कि कुछ ऐसे बिंदु सामने आएं, जो मीडिया संस्थानों की चमचमाती बिल्डिंग के भीतर की क्षतिग्रस्त व्यवस्था की कलई खोल दे. सच्चाई सामने आनी चाहिए. हम तोप नहीं हैं जो खुद के संस्थान से जुड़े व्यक्ति की आत्महत्या को प्राकृतिक मौत करार दें, और खुद को क्लीनचिट दे दें. इस आत्महत्या पर पत्रकारिता से जुड़े हरेक शख़्स को लिखना, सोचना, बोलना चाहिए. ये हमारा धर्म है, और अपने धर्म को भूलने का मतलब खुद के अस्तित्व पर खुद हो पूर्णविराम लगाना है!

रायपुर के पत्रकार योगेश मिश्रा की फेसबुक वॉल से. संपर्क : 9329905333

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