विश्व दीपक-
तीसरी दुनिया के चौथे दर्जे के देश भारत के सत्ताधारी दल का बैंक बैलेंस अगर 10 हज़ार करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है तो समझिए कि कुछ बुनियादी गड़बड़ी है जो कि बहुत बड़ी है.
इतनी बड़ी कि जिसके शोषण और जकड़न की तुलना सिर्फ ईस्ट इंडिया कंपनी से की जा सकती है.
सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई 6 अप्रैल 1980 को. मात्र 44 साल में अलग, चाल, चरित्र का दावा करने वाली पार्टी का बैंक बैलेंस 10 हज़ार करोड़ से ज्यादा हो गया.
20 साल पहले 2004 में बीजेपी के खाते में 88 करोड़ थे. आज 10,107 करोड़ हैं.
यहां सिर्फ बैंक बैलेंस की बात हो रही है. जमीन, पांच सितारा ऑफिस, बॉन्ड, शेयर आदि की बात छोड़ दीजिये. अगर इन सबको मिला दिया जाए तो दस-बीस हज़ार करोड़ और जोड़ना पड़ेगा.
यह ‘विकास’ तब हुआ है जब पार्टी देश की केन्द्रीय सत्ता में बीजेपी बस 11 साल पहले ही विराजमान हुई है. अगर 5-10 साल और रह गई तो मल्टीनेशनल कंपनियों की बैलेंस शीट भी बीजेपी के आगे छोटी पड़ जाएगी.
इस संदर्भ में कांग्रेस की बात करने का कोई औचित्य नहीं फिर भी यह दोहराया जा सकता है कि कांग्रेस 183 साल पुरानी पार्टी है, करीब 50 साल तक देश की केन्द्रीय सत्ता में रही लेकिन आज दोनों की आर्थिक ताकत के बीच 75 गुने का फर्क है.
सवाल यह है कि उस वक्त जब देश की आर्थिक हालत लगातार खराब हो रही है, विदेशी निवेश गिरता हुआ निम्नतम स्तर तक पहुंच चुका है, रुपये की हालत कमजोर है, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर डूब रहा है फिर बीजेपी का बैंक बैलेंस कहां से इतना मोटा हो रहा है?
जवाब यही है कि अगर तीसरी दुनिया के चौथे दर्जे के देश भारत के सत्ताधारी दल का बैंक बैलेंस अगर 10 हज़ार करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है तो समझिए कि कुछ बुनियादी गड़बड़ी है जो कि बहुत बड़ी है.
आलोक शर्मा-
भाजपा (BJP) और कांग्रेस (INC) का बैंक बैलेंस:
2004:
- कांग्रेस (INC): ₹38 करोड़
- भाजपा (BJP): ₹88 करोड़
2009:
- कांग्रेस (INC): ₹221 करोड़
- भाजपा (BJP): ₹150 करोड़
2014:
- कांग्रेस (INC): ₹390 करोड़
- भाजपा (BJP): ₹295 करोड़
2019:
- कांग्रेस (INC): ₹315 करोड़
- भाजपा (BJP): ₹3,562 करोड़
2024:
- कांग्रेस (INC): ₹133 करोड़
- भाजपा (BJP): ₹10,107 करोड़


