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आज के अखबार : भाजपा का नैरेटिव और लोगों को ‘सतर्क’ करने में ‘पीआईबी फैक्ट चेक’ की भूमिका

कहा जा सकता है कि सरकार और मीडिया का एक वर्ग अपने निम्नतम स्तर पर हैं। इंदिरा गांधी को सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का दोषी पाया गया था लेकिन चुनाव आयोग की मिलीभगत में दूरदर्शन से लेकर पीआईबी फैक्ट चेक तक के काम कौन देखे और जांचे?

संजय कुमार सिंह

पटना के होटल में जहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार के सिलसिले में ठहरे थे उसके सीसीटीवी पर कागज चिपकाकर वहां रहने वालों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का दावा किया जाता है। सीसीटीवी पर कागज लगाने का न्यूनतम मकसद तो यही होगा कि गृहमंत्री से मिलने आने वालों की पहचान सुरक्षित रहे। इसके बाद दिल्ली में विस्फोट हो जाता है। आठ लोग मारे गए। आज सभी अखबारों में यही खबर लीड है। प्रधानमंत्री विदेश यात्रा पर जा चुके हैं और प्रचारक उनका वीडियो साझा कर रहे हैं जिसमें कहा जा रहा है, इसके पीछे के षडयंत्रकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। पर मामला यह है कि इससे हो क्या रहा है। आपने तो आतंकवाद खत्म कर दिया था। पुलवामा हमला करने वालों का क्या हुआ पता नहीं लेकिन पहलगाम वालों को मारने का दावा किया गया और ऑपरेशन सिन्दूर चलाया गया। लेकिन उसे अचानक बंद कर दिया गया और अब सीसीटीवी पटना में बंद हुआ वारदात दिल्ली में हो गई। सोशल मीडिया पर सूची घूम रही है कि भाजपा शासन में कितने आतंकी हमले हुए। जवाब में मुंबई हमले की याद दिलाई जा रही है। सच यह भी है कि मुंबई हमला हुआ था तो नरेन्द्र मोदी उसका राजनीतिक लाभ लेने पहुंच गए थे। अब जो हो रहा है वह और चाहे जो हो, जिम्मेदारी और पारदर्शिता से मीलों दूर है। और यही कम नहीं है। आज बिहार में मतदान है और इतिहास गवाह है कि आतंकी हमलों का संबंध चुनाव और चुनाव की तारीखों से होता है। इसलिए आज अखबारों की खबरों की नहीं, सोशल मीडिया पर जो चल रहा है उसकी बात करता हूं।  

इनमें सबसे महत्वपूर्ण यह प्रचार है कि गृहमंत्री ने खुद अस्पताल जाकर घायलों का उपचार सुनिश्चित किया। कहने की जरूरत नहीं है कि इसके लिए गृहमंत्री तो क्या, किसी मंत्री या मंत्रालय के कर्मचारी को भी अस्पताल जाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। जाना ही हो तो स्वास्थ्य मंत्रालय से कोई जाता, स्वास्थ्य मंत्री जाते पर गृहमंत्री का काम नहीं है कि वे घायलों का इलाज सुनिश्चित करें। वह भी तब जब आयुष्मान योजना है। यहां दिलचस्प यह है कि मुद्दा विस्फोट नहीं, फरीदाबाद में आरडीएक्स बरामद किए जाने को बनाने की कोशिश की जा रही है। निश्चित रूप से यह गंभीर मुद्दा है और इसपर गृहमंत्री को बयान देना चाहिए लेकिन वे स्वास्थ्य मंत्री का काम कर रहे हैं। असल में मतदान के दिन पार्टी के प्रचारक के रूप में पार्टी को सेवा दे रहे हैं। जहां तक आरडीएक्स बरामद होने की बात है, डबल इंजन वाले फरीदाबाद में हुआ है और जवाब भाजपा को ही देना है। आरडीएक्स का जवाब क्या मिलेगा जब निजी बंदरगाह पर नशे की खेप बरामद होने की चिन्ता नहीं होती है। बात इतनी ही नहीं है, जब चिन्ता होनी होती है तो रिया चक्रवर्ती के पास कुछ ग्राम नशा बरामद होने पर भी कार्रवाई होती है और मामला कई दिनों तक टेलीविजन पर छाया रहा था।  कुछ ग्राम बरामद होने पर तो न जाने-क्या-क्या जांच हुई थी लेकिन बंदगाह पर आई खेप के मामले में कुछ पता नहीं चला।

अब फरीदाबाद में आरडीएक्स की बड़ी मात्रा बरामद होने पर जिनके पास से यह सब मिला है उनका नाम धर्म, पेशा, शिक्षा बता कर पूरे धर्म को बदनाम किया जा रहा है।। लेकिन हरियाणा सरकर से यह सवाल नहीं है कि अगर फरीदाबाद के उस घर में आरडीएक्स बना नहीं तो वहं पहुंचा कैसे?  कहने की जरूरत नहीं है कि फरीदाबाद में तो डबल इंजन की सरकार है ही वह दूर-दर तक डबल इंजन वाली सरकारों के कार्यक्षेत्र से घिरा हुआ है। जहां तक आतंकी वारदात की बात है, जम्मू कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी को आतंकवादियों के साथ कई वर्ष पहले गिरफ्तार किया गया था। अब तक यह नहीं बताया गया है कि वह कौन था और आतंकियों के साथ क्या कर रहा था। कहने की जरूरत नहीं है कि आरोपों पर यकीन किया जाए और नहीं करने का कोई कारण नहीं है तो हरियाणा की सरकार चोरी की है, वहां आरडीएक्स मिला और दिल्ली में विस्फोट हुआ जहां सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र की भाजपा सरकार की है। तथ्य यह है कि भाजपा मुद्दों पर बोलने की बजाय इस कार्टून को ट्वीट कर रही है। मुझे यह एक्स पर मिला। इसे कल पोस्ट किया गया था – पता नहीं विस्फोट से पहले या बाद में। पहले भी किया हो तो गौरतलब है कि वोट चोरी से संबंधित आरोपों के जवाब चुनाव आयोग को देने हैं और उसने जवाब देना तो दूर, कर्नाटक मामले में सीआईडी की चिट्ठियों का जवाब दिया या नहीं – नहीं बताया गया है। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा आरोप लगाया था। पर संतोषजनक जवाब नहीं है।

दूसरी ओर, इसका असर यह हुआ कि हरियाणा चुनावों पर आरोप लगाने के बाद राहुल गांधी से शपथपत्र नहीं मांगा गया। चुनाव आयोग के शपथपत्रों की कहानी अलग दिलचस्प है और सब साथ-साथ चल रहा है। कहने की जरूरत नहीं है कि वोट चोरी का लाभ भाजपा को है और मिले होने की उम्मीद है। इसलिए भाजपा और प्रचारक आरोपों को कमजोर करने में लगे हैं और इसके लिए राहुल गांधी को भी अगंभीर बनाने की प्रयास चल रहा है। इसमें विदेशी व्यवसायी सोरोस के सक्रिय होने का आरोप शामिल है। सच्चाई यह है कि सोरोस से पैसे लेकर या वैसे भी कुछ गलत किया जाए तो इस सरकार ने किसी विरोधी को बख्शा नहीं है। भारतीय जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि (जन्म 1998, बैंगलोर) हों या ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के मंच से पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने वाली 19 साल की अमूल्य लियोना। ऐसे में राहुल गांधी को बख्श देने की कोई उम्मीद तो नही ही है और उनके खिलाफ देश भर में मामले चल ही रहे हैं। ऐसे में गलत करने पर भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने की उम्मीद किसी को नहीं है। फिर भी उन्हें गलत तो प्रचारित किया जाता है, कार्रवाई नहीं हो रही है। इस तरह, कार्रवाई नहीं होने के मायने स्पष्ट है लेकिन भाजपा आज मतदान के दिन किसी तरह वोट चोरी के हर संभव  प्रयास कर रही है। इसमें बीजेपी ने एक्स पर एआई से तैयार किया वीडियो, ‘बूथ कैप्चर किए बाप, बेटा बन रहा नवाब…’ साझा किया है। दूसरी ओर, पीआईबी फैक्ट चेक ने एक पोस्ट में लिखा है, कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा प्रधानमंत्री और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का एक एआई जेनरेटेड फेक वीडियो साझा किया जा रहा है। कहने की जरूरत नहीं है कि वीडियो ऐसा नहीं है कि देखने वाले को समझ में नहीं आए या कोई झांसे में आ जाए। फिर भी सरकारी खर्चे पर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा खुद ऐसा कर रही है। कांग्रेस के पास ऐसा करने के लिए सरकारी साधन नहीं हैं या हों तो वह उपयोग नहीं कर रही है। 1975 में कांग्रेस ने किया था तो उसे अभी तक याद किया जाता है।

इस वीडियो को कांग्रेस के हैंडल से वैसे ही साझा किया गया है जैस भाजपा के हैंडल से पहले वाला वीडियो। जो भाजपा के खिलाफ है उसे पीआईबी गलत बता रहा है और कांग्रेस वोट चोरी से मुकाबला कर रही है। राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाने के लिए इंडियन एक्सप्रेस समेत तमाम प्रचारक लगे हुए हैं। इससे कुछ लोग कह रहे हैं कि वोट चोरी के आरोपों का मु्द्दा ही कमजोर है। पीआईबी फैक्टचेक ने भाजपा की सेवा में कहा है, ऐसे एआई-जेनरेटेड या डिजिटल रूप से बदले गए वीडियो चुनाव प्रक्रिया पर अविश्वास पैदा करने और गलत नैरेटिव गढ़ने के लिए प्रसारित किए जाते हैं। कृपया इन्हें शेयर न करें और किसी भी संदिग्ध दावे की पुष्टि ज़रूर करें। ऐसा ही दिल्ली में प्रदूषण के मामले में है। कल दिल्ली के हिन्दुस्तान टाइम्स में खबर थी, “7000 एफआईआर, कोई कार्रवाई नहीं : पंजाब खेतों में पराली जलाने के मामलों पर बैठा हुआ है”। कहने की जरूरत नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आतिशबाजी पर रोक लगाई तो भाजपा की सरकार ने उसे लागू नहीं किया, भाजपा के नेताओं ने पटाखे चलाए और शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर दिल्ली की भाजपा सरकार की अपील पर हरित पटाखे चलाने की इजाजत थी लेकिन खूब पटाखे चले और सब चले, सब बिके। खबर भी छपी। कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पटाखे चलने से प्रदूषण तो बढ़ा ही। उसे रोकने के लिए दिल्ली की भाजपा सरकार ने जो उपाय किए उसका खुलासा आम आदमी पार्टी के नेता ने किया। इससे हुई बदनामी से बचने के लिए प्रधानमंत्री नकली यमुना में छठ करने नहीं गए, राहुल गांधी ने इसका मजाक उड़ाया तो प्रचारित किया गया कि छठ का मजाक उड़ा। इस तरह भाजपा की राजनीति अखबारों और सोशल मीडिया में चल रही है। इसमें प्रदूषण सूचकांक यानी एक्यूआई का स्तर कम रिकार्ड हो इसकी फर्जी कोशिश शामिल है और इसका भी खुलासा हो चुका है लेकिन उपाय बंद नहीं किया गया और सौरभ ने इसकी भी जानकारी दी। ऐसे में प्रचारित यह किया जा रहा है कि पंजाब सरकार पराली जलाने के मामले में कार्रवाई नहीं कर रही है जबकि दिल्ली सरकार ने दिल्ली के मामले में कार्रवाई नहीं की है और कार्रवाई के नाम पर फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद भी जारी है। ऐसे में आज के अखबारों में धमाके की खबरें वैसे ही छपी हैं जैसे सरकार को जरूरत होगी। उसपर क्या टिप्पणी करना, मरने वालों से सहानुभूति जरूर है। खबर है कि गृहमंत्री घायलों की देखभाल का काम खुद देख रहे हैं तो उम्मीद करनी चाहिए कि सबको राहत मिलेगी। नैरेटिव सेट करने की हद यह है कि प्रधानमंत्री के भूटान जाने को पहले से तय कार्यक्रम और सामान्य कहा जा रहा है और यह प्रचारित किया जा रहा है (पता नहीं किस आधार पर, सही या गलत) कि प्रयंका गांधी न्यूयॉर्क चली गईं। राहुल गांधी छुट्टी मनाने मस्कट जा रहे हैं।  

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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