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यूनियन बजट 2026 : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का बजट कटा, फायदा किसे मिला जानिए!

केंद्रीय बजट 2026 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) के लिए सरकार ने संतुलित लेकिन संकेत देने वाला फैसला किया है। इस बार मंत्रालय का कुल बजट घटाकर 4,551.94 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष (FY26) के संशोधित अनुमान 6,103.02 करोड़ रुपये से करीब 25 फीसदी कम है।

हालांकि यह कटौती किसी बड़े पीछे हटने का संकेत नहीं है, बल्कि इसे सरकार की ओर से फिस्कल नॉर्मलाइजेशन यानी खर्च के संतुलन की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि बजट में व्यापक खर्च की जगह अब चयनित और भविष्य-उन्मुख निवेश पर जोर दिया गया है, खासकर कंटेंट क्रिएशन, ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और क्रिएटर इकॉनमी में।

FY26 रहा अपवाद, FY27 में ‘रीसेट’

FY26 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के लिए असाधारण साल रहा, जब खर्च अचानक काफी बढ़ गया था। इसकी सबसे बड़ी वजह थी प्रसार भारती को मिला भारी फंड, जो FY26 (RE) में 4,059.24 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

लेकिन FY27 में प्रसार भारती का बजट घटाकर 2,291.88 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो उसके पारंपरिक स्तर के करीब है। यही एक फैसला मंत्रालय के कुल बजट में आई बड़ी गिरावट की मुख्य वजह बना है।

मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि FY26 कोई नया ट्रेंड नहीं था, बल्कि एक एक्सेप्शनल खर्च वाला साल था। FY27 दरअसल उसी का करेक्शन है, न कि किसी स्थायी कटौती की शुरुआत।

कैपेक्स बढ़ा, इंफ्रास्ट्रक्चर पर भरोसा कायम

हालांकि कुल खर्च घटा है, लेकिन मंत्रालय का कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत खर्च) बढ़ाया गया है। FY27 में यह बढ़कर 57.38 करोड़ रुपये हो गया है, जो FY26 के बजट अनुमान 43.79 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

यह संकेत देता है कि सरकार अब भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्रॉडकास्टिंग एसेट्स पर निवेश को रणनीतिक रूप से जरूरी मान रही है।

AVGC सेक्टर को 250 करोड़ की बड़ी सौगात

बजट 2026 की सबसे अहम घोषणा AVGC (Animation, Visual Effects, Gaming & Comics) सेक्टर के लिए 250 करोड़ रुपये का नया आवंटन है।

इस योजना के तहत देशभर में

  • 15,000 स्कूलों
  • 500 कॉलेजों

में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएंगी। इसका उद्देश्य है डिजिटल मीडिया, गेमिंग, एनीमेशन और इमर्सिव कंटेंट के लिए स्किल्ड टैलेंट तैयार करना।

ब्रांड्स, एजेंसियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आने वाले वर्षों में क्रिएटर इकॉनमी को मजबूत सप्लाई लाइन मिलेगी। सरकार पहली बार क्रिएटर इकॉनमी को सिर्फ प्लेटफॉर्म ट्रेंड नहीं, बल्कि राष्ट्रीय क्षमता (National Capability) के तौर पर देख रही है।

ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क पर 509 करोड़

ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क डेवलपमेंट के लिए सरकार ने 509.24 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इसका उपयोग मुख्य रूप से:

  • ऑल इंडिया रेडियो के डिजिटलीकरण
  • एफएम नेटवर्क विस्तार
  • DTH प्लेटफॉर्म अपग्रेड में किया जाएगा।

इसका सीधा फायदा टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण भारत में टीवी-रेडियो की पहुंच बढ़ाने में होगा, जो विज्ञापन बाजार के लिए भी अहम है।

सरकारी विज्ञापन और सूचना प्रचार पर खर्च बढ़ा

सरकार ने डेवलपमेंट कम्युनिकेशन और इंफॉर्मेशन डिसेमिनेशन के लिए बजट बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये कर दिया है, जो FY26 में 196 करोड़ था। यह मद आमतौर पर सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार, जागरूकता अभियानों और विज्ञापन खर्च से जुड़ी होती है। यानी आने वाले समय में सरकार एक बार फिर बड़े विज्ञापनदाता की भूमिका में दिख सकती है।

फिल्म संस्थानों को मिला चयनित समर्थन

सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) को बजट बढ़ाकर 80 करोड़ रुपये

  • FTII पुणे को 89.97 करोड़ रुपये
  • NFDC को 35 करोड़ रुपये

दिए गए हैं। यह दर्शाता है कि सरकार फिल्म और कंटेंट शिक्षा में सिलेक्टिव सपोर्ट जारी रखे हुए है।

मीडिया और ऑरेंज इकॉनमी के लिए क्या मतलब?

कुल मिलाकर, बजट 2026 यह साफ करता है कि सरकार अब “ज्यादा खर्च” नहीं, बल्कि “स्मार्ट निवेश” की नीति अपना रही है। फोकस अब है:

  • स्किल डेवलपमेंट
  • क्रिएटर इकॉनमी
  • ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
  • डिजिटल कंटेंट कैपेसिटी

प्रसार भारती के बजट में कटौती से अल्पकालिक खर्च जरूर घटेगा, लेकिन दीर्घकाल में सरकार का रुख साफ है — भविष्य का मीडिया स्केल से नहीं, स्किल और टेक्नोलॉजी से बनेगा।

यानी आने वाले वर्षों में भारत का कंटेंट और कम्युनिकेशन इकोसिस्टम सरकारी खर्च से कम और निजी भागीदारी, क्रिएटर्स और प्लेटफॉर्म इनोवेशन से ज्यादा आगे बढ़ेगा।

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