Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

जी, वो कैन्सर ही था…

प्रभात डबराल-

उस दिन 14 दिसंबर को दिल्ली पहुँचने पर पेशाब में जो ख़ून दिखा था वो दरअसल मूत्राशय में उग आए ट्यूमर से रिस रहा था.

16 दिसंबर को तरह-तरह के टेस्टों के बाद पता चला कि ट्यूमर कैन्सर है….

अच्छी ख़बर ये थी कि कैन्सर एकदम शुरुआती अवस्था में था और गहन होने के बावजूद अभी त्वचा के भीतर मसल्स तक नहीं पहुँचा था.

डॉक्टर ने तत्काल ट्यूमर निकाल मूत्राशय की सफ़ाई कर दी. कैन्सर के इलाज की भी ज़रूरत नहीं पड़ी – न कीमो थेरेपी, न रेडिएशन.

हाँ, कैन्सर वापस न आ पाए इसके लिए छः हफ़्ते तक, हफ़्ते में एक बार BCG induction किया गया. इसके ज़रिए इम्यून सिस्टम को मज़बूत किया जाता है. ताकि अगर कैन्सर फिर उभरने की सोचे तो उससे तत्काल निपट लिया जाए.

बहरहाल, परसों एस्कॉर्ट्स दिल्ली में BCG की आख़िरी पेशी थी और कल रात मैं कोटदवार पहुँच गया – खुद(याद) लग रही थी.

विस्तार से इसलिए लिख रहा हूँ ताकि बता सकूँ कि ऐसा कुछ नहीं है जिससे निपटा न जा सके. समय पर जाग जाओ तो हर लड़ाई जीती जा सकती है.

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन