ये पत्रकारिता है और “चौधरी” पत्रकार हैं!

Sheetal P Singh : क़रीब दो तीन बरस पहले जी न्यूज़ ने हफ़्तों कोयला घोटाले और उसमें जिन्दल ग्रुप की मिली भगत पर नान स्टाप कवरेज दी थी। आपको मालूम ही है कि बाद में एक स्टिंग सामने आया था जिससे पता चला था कि सुधीर चौधरी समेत जी न्यूज़ के आला अधिकारी और जी के मालिक सुभाष चन्द्रा नवीन जिन्दल से समाचार रोकने के लिये १०० करोड़ की राशि माँग रहे थे। उसमें मुक़दमा दर्ज हुआ। चौधरी लम्बे समय जेल में रहे, सुभाष चन्द्रा अग्रिम ज़मानत पर बचे और मुक़दमा जारी है।

चौधरी इसके पहले एक Orchestrated sting में एक शिक्षिका को वेश्यावृत्ति की किंगपिन बतलाने की फ़र्ज़ी कोशिश के अपराध के मुख्य नियंता पाये गये थे पर वह चैनल कोई दूसरा था। अब उसी तरह का अभियान दौसा के किसान गजेन्द्र सिंह की आत्महत्या पर उन्होंने ले लिया लगता है। बीजेपी ने सुभाष चन्द्रा को उ०प्र० से राज्यसभा देने का वादा किया हुआ है। यह नहीं पता कि उसमें कोई प्रतिद्वन्द्वी आ गया या कुछ उससे ज़्यादा की इच्छा या महज़ TRP पर अभियान असामान्य है।

इस अभियान में मरहूम गजेन्द्र के परिवारजन व रिश्तेदारों को जी न्यूज़ के रिपोर्टर coax करके मनमाफिक शब्द/वाक्य हासिल करने की कोशिश करते लगते हैं। थीम यह है कि गजेन्द्र के फ़सली नुक़सान से प्रभावित होने की बात को गोल कर दिया जाय, बताया जाय कि वह साफ़ा बाँध कर ही बहुत कमा लेते थे, सो फ़सल के ख़राब होने का कोई असर न था। दूसरे उन्हे सिसोदिया ने फ़ोन कर बुलाया था और वे सिसोदिया के संपर्क में थे और अन्त में इस घटना की ज़िम्मेदारी केजरीवाल की है। न राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री का नाम न मोदी के ज़मीन हड़प क़ानून की बात न ओलावृष्टि से फ़सल की बर्बादी! ये पत्रकारिता है और “चौधरी” पत्रकार हैं!

वरिष्ठ पत्रकार और उद्यमी शीतल पी. सिंह के फेसबुक वॉल से.

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Comments on “ये पत्रकारिता है और “चौधरी” पत्रकार हैं!

  • यह तो सभी मीडिया वाले कह रहे हैं। इसमें एक चैनल का क्या दोष। टी वी खुद गजेंद्र सिंह के परिजन ऐसी मजबूरी नहीं बता रहे जिससे आत्महत्या जैसा कदम उठाना पडे। टीवी फुटेज में उनका जैसा मकान बताया गया उससे भी वे इतने गरीब नहीं लग रहे हैं। पूर्वाग्रहग्रस्त लेखन नहीं होना चाहिए चाहे कोई भी हो।

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