हरीश रावत और नवीन जिंदल के गठजोड़ का कहर, पीसी तिवारी समेत कई पर जानलेवा हमला

Abhishek Srivastava : उत्तराखंड में आंदोलनों से जुड़े लोग पीसी भाई यानी पी.सी. तिवारी, उत्‍तराखण्‍ड परिवर्तन पार्टी के अध्‍यक्ष को बखूबी जानते हैं। पी.सी. तिवारी ने अल्‍मोड़ा के द्वारसो गांव में ज़मीन की लूट के खिलाफ़ ऐसा आंदोलन खड़ा कर दिया है कि जिंदल ग्रुप को गैर-कानूनी तरीके से ज़मीन देने वाली हरीश रावत सरकार की नाक में तीन महीने से दम हुआ पड़ा है। ग्रामीणों ने इस मसले पर जिंदल ग्रुप के खिलाफ़ एक मुकदमा किया हुआ था। निचली अदालत ने जिंदल के खिलाफ़ फैसला देते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी।

फिर वही होना था जो आज हुआ। थोड़ी देर पहले पीसी भाई, रेखा धस्‍माना और अन्‍य के ऊपर जिंदल के गुंडों ने जानलेवा हमला कर दिया, ऐसी खबर आई है। योजना जान से मारने की थी लेकिन वे बाल-बाल बच गए हैं। फिलहाल वे लोग द्वारसो गांव में हैं। रानीखेत एसडीएम मौके पर पहुंच चुके हैं। सारी मारपीट नवीन जिंदल के भतीजे प्रतीक जिंदल के कहने पर उनकी आंखों के सामने उनके गुंडों ने उन्‍हीं के परिसर में की है।

उत्‍तराखण्‍ड परिवर्तन पार्टी के अध्‍यक्ष पी.सी. तिवारी से अभी तफ़सील से फोन पर बात हुई। वे लोग अल्‍मोड़ा के रास्‍ते में थे। पुलिस ने नारा लगा रहे धरनारत गांव वालों के साथ तिवारी को भी हिरासत में ले लिया है और अल्‍मोड़ा लेकर जा रहे हैं। हलद्वानी के पत्रकार संजय रावत के मुताबिक द्वारसो गांव से कोई 30 लोगों को पुलिस ने करीब आधे घंटे पहले उठाया था, हालांकि पी.सी. तिवारी का कहना है कि उनके साथ करीब पंद्रह लोग हिरासत में लिए गए हैं जिन्‍हें अल्‍मोड़ा ले जाया जा रहा है। बाकी लोगों का कोई पता नहीं है।

तिवारी और अन्‍य का मेडिकल हो गया है। उनके मुताबिक पटवारी क्षेत्र डीडा के थाने में प्रतीक जिंदल, उसके सहयोगी प्रेमपाल और अन्‍य के खिलाफ जानलेवा हमले की एफआइआर लिखवा दी गई है। तिवारी ने बताया कि गांव वालों द्वारा जिंदल के खिलाफ दायर मुकदमे में चूंकि वे खुद वकील हैं, लिहाजा कल आए कोर्ट के आदेश की तामील करवाने के लिए वे अदालत के कर्मचारी देवीदत्‍त के साथ दिन में जिंदल के स्‍कूल परिसर में गए थे जहां उन्‍हें बंधक बना लिया गया और प्राणघातक हमला किया गया।

इस बीच, कैलाश पांडे ने सूचित किया है कि भाकपा (माले) जिला- अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड) ने डीडा नैनीसार में पी.सी.तिवारी और रेखा धस्माना के साथ जिन्दल कम्पनी के कारिंदों द्वारा की गयी मारपीट व दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए मांग किया है कि जिंदल कम्पनी के ऐसे आरोपी लोगों पर आपराधिक मामला दर्ज करते हुए उनकी तत्काल गिरफ़्तारी की जाय. माले की प्रेस रिलीज में आगे जो लिखा गया है, वह इस प्रकार है-

”डीडा नैनीसार में गाँव की वन पंचायत की भूमि को जिंदल समूह को दिए जाने के खिलाफ वहां किसानों का आन्दोलन शुरू से ही चल रहा है और राज्य सरकार इस आन्दोलन के दमन पर शुरू से ही आमादा है. आंदोलनरत सैकड़ों किसानों व उनके अगुवा नेताओं पर संगीन धाराओं में मुक़दमे लाद दिए गए हैं. और अब तो हद हो गयी है जब सीधे आन्दोलनकारी नेताओं पर हमला किया जा रहा है. ऐसा लगता है उत्तराखण्ड की हरीश रावत सरकार बड़े जमीन लुटेरों और खनन माफिया के हाथ की कठपुतली बन कर रह गयी है. आन्दोलन के बूते बना यह राज्य जमीन की लूट और राज्य दमन का पर्याय बन गया है. कांग्रेस-भाजपा बारी-बारी से चलने वाले अपने राज में उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा-भूमि, खनिज, नदियों आदि को ठिकाने लगाने के लिए रास्ता तलाश करने वाली एजेंसी में बदल गए है. ऐसे में सभी जनवादी-लोकतांत्रिक शक्तियों को इस लूट और दमन के खिलाफ एकताबद्ध होकर लड़ना वक्त की मांग है.”

जनसरोकारी पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

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फोकस टीवी बंद होगा, संजीव श्रीवास्तव ने दिया इस्तीफा

फोकस टीवी से संजीव श्रीवास्तव ने इस्तीफा दे दिया है. वे एडिटर इन चीफ हुआ करते थे. संजीव करीब दो साल से इस ग्रुप के साथ थे. बताया जा रहा है कि फोकस टीवी को बंद कर दिया जाएगा. मतंग सिंह के पाजीटिव मीडिया ग्रुप से नवीन जिंदल का जो करार था, वो खत्म हो चुका है. जिंदल अब खुद की तरफ से नया चैनल लाएंगे और फोकस के अधिकतर स्टाफ को उसमें एकोमोडेट करेंगे. संजीव श्रीवास्तव के विदा होने के बाद जिंदल अब मीडिया की कमान किसी दूसरे वरिष्ठ पत्रकार को सौंप सकते हैं. इसको लेकर कई नामों की चर्चा है.

 भड़ास तक अपनी बात आप bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.

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ये पत्रकारिता है और “चौधरी” पत्रकार हैं!

Sheetal P Singh : क़रीब दो तीन बरस पहले जी न्यूज़ ने हफ़्तों कोयला घोटाले और उसमें जिन्दल ग्रुप की मिली भगत पर नान स्टाप कवरेज दी थी। आपको मालूम ही है कि बाद में एक स्टिंग सामने आया था जिससे पता चला था कि सुधीर चौधरी समेत जी न्यूज़ के आला अधिकारी और जी के मालिक सुभाष चन्द्रा नवीन जिन्दल से समाचार रोकने के लिये १०० करोड़ की राशि माँग रहे थे। उसमें मुक़दमा दर्ज हुआ। चौधरी लम्बे समय जेल में रहे, सुभाष चन्द्रा अग्रिम ज़मानत पर बचे और मुक़दमा जारी है।

चौधरी इसके पहले एक Orchestrated sting में एक शिक्षिका को वेश्यावृत्ति की किंगपिन बतलाने की फ़र्ज़ी कोशिश के अपराध के मुख्य नियंता पाये गये थे पर वह चैनल कोई दूसरा था। अब उसी तरह का अभियान दौसा के किसान गजेन्द्र सिंह की आत्महत्या पर उन्होंने ले लिया लगता है। बीजेपी ने सुभाष चन्द्रा को उ०प्र० से राज्यसभा देने का वादा किया हुआ है। यह नहीं पता कि उसमें कोई प्रतिद्वन्द्वी आ गया या कुछ उससे ज़्यादा की इच्छा या महज़ TRP पर अभियान असामान्य है।

इस अभियान में मरहूम गजेन्द्र के परिवारजन व रिश्तेदारों को जी न्यूज़ के रिपोर्टर coax करके मनमाफिक शब्द/वाक्य हासिल करने की कोशिश करते लगते हैं। थीम यह है कि गजेन्द्र के फ़सली नुक़सान से प्रभावित होने की बात को गोल कर दिया जाय, बताया जाय कि वह साफ़ा बाँध कर ही बहुत कमा लेते थे, सो फ़सल के ख़राब होने का कोई असर न था। दूसरे उन्हे सिसोदिया ने फ़ोन कर बुलाया था और वे सिसोदिया के संपर्क में थे और अन्त में इस घटना की ज़िम्मेदारी केजरीवाल की है। न राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री का नाम न मोदी के ज़मीन हड़प क़ानून की बात न ओलावृष्टि से फ़सल की बर्बादी! ये पत्रकारिता है और “चौधरी” पत्रकार हैं!

वरिष्ठ पत्रकार और उद्यमी शीतल पी. सिंह के फेसबुक वॉल से.

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फोकस चैनल के मालिक नवीन जिंदल और उनके बेटे-बेटी-पत्नी के खिलाफ ईडी ने फेमा के तहत केस दर्ज किया

फोकस न्यूज चैनल के मालिक और कांग्रेस नेता नवीन जिंदल पर इनफोरसमेंट डायरेक्टोरेट यानि ईडी ने केस दर्ज कर लिया है. इनके चार परिजनों के खिलाफ भी ईडी ने मामला दर्ज किया है. ऐसा रिजर्व बैंक को जानकारी दिए बिना सिंगापुर के बैंक में बैंक खाता खोलने के कारण किया गया है. निदेशालय जल्द ही इन सभी को पूछताछ के लिए नोटिस भेजेगा. जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उनमें नवीन जिंदल के अलावा उनकी पत्नी शालू जिंदल, बेटी यशस्विनी और बेटे वेंकटेश हैं. इन सभी के खिलाफ फेमा के तहत केस दर्ज कर लिया गया है.

प्रवर्तन निदेशालय को फाइनेंसियल इंटेलिजेस यूनिट से सूचना मिली थी कि नवीन जिंदल और उनके परिजनों ने सिंगापुर के एक प्राइवेट बैंक में साल 2010 में खाते खुलवाए थे. एफआईयू की रिपोर्ट में इन बैंक खातों के बाकायदा नंबर भी भेजे गए थे. सूचना के आधार पर ईडी ने रिजर्व बैंक से पता किया कि नवीन जिंदल और उनके परिजनो के इन बैंक खातो की उसके पास कोई सूचना है, तो आऱबीआई ने साफ तौर पर इनकार कर दिया.

सूत्रों के मुताबिक, सिंगापुर के प्राइवेट बैंक जूलियस बीर एंड कंपनी में अकाउंट खुलवाते वक्त चारों अकाउंट दस-दस हजार डॉलर जमा कराए गए थे. प्रवर्तन निदेशालय जानना चाहता है कि इन खातो में जिंदल ने कब कब कितना पैसा जमा कराया, इस खाते में पैसा कहां-कहां से आया, भारत के किन बैंकों से इस खाते में पैसा गया और इस पैसे का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया, इस समय खाते में कितना पैसा है और इस बारे में जिदल ने आरबीआई को सूचना क्यों नहीं दी.

ये तमाम ऎसे सवाल हैं जिनका जवाब ईडी जिंदल से जानने की कोशिश करेगा. उधर, नवीन जिंदल की कंपनी जेएसपीएल का कहना है कि कुछ भी गलत नहीं किया गया है. सब कुछ अधिकारिक तौर पर है हुआ. जिंदल का बहुत सा कारोबार विदेशों में भी है. नोटिस मिलने पर जांच एजेंसियों को जवाब दे दिया जाएगा. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने नवीन जिंदल के खिलाफ कोयला घोटाला मामले में भी लगभग आधा दर्जन केस दर्ज कर रखा है, जिनकी जांच जारी है.

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‘फोकस’ के सारे रीजनल न्यूज चैनल बंद!

नवीन जिंदल को धीरे धीरे समझ में आने लगा है कि मतंग सिंह ने उन्हें अच्छी खासी टोपी पहना दी है. फोकस समेत ढेर सारे न्यूज चैनल मतंग सिंह से खरीदने के कुछ महीनों बाद नवीन जिंदल को लगने लगा कि पैसा तो आ नहीं रहा, उपर से करोड़ों घर से जा रहा है. जिंदल ने चैनल खरीदा सुभाष चंद्रा और जी ग्रुप को सबक सिखाने के लिए. लेकिन ये ढेर सारे चैनल हाथी के पेट की तरह काफी पैसा खाते हैं.

बांग्ला से लेकर असमिया तक चैनलों की पूरी श्रृंखला खरीदने के बाद नवीन जिंदल ने फैसला लिया है कि वे केवल नेशनल न्यूज चैनल चलाएंगे और बाकी बंद कर देंगे. इसी क्रम में फोकस न्यूज को छोड़कर बाकी सारे रीजनल न्यूज चैनलों को बंद करने का फरमान जारी कर दिया गया है. इस कारण सैकड़ों लोग सड़क पर आ गए हैं. ये लोग दूसरे चैनलों में नौकरी तलाशने लगे हैं. (कानाफूसी)

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नवीन जिंदल की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने जी मीडिया की जांच के निर्देश दिए

नई दिल्ली । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से उद्योगपति नवीन जिंदल के खिलाफ ज़ी मीडिया की ओर से कथित तौर पर चलाए जा रहे नकारात्मक अभियानों की जांच करने को कहा है। आयोग ने कहा कि मंत्रालय इस बात की जांच करे कि क्या जी मीडिया अपनी दुश्मनी निकालने के लिए नवीन जिंदल के खिलाफ झूठी और उनके सम्मान को चोट पहुंचाने वाली खबरें प्रसारित कर अपने ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस का दुरुपयोग कर रहा है।

नवीन जिंदल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी अपनी शिकायत में कहा है कि जी मीडिया के चैनलों ने 20 मार्च से 2014 से 14 नवंबर 2014 के दौरान उनके खिलाफ 3162 बार आपत्तिजनक, गुमराह और मनगढ़ंत खबरों का प्रसारण किया। शिकायत में कहा गया है कि जी मीडिया और उसके संपादक सुधीर चौधरी ने जानबूझ कर उनके खिलाफ ऐसी खबरें प्रसारित कीं, जिनसे उनकी गरिमा को चोट पहुंचती है। ऐसा करके वे अपने ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस का दुरुपयोग कर रहे हैं।

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नवीन जिंदल ने जो टीम फोकस में बनाई है वो सारी कि सारी ज़ी न्यूज से उठाई गई है

यशवंत भाई नमस्कार… मैं फोकस टीवी में काम करता हूं… पिछले कुछ समय से हमारे ऊपर सिर्फ ज़ी और सुभाष चंद्रा के खिलाफ खबरें दिखाने का भारी दबाव है…. हम जो खबर बाकी चैनलों पर चल रही हैं उसको दिखाने जाते हैं तो ज़ी के खिलाफ कुछ करने को कहा जाता है… इस चैनल में पत्रकारिता का मजाक बना दिया है। अपना दुख एक खबर के तौर पर लिखा है… उचित समझे तो छाप देना…

कांग्रेस के सांसद के चैनल फोकस पर सिर्फ सुभाष चंद्रा

कांग्रेस के पूर्व सांसद और उद्योगपति नवीन जिंदल का चैनल फोकस टीवी इन दिनों 24 घंटे में से कम से कम 5 घंटे सिर्फ और सिर्फ ज़ी न्यूज और सुभाष चंद्रा के खिलाफ ही दिखा रहा है । पिछले पूरे हफ्ते इस चैनल पर सुभाष चंद्रा ही छाए रहे। अब इनको कौन समझाए कि अपने निजी मामलों को साधने के लिए चैनल तो ले लिया है। लेकिन चैनल अपनी ख़बरों से जाने जाते हैं, न कि किसी के खिलाफ प्रोपेगेंडा करके। बड़ी बात ये है कि नवीन जिंदल ने जो टीम फोकस में बनाई है वो सारी कि सारी ज़ी न्यूज से उठाई गई है। चाहे वो दिव्या वर्मा हो या फिर ए जी नायर या फिर एसआईटी हेड कुलदीप सिंह। अब ऐसे में ये चैनल कितना आगे बढ़ पाएगा इसपर तो संश्य है ही। लेकिन पत्रकारिता के सारे नियम कायदे इस चैनल ने पाताल में डाल दिए हैं। इन लोगों को कोई तो समझाओ कि मालिक का कहना तो मानो लेकिन चैनल को ऐसा न बना दो कि लोग हंसे कि देखो वो चैनल वाले आ गए जो सिर्फ सुभाष चंद्रा के खिलाफ ही खबरें दिखाते हैं।

एक पत्रकार…

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जी न्यूज व जी बिजनेस के आरोपी संपादकों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने का अनुरोध

पूर्व कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल ने बुधवार को आइटीओ स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी से मुलाकात की। शाम 5.30 बजे पुलिस मुख्यालय पहुंचे जिंदल ने बस्सी से मुलाकात कर जी न्यूज व जी बिजनेस के आरोपी संपादकों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया। साथ ही उन्हें शीर्ष न्यायालय के आदेश की प्रति भी सौंपी, जिसमें न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से जांच आगे बढ़ाने की बात कही है।

करीब 30 मिनट बाद पुलिस मुख्यालय से बाहर निकले जिंदल ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा, सोमवार को सुधीर चौधरी ने अग्रिम जमानत वापस ले ली है। मैंने पुलिस आयुक्त से मिलकर कार्रवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया है। पुलिस आयुक्त ने जल्द से जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। कोल ब्लाक आवंटन घोटाला मामले में जिंदल के खिलाफ कई दिनों तक खबरें दिखाए जाने पर पिछले साल उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त से जी न्यूज के दो संपादकों सुधीर चौधरी व समीर अहलुवालिया के खिलाफ शिकायत की थी। जिंदल ने उक्त दोनों संपादकों पर सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। इस पर अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर दोनों संपादकों को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। ।

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शैलेष बने फोकस न्यूज के सलाहकार, ईटीवी में मुकेश राजपूत को प्रमोशन

हिंदी न्यूज चैनलों से दो खबरें हैं. न्यूज नेशन चैनल के संस्थापक और एडिटर इन चीफ रहे शैलेष ने नई पारी की शुरुआत ‘फोकस न्यूज’ के साथ की है. शैलेष इस चैनल में बतौर सलाहकार जुड़े हैं. सूत्रों के मुताबिक नवीन जिंदल अपने न्यूज चैनल फोकस न्यूज को टाप टेन न्यूज चैनलों में लाना चाहते हैं. इसके लिए वह कई तरह के बदलाव कर रहे हैं. इसी क्रम में जाने-माने पत्रकार शैलेष को चैनल के साथ जोड़ा गया है. शैलेष नवभारत टाइम्स और आजतक में लंबे समय तक रहे हैं. न्यूज नेशन नामक चैनल को लांच कर कंटेंट के दम पर टाप फाइव न्यूज चैनलों में पहुंचाने वाले शैलेष ने कुछ माह पहले अचानक न्यूज नेशन से नाता तोड़ा लिया और घर बैठ गए.

सूत्रों का कहना है कि न्यूज नेशन सफल होने के बाद इसके मालिकों कुलश्रेष्ठ ब्रदर्स के मन में चैनल खुद के हाथों चलाने की महत्वाकांक्षा जग गई. इसी के बाद शैलेष ने इस्तीफा दे दिया. न्यूज नेशन अब पूरी तरह मीडिया का क ख ग घ न जानने वाले कुलश्रेष्ठ लोगों के हाथ में आ गया है और माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ महीनों में यह चैनल धूल चाटता नजर आएगा. उधर, शैलेष ने कुछ दिन विश्राम के बाद फोकस न्यूज से आए प्रस्ताव को स्वीकार किया और बतौर एडवाइजर चैनल के साथ काम करना शुरू कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि फिलहाल शैलेष को चैनल के कंटेंट को मानीटर करने और चैनल को सफल बनाने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार करने का काम दिया गया है. माना जा रहा है कि शैलेष के जुड़ने से फोकस न्यूज को मजबूती मिलेगी.

उधर, एक खबर ईटीवी से है. पी7 न्यूज चैनल से इस्तीफा देने के बाद पंजाब के पत्रकार मुकेश राजपूत ने पिछले दिनों ईटीवी समूह ज्वाइन किया और उन्हें डिप्टी एडिटर का पद देकर ईटीवी हिमाचल प्रदेश हरियाणा से संबद्ध किया गया. पिछले दिनों रीतेश लक्खी फोकस न्यूज हरियाणा छोड़कर ईटीवी हरियाणा के एडिटर बने. कुछ ही माह बाद रीतेश लक्खी फिर से फोकस न्यूज हरियाणा चले गए. इसके बाद मुकेश राजपूत को ईटीवी हरियाणा का एडिटर इन चार्ज बना दिया गया है. मुकेश राजपूत पी7न्यूज, सहारा, वीओआई समेत कई चैनलों में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके हैं.

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जिंदल के चैनल ‘फोकस’ ने राहुल गांधी को बीजेपी उपाध्यक्ष घोषित किया

लाइव इंडिया नामक न्यूज चैनल अपने मालिक के घर के पार्टी फंक्शन को लाइव प्रसारित करने के कारण बदनाम है तो फोकस नामक चैनल नवीन जिंदल के निजी खेल, समारोह, चुनाव आदि को दिन भर लाइव दिखाने के लिए कुख्यात हो चुका है. इसी जिंदल के फोकस नामक चैनल ने अब तो राहुल गांधी को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित कर दिया है. इतनी बड़ी गलती फोकस टीवी पर लाइव चली लेकिन किसी वरिष्ठ पत्रकार की नजर इस पर नहीं पड़ी.

लाखों रुपये सेलरी लेने वाले नामधारी पत्रकारों ने भी मान लिया है कि फोकस तो जिंदल के जिद पर चल रहा है इसलिए यहां पत्रकारिता करने या पढ़ने-लिखने से कोई मतलब नहीं है, सो जो कुछ चैनल पर चल दिख रहा है, उसे चलने दिखने दो. पर दर्शकों के पास कई आंख नाक कान होते हैं. भड़ास के पास कई दर्शकों ने मेल करके फोकस टीवी की गलती को मय तस्वीर भेजा है जिसे यहां प्रकाशित किया जा रहा है.

कहीं ऐसा तो नहीं कि आजकल टीवी चैनल वाले बीजेपी से इतने अधिक प्रभावित हैं कि चैनलों ने राहुल गांधी तक को भी बीजेपी का उपाध्यक्ष दिखाना शुरू कर दिया है. पिछले दिनों राहुल गांधी ने झारखंड में एक चुनावी रैली को संबोधित किया था लेकिन कांग्रेसी सांसद रहे और इन दिनों परेशान घूम रहे नवीन जिंदल के चैनल फोकस टीवी ने राहुल गांधी का परिचय बीजेपी उपाध्यक्ष के रूप में करा दिया. अब सवाल ये है कि जिस पार्टी से नवीन जिंदल संबंध रखते हैं अगर उसी पार्टी के मालिक का नाम ही सही नहीं दिखा सकते हैं तो इस चैनल में काम करने वाले लोग किसी काम के नहीं हैं.

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जी न्यूज मेरी इज्जत के साथ खेल रहा है : जिंदल

जी न्यूज चैनल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सांसद व जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने बृहस्पतिवार को पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी से मुलाकात की। करीब 20 मिनट की मुलाकात में जिंदल ने बस्सी को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रति भी सौंपी, जिसमें दिल्ली पुलिस को जांच आगे बढ़ाने को कहा गया है। जिंदल का आरोप है कि कोल ब्लाक आवंटन घोटाला मामले में जी न्यूज ने जानबूझकर लगातार उनके खिलाफ गलत खबरे प्रसारित कर उनकी छवि खराब की।

कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल दोपहर करीब 12 बजे पुलिस मुख्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने भीमसेन बस्सी से और क्राइम ब्रांच के विशेष आयुक्त ताज हसन से मुलाकात की। पत्रकारों से बातचीत में नवीन जिंदल ने कहा कि जी न्यू उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ कर रहा है। पुलिस आयुक्त से मिलकर कार्रवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया है। मामले में पुलिस पूरक आरोप पत्र दाखिल करेगी। बस्सी ने पत्रकारों को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को वह पहले पढ़ेंगे, उसके बाद आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। पूरक आरोप पत्र के बारे में उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। गौरतलब है कि इससे पूर्व 8 अप्रैल को नवीन जिंदल ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग की थी। उस दौरान जी न्यूज व जी बिजनेस के संपादकों के खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल नहीं किया था।

कोल आवंटन घोटाला मामले में जी न्यूज में अपने खिलाफ कई दिनों तक खबरें दिखाए जाने पर पिछले साल नवीन जिंदल ने पुलिस आयुक्त से मिलकर चैनल के दो संपादकों सुधीर चौधरी व समीर अहलुवालिया के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने संबंधी शिकायत की थी। क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर दोनों संपादकों को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई। जिंदल ने अपने दावे के पक्ष में एक स्टिंग भी सौंपा था। इसमें दिखाया गया कि दोनों संपादक कैसे उनसे खबरें न प्रसारित करने की एवज में 10 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं। जी न्यूज के खिलाफ दर्ज मामले में क्राइम ब्रांच ने जो आरोप पत्र दायर किया था, उस पर मुख्य महानगर दंडाधिकारी अदालत (सीएमएम कोर्ट) ने 4-5 तथ्यों पर सवाल उठाते हुए जवाब देने का आदेश दिया था। इस पर दिल्ली पुलिस सेशन कोर्ट चली गई। सेशन कोर्ट ने मुख्य महानगर दंडाधिकारी कोर्ट को अपने दायरे में रहकर पहले मामले में संज्ञान लेने का आदेश दिया। इसी दौरान आरोपी संपादकों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने सेशन कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। इसके बाद आरोपी सुप्रीम कोर्ट चले गए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि पहले दिल्ली पुलिस मामले में निष्पक्ष जांच करे फिर पूरक आरोप पत्र दायर कर कार्रवाई करे। बता दें कि इस मामले में जी न्यूज समूह के मालिक तथा उनके बेटे से भी पूछताछ की गई थी।

नवीन जिंदल ने लिखा पुलिस आयुक्त को पत्र

जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने जी न्यूज उगाही मामले में सुप्रीम कोर्ट के 10 नवम्बर के आदेश का हवाला देते हुए जल्द पूरक आरोपपत्र दाखिल करने का अनुरोध करते हुए पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा है। जिंदल ने पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वह दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में दर्ज मामलों की जांच आगे बढ़ाते हुए पूरक आरोप पत्र दाखिल करवाएं। पत्र में नवीन जिंदल ने कहा कि 2012 में दर्ज प्राथमिकी के तहत जी न्यूज के मालिक सुभाष चंद्रा, संपादक सुधीर चौधरी व समीर अहलूवालिया के खिलाफ पटियाला हाऊस स्थित मुख्य महानगरीय मैजिस्ट्रेट की अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।  अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने 6 जनवरी 2014 को आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए इस आरोपपत्र की वैधता व प्रामाणिकता पर अपनी मुहर लगाई एवं मुख्य महानगरीय मैजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियां रद्द कर दीं।

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मित्रों, मैं पिछले 4-5 दिनों से डा. सुभाष चन्द्रा जी से परेशान हूं

Vijay Yadav :  मित्रों, मैं पिछले 4-5 दिनों से डा. सुभाष चन्द्रा जी से परेशान हूं। सुभाष जी एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन हैं। दरअसल हमने अपने घर पर जो टीवी छतरी (डिश टीवी) लगाया है, वह इन्हीं की कंपनी का है, जिसका एकाउंट नंबर 01518442110 है। करीब दो साल से मैं डा. साहब की सुविधा हर महीने 220 रुपये चुका कर ले रहा हूं। हाल ही में उन्होंने 220 को 230 रुपये कर दिया। हमने मान लिया डा. चन्द्रा जी हाल ही में हरियाणा में नवीन जिंदल के खिलाफ लड़कर लौटे हैं, खर्चा बढ़ गया होगा। हमने उन्हें 10 रुपये अतिरिक्त बढाकर देना स्वीकार कर लिया।

भाई हद तो तब हो गई, जब उन्होंने पैसे बढ़ाने के बाद भी कुछ चैनल बंद कर दिए, जिसमें सब टीवी भी शामिल था। जब उनके कर्मचारी से फोन पर बात हुई तो, उसने कहा कि, आपको पांच रुपये और देने होंगे। फिलहाल डा. सुभाष चन्द्रा जी को प्रतिमाह 10+5 रुपये अतिरिक्त देकर हमने समझौता कर लिया है। सुभाष चंद्रा जी पहले इतने जिद्दी नहीं थे कि पांच रुपये के लिए चैनल बंद कर दें। जबसे अपने चैनलों पर (डा. सुभाष चंद्रा शो) धंधे का फंडा युवाओं को सिखाने लगे हैं, तभी से ऐसा हो रहा है। पता नहीं यह उनके नए व्यापार का फंडा है या माननीय प्रधानसेवक जी की संगत का असर। पिछले महीने उनका एक टेक्नीशियन एंटीना रिपेयर करने के बाद 465 रुपये लेकर गया, जिसकी रसीद तक नहीं दी। इस 465 में 12 प्रतिशत का सरकारी सेवा शुल्क भी शामिल था। पता नहीं सेवा शुल्क उन्होंने सरकारी खजाने में जमा किया की नहीं या उसे भी हरियाणा चुनाव में लगा दिया।

मुंबई के पत्रकार विजय यादव के फेसबुक वॉल से.

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मीडिया की भाषा और मीडिया की साख : ‘सुभाष चंद्रा गाली-गलौज कर रहा है’ बनाम ‘नवीन जिंदल अपराधी है’

अब सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का कोई मतलब ही नहीं रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार अभियान में जिस भाषा-शैली का इस्तेमाल किया, वैसी भाषा-शैली का इस्तेमाल इससे पहले किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं किया. खासकर, राजनीति में अपने साथियों के चुनाव क्षेत्र में भले ही वे किसी भी पार्टी के राजनेता रहे हों, इस तरह की भाषा-शैली का इस्तेमाल पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया.हमें यह मानना चाहिए कि केंद्र में नई सत्ता के आने के बाद नई भाषा और नई शब्दावली का भी अभ्यस्त हो जाना पड़ेगा.

दो बड़े व्यापारिक घराने टेलीविजन चैनलों के माध्यम से लड़ रहे हैं. जी न्यूज के प्रमुख सुभाष चंद्रा और मशहूर उद्योगपति नवीन जिंदल कभी आपस में बहुत गहरे दोस्त हुआ करते थे और दोनों का परिवार दोस्ती की मिसाल माना जाता था. आज दोनों आमने-सामने खड़े हैं. कारणों की तह में जाने का कोई मतलब नहीं है. इन दोनों घरानों के दो टेलीविजन चैनल हैं. एक जी मीडिया के रूप में देश के सबसे बड़े मीडिया समूह का स्वामित्व रखता है और दूसरे ने एक नए टेलीविजन में निवेश करके उसके ऊपर अपना आधिपत्य कर लिया है. इस चुनाव में इन दोनों टेलीविजन चैनलों ने भाषा की मर्यादा समाप्त कर दी है. सुभाष चंद्रा गाली-गलौज कर रहा है, सुभाष चंद्रा गुंडागर्दी कर रहा है, सुभाष चंद्रा लोगों को धमका रहा है, जैसी सभ्यता के स्तर से नीचे उतरी भाषा का इस्तेमाल सुभाष चंद्रा के लिए फोकस टीवी ने किया. सुभाष चंद्रा के चैनल जी मीडिया ने भी तुर्की-ब-तुर्की, नवीन जिंदल कोयला घोटाले का आरोपी है, नवीन जिंदल अपराधी है, नवीन जिंदल गले में कांग्रेस का चुनाव चिन्ह लगा मफलर डालकर घूम रहा है, जैसी भाषा का इस्तेमाल किया. इससे थोड़ी-सी और नीचे गिरी भाषा-शैली का भी इस्तेमाल हुआ. दोनों टेलीविजन चैनल इस भाषा युद्ध में एक-दूसरे को नीचा दिखाने और अपने-अपने घरानों का प्रतिनिधित्व करने में बस एक महत्वपूर्ण बात भूल गए.

वह महत्वपूर्ण बात मीडिया की अपनी साख है. हम जब टेलीविजन या अख़बार में होते हैं, तो लोग हमारे ऊपर वैसे ही विश्‍वास करते हैं, जैसे वे किसी न्यायाधीश के ऊपर विश्‍वास करते हैं. आज भी मीडिया के ऊपर, वह चाहे प्रिंट हो या टेलीविजन चैनल हों, देश के अधिकांश लोग बिना किसी तर्क के उनकी कही हुई बातों पर विश्‍वास कर लेते हैं. यह साख अभी मीडिया की ख़त्म नहीं हुई है. हालांकि, बहुत सारे लोगों के मन में ख़बरों के दिखाने के तरीके को लेकर शंकाएं उत्पन्न हो गई हैं और वे मीडिया के एक हिस्से को मनोरंजन का पर्याय भी मानने लगे हैं. पर इसके बावजूद साख अभी ख़त्म नहीं हुई है.

ये दोनों टेलीविजन समूह इस बात को भूल गए कि उनकी इस असभ्य अंत्याक्षरी में इन दोनों का कोई नुक़सान नहीं होने वाला, क्योंकि दोनों ही धन में और ताकत में एक-दूसरे का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे. अगर कुछ बिगड़ेगा, तो मीडिया का बिगड़ेगा. और मीडिया का मतलब स़िर्फ जी और फोकस से जुड़े हुए या उनके दर्शकों का नहीं, बल्कि उन सारे लोगों का, जो मीडिया में काम करते हैं.

जब दो लोग एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, तो न केवल राजनीतिक दल, बल्कि जनता भी इसे एक तमाशा मान लेती है. और उस तमाशे में सारे पत्रकार, वे चाहे किसी भी विधा से जुड़े हों, एक हास्यास्पद भूमिका में जोकरों की तरह खड़े दिखाई देते हैं.वैसे ही मीडिया की साख समाप्त हो रही है. मीडिया खुद अपनी साख समाप्त कर रहा है. ऐसे में अगर टेलीविजन चैनल और अख़बारों के माध्यम से आपसी युद्ध सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाए, तो इससे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति दूसरी नहीं हो सकती.

मेरी चिंता सुभाष चंद्रा और नवीन जिंदल में नहीं है. मेरी चिंता मीडिया में है. और मैं इन दोनों (सुभाष चंद्रा और नवीन जिंदल) से विनम्र अनुरोध करना चाहता हूं कि आप दोनों लड़ें, आपके पास लड़ने के बहुत सारे माध्यम हैं. उसमें टेलीविजन चैनलों और अख़बारों को, जो आपके पैसे की वजह से चलते हैं, उन्हें न घसीटें. क्योंकि, जब आप अपने टेलीविजन चैनलों और अख़बारों को घसीटते हैं, तो आप पत्रकारिता को वहां खड़ा कर देते हैं, जहां पत्रकारिता अपनी साख खो देती है और पत्रकारिता हास्यास्पद नाटक मंडली का प्रहसन बन जाती है. लोग भले अपने मुंह से कुछ न कहें, लेकिन लोग इसे अपने दिल से उतार देते हैं.

मुझे नहीं मालूम, ये दोनों महान व्यक्ति, सुभाष चंद्रा और नवीन जिंदल हमारे इस छोटे-से अनुरोध को स्वीकार करेंगे या नहीं. लेकिन अगर वे स्वीकार करेंगे, तो न केवल अपने चैनलों और अख़बारों में काम करने वाले पत्रकारों पर कृपा करेंगे, बल्कि पत्रकारिता के पेशे में लगे हुए तमाम उन लोगों पर भी उपकार करेंगे, जो अपनी जान हथेली पर रखकर अभी भी सच की तलाश में जुटे हुए हैं. क्योंकि, जो चीजें आज हो रही हैं, वे दीमक की तरह हैं. और दीमक जब कहीं लग जाती है, तो वह किसी को नहीं छोड़ती. कोशिश करनी चाहिए कि पत्रकारिता के पेशे में दीमक न लगे, क्योंकि पत्रकारिता का पेशा लोकतंत्र की सलामती के लिए बहुत अहम स्थान रखता है. इसलिए आख़िर में श्री सुभाष चंद्रा और श्री नवीन जिंदल से एक बार फिर अनुरोध है कि वे अपना युद्ध लड़ें, जिस स्तर पर चाहें लड़ें, जितना चाहें एक-दूसरे को ऩुकसान पहुंचाएं, उनकी मर्जी. बस अपने टेलीविजन चैनलों और अख़बारों को इस युद्ध से दूर रखें, तो उनकी पत्रकारिता के ऊपर और दूसरे शब्दों में, लोकतंत्र के ऊपर बहुत बड़ी कृपा होगी.

लेखक संतोष भारतीय वरिष्ठ पत्रकार और ‘चौथी दुनिया’ अखबार के प्रधान संपादक हैं. उपरोक्त आलेख चौथी दुनिया में प्रकाशित हो चुका है. वहीं से साभार लेकर भड़ास पर प्रकाशित किया गया है.

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जिंदल और कांग्रेस की हार के बाद फोकस टीवी में छंटनी, संपादक रितेश लक्खी हटाए गए

नवीन जिंदल का दिवाला निकल गया है… ज़ी न्यूज़ को धूल चटाने के लिए नवीन जिंदल फोकस टीवी लेकर तो आये, लेकिन जिंदल के परिजनों के हारने और कांग्रेस का सूरज अस्त होने के बाद इस चैनल का दिवाला निकलने लगा है… चैनल में छंटनी हो रही है…. रीज़नल टीवी इतिहास में पहली बार इतनी जल्दी और सबसे बड़ी छंटनी हो रही है….. जिंदल का चैनल ‘फोकस हरियाणा’ फोकस नहीं कर पाया और मैनजमेंट एक साथ सौ  लोगों को निकाल रहा है…..

शुरुवात हो चुकी है और पहला नाम है संपादक रितेश लक्खी का…. मैनजमेंट ने फरमान सुना दिया है और रितेश लक्खी ने इस्तीफा  दे दिया है…. चुनाव खत्म हुए और चैनल बर्बाद हो गया, क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं आ पाई, और जिंदल कांग्रेस के सांसद हैं .
 

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नवीन जिंदल ने सुभाष चंद्रा को भेजा कानूनी नोटिस, भड़काऊ भाषण का आरोप, पेड न्यूज की शिकायत

हिसार : कांग्रेस प्रचार एवं प्रकाशन समिति के चेयरमैन और कुरुक्षेत्र के पूर्व सांसद नवीन जिंदल ने जी टेली मीडिया के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा पर भड़काऊ व जनता को गुमराह करने वाला भाषण देने का आरोप लगाते हुए उन्हें कानून नोटिस भेजा है। उन्होंने हिसार में चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई जाने का आरोप लगाते हुए हिसार शहर में 15 अक्तूबर तक जी न्यूज और सिटी केबल के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग भी की है। इस बारे में जिंदल हाउस से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि गत 4 अक्तूबर को जहाजपुल के पास हिसार आरा एसोसिएशन के कार्यक्रम में सुभाष चंद्रा ने भड़काऊ और जनता को गुमराह करने वाला भाषण देते हुए जिंदल परिवार पर इलियट क्लब से संबंधित जमीन के बारे में बेबुनियाद आरोप लगाया था।

नवीन जिंदल ने इस पर आपत्ति जताते हुए अपने कानूनी नोटिस में लिखा है कि यह जमीन अभी भी हरियाणा सरकार के नाम है जो पूर्व ऊर्जामंत्री ओपी जिदल को श्रद्धांजलि स्वरूप 31 अक्तूबर, 2005 को ओपी जिंदल स्मारक, योग केंद्र और सार्वजनिक पार्क बनाने के लिए ओपी जिंदल फाउंडेशन को दी गई थी।

हिसार शहर से कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री जिंदल ने भी सुभाष चंद्रा, जी टीवी एवं सिटी केबल पर पेड न्यूज चलाकर चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग से शिकायत की है। कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि जी टीवी और सिटी केबल एक पार्टी के प्रत्याशी का लगातार प्रचार कर पेड न्यूज श्रेणी में चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं।

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राजदीप सरदेसाई के धतकरम के बहाने अपने दाग और जी न्यूज के पाप धोने में जुटे सुधीर चौधरी

सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज को… जी न्यूज पर पत्रकारिता की रक्षा के बहाने हाथापाई प्रकरण को मुद्दा बनाकर राजदीप सरदेसाई को घंटे भर तक पाठ पढ़ाते सुधीर चौधरी को देख यही मुंह से निकल गया.. सोचा, फेसबुक पर लिखूंगा. लेकिन जब फेसबुक पर आया तो देखा धरती वीरों से खाली नहीं है. युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार ने सुधीर चौधरी की असलियत बताते हुए दे दनादन पोस्टें लिख मारी हैं. विनीत की सारी पोस्ट्स इकट्ठी कर भड़ास पर प्रकाशित कर दिया. ये लिंक http://goo.gl/7i2JRy देखें. ट्विटर पर पहुंचा तो देखा राजदीप ने सुधीर चौधरी पर सिर्फ दो लाइनें लिख कर तगड़ा पलटवार किया हुआ है. राजदीप ने रिश्वत मांगने पर जेल की हवा खाने वाला संपादक और सुपारी पत्रकार जैसे तमगों से सुधीर चौधरी को नवाजा था..

जी न्यूज के सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के समीर अहलूवालिया द्वारा जिंदल समूह के नवीन जिंदल से कोल ब्लाक धांधली प्रकरण की खबर रोकने के एवज में करोड़ों रुपये मांगने से संबंंधित स्टिंग की खबर को सबसे पहले भड़ास ने पब्लिश किया था (देखें http://goo.gl/x5y9Bz ) . उसके बाद इंडियन एक्सप्रेस समेत दूसरे मीडिया हाउसेज ने खबर को तब उठाया जब दिल्ली पुलिस ने नवीन जिंदल की लिखित शिकायत और प्रमाण के रूप में सौंपी गई स्टिंग की सीडी को देखकर एफआईआर दर्ज कर ली. फिर तो ये प्रकरण बड़ा मुद्दा बन गया और चारों तरफ पत्रकारिता के पतन की कहानी पर चर्चा होने लगी. सुधीर और समीर तिहाड़ जेल भेजे गए. इनके आका सुभाष चंद्रा पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी, लेकिन वो जेल जाने से बच पाने की एलीट तिकड़म भिड़ाने में कामयाब हो गए.

उन दिनों राजदीप सरदेसाई ने भी सीएनएन-आईबीएन और आईबीएन7 पर सुधीर चौधरी के ब्लैकमेलिंग में जेल जाने के बहाने पत्रकारिता के पतन पर गहरा आंसू बहाया था. अब समय का पहिया जब काफी चल चुका है तब राजदीप सरदेसाई अपनी गालीगलौज व हाथापाई वाली हरकत के कारण सबके निशाने पर हैं और इनकी करतूत के चलते पत्रकारिता की हालत पर दुखी होकर टपाटप आंसू बहा रहे हैं सुधीर चौधरी. सोचिए जरा. इस देश के आम आदमी को मीडिया का संपूर्ण सच भला कैसे समझ में आएगा क्योंकि उसे कभी राजदीप सरदेसाई में सच्चा पत्रकार दिखता होगा तो कभी सुधीर चौधरी पत्रकारिता के हनुमान जी लगते होंगे.

इस विचित्र और घनघोर बाजारू दुनिया में दरअसल जनता के लिए सच जैसी पक्षधरता / चीज पर कोई मीडिया वीडिया काम नहीं कर रहा. सब अपने अपने एजेंडे, अपने अपने राग द्वेष, अपने अपने मतलब पर काम कर रहे हैं और इसे जन पत्रकारिता का नाम दे रहे हैं. ब्लैकमेलिंग में फंसे सुधीर चौधरी हों या हाथापाई-गालीगलौज करने वाले राजदीप सरदेसाई. इन जैसों ने असल में केवल खुद की ब्रांडिंग की है और अपनी ब्रांडिंग के जरिेए अपने लालाओं और अपनी तिजोरियां भरी हैं. क्या गलत है, क्या सही है, इस पर हम लोग भले तात्कालिकता / भावुकता के शिकार होकर फेसबुक-ट्विटर पर एक दूसरे का सिर फोड़ रहे हों, एक दूसरे को समझा ले जाने या निपटा देने में जुटे हुए हों लेकिन सच्चाई यही है कि अंततः राजदीप, सुधीर, हम, आप… हर कोई अपनी सुरक्षा, अपने हित, अपने दांव, अपने करियर, अपनी जय-जय में जुटा हुआ है और जो फिसल जा रहा है वह हर हर गंगे कहते हुए खड़ा होने की कोशिश मेें जुट जा रहा है.

देखिए इन्हीं मोदी महोदय को. गुजरात के दंगों के दाग से ‘मुक्त’ होकर विश्व नायक बनने की ओर चल पड़े हैं. इनकी बातें सुन सुन कर अब तो मुझको भी लगने लगा है कि सच में भारत को बहुत दिनों बाद कोई कायदे का नेता मिला है जो देश को एकजुट कर, एक सूत्र में पिरोकर बहुत आगे ले जाएगा… लेकिन जब मोदी की विचारधारा, मोदी के भक्तों, मोदी के अतीत को देखता हूं तो सारा उत्साह ठंढा पड़ जाता है क्योंकि ये लोग अपने हित के लिए कुछ भी, जी हां, कुछ भी, बुरा से बुरा तक कर डालते हैं. पर, समय और हालात, दो ऐसी चीज हैं भाइयों कि इनके कारण बुरे से बुरे को अच्छे से अच्छा में तब्दील होते देखा जा सकता है और अच्छे से अच्छा को बुरे से बुरा बताया जा सकता है. ऐसे ही हालात में मिर्जा ग़ालिब साहब ने कहा होगा…

रहिये अब ऐसी जगह चलकर जहाँ कोई न हो
हमसुख़न कोई न हो और हमज़बाँ कोई न हो

बेदर-ओ-दीवार सा इक घर बनाया चाहिये
कोई हमसाया न हो और पासबाँ कोई न हो

पड़िये गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार
और अगर मर जाईये तो नौहाख़्वाँ कोई न हो

और अंत में… जाते-जाते…

जी न्यूज के सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के समीर अहलूवालिया के स्टिंग की वो सीडी जरूर देखिए जिसकी खबर भड़ास पर आने के बाद तहलका मचा और बाद में इन दोनों संपादकों को ब्लैकमेलिंग के आरोप में जेल जाना पड़ा… आज यही सुधीर साहब देश को जी न्यूज पर राजदीप सरदेसाई के धतकरम के बहाने सच्ची-अच्छी पत्रकारिता सिखा रहे थे… इस लिंक पर क्लिक करें… http://goo.gl/N96BR8

बाकी, सुधीर चौधरी और जी न्यूज की संपूर्ण कथा इस लिंक में है… http://goo.gl/6k7p41

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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