लॉकडाउन में वेतन कटौती तथा छंटनी मामलों की सुनवाई 23 नवंबर को करेगा सुप्रीमकोर्ट

मीडियाकर्मियों और श्रमिकों के जीवन से जुड़ा है ये मामला…

एक तरफ जहां श्रम सुधार बिल के ससंद में पास हो जाने के बाद 300 या उससे कम कर्मचारियों वाली कंपनियों में छटनी के लिए किसी तरह की सरकारी अनुमति न लेने के मामले की हर तरह आलोचना श्रमिक संगठन कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मीडियाकर्मियों और श्रमिकों के वेतन कटौती तथा छटनी के मामले की सुनवाई 23 नवंबर को सुप्रीमकोर्ट करेगा।

इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की साइट पर 23 नवंबर को सुनवाई की संभावित सूची में इस मामले को लिस्टेड किया गया है। प्रकरण की सुनवाई जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम.आर.शाह की बेंच करेगी।

इससे पहले पिछले महीने में इस मामले की सुनवाई हुई थी। देश भर के मीडियाकर्मियों की लॉक डाउन में हुई छंटनी और वेतन कटौती मामले पर सुनवाई करते हुए पिछले महीने माननीय सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले को डायरी नम्बर 10983/2020 से टैग कर दिया। अब दोनों मामलों को एक साथ सुना जाएगा।

डायरी नम्बर 10983 /2020 में इसी तरह के एक मामले की सुनवाई विचाराधीन थी।इन दोनों मामलों को 23 नवंबर को सुना जाएगा। डायरी नम्बर 10983 /2020 की सुनवाई करते हुए सुप्रीमकोर्ट ने निजी नियोक्ताओं, कारखानों, उद्योगों को फौरी राहत देते हुए कहा था कि निजी नियोक्ताओं, कारखानों, उद्योगों के खिलाफ सरकार कोई कठोर कदम नहीं उठाएगी, जो लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को मजदूरी देने में विफल रहे।

ये व्‍यवस्‍था देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार के श्रम विभाग वेतन भुगतान के संबंध में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच बातचीत करवाएं। मजदूरों को 54 दिन के लॉकडाउन की मजदूरी के भुगतान के लिए बातचीत करनी होगी। उद्योग और मज़दूर संगठन समाधान की कोशिश करें।

इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को 29 मार्च के अपने आदेश की वैधानिकता पर जवाब दाखिल करने के लिए 4 और सप्ताह दिए थे जिसमें सरकार ने मजदूरी के अनिवार्य भुगतान का आदेश दिया था। अगली सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह में होनी थी। जिसकी लिस्टिंग 27 जुलाई को हुई थी।

अब इन दोनों मामलों को एक साथ सुना जाएगा। इसके पूर्व मीडियाकर्मियों की तरफ से प्रस्तुत एडवोकेट को संशोधित याचिका पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया था।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी
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