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कंपनी के मालिकों को बचाने के चक्कर में दलाल बन गए चिटफंडिया चैनलों के कई पत्रकार

इन दिनों कई चिटफंडिया चैनलों के पत्रकार दलालों की भूमिका में नज़र आ रहे हैं. नौकरी करने और बचाने के चक्कर में पत्रकार इन चिटफंड माफियाओं के दलाल बन गए हैं. जिसकी दलाली रास नहीं आती, वो जल्द ही चैनल छोड़ देते हैं. जिन चिटफंडिया पत्रकारों में पत्रकारिता कम, दलाली का हुनर ज्यादा है, उनकी गाड़ी निकल पड़ी है. पी7 न्यूज  नामक टीवी चैनल का हाल सबको पता है. ये PACLग्रुप का चैनल है. इनके दलाल पत्रकारों की लाख कोशिशों के बावजूद भी कंपनी को बचाया नहीं जा सका, सो अब चैनल भी बुरे दिन झेल रहा है. कई जवान से लेकर बूढ़े पत्रकार तक इस कंपनी की दलाली के काम में लगे थे. इनकी हालत पर वाकई तरस आती है.

<p>इन दिनों कई चिटफंडिया चैनलों के पत्रकार दलालों की भूमिका में नज़र आ रहे हैं. नौकरी करने और बचाने के चक्कर में पत्रकार इन चिटफंड माफियाओं के दलाल बन गए हैं. जिसकी दलाली रास नहीं आती, वो जल्द ही चैनल छोड़ देते हैं. जिन चिटफंडिया पत्रकारों में पत्रकारिता कम, दलाली का हुनर ज्यादा है, उनकी गाड़ी निकल पड़ी है. पी7 न्यूज  नामक टीवी चैनल का हाल सबको पता है. ये PACLग्रुप का चैनल है. इनके दलाल पत्रकारों की लाख कोशिशों के बावजूद भी कंपनी को बचाया नहीं जा सका, सो अब चैनल भी बुरे दिन झेल रहा है. कई जवान से लेकर बूढ़े पत्रकार तक इस कंपनी की दलाली के काम में लगे थे. इनकी हालत पर वाकई तरस आती है.</p>

इन दिनों कई चिटफंडिया चैनलों के पत्रकार दलालों की भूमिका में नज़र आ रहे हैं. नौकरी करने और बचाने के चक्कर में पत्रकार इन चिटफंड माफियाओं के दलाल बन गए हैं. जिसकी दलाली रास नहीं आती, वो जल्द ही चैनल छोड़ देते हैं. जिन चिटफंडिया पत्रकारों में पत्रकारिता कम, दलाली का हुनर ज्यादा है, उनकी गाड़ी निकल पड़ी है. पी7 न्यूज  नामक टीवी चैनल का हाल सबको पता है. ये PACLग्रुप का चैनल है. इनके दलाल पत्रकारों की लाख कोशिशों के बावजूद भी कंपनी को बचाया नहीं जा सका, सो अब चैनल भी बुरे दिन झेल रहा है. कई जवान से लेकर बूढ़े पत्रकार तक इस कंपनी की दलाली के काम में लगे थे. इनकी हालत पर वाकई तरस आती है.

सहारा का “समय”, समृद्ध जीवन चिटफंड कंपनी का “लाइव इंडिया” और “मी मराठी” आदि चिटफंडिया मीडिया यूनिटों में मजबूरन ढेर सारे पत्रकार फंसे हैं. जिनको यहां की नौकरी रास आ गयी है उनकी बात और है, लेकिन जिसने कभी दलाली की नहीं है, उनके लिए मुसीबत बड़ी हो गयी है. निखिल वागले जी को ही लीजिए. हमेशा से समाजवादी, गांधीवादी, लोहियावादी आदि रहे हैं, लेकिन किस्मत का तकाजा देखो कि पहले जवाहर दर्डा के यहां काम किया. अब महेश मोत्तेवार की नौकरी कर रहे हैं. भगवान इस बन्दे को कोई अच्छा समूह दिलाये, क्योंकि यह ग्रुप उसके लायक नहीं है.

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सतीश के. सिंह जैसे पत्रकार चिटफंडिया कंपनी के चैनल में काम करके और मालिकों के संकटमोचक बनकर जीवन काट कर रहे हैं. जिन पत्रकारों को इन चिटफंडिया चैनलों क़ी दलाली रास आ गयी है, वो पत्रकारिता भी भूल गए हैं और दिन भर पुलिस, वकील और कोर्ट के दलालों के चक्कर में पड़े रहते हैं. इनका फुल टाइम एक ही काम रहता है कि, कंपनी को एक झमेले से निकाल कर दूसरे झमले में डालना. अजब है चिटफंडिया पत्रकार कम दलालों की दुनिया..!

मोहम्द उस्मान की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. एच.आनंद शर्मा,शिमला

    October 22, 2014 at 7:15 am

    अच्छी रिपोर्ट है। चिटफंड कंपनियां चैनल या अखबार चलाते ही इसलिए हैं ताकि उनके काले कारनामों पर पर्दा डाला जा सके।

  2. vijay trivedi

    October 24, 2014 at 7:15 am

    ये बात बिलकुल सच है। हाल ही में इंदौर के पत्रकार सिद्धार्थ माछीवाल को ‘पत्रिका’ ने एक चिटफंड कंपनी की लाइसनिंग करने और ख़बरें रोकने के आरोप में नौकरी से निकाला है।

  3. ajay mehta

    May 27, 2015 at 6:56 am

    satish ke singh jaise kabhi nami patralkar mane jaate the par ab to uski halat kutte se bhi badtar ho gai hai jo mahesh motewar aur uski rakhail supriya kanse jo lul hai uske bhare sabha me pair chute najar aate hain jo usse umra me choti bhi hai aur to aur ye haal hai ji ki uske 2-3 chele chapate bhi hai jaise chutiya indrajeet rai, charan shrivastava jo malik ki rakhail k aage aise natmastak rahte hain jaise wo unki bhagwan ho gai hai

  4. arvind jha

    May 27, 2015 at 7:01 am

    bahut madharchod aadmi hai ye mahesh motewar aur uski rakhail supriya kanse logo ka paisa kha kar kaise pacha jate hain ye to pata hi nahi chalta aur satish k singh bhi mota kama raha hai waha se ab isko kahi naukri to milegi nahi islie bhadua ban kar baitha hai us channel me ek baar to kuch cash paisa motewar ne uske ghar par rakhwaya tha to usne kuch paisa bhi gayab kar diya tha par motewar ne usko nikala nahi kyunki wo in chutiyo k sare raaz janta hai aur un thakur jaise log jo ek reputed pad par rah chuke hain wo bhi in chutiyon ke chut me ghuse pade hain kab samajh aayega inhe ki inki gand me bhi lakdi daali jayegi jab wo nigeria bhagne ki taiyari me laga hai motewaar saala

  5. mahendra

    January 17, 2016 at 9:15 am

    ajeeb sa lagta hai jab…kabhi bhi NEWS EXPRESS news channel ka kabhi jikra nahin hota …..SEBI ko patane unke ptrakaaar bhi dalal ki bhumika me utar aayew the.

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