सहारा इंडिया अपने एजेंटों, फील्ड वर्करों और मोटीवेटरों को अपना कर्मचारी नहीं मानता!

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सहारा इंडिया के चेयरमैन सुब्रत रॉय

एक बड़ी खबर सहारा इंडिया कंपनी से आ रही है. कंपने कोर्ट में यह लिखकर दे दिया है कि उसका अपने कमीशन एजेंटों, फील्ड वर्करों और मोटीवेटरों से कोई संबंध नहीं है. Continue reading

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कैनविज समूह के चेयरमैन कन्हैया गुलाटी के पापों का घड़ा जल्द भरने वाला है

कैनविज टाइम्स की धोखाधड़ी के संबंध में आप लोगों को बताना चाह रहा हूं. लोगों को करोड़पति बनाने का ख्वाब दिखाकर लाखों लोगों को ठगने वाले कैनविज समूह के चेयरमैन कन्हैया गुलाटी के पापों का घड़ा जल्दी ही भरने वाला है. यूपी में फर्जीवाड़ा कर लोगों को चूना लगाने वाली कंपनियों की पोल यूं तो आए दिन खुल रही है, लेकिन अब वो दिन भी दूर नहीं जब कन्हैया गुलाटी के काले कारनामों का चिट्ठा चर्चा-ए-आम होगा.

अभी तक गुलाटी एंड कंपनी ने अपने राजनीतिक और प्रशासनिक दबदबे से अपने कुकर्मों को दबाए रखा और जिम्मेदार अफसर भी मलाई काट कर फाइलों पर कुंडली मार कर बैठ गए. हजारों- हजार कारें बांटने का दावा करने वाले कन्हैया गुलाटी यूं तो नीति और नीयत की बात करते हैं लेकिन उनकी खुद की नीयत कितनी दोयम दर्जे की है, आइए उसे विस्तार से समझाते हैं.

कैनविज समूह की धोखाधड़ी से त्रस्त होकर मुरादाबाद के संतोष कुमार शर्मा ने दिनांक 30.05.15 को बरेली जिले के जिलाधिकारी के समक्ष कैनविज समूह द्वारा 7500  रूपये का निवेश कराकर ठगने के संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई. इस संबंध में भड़ास में 06 जून 2015 को खबर प्रकाशित की गई थी. शिकायत का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के लिए अपर जिला मजिस्ट्रेट, बरेली (नगर)  ने दिनांक 22.06.15 को पुलिस अधीक्षक बरेली को जांच के लिए पत्र लिखकर 15 दिनों के भीतर आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. लेकिन जून 2015 के निर्देशों को पुलिस अधीक्षक महोदय ठंडे बस्ते में दबा गए और जांच आज तक लंबित है.

गुलाटी के खिलाफ 60 से अधिक बार जारी हो चुका है एलबीडब्लू

कैनविज की धोखाधड़ी से त्रस्त होकर मुरादाबाद के नरेश कुमार ने सीजेएम कोर्ट में कन्हैया लाल गुलाब व अन्य के विरुद्ध परिवाद दाखिल किया. गुलाटी के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीजेएम कोर्ट से 60 से अधिक बार गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद वे एक भी बार न तो कोर्ट के समक्ष पेश हुए,  न ही जमानत कराई।

मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

न्याय के दर-दर भटक रहे लोगों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। नरेश सैनी अपनी पीड़ा से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अवगत कराया है।

अमित मिश्रा
प्रबंधक/ मंत्री
जनसंवेदना मानव उत्थान सेवा समिति
am19763@gmail.com

इसी ग्रुप से संबंधित एक पुरानी पोस्ट…

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डिजिटल, अखबार और मैग्जीन बंद कराने पहुंचे लाइव इंडिया के एचआर हेड को करारा जवाब दिया मीडियाकर्मियों ने

इन दिनों लाइव इंडिया समूह की हालत बेहद खराब है. चिटफंड घोटाले समेत सैकड़ों केसों में फंसे लाइव इंडिया की मूल कंपनी समृद्धि जीवन के मालिक महेश मोतेवार और उनका पूरा परिवार सीबीआई के शिकंजे में है. महेश मोतेवार को सीबीआई ने रिमांड पर ले रखा है. हजारों करोड़ के घोटाले के मामले में फंसा यह चिटफंड समूह अपने मीडिया वेंचर को बचाने की सारी कोशिशें कर रहा है लेकिन पैसा न दिए जाने से इंप्लाई परेशान हैं. दो महीने की सेलरी बकाया है.

खबर है कि आज एचआर हेड अजय मेहता पंद्रह बीस लोगों के साथ लाइव इंडिया आफिस पहुंचा और लाइव इंडिया के डिजिटल, मैग्जीन व अखबार को बंद करने का फरमान सुना दिया. कारण बताया कंपनी के पास पैसा न होने को. उसने कर्मियों को कहा कि आज उन सभी का आखिरी वर्किंड डे है. इस पर भड़के मीडिया कर्मियों ने कहा कि पहले सबका बकाया दो, तीन महीने का नोटिस पीरियड का एडवांस पैसा दो फिर बंद करो. कर्मियों ने एकजुटता दिखाते हुए पुलिस को फोन कर बुला लिया. मीडियाकर्मियों ने बिना फुल एंड फाइनल हुए आफिस छोड़ने और डिजिटल मैग्जीन अखबार बंद किए जाने का विरोध किया. पता चला है कि करीब साल भर से कंपनी ने किसी भी इंप्लाई का पीएफ नहीं जमा किया है. एक मीडियाकर्मी ने पीएफ की डिमांड की तो यही एचआर हेड अजय मेहता ने उसे निकाल दिया. वह पीड़ित मीडियाकर्मी श्रम विभाग जा रहा है और कंपनी को कानूनी लड़ाई के लिए खींच रहा है.

बताया जा रहा है कि समृद्ध जीवन कंपनी में जिन जिन लोगों ने निवेश किया है और उनकी परिपक्वता अवधि आ गई है, उनके पैसे नहीं दिए जा रहे हैं. कंपनी पर इस किस्म का ग्यारह सौ करोड़ का बकाया हो गया है. महेश मोतेवार और पूरी फेमिली पर सैकड़ों केस हैं लेकिन कंपनी का वसूली का काम जारी है. दिल्ली के करोलबाग से लेकर नोएडा तक में कंपनी प्रतिदिन लोगों से करोड़ों रुपये निवेश करा रही है. महेश मोतेवार की पहली और दूसरी दोनों पत्नियों को सीबीआई ने तलब किया है. महेश मोतेवार के अन्य परिजनों को भी पूछताछ के लिए सीबीआई ने बुलाया है. फिलहाल सबसे चिंताजनक हालत मीडिया वेंचर की है. टीवी, डिजिटल, मैग्जीन, अखबार सभी में कार्यरत लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है. पैसे न मिलने से रोजाना की जीवनचर्या पर असर पड़ने लगा है.

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दलाल पीआर और फ्रॉड बिल्डर के फेर में फंसे लखनऊ के पत्रकार

लखनऊ की पत्रकारिता रो रही है….इस शहर में बड़े-बड़े संपादक हुए देश दुनिया में नाम कमाया….बीबीसी से लेकर रायटर्स और कई चैनलों में बड़े ओहदों पर पहुंचे पत्रकार इसी शहर की देन हैं….इतना ही नहीं वालस्ट्रीट जर्नल और गल्फ टुडे जैसे बड़े समूहों में अच्छे पदों पर पहुंचे कई नामचीन पत्रकार लखनऊ के पत्रकारिता से ही ककहरा सीखकर आगे बढ़े हैं..लेकिन अब जो यहां देखने को मिल रहा है उससे लग रहा है ज़हर खाकर जान दे दूं या पत्रकारिता को अलविदा कह दूं…..

यही दिन बाकी थे कि चिटफंडिया टाइप बिल्डर शाइन सिटी और एक लोकल पीआर कंपनी के संचालक के पैसे से मीडिया के लिए टी-20 कप क्रिकेट कप आयोजित किया जा रहा है….पीआर कंपनी का संचालक प्रेस कांफ्रेस में बता रहा है कि मैच किससे के बीच खेला जाएगा…कौन विजेता होगा किसको टी शर्ट और ट्राउजर मिलेगा…किसने नरलॉप का किचेन सेट …..छी-छी…

हजारों गरीब निवेशकों के पैसे जमा करा कर प्लॉट देने का वादा करने वाली शाइन सिटी का मालिक अपने पैसे से लखनऊ की पत्रकारिता से जुड़े लोगों को दारू पिलाकर नशे में कर रहा है ताकि उसके काले कारनामों का कोई चिट्ठा न खोल दे और उसका साथ देता रहे….  जेल की हवा खा चुका एक पीआर कंपनी का संचालक…. बताया तो यहां तक जा रहा है कि यह पीआर संचालक कुछ पत्रकारों की सीडी भी बना चुका है क्योंकि जो भी मुंह खोलता है उसको संपादक के जरिये नौकरी से निकवालने की धमकी देता है…

लखनऊ से नरेंद्र कुमार की रिपोर्ट. संपर्क: narenderzee02@gmail.com

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टीवी चैनल चलाने वाला एक और चिटफंडिया मालिक निवेशकों को लूटने के लिए तैयार…

Vishwamitra India Parivar भी निवेशकों को लूटने के लिए तैयार, सुनिए इस मुखिया की वीडियो अपील… VIP यानि vishwamitra india parivar का chief manoj chand है. ये VIP नाम से वेस्ट बंगाल से टीवी चैनल भी चलाते हैं और यह चैनल इन्होंने अपनी चिटफंड कंपनी से जमा रुपयों से खोली है. जिन लोगों ने निवेश किया पिछले 2 साल से, उनकी मेच्यूरिटी के रुपये खाकर बेठे हैं. रुपये लौटने का वादा किस तरह किया जा रहा है, यह इस वीडियो में देख सकते हैं. हालांकि उन्होंने चौथी बार ऐसा वादा किया है. लेकिन अब सबको लगने लगा है कि ये सबके रुपये डकार जाएगा.

इस वीडियो में विश्वमित्र इंडिया परिवार का चीफ मनोज चंद ऐसे बात कर रहा है जैसे वह राष्ट्र के नाम संबोधन दे रहा हो. वीडियो के लास्ट में वह वीडियो बनाने वाले को गुस्से में कह रहा है कि तुम ऐसे काहें हिलाते डुलाते रहते हो वीडियो. वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें >

https://www.youtube.com/watch?v=8g0KUFAvq_M

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‘लाइव इंडिया’ चैनल के मालिक मुंबई पुलिस से छूटे तो उड़ीसा पुलिस धर ले गई

समृद्ध जीवन नामक चिटफंडिया कंपनी का मालिक महेश मोतेवार जो लाइव इंडिया नामक न्यूज चैनल भी चलाता है, पिछले दिनों मुंबई पुलिस के हत्थे चढ़ गया था. उस पर जनता को भरमाने, धोखा देने, पैसा हड़पने, गैर कानूनी चिटफंडी योजनाएं चलाने समेत कई आरोप हैं और वह काफी समय से फरार चल रहा था. सूत्रों का कहता है कि महेश मोतेवार ने कई वरिष्ठ पत्रकार और संपादक पाल रखे हैं जो उनके लिए लाइव इंडिया चैनल की आड़ में दलाली व लायजनिंग करते हैं.

इन संपादकों और चिटफंड कंपनी के मैनेजरों ने पैसे व संपर्क के बल पर तीन तिकड़म से महेश मोतेवार को मुंबई पुलिस के चंगुल से छुड़वा तो लिया लेकिन इंतजार में बैठी उड़ीसा पुलिस महेश मोतेवार को पकड़ कर ले कर चली गई. सूत्र बताते हैं कि लाइव इंडिया चैनल व इसके अन्य मीडिया उपक्रमों में दो महीने से सेलरी नहीं आई है. महेश मोतेवार ने कह रखा था कि वह जल्द छूट जाएगा, सेटिंग हो गई, और तब सेलरी आ जाएगी. लेकिन अब जब उड़ीसा पुलिस से ले गई तो लोग चर्चा कर रहे हैं कि आखिर यह दुकान कितने दिन चल पाएगी?

पूरे मामले को समझने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर एक-एक कर क्लिक करते जाएं>

लाइव इंडिया का मालिक महेश मोतेवार चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार

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महेश मोतेवार दो दिन के रिमांड पर, 58 जगहों पर छापे, सतीश के सिंह भी नपेंगे

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Samruddha Jeevan Fraud : महेश किशन मोटेवार समेत तीन डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश

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चिटफंड के ‘चैनलों’ से सावधान! मीडियाकर्मियों की जिंदगी नरक बना देते हैं ये

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भंगू का हाल में ही किडनी बदला गया है, जेल प्रशासन रखेगा ध्यान

देश के सबसे बड़े पौंजी घोटाले में गिरफ्तार पर्ल्स समूह के सीएमडी निर्मल सिंह भंगू का अभी हाल में ही किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है. इस बात का उल्लेख उनके दो वकीलों ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान किया. भंगू के अधिवक्ता मनीष जैन और विजय अग्रवाल ने अदालत से कहा कि भंगू का हाल में किडनी प्रत्यारोपण हुआ है इसलिये जेल में उनकी नियमित जांच होनी चाहिये. साथ ही उनकी मेडिकल कंडीशन के मुताबिक इलाज व दवाइयां दिए जाने की मांग की. अदालत ने इस पर कहा कि जेल प्रशासन इसका ध्यान रखेगा. वकीलों की यह मांग भी कोर्ट ने मान ली कि उन्हें रोजाना एक घंटे अपने क्लाइंट यानि भंगू से मुलाकात की अनुमति दी जाए.

पर्ल्स समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक निर्मल सिंह भंगू और तीन अन्य को 45,000 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी मामले में एक स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्याययिक हिरासत में भेज दिया. मुख्य महानगर दंडाधिकारी सुगंधा अग्रवाल ने सीबीआई के यह कहने पर कि अब हिरासत में उनसे पूछ-ताछ की जरूरत नहीं है, आरोपियों को छह फरवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया. अदालत ने कहा, ‘आरोपियों को 14 दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत में पेश किया गया. अब 14 दिन की न्यायिक हिरासत के लिए एक याचिका दायर की गई है. आवेदन में दी गई वजहों के तहत इसकी मंजूरी दी जाती है.’

इस प्रकार ये लोग 6 फरवरी तक के लिए जेल भेज दिए गए. इन पर आपाराधिक साजिश रचने और धोखाधड़ी के आरोप हैं. सीबीआई ने इन आरोपियों को आठ जनवरी को दो साल की लंबी जांच पड़ताल के बाद गिरफ्तार किया था. जांच के आदेश उच्चतम न्यायालय ने दिये थे.

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तिहाड़ जेल के हवाले हुए चिटफंड के सरगना भंगू और उनके गिरोह के प्रमुख सदस्य

चिटफंड कंपनियों पीएसीएल और पर्ल्स ग्रुप के मालिक भंगू समेत कई घपलेबाजों को 14 दिन के लिये दिल्ली की तिहाड़ जेल में भेज दिया गया है। अदालत ने उसे और उसके साथियों को न्यायिक हिरासत में रखने का फैसला किया है। पर्ल्स समूह के सीएमडी और प्रबंधक निदेशक निर्मल सिंह भंगू और उसके तीन अन्य साथियों को 45,000 करोड़ रूपये की धोखाधड़ी मामले में अदालत ने 14 दिन के लिए जेल भेजा है। अदालत ने कहा, ‘आरोपियों को 14 दिन के न्यायिक रिमांड के बाद अदालत में पेश किया गया। अब अगले 14 दिन की न्यायिक हिरासत के लिए एक याचिका दायर की गई है। आवेदन में दी गई वजहों के तहत इसकी मंजूरी दी जाती है।’

सीबीआई ने बताया कि निर्मल सिंह भंगू के अलावा जिन आरोपियों को जेल भेजा गया है उनमें सुखदेव सिंह एमडी तथा प्रमोटर डायरेक्टर पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन, गुरमीत सिंह एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वित्त तथा सुब्रत भट्टाचार्य हैं। चारों आरोपियों को गत आठ जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। इस बीच महाराष्ट्र की पुलिस ने एक दूसरे मामले में निर्मल सिंह भंगू की हिरासत की मांग की है।

पर्ल्स गोल्डन फारेस्ट लिमटेड (पीजीएफ) के चेयरमैन एंव प्रबंध निदेशक तथा पर्ल्स आस्ट्रेलिसिया प्रा. लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन भंगू के अलावा पीएसीएल के प्रबंध निदेशक और प्रवर्तक-निदेशक सुखदेव सिंह, कार्यकारी निदेशक (वित्त) गुरमीत सिंह और पीजीएफ एवं पीएसीएल में कार्यकारी निदेशक सुब्रत भट्टाचार्य को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। दो साल से इस मामले की जांच चल रही थी जिसमें सीबीआई अधिकारियों ने पर्ल्स कंपनी के 1300 बैंक खातों का पता लगाया और 108 करोड़ रुपये हाईकोर्ट में जमा कराए थे। सीबीआई ने भंगू तथा कंपनी से संबंधित संपत्तियों के 20 हजार दस्तावेज बरामद किए थे। इनका मूल्य करीब पांच हजार करोड़ आंका गया है। दिल्ली में भंगू की 583 एकड़ भूमि भी मिली है।

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चिटफंड के ‘चैनलों’ से सावधान! मीडियाकर्मियों की जिंदगी नरक बना देते हैं ये

नई दिल्ली: एक का दो और दो का चार बनाने का दावा करती हैं चिटफंड कंपनियां. कंपनियां कुछ ही समय में लखपति बनाने का सपना दिखाती हैं और इनके लालच में आ जाते हैं गरीब और आम निवेशक. लोगों से लिए गए पैसों से चिटफंड कंपनियां संपत्तियां खरीदती हैं और जब निवेशक पैसा वापस मांगते हैं तो उन्हें दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है पर आज की कहानी ये नहीं है. आज हम बता रहे हैं किस तरह चिटफंड कंपनियां अपने कारोबार को चमकाने के लिए न्यूज चैनल और अखबार शुरू करती हैं और फिर निवेशकों का पैसा डूबने के बाद पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को बर्बाद होने के लिए छोड़ देती हैं.

अब हम आपको कुछ पत्रकारों के नाम बताते हैं. हर्षवर्धन त्रिपाठी, अगस्त्य अरुणाचल, मनोजित मलिक और सुभदीप राय ये सभी वो टीवी पत्रकार हैं जिन्हें चिट फंड कंपनी वाले टीवी चैनलों ने कहीं का नहीं छोड़ा. P7 चैनल में काम कर चुके अगस्त्य अरुणाचल आज बेरोजगार तो नहीं लेकिन इनका दर्द किसी बेरोजगार से कम भी नहीं. अगस्त्य अरुणाचल का कहना है, ”पत्नी ने नौकरी शुरू कर दी है, भाई से मदद ले लेता हूं, मां को बताया नहीं है लेकिन कुछ-कुछ करके काम चल रहा है. वहीं एक और पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी का है, ”बहुत सारे लोगों ने हमारे सामने अपनी पत्नी और बच्चों को गांव भेज दिया. सैलरी नहीं आई तो उनका वक्त कटना मुश्किल था.

अगस्त्य अरुणाचल और हर्षवर्धन त्रिपाठी को दो राहे पर लाकर खड़ा करने वाला पी7 चैनल न्यूज चैनल नवंबर 2014 में बंद हो चुका है. इसका संचालन करने वाली कंपनी पर्ल्स ग्रुप के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू को धोखाधड़ी के आरोप में सीबीआई ने हाल ही में गिरफ्तार किया है. भंगू ने लाखों निवेशकों को शिकार बनाया तो पी 7 न्यूज चैनल के जरिए सैंकड़ों पत्रकार सड़कों पर आ गए. जैसे-जैसे पर्ल्स ग्रुप पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता गया तो सबसे पहले पी 7 न्यूज चैनल को ही बंद करने की बात सामने आई.

पर्ल्स ग्रुप के P7 न्यूज के पत्रकारों की लड़ाई

अगस्त्य अरुणाचल का कहना है कि जब उन्होंने पी-7 न्यूज चैनल में नौकरी शुरू की तब इस चीज पर जरा भी गौर नहीं फरमाया कि ये चैनल चिट फंड कंपनी का है लेकिन चैनल में वरिष्ठ लोगों की कार्यशैली देखकर अहसास होने लगा कि इस चैनल का मिशन पत्रकारिता नहीं है बल्कि पत्रकारिता के जरिए कंपनी का प्रचार-प्रसार करना इसका मकसद है.

पी7 न्यूज चैनल के आउटपुट विभाग में 4 साल तक काम कर चुके हर्षवर्धन त्रिपाठी का कहना है बुरा दौर तब शुरू हुआ जब सैलरी 15 दिन लेट आने लगी और फिर बढ़ते-बढ़ते ये दौर दो-दो महीने पर पहुंच गया. हर्षवर्धन के मुताबिक चैनल बंद होने की घोषणा के बाद उन्होंने तीन महीने की सैलरी पाने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया. डायरेक्टर के सामने धरना प्रदर्शन किया तो साथ ही नोएडा के जिला कलेक्टर को भी साथ लिया. श्रम विभाग के आयुक्त के सामने अर्जी डालकर उन्होंने न्यूज चैनल के संघर्ष कर रहे कर्मचारियों की लड़ाई को आगे बढ़ाया तब जाकर उन्हें अपना हक मिला.

पीएसीएल का कहना है कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. कंपनी में जिन लोगों ने पैसा लगाया है उन्हें उनका पैसा वापस मिलेगा. कंपनी के वकील का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2015 में कमिटी बनायी थी और उसके पास कंपनी के सारे दस्तावेज़ मौजूद हैं.

रोजवैली, सारधा ग्रुप के चैनल के पत्रकारों की लड़ाई

पश्चिम बंगाल के रोज वैली कंपनी के चैनल न्यूज टाइम्स में काम करने वाले कर्मचारियों को अब भी वेतन नहीं मिल रहा. वहां बतौर एनटरटेनमेंट प्रोड्यूसर काम कर चुके सुभदीप राय ने बताया कि उन्होंने 5 साल न्यूज टाइम्स में काम किया लेकिन कंपनी ने उनका पीएफ अकाउंट में डालना साल 2014 से ही बंद कर दिया और जब पत्रकारों ने देरी से सैलरी मिलने, ईपीएफ खाते में न डाले जाने जैसी शिकायतों के खिलाफ आवाज उठाई तो वहां मौजूद बाउंसरों के जरिए उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई. रोजवैली से इस पूरे मामले पर उनका पक्ष मांगा गया लेकिन कंपनी ने कुछ भी कहने से मना कर दिया.

सुभदीप राय अब भी बेरोजगार हैं तो सारधा समूह के चैनल 10 में 5 साल तक काम कर चुके एक और पत्रकार मनोजित मलिक की कहानी भी कमोबेश यही है. अप्रैल 2013 में सारधा ग्रुप के मालिक सुदीप्तो सेन की गिरफ्तारी के बाद चैनल 10 के पत्रकारों को अचानक बर्खास्त किया जाने लगा. वेतन में कटौती शुरू हो गई और मजबूरी में जो लोग आज भी वहां हैं उनकी हालत भी बेरोजगार वालों जैसी ही है.

लब्बोलुआब ये कि पर्ल्स ग्रुप, सारधा ग्रुप, रोजवैली जैसी चिट फंड कंपनियों से जुड़े टीवी चैनलों के पत्रकार कहीं के नहीं रहे. यही नहीं चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन परिवार के चैनल लाइव इंडिया के मालिक महेश मोतेवार को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है. P7 न्यूज या लाइव इंडिया हो, चैनल 10 हो, न्यूज टाइम्स हो या फिर चिट फंड कंपनी से जुड़ा कोई और टीवी चैनल, हकीकत ये है कि इनके मालिकों का पत्रकारिता से दूर-दूर तक का कोई नाता नहीं.

कई पत्रकारों को बेरोजगार करने वाले भंगू की कहानी

P7 न्यूज कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भंगू की जिंदगी का सफर साइकिल पर दूध बेचने से शुरू हुआ था. पंजाब के जिला चमकौर साहबिब में भंगू साइकिल पर दूध इकट्ठा कर शहर में घर-घर जाकर बेचने का काम करता था. इसी दौरान वो एक चिट फंड कंपनी के लिए एजेंट का काम करने लगा. धीरे-धीरे इस काम में भंगू इतना माहिर हो गया कि उसने गुरवंत एग्रोटेक के नाम से अपनी कंपनी शुरू कर दी. ये कंपनी मैग्नेटिक पिलोज बेचने के नाम पर लोगों से पैसा जमा कराती थी. इसके बाद कंपनी का नाम बदलकर 1998 में पीएसीएल इंडिया यानि पर्ल एग्रोटेक कार्पोरेशन लिमिटेड रख दिया गया.

इस तरह दो दशक के भीतर भंगू हिंदुस्तान के सबसे बड़े लैंड बैंक का मालिक बन गया. इस ग्रुप की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके ब्रेंड एंबेसेडर अक्षय कुमार से लेकर ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज ब्रैट ली तक रह चुके हैं. पीएसीएल का मुख्य दफ्तर दिल्ली में है. देशभर में इसके एजेंटों का जाल फैला हुआ है. कंपनी के करीब 8 लाख एजेंट पूरे देश में हैं जो चेन मार्केटिंग के तहत काम करते हैं. इसके अलावा आईपीएल में पंजाब की टीम किंग्स इलेवन के साथ भी पर्ल ग्रुप जुड़ा रहा है.

कंपनी ने रियल एस्टेट, टिंबर इंडस्ट्री, हेल्थ, बीमा, होटल जैसे क्षेत्रों में हाथ आजमाने के बाद 2011 में P7 न्यूज चैनल शुरू किया. चैनल के जरिए पर्ल्स ग्रुप कंपनी का प्रचार-प्रसार करना ही उसका मकसद था. राष्ट्रीय चैनल के अलावा भंगू ने क्षेत्रीय चैनल पर्ल्स मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भी शुरू किया और खूब पूंजी निवेश कराया. लेकिन आज 5 करोड़ निवेशकों से 45 हजार करोड़ रु ऐंठने के आरोप में भंगू को जेल भेजा जा चुका है. इस बीच सीबीआई की जांच में पचा चला है कि निवेशकों के पैसों से कंपनी ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में 66 दफ्तरों को खरीदा. पंजाब के संगरुर में पर्ल्स कंपनी के कई निवेशकों को अपनी रकम डूबने का डर सता रहा है.

लाइव इंडिया के मालिक महेश मोतेवार की कहानी

लाइव इंडिया और महाराष्ट्र में मी मराठी न्यूज चैनल के मालिक महेश मोतेवार का शुरूआती सफर भी संघर्ष भरा रहा. महेश मोतेवार ने 2005 में खोली अपनी समृद्ध जीवन परिवार कंपनी को और ताकतवर बनाने के लिए चैनल खोला, अच्छे पत्रकारों को ऊंची सैलरी पर नौकरी दी. मोतेवार की कंपनी ग्रामीणों को बताती थी कि वह पुणे में बकरी और गाय पालन का कारोबार करती है. इसके बड़े-बड़े फार्म हैं, जहां पशुओं का पालन-पोषण होता है. कंपनी ने ग्रामीणों को बताया कि उनके पास जितने भी पैसे हैं, वे उनकी कंपनी में निवेश कर दें. बकरी व गाय पालन में मिलने वाले तीन गुना लाभ उन तक सीधे पहुंचेगा. इस तरह ग्रामीण उनके चंगुल में फंस गए.

महाराष्ट्र के नांदेड जिले के लोहारा तहसील के जेवली गांव में करीब डेढ़ सौ लोगों ने समृद्ध जीवन परिवार में निवेश किया है. श्याम सुंदर पाटिल नाम के किसान ने 21 लाख तो श्रीमंत घोडकें नाम के इस किसान ने 36 हजार रुपये समृद्ध जीवन परिवार में जमा किये हैं. अब मालिक महेश मोतेवार की गिरफ्तारी के बाद अब सभी को अपनी राशि वापस न मिलने का डर सता रहा है. लाइव इंडिया चैनल से इस पूरे मामले पर एबीपी न्यूज ने संपर्क साधा लेकिन उनका अब तक कोई जवाब नहीं आया है. जो भी हो इन चिट फंड कंपनियों के सबसे ब़ड़े शिकार बने निवेशक और खुद पत्रकार जिन्होंने इन कंपनियों से जुड़े टीवी चैनलों में काम किया या फिर कर रहे हैं. पी 7 न्यूज में काम कर चुके पत्रकार हर्षवर्धन और अगस्त्य अरुणाचल का कहना है कि चैनल खोलने के लिए बाकायदा केंद्र सरकार कायदा कानून बनाए और ऐसे लोगों को ही न्यूज चैनल का लाइसेंस दे जो पत्रकार रह चुके हैं या फिर पत्रकारिता करना चाहते हों.

साभार- एबीपी न्यूज

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अंतत: अरेस्ट हो गए चिटफंड कंपनियों पीएसीएल और पर्ल्स ग्रुप के दिग्गज निर्मल सिंह भंगू, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह और सुब्रत भट्टाचार्य

सीबीआई ने 45 हजार करोड़ रुपये के घोटाले में पीएसीएल व पर्ल्स ग्रुप के सीएमडी निर्मल सिंह भंगू तथा इनके तीन सहयोगी एमडी सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह, सुब्रत भट्टाचार्य को गिरफ्तार कर लिया है। इन्हें पोंजी स्कीम केस के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि ये लोग लगातार बयान बदल रहे थे और जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार भंगू के साथ पीएसीएल के प्रमोटर-डायरेक्टर तथा एमडी सुखदेव सिंह, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (फाइनेंस) गुरमीत सिंह तथा ईडी सुब्रत भट्टाचार्य से शुक्रवार को एजेंसी के मुख्यालय में विस्तृत पूछताछ की गई।

इसके बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि इन लोगों ने कृषि भूमि के विकास तथा बिक्री के नाम पर देश भर के 5.5 करोड़ निवेशकों से 45 हजार करोड़ रुपये एकत्रित किए थे। निवेशकों को भारी रिटर्न का लालच दिया गया था। जांच में पता चला है कि आरोपियों ने पीड़ितों को फर्जी भूमि आवंटन पत्र दिए थे। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक छानबीन में भारत तथा विदेश में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति के भी दस्तावेज मिले हैं। यह भी पता चला है कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जब पर्ल्स गोल्डेन फॉरेस्ट लिमिटेड (पीजीएफ) को स्कीम बंद करने तथा निवेशकों का रुपया वापस करने का आदेश दिया तो पर्ल्स एग्रोटेक कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के नाम से वैसी ही दूसरी फर्जी योजना चला दी गई।

इसका ऑफिस नई दिल्ली के बाराखंभा में खोला गया और पीएसीएल से मिले रुपये पीजीएफ के निवेशकों को लौटाने में इस्तेमाल किए गए। लोगों से पैसा ऐंठने के लिए पूरे देश में लाखों कमीशन एजेंट का जाल बिछाया गया था। इन एजेंटों को मोटा कमीशन दिया जाता था। पीएसीएल और इसके प्रमोटर रहे निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ ईडी और सीबीआई का शिकंजा लगातार कसता जा रहा था. पिछले महीने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश के कई शहरों में पीएसीएल के दफ्तरों पर छापे मारे थे.

मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत दिल्ली, मुंबई, मोहाली, चंडीगढ़ और जयपुर में छापे मारे गए थे. सन् 2015 में सीबीआई की एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने पीएसीएल के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया था. इसके बाद जांच शुरू कर दी थी. पीएसीएल ने रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट के नाम पर बिना पूंजी बाजार नियामक की मंजूरी लिए सामूहिक निवेश योजनाएं यानी पोंजी स्कीम चलाई. इसके जरिए निवेशकों से करीब 45 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए, जिसे वसूलने का आदेश दिया गया था.

सीबीआई जांच से पता चला कि इन्होंने पांच करोड़ निवेशकों को लूटा. कुल 45 हजार करोड़ रुपये निवेशकों से इकठ्ठा किए. बटोरी गई बेहिसाब दौलत को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया. इस दौलत का बड़ा हिस्सा विदेश ले गए. ऑस्ट्रेलिया में कारोबार शुरू किया. यूपी में ठगे गए 1.30 करोड़ निवेशक. महाराष्ट्र में लुटे 61 लाख निवेशक. तमिलनाडु में लुटे 51 लाख लुटे निवेशक. राजस्थान में लुटे 45 लाख निवेशक. हरियाणा में लुटे 25 लाख निवेशक.

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साईं प्रसाद के मालिक शशांक भापकर भी गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा पुलिस हिरासत में

मुबंई से सूचना है कि मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने साईं प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के तीसरे मालिक की भी गिरफ्तारी कर ली है. कंपनी के चेयरमैन बालासाहेब भापकर के बेटे शशांक भापकर को परसों गोवा के मडगांव के एक बंगले से गिरफ्तार किया गया. बताया जा रहा है कि शशांक भापकर गोवा में नए साल का जश्न मनाने के लिए पहुंचे थे. उन पर आर्थिक अपराध शाखा की पैनी नज़र थी.

जैसे ही शशांक के गोवा होने की सूचना मिली, आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने गोवा में जाल बिछाया और शशांक को मडगांव के एक बंगले से गिरफ्तार कर लिया. शशांक भापकर को आर्थिक अपराध शाखा ने कोर्ट मे पेश किया जहां कोर्ट ने 4 जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया.  इससे पहले शशांक को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किया गया था लेकिन सहार पुलिस थाने के परिसर से ही शशांक इमीग्रेशन ऑफीसर को चकमा देकर हिरासत से फ़रार हो गये थे.

मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने साईं प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बालासाहेब भापकर को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है. छत्तीसगढ़ पुलिस कंपनी की मालकिन वंदना भापकर को गिरफ्तार कर चुकी है. इस तरह पति-पत्नी और पुत्र तीनों को गिरफ्तार किया जा चुका है. आर्थिक अपराध शाखा के डीसीपी प्रवीण पटवाल ने कहा कि फिलहाल हम शशांक भापकर से पूछताछ कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि निवेशकों के पैसे कहां हैं और कौन-कौन से लोग इस धंधे में शामिल हैं. ज्ञात हो कि साईं प्रसाद की तरफ से न्यूज एक्सप्रेस नाम से न्यूज चैनल और हमवतन नाम से अखबार संचालित किया जाता था जो अब बंद हो चुका है.

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पीएसीएल वाले निर्मल सिंह भंगू के कई ठिकानों पर ईडी ने की छापेमारी

पीएसीएल और इसके प्रमोटर रहे निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ शिकंजा कसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश के कई शहरों में पीएसीएल के दफ्तरों पर छापे मारे। ईडी निवेशकों से गैरकानूनी तरीके से जुटाई गई करीब 60 हजार करोड़ रुपये की राशि के मामले में मनी लांड्रिंग के पहलू की जांच कर रहा है। यह राशि कई पोंजी स्कीमों के जरिये जुटाई गई।

ईडी के अधिकारियों ने बताया कि पर्ल और इसके निदेशकों व सहयोगियों के ठिकानों पर मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत दिल्ली, मुंबई, मोहाली, चंडीगढ़ और जयपुर में छापे मारे गए हैं। सीबीआई की एफआईआर के आधार पर इस साल की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय ने पीएसीएल के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। कंपनी के खिलाफ कई सरकारी एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं। पर्ल पर आरोप है कि इसने रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट के नाम पर बिना पूंजी बाजार नियामक की मंजूरी लिए अनधिकृत रूप से सामूहिक निवेश योजनाएं यानी पोंजी स्कीमें चलाईं। इनके जरिये निवेशकों से कई सालों में तकरीबन 60 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए।

देश की सबसे बड़ी गैरकानूनी धन उगाही स्कीम के चलते शिकंजे में फंसे पीएसीएल (पर्ल) के निदेशक निर्मल सिंह भंगू सेबी के खिलाफ सैट के शरण में पहुंच गए हैं। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने 22 अगस्त 2014 को पीएसीएल और भंगू समेत कंपनी के सभी निदेशकों को निवेशकों सेवसूले गए लगभग 50 हजार करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया था। अब यह रकम ब्याज समेत लगभग साठ हजार करोड़ रुपये पहुंच गई है।

इस बीच रामपुर से खबर है कि सिविल लाइंस क्षेत्र में डीएम आवास किनारे स्थित पर्ल बनाम पीएसीएल लिमिटेड के ऑफि‍स में मुरादाबाद के एजेंट्स ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान मौका पाकर ऑफि‍स मैनेजमेंट और कर्मचारी वहां से खिसक लिए। पड़ोसी जिले मुरादाबाद से पहुंचे एजेंटों के मुताबिक, उन्हें कई दिन से पीएसीएल के ऑफि‍स में रुपयों के जमा होने की सूचना मिल रही थी, जिसके चलते शुक्रवार को एजेंट यूनियन ने ऑफि‍स पर छापा मारा। छापे के दौरान ऑफि‍स में बदस्तूर काम जारी मिला। साथ ही बैकडेट में कलेक्शन जमा किया जा रहा था।

एजेंट की बात पर अगर यकीन किया जाए तो सेबी और हाईकोर्ट ने पर्ल बनाम पीएसीएल को ग्राहकों का रुपया आगे जमा करने पर रोक लगा रखी है। यह रोक 22 अगस्त 2014 से जारी है। इसके बावजूद कंपनी बदस्तूर हाईकोर्ट और सेबी के आदेशों का उल्लंघन करते हुए ग्राहकों से रुपया जमा कर रही है। साथ ही पुराने जमा रुपयों के प्लान की मैच्योरिटी होने के बावजूद पिछले करीब एक साल से कोई भुगतान नहीं कर रही है।

सेबी ने वर्ष 2014 में तीन महीने में ग्राहकों का भुगतान करने के आदेश दिए थे। ऐसा नहीं होने पर ग्राहकों और अभिकर्ताओं में जबरदस्त नाराजगी है। इसी के चलते आज अभिकर्ताओं की यूनियन ने कंपनी के ऑफि‍स पहुंचकर सारी ट्रांसएक्शन बंद करवा दी। इस दौरान ऑफि‍स मैनेजमेंट और कर्मचारी मौका देखकर वहां से खिसक लिए। साथ ही आक्रोशित अभिकर्ताओं ने कंपनी ऑफि‍स में ही डेरा डाल लिया। अभिकर्ताओं ने टीडीएस काटने और आयकर विभाग को सूचना न देने का इल्जाम भी लगाया। कलेक्शन एजेंट्स का मानना है कि इस तरह पूरे यूपी और इंडि‍या में कंपनी ने हजारों करोड़ जनता का रुपया ठग लिया है और फ्रॉड जारी है। इसपर यूनियन ने पुलिस और जिला प्रशासन को सूचना देकर कार्रवाई और जांच की मांग की है।

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महेश मोतेवार दो दिन के रिमांड पर, 58 जगहों पर छापे, सतीश के सिंह भी नपेंगे

विवादित निवेश योजना की समृद्ध जीवन कंपनी में चिटफंड घोटाला के संबंध में कंपनी के प्रबंध निदेशक महेश मोतेवार के पुणे के 40 कार्यालयों समेत 58 जगहों पर पुलिस व सीबीआई टीमों ने छापा मारा है. गिरफ्तार मोतेवार को उस्मानाबाद की उमरगा अदालत ने दो दिन यानि 31 दिसंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है. मोतेवार को उस्मानाबाद पुलिस ने पुणे से गिरफ्तार किया था. बताया जा रहा है महेश मोतेवार की मीडिया कंपनी में सतीश के सिंह भी डायरेक्टर हैं और वे लंबे समय से मोतेवार के इशारे पर तरह तरह के काम करते आए हैं. पुलिस और सीबीआई की टीम सतीश के सिंह से भी पूछताछ कर सकती है क्योंकि मोतेवार के ढेर सारे राज इस वरिष्ठ पत्रकार के पास सुरक्षित हैं.

उधर, चर्चा है कि मोतेवार की गिरफ्तारी के बाद इनका मीडिया का धंधा धराशायी होने वाला है. लाइव इंडिया चैनल, लाइव इंडिया अखबार, प्रजातंत्र लाइव अखबार, मी मराठी समेत कई किस्म के प्रिंट इलेक्ट्रानिक व डिजिटल मीडिया माध्यमों को मोतेवार संचालित करता है. इस सबका मकसद सिर्फ एक रहा है. वह है अपने दागी व आरोपी मालिक को बचाना व इसके ठगी के धंधे को सुरक्षित रखकर बढ़ावा देना. निवेशकों संग धोखाधड़ी का आरोपी मोतेवार पिछले तीन सालों से फरार चल रहा था.

गृह राज्यमंत्री राम शिंदे ने पहले ही कह दिया था कि मोतेवार जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होगा. महेश मोतेवार पर तीन लोगों को डेयरी प्रोजेक्ट में भागीदारी देने का लालच दिखाकर ३५ लाख रूपये की ठगी करने का आरोप है. इस मामले में पुलिस ने साल २०१३ में अदालत में आरोप पत्र दायर किया था. महेश के खिलाफ पुणे के डेक्कन पुलिस थाने में भी निवेशकों से धोखाधड़ी करने और सेबी के निर्देशों का उल्लघंन करने का मामला दर्ज है. इस बारे में भाजपा सांसद किरीट सोमय्या ने मीडिया से बात करते कहा कि मोतेवार को दो साल पहले ही गिरफ्तार करना चाहिए था. कांग्रेस-राकांपा की सरकार से भी मैंने गुहार लगाई थी, लेकिन कुछ नहीं हो सका. हमारी सरकार आने के बाद तुरंत उसकी गिरफ्तार नहीं हुई, लेकिन यह चिटफंड़ घोटाले का मामला सेबी, आरबीई तक पहुंचाया. अब महेश मोतेवार को कोई बचा नहीं सकता.

मूल खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें>

लाइव इंडिया का मालिक महेश मोतेवार चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार

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लाइव इंडिया का मालिक महेश मोतेवार चिटफंड घोटाले में गिरफ्तार

हिंदी न्यूज चैनल ‘लाइव इंडिया’, मराठी न्यूज चैनल ‘मी मराठी’, लाइव इंडिया नाम से अखबार और मी मराठी नाम से अखबार की संचालक कंपनी समृद्ध जीवन के एमडी व चेयरमैन महेश मोटेवर उर्फ महेश किसान मोतेवार को चिटफंड घोटाले के चलते गिरफ्तार कर लिए जाने की खबर है. सेबी ने समृद्ध जीवन फूड्स के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था.

कंपनी के चार डायरेक्टर्स द्वारा मनाही के बावजूट चिटफंड कंपनी के जरिए पैसा जमा करने का आरोप है. मोटवार पिछले कई हफ्तों से गायब चल रहे थे. महेश मोतेवार को पुणे में कल दोपहर गिरफ्तार किया गया. पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके उस्मानाबाद ले गई है. सेबी और अन्य कई सरकारी एजेंसियों की तरफ से मोतेवार की कंपनी समृद्ध जीवन के बैंक खाते सील करने के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं.

पूरे मामले को समझने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करें>

चिटफंड के समारोह का ‘लाइव इंडिया’ करता रहा लाइव प्रसारण, सतीश के सिंह भी मंच पर मौजूद

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लाइव इंडिया चैनल की मूल कंपनी समृद्ध जीवन व इसके डायरेक्टरों पर मुंबई स्टाक एक्सचेंज और नेशनल स्टाक एक्सचेंज ने लगाई पाबंदी

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ये लाइव इंडिया नहीं, ये है चिट फंड इंडिया

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लाइव इंडिया चैनल की मूल कंपनी समृद्ध जीवन व इसके डायरेक्टरों पर मुंबई स्टाक एक्सचेंज और नेशनल स्टाक एक्सचेंज ने लगाई पाबंदी

एक बड़ी खबर ये है कि लाइव इंडिया चैनल संचालित करने वाली चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन और इसके डायरेक्टरों पर मुंबई स्टाक एक्सचेंज व नेशनल स्टाक एक्सचेंज ने पाबंदी लगा दी है. इस पाबंदी के बाद कंपनी अगर किसी किस्म का कारोबार या निवेश कराती है तो उसे अवैध माना जाएगा. ज्ञात हो कि समृद्ध जीवन कंपनी के नाम पर इसके मालिकों ने देश भर की जनता को हसीन सपने दिखाकर अरबों खरबों रुपये लूटे हैं और इस लूट को शादी ब्याह के नाम पर पैसे की तरह बहाया है. मुंबई स्टाक एक्सचेंज और नेशनल स्टाक एक्सचेंज द्वारा पाबंदी लगाने से संबंधित दस्तावेज नीचे दिए जा रहे हैं.

यह ध्यान रखें कि ये दस्तावेज देश के सारे न्यूज चैनलों और अखबारों के पास पहुंच चुके हैं लेकिन कोई इसे नहीं दखा रहा है क्योंकि समृद्ध जीवन कंपनी ने सत्ता और मीडिया को करोड़ों अरबों रुपये फेंक कर मैनेज कर रखा है. वैसे तो चैनल वाले छोटी से छोटी खबरें को बिग ब्रेकिंग बनाकर दिखाते हैं लेकिन समृद्ध जीवन और पीएसीएल जैसी कंपनियों के बड़े बड़े घटनाक्रमों को पी जाते हैं. समृद्ध जीवन पर पाबंदी संबंधी दस्तावेजों को भड़ास तक समृद्ध जीवन से जुड़े रहे एक ऐसे शख्स ने पहुंचाया है जिसने जनता के पैसे की नंगी लूट देखकर इस फ्राड कंपनी से इस्तीफा दे दिया और अब इस कंपनी को एक्सपोज करने में जुटा हुआ है ताकि फिर करोड़ों लोगों की अरबों खरबों रुपये की खून पसीने की कमाई डूब न सके. पढ़िए मेल और फिर देखिए दस्तावेज.

Dear Sir,

Please go through with the attachment. Bombay Stock Exchange and National Stock exchange banned smaruddha jeevan and his directors.

The third attachment is of RCS Punjab in which, the samruddha jeevan dont have the license to work in punjab but still he is doing business in punjab and doing fraud of crores.

Please also publish sebi order of 2nd sept 15, in which sebi instruct samruddha jeevan to refund the deposited amount in 3 months.

Regards

xyz

मुंबई स्टाक एक्सचेंज द्वारा समृद्ध जीवन को प्रतिबंधित किए जाने संबंधी पत्र….

नेशनल स्टाक एक्सचेंज द्वारा समृद्ध जीवन को प्रतिबंधित किए जाने संबंधी पत्र….

पाबंदी के बावजूद पंजाब में धड़ल्ले से उगाही करने वाले समृद्ध जीवन समूह की काली कथा को द ट्रिब्यून अखबार ने विस्तार से प्रकाशित किया लेकिन पुलिस प्रशासन और मीडिया को मैनेज करने वाला यह समूह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा और उगाही के कार्यक्रम को जारी रखे है.. द ट्रिब्यून अखबार में प्रकाशित विस्तृत खबर पढ़ने के लिए नीचे लिए आ रहे Next पर क्लिक कर दें>>

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Samruddha Jeevan Fraud : महेश किशन मोटेवार समेत तीन डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश

लाइव इंडिया न्यूज चैनल संचालित करने वाली चिटफंड कंपनी समृद्धि जीवन के डायरेक्टरों महेश किशन मोटेवार, संतोष पायगोडे और राजेंद्र भंडारे की संपत्ति कुर्क करने के आदेश ग्वालियर की एक अदालत ने दिए हैं. इन तीनों डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश रोकने को लेकर दाखिल याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है. तीनों के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं.

शासकीय अधिवक्ता जगदीश प्रसाद शर्मा ने बताया कि समृद्धि जीवन चिटफंड कंपनी के डायरेक्टरों महेश मोटेवार, संतोष पायगोडे और राजेंद्र भंडारे के खिलाफ थाटीपुर थाने में जनता के साथ धोखाधड़ी किए जाने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 3/4 के तहत प्रकरण पंजीकृत किया गया है. लोगों को उनका धन कम समय में दुगना करने का लालच देकर पैसे वसूलने वाली इस कंपनी के तीनों डायरेक्टर एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही फरार हैं. इन पर न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए धारा 82/83 की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है.

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Samruddha Jeevan Fraud : अब तो मान लीजिए ‘समृद्ध जीवन’ फ्रॉड चिटफंड कंपनी है, पढ़ें ये 30 पेज की सरकारी जांच रिपोर्ट

कथित मुख्यधारा के मीडिया घराने चिटफंड कंपनियों के हजारों करोड़ रुपये के फ्राड पर लंबी चुप्पी साधे रहते हैं, दिखाते भी हैं तो बस दो चार सेकेंड के लिए या नीचे पट्टी पर चला कर मुंह सिल लेते हैं. वैसे तो छोटे व गैर-जरूरी मसलों पर दिन भर मुंह फाड़े चिल्लाते रहते हैं लेकिन चिटफंड कंपनियों के फर्जीवाड़े के खुलासे पर इन्हें सांप सूंघा रहता है. इसकी बड़ी वजह चिटफंड कंपनियों से मीडिया हाउसों की सेटिंग हैं. हजारों करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में घिरी चिटफंड कंपनियां मीडिया हाउसेज को मुंहमागी कीमत देकर उनका मुंह बंद रखने का काम करती हैं. इसी कारण लुटेरी चिटफंड कंपनियों के फ्राड पर न कभी कोई ‘प्राइम टाइम’ होता है, न कभी कोई ‘विशेष’ आता है और न ही ‘आज की बात’ होती है. ‘धड़ाधड़’ और ‘फटाफट’ खबरों में भी चिटफंड कंपनियों के फ्राड की खबरों पर खूब कृपा करके उन्हें बख्श दिया जाता है.

अब जबकि सहारा के श्री महोदय जेल में हैं और छूट नहीं पा रहे हैं, पीएसीएल पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगा है, निवेशकों को पचास हजार करोड़ रुपये लौटाने के आदेश को कायम रखा गया है, साईं प्रसाद की मालकिन धोखाड़ी के आरोप में जेल जा चुकी हैं, समृद्ध जीवन फूड्स को भी पैसे लौटाने के आदेश सेबी ने दिए हैं, आपको अब एक नई खबर बताते हैं. यह खबर समृद्ध जीवन से जुड़ी हुई है. लाइव इंडिया नामक चैनल संचालित करने वाली यह कंपनी देश के कई राज्यों में अवैध तरीके से हजारों करोड़ रुपये की उगाही करने में जुटी है. सारे नेता, अफसर, एजेंसियां चुप्पी साधे हैं क्योंकि सबको महीना पहुंच रहा है. इस समृद्ध जीवन कंपनी के कारनामों को लेकर एक सरकारी संस्था ने जो जांच की है, उसकी जांच रिपोर्ट भड़ास के पास है. इस जांच रिपोर्ट में इस कंपनी के देश विरोधी, जन विरोधी, अवैध और अनैतिक कारनामों का खुलासा किया गया है. इस जांच रिपोर्ट के हर पन्ने को यहां प्रकाशित किया जा रहा है. शुरुआत पहले पन्ने से करते हैं…

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Sebi orders Samruddha Jeevan Foods India to repay investors money in 3 months

NEW DELHI: Markets regulator Sebi today asked Samruddha Jeevan Foods India and its directors to refund in three months money collected from investors through unauthorised cattle and goat farm schemes. The company and its directors — Mahesh Kisan Motewar, Vaishali Mahesh Motewar, Ghanshyam Jashbhai Patel and Rajendra Pandurang Bhandar — have also been barred from the capital market for four years. The Securities and Exchange Board of India (Sebi) has begun the probe after receiving complaints about the company agents promising “more than 12 per cent fixed returns and other unusual returns on investments in cattle and goat farms”.

The company was running Collective Investment Scheme (CIS) without obtaining regulatory approvals. A Sebi probe found that the firm was collecting money from the public in order to carry out business of “purchase and rearing of goats/buffaloes’ and also of sheep farming. Under its various schemes, the company was offering to double the money in five and half years, while also promising an amount equivalent to 1.5 times of the contract value as ‘accidental death help’.

The company’s financial statements showed that ‘advance from customers’ in fiscal year 2011-12 stood at over Rs 331 crore, at over Rs 163 crore in 2010-11 and Rs 36 crore in 2009-10. It spent over Rs 56 crore towards ‘advertisement and sales promotion (including commission)’ in 2011-12, Rs 39.5 crore in 2010-11 and Rs 22 crore in 2009-10. In an order passed today, Sebi has the company and its directors to “wind up the existing CIS and refund the money collected by the said company under the schemes with returns which are due to its investors…within a period of three months.”

Thereafter, the firm has to submit a winding up and repayment report within 15 days, including the trail of funds claimed to be refunded, bank account statements indicating repayment to investors among others. In addition, they have been barred from selling any assets of the company, except for the purpose of making refunds to its investors. In case, they fail to comply with the order, Sebi said Samruddha Jeevan and its directors will continue to be barred from the securities market, even after the completion of four years of restrictions imposed on them “till all the CIS are wound up and all the money mobilised through such schemes are refunded to its investors with returns which are due to them.”

Besides, it would make a reference to State Government/ Local Police and register a civil/criminal case against Samruddha Jeevan and would make a reference to the Ministry of Corporate Affairs to initiate the process of winding up of the firm.

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चिटफंडिया ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ की मददगार बनी अखिलेश सरकार, निष्कासित मीडियाकर्मी संघर्ष की राह पर

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विवादित चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन के अखबार ‘प्रजातंत्र लाइव’ में बवाल, पुलिस पहुंची, मालिक से शिकायत

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अपने मालिक की बर्थडे पार्टी को सबसे बड़ी ख़बर बताकर पूरे दिन प्रसारित करता रहा लाइव इंडिया

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ये लाइव इंडिया नहीं ये है चिट फंड इंडिया

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पीएसीएल को निवेशकों का 49100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश बरकरार

मुंबई। भारतीय प्रतिभूति अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) ने बाजार नियामक सेबी के उस आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया जिसमें प्रॉपर्टी डेवलपर पीएसीएल को निवेशकों का 49,100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश जारी किया गया था। सेबी ने अवैध सामूहिक निवेश योजना को लेकर पीएसीएल के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद पिछले साल सेबी के आदेश के खिलाफ पीएसीएल ने ट्रिब्यूनल में अपील किया था। लेकिन ट्रिव्यूनल ने पीएसीएल की अपील खारिज करते हुए उसे सेबी के निर्देशों पर तीन महीने में अमल करने को कहा।

सेबी ने अवैध योजनाओं के जरिये निवेशकों से धन जमा करने के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए पीएसीएल लिमिटेड (पहले पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन) को तीन महीने के भीतर 49 हजार 100 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाने का आदेश दिया था। सेबी ने कंपनी से अवैध सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) को बंद करने को भी कहा है।  सेबी के आदेश के बाद पीएसीएल ने इसे प्रतिभूति अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) में चुनौती दी। वहीं, पीएसीएल के बयान में कहा गया कि दुर्भाग्य से सेबी इस बात पर ध्यान नहीं दे सका कि कंपनी ने कहा था कि उसे सीआईएस नहीं माना जाए। कंपनी ने कहा है, ‘पीएसीएल ने सेबी की बेंच के सामने कहा था कि वह सीआईएस नहीं चला रही है। कंपनी ने अपने रीयल एस्टेट कारोबार के लिए जो धन जुटाया है, उसके पास उचित मात्रा में परिसंपत्तियां हैं।’

सेबी ने कहा है कि वह उच्चतम न्यायालय के एक दिशानिर्देश के अनुसार कंपनी तथा निदेशकों के खिलाफ धोखाधड़ी तथा व्यापार में अनुचित व्यवहार करने वह सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआइएस) के बारे में सेबी के नियमों के उल्लंघन के आरोप में पीएसीएल के खिलाफ कार्रवाई की है।  भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस संबंध में 92 पृष्ठ का आदेश जारी किया था। इसके अनुसार कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि उसने 49,100 करोड़ रुपये जुटाये है और अगर पीएसीएल एक अप्रैल 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच जुटाये गये कोष का पूरा ब्योरा दे तो यह राशि और भी अधिक हो सकती है। जिन निवेशकों से यह राशि जुटायी गयी, उनकी संख्या करीब 5.85 करोड़ है। इनमें वे ग्राहक भी शामिल है। जिन्हें जमीन आवंटित करने की बात कही गयी थी और उन्हें अभी तक जमीन नहीं दी गयी। अवैध तरीके से धन जुटाने के मामलों में यह न केवल राशि के लिहाज से बल्कि निवेशकों की संख्या को लेकर भी सबसे बड़ा मामला है।

वही, पीएसीएल तथा निर्मल सिंह भांगू समेत उसके शीर्ष कार्यकारियों के खिलाफ सीबीआई भी जांच कर रही है। साथ ही यह सेबी की जांच के घेरे में पुराने मामलों में से एक है। नियामक ने 16 साल पहले फरवरी 1998 में पीएसीएल को कहा था कि वह न तो कोई योजना शुरू कर सकती है और न ही अपनी मौजूदा योजनाओं के तहत कोष जुटा सकती है। कंपनी ने अपनी दलील में कहा कि वह कोई अवैध योजना नहीं चला रही है और जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल है। सेबी ने अवैध तरीके से धन जुटाने की योजना चलाने को लेकर 1999 में पीएसीएल को नोटिस जारी किया था। बाद में मामला अदालतों में गया। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल फरवरी में आदेश जारी कर सेबी को यह पता लगाने को कहा कि क्या पीएसीएल का कारोबार सामूहिक निवेश योजना के दायरे में आता है या नहीं और कानून के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा।

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पीएसीएल पर सेबी ने अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया, देने होंगे 7269 करोड़ रुपये

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नई दिल्‍ली। बाजार नियामक सेबी ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) और इसके चार डायरेक्‍टर्स पर 7,269 करोड़ रुपए की पेनल्‍टी लगाई है। पीएसीएल को यह रकम 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। सेबी द्वारा किसी कंपनी पर लगाई गई यह सबसे बड़ी पेनल्‍टी है। सेबी के अनुसार पीएसीएल के डायरेक्‍टर्स तरलोचन सिंह, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह और सुब्रता भट्टाचार्य ने लोगों से अवैध तरीके से पैसा जुटाया है। इसके चलते कंपनी पर इतना बड़ा जुर्माना लगाया गया है। ज्ञात हो पर्ल और पीएसीएलल की तरफ से ही एक न्यूज चैनल पी7 न्यूज चलाया जाता था। साथ ही कई पत्रिकाएं भी निकाली जाती थीं। बाद में कंपनी के फ्राड का खुलासा होने और कई एजेंसियों के शिकंजे में फंसने के बाद ये मीडिया हाउस बंद हो गया। यहां के कर्मचारियों ने अपने बकाया वेतन के लिए लंबा आंदोलन चलाया जिसके बाद उन्हें उनका हक मिल सका। हालांकि अब भी ढेर सारे कर्मी अपना बकाया पाने के लिए भटक रहे हैं।

पिछले साल सेबी ने पीएसीएल को पिछले 15 साल में फर्जी स्‍कीमों के माध्‍यम से जुटाए गए 49,100 करोड़ रुपए निवेशकों को वापस करने का आदेश दिया था। हालांकि इस आदेश के खिलाफ पीएसीएल ने सिक्‍युरिटी अपीलेट ट्रिब्‍युनल (सेट) में अपील की थी। लेकिन पीएसीएल की अपील को खारिज करते हुए पिछले महीने सेट कंपनी की अपील खारिज करते हुए निवेशकों को पैसा वापस करने को कहा था। सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि पीएसीएल ने पिछले एक साल में भारी मात्रा में निवेशकों से अवैध स्‍कीमों के माध्‍यम से पैसा जमा किया है। इसके चलते कंपनी का मुनाफा सिर्फ एक साल के भीतर बढ़कर 2,423 करोड़ हो गया। सेबी ने इस मामले में कड़े शब्‍दों का प्रयोग करते हुए कहा कि जिस तरह कंपनी ने अवैध तरीके से पैसा जुटाया है। उसे देखते हुए अभी तक की सबसे बड़ी पेनल्‍टी लगाए जाने के लिए पीएलसीएल से बेहतर कोई दूसरा मामला नहीं हो सकता।

सेबी के अनुसार पीएसीएल पर उसका यह सख्‍त रवैया अवैध तरीके से पैसा जुटाने की कोशिश में जुटी फाइनेंस कंपनियों को एक कड़ा संदेश देगा। पिछले कुछ वर्षों में इस प्रकार की गतिविधियों में तेजी आई है। देश में लाखों लोगों की बड़ी रकम इन्‍हीं स्‍कीमों में निवेश के चलते डूब गई है। ऐसे गंभीर मामलों को हल्‍के में नहीं लिया जा सकता। सेबी के नियमों के तहत यह फर्जी तरीके से धन जुटाने वाली कंपनियों पर 25 करोड़ रुपए से लेकर उनके सालाना मुनाफे के तीन गुना तक पेनल्‍टी वसूलने का अधिकार है। जहां तक मौजूदा मामले का सवाल है, सेबी ने इसी नियम का पालन करते हुए कंपनी पर उसके मुनाफे की तीन गुनी पेनल्‍टी लगाई है।

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चिटफंड कंपनी ‘समृद्ध जीवन’ से सावधान, इसका भी हाल पीएसीएल और शारधा घोटाले वाला होने वाला है!

आजमगढ़ । समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के मेरठ ब्रांच के पूर्व शाखा प्रबंधक संदीप राय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के उपर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये सोसायटी देश में चल रही चिटफंड कंपनियों में अग्रणी है और इसका भी हाल पीएसीएल और शारधा चिट फंड घोटाले जैसी कंपनियों वाला होने वाला है। पीएसीएल और शारधा चिटफंड कंपनियों ने आम नागरिकों की 60 हजार करोड रुपये से भी ज्यादा की खून पसीने की कमाई को जी भर कर लूटा था। इसी कडी में अगला एपिसोड समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी का होने वाला है। राय ने कंपनी पर आरोप लगाते हुये प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सोसायटी प्रबंधन से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

1-वर्ष 2002 सें अब तक कंपनी को अपने नाम क्रमशः गुरूकृपा डेयरीज, समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लि0, प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड, समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी एवं गोल्डन पेटल नाम क्यों रखने पड़े। क्या ये किसी संदिग्धता की भावना के चलते तो नहीं किया गया।

2-जब सेबी ने दिनांक 2013 ने समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड एवं प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड पर बैन लगाया एवं किसी भी प्रकार की नयी कंपनी अथवा लुभावनी स्कीम्स के संचालन से रोक लगाई तो समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी का गठन किस आधार पर किया गया क्योंकि दोनों के संचालक मंडल एवं कार्य करने का प्रकार क्रमशः एक जैसा ही है।

3-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के बॉयलाज में यह उल्लेखित होने पर कि मांग पर भुगतान किया जायेगा, आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान के तहत अनुबंध कराया जा रहा हैं, जिसमें मात्र परिपक्वता पर भुगतान दिये जाने का उल्लेख किया गया। इस प्रकार समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा अपने बॉयलाज की मंशा के विपरीत कार्य किया जा रहा है, क्यों।

4-सेबी द्वारा 26 नवंबर 2013 को जारी अपनी जांच रिपोर्ट में समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड द्वारा करायी गयी पालिसी मुख्यतः आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान पर तत्काल से कस्टमर से धनराशि ना लिये जाने के आदेश जारी किये गये थें। जबकि समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड द्वारा आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान के अंतर्गत करवायी गयी पालिसी को देश भर में समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के नाम के तहत जारी रखा गया, जोकि सेबी के आदेशों का पूर्णतः उल्लंघन है।

5-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा बॉयलाज की मंशा के विपरीत आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान के अंतर्गत जो योजना चलाई जा रही हैं बांड के अनुसार उसमें लाइव स्टाक देने की बात लिखी जाती हैं, जबकि कस्टमर को किसी भी प्रकार का लाइव स्टाक नही दिया जाता हैं बदलें में धनराशि ही दी जाती हैं, इसका उल्लेख सेबी द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट में भी किया गया हैं। इस प्रकार बिजनेस प्लान के नाम पर सोसायटी द्वारा एक प्रकार से टर्म डिपाजिट लेकर बैंकिग का ही कार्य किया जा रहा हैं जोकि कृषि मंत्रालय एवं सहकारिता के नाम पर धोखा हैं।

6-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड एवं प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड द्वारा कस्टमर के नाम जारी चेक को भुगतान किया गया हैं एवं इस प्रकार बैंकिग रेग्यूलेशन एक्ट 1949 के पैरा-49-ए का पूर्णरूप से उल्लंघन किया गया हैं।

7-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के लखनउ एवं हल्द्वानी स्थित शाखायें जोकि प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया के नाम से खरीदी गयी थी एवं जिसमें आज दिनांक तक समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी का कार्य चल रहा हैं इस तथ्य से साबित होता हैं कि नाम बदले हैं काम नही ।

8-मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के आदेश दिनांक 13 जुलाई 2012 के संदर्भ में राय ने सोसायटी प्रबंधन से जवाब मांगा हैं कि क्यों आपकों माननीय मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने भगोडा घोषित किया था।

9-उडीसा राज्य के तलचर, जाचपुर एवं बाडगाह जिलों में दर्ज सोसायटी प्रमुख श्री महेश किसन मोतेवार के खिलाफ दर्ज 420 के मुकदमों के बारे में सोसायटी प्रबंधन का क्या जवाब है।

10-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी किस आधार पर ऐजेंटों की नियुक्ति करती हैं एवं किस आधार पर उनकों ओ0आर0सी0 ;ओवर रायडिंग कमीशनद्ध एवं एम0एफ0ए ;मंथली फिल्ड ऐलाउंस का वितरण करती हैं जबकि उसको कृषि मंत्रालय एवं सहकारिता की मूल भावना के अंतर्गत केवल सदस्यों के माध्यम से ही व्यवहार करना था।

11-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के कर्मचारी का पी0एफ जोकि उनका मूलभूत अधिकार हैं उसमें अपना अंशदान क्यों नहीं जमा करती।

12-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी अपने कर्मचारियों को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अवकाश क्यों नही प्रदान करती।

13-अभी हाल ही में पंजाब सरकार के कापरेटिव सोसायटी के रजिस्ट्रार ने आपको चिन्हित किया था कि आपके पास पंजाब राज्य में कार्य करने हेतु आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र नही था फिर भी आपने संपूर्ण राज्य में अनाधिकृत रूप अपनी अनेक शाखाओं के माध्यम से करोडों का हेरफेर किया, आखिर क्यों ।

14-उत्तराखंड राज्य में आपकी समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी की निबंधन तिथि 8 जून 2012 थी एवं उत्तराखण्ड राज्य में कार्य करने की अनुमति 28 मार्च 2013 को प्राप्त हुई, जबकि समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा निबंधन तिथि से पूर्व ही समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के नाम की जमा रसीद कस्टमर को दी गई, इस प्रकार से यह स्पष्ट हैं कि आपके द्वारा अपने निबंधन से पूर्व ही उत्तराखण्ड राज्य में कार्य करना आरंभ कर दिया गया था जोकि अवैध है।

15-निबंधक सहकारी समितियां उत्तराखण्ड के कार्यालय पत्रांक 27107/अधि0-सं-का/मल्टी स्टेट को0 आप/निरीक्षण-जांच 2014-15 दिनांक 4 जुलाई 2014 में मुख्य जांच अधिकारी श्री नीरज बेलवाल की जांच रिपोर्ट में जिसमें की आपके ध्वस्त होने एवं कानून व्यवस्था बिगडने तक की बात कही गयी हैं उसके बार में सोसायटी प्रबंधन का क्या कहना है।

16-आपके द्वारा चार बार नाम बदलने के पीछे कही किसी प्रकार की घृणित मानसिकता तो नही हैं।

17-आपने अफ्रीकी गणराज्य लिथुआनिया की नागरिकता लेने के पीछे जो आपने वहा 10 लाख डालर का निवेश किया हैं कही वो आपका पलायन तो नही दर्शाता है।

18-प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया पर रोक के बावजूद आपके द्वारा संचालित लाइव इंडिया न्यूज चैनल एवं मी मराठी नाम के चैनल को चलाने का आखिर क्या उद्वेश्य है, कहीं ऐसा तो नही कि आप अपने कारनामों से खुद को बचने बचाने के लिये ऐसा करते हों।

19-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के पास केवल सावधि जमा एवं पिग्मी डिपाजिट का ही लायसेंस हैं वो भी केवल सदस्यों के मध्य में फिर भी आप आय0 पी0 एवं एस0 आय0 पी0 प्लानों का संचालन धडल्ले से कर रहें हैं और वो भी सेबी के प्रतिबंध के बावजूद।

20-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के द्वारा सर्कुलरों अथवा विशेष लुभावनी स्कीमों का संचालन जो आपके द्वारा समय समय पर बिजनेस को बढाने के लिये किया जाता हैं  वो आप किस आधार पर करते हैं क्योंकी सहाकारिता आपकों इस बात की इजाजत नही देती हैं।

21-किस प्रकार से आप अपने ऐजेंटो के मध्य 12 साल का कैरियर एवं 12 रैंक देते हैं, इस तरह का कार्य तो केवल मल्टी लेवल मार्केंटिग एवं चिट फंडी करते हैं। आप क्लब मेंबरशिप भी प्रदान करते हैं।

22-अपने भांजे श्री प्रसाद परसवार की शाही शादी जो कि आपने पुणे के बालेवाडी स्टेडियम में की थी वो एवं उसमें तकरीबन 3 लाख लोगों की आमद हुई थी एवं इस शादी के लिये आपने पुणे शहर के तमाम मैरिज हाल, बैंक्वेट हाल एव पंडाल बुक किये थे, साथ ही चार विशेष रेलगाडिया एवं तकरीबन पूरे भारत की 80 प्रतिशत वायु सेवा को आपने बुक किया था। उस शाही शादी में आपने सेलो कंपनी से 80 हजार कुर्सियां खरीदी एवं इस पूरे तामझाम को पूरा करने के लिये आम जनता की गाढी कमाई के 90 करोड़ रुपये आपने खर्च कर दिये, आखिर किस हैसियत से।

23-आपके पास राल्य रायस एवं लुब्रगिनी जैसी गाडियों का काफिला हैं जोकि भारत जैसे देश में भी अल्प मात्रा में उपलब्ध हैं आखिर अपनी शाही जिंदगी के लिये कब तक आप जनता का खून चूसते रहेंगे।

24- 13 साल के आपकी कंपनी के इतिहास में आपने अभी तक 14 हजार करोड रूप्ये की धनराशि आपने 21 राज्यों की जनता से बटोरी हैं उसकों लोटाने के लिये आपके पास पर्याप्त बैलेंस है कि वो आपने लिथुआनिया देश में अपने बुढापें के लिये बचा कर रखा हैं।

मेरा माननीय प्रधानमंत्री जी एवं पाठकों से अनुरोघ हैं कि वो अपने विवके का प्रयोग करें साथ ही इस प्रकार की चिट फंडी कंपनी के खिलाफ एकजुट होकर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर, इस कंपनी के भागने के मार्ग को अवरूद्ध करनें में अपना योगदान दें जिससे की जनता की गाढी कमाई का बचाया जा सकें।

सधन्यवाद,

आपका

संदीप राय

आजमगढ

संपर्क: 07895998665, sandyazam7@gmail.com

प्रेस विज्ञप्ति


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‘प्रजातंत्र लाइव’ के मीडियाकर्मियों ने कैंडल मार्च निकाल कर अपने चिटफंडिये मालिक को ललकारा

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चिटफंड के समारोह का ‘लाइव इंडिया’ करता रहा लाइव प्रसारण, सतीश के सिंह भी मंच पर मौजूद

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साईं प्रसाद की मालकिन वंदना भापकर को कोर्ट ने जेल भेजा

चिटफंड कंपनी साईं प्रसाद की मालकिन वंदना भापकर को रायपुर की एक अदालत ने जेल भेज दिया है. उन्हें पहले एक दिन के रिमांड पर पुलिस को सौंपा था. रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. लाभ की आकर्षक स्कीमों का झांसा देकर कई सालों से छत्तीसगढ़ और देश के दूसरे शहरों में सक्रिय साईं प्रसाद और उससे सम्बंधित दूसरी कंपनियों पर CBI ने छापा मारी शुरू कर दी है. साथ ही देश के 30 से ज़्यादा शहरों में दस्तावेजी जांच पड़ताल शुरू हो गयी है. सूत्रों के अनुसार CBI की तीन टीमें रायपुर पहुंची जिसमे दिल्ली कोलकता और भिलाई के अधिकारी शामिल थे.

 

CBI अधिकारियों ने रिंग रोड राजेन्द्र नगर के पास मिलेनियम काम्प्लेक्स के फ्यूचर अ डे नामक फर्म पर दबिश दी. यह कंपनी साई प्रसाद की सहयोगी कंपनी बताई जा रही है. मारुती रेसीडेंसी अमलीडीह के एक मकान पर भी छापामार कार्यवाही हुई. दोनों जगहों पर कोई जिम्मेदार नहीं मिला. सूत्रों के अनुसार सीलबंद कार्यवाही की भी तैयारी है. इस तरह की जांच देश के 25 से 30 शहरों में जारी है. साथ ही कंपनी द्वारा 800 करोड़ रुपये का गड़बड़झाला किए जाने के मामले की भी जांच की जा रही है.

एक अधिकारी ने बताया कि अशोक मिलेनियम में भाड़े पर जगह लेकर कम्पनी चला रहे साईं प्रसाद के आफिस पर CBI ताला तोड़कर घुसी और पुलिस बल की मौजूदगी में दस्तावेजी जांच शुरू हुई. मगर कोई भी सामने नहीं आया है. वहीं रायपुर में कंपनी के ऊपर सीधे तौर पर कोई FIR दर्ज नहीं है मगर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की खबर है. निवेशक इस वक्त एजेंटों को ढूंढ रहे हैं. पश्चिम बंगाल के शारदा चिट फंड घोटाले से भी साईं प्रसाद कंपनी के तार जुड़े होने का सन्देह है. उडीशा और प.बंगाल में साईं प्रसाद के ऊपर 50 से ज़्यादा FIR दर्ज है.

न्यूज़ एक्सप्रेस नेशनल चैनल, रीजनल चैनल MP CG स्वराज एक्सप्रेस और हमवतन अखबार की आड़ में चिटफंड कारोबार करने वाली यह कम्पनी मीडिया के नाम पर सरकार और प्रशासन में अपनी पकड़ बनाने की जुगत के थी. मगर कंपनी के मालिकों की सारी मंशा पर पानी फिर गया. कुछ चैनलों व अखबार की गर्भावस्था में ही मौत हो गयी. पुलिस कंपनी की मालकिन को पुणे के चिंचवड से ले गयी.

जानकारों के अनुसार देश में वर्षों से चिटफंडिया कारोबार करने वाले देश के सभी राज्यों में वसूली करते रहे हैं. SEBI और RBI की कार्यवाही से बचने के लिए नामी कंपनियों ने कोआपरेटिव सोसायटी बना कर कामकाज को नंबर एक में तब्दील करना शुरू कर दिया है. एक तरह से ये कंपनिया नाम बदलकर सहयोगी कम्पनियों के ज़रिये फ़र्ज़ीवाड़ा करती हैं. साईं प्रसाद की मालकिन वंदना भापकर को छत्तीस गढ़ पुलिस ने अरेस्ट किया है. उनसे एक दिन की रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ जारी है. पुलिस की कोशिश है कि वंदना भापकर पर दबाव बनाकर बाला साहब भापकर व शशांक भापकर को सामने लाया जाए ताकि चिटफंड फ्राड का पूरा खुलासा हो सके.

पत्रकार दानिश आज़मी की रिपोर्ट.

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800 करोड़ का घोटालेबाज चिटफंडिया पुष्पेंद्र सिंह बघेल गिरफ्तार, ‘खबर भारती’ नाम से चैनल भी चलाया था

‘खबर भारती’ नाम से न्यूज चैनल चलाने वाले एक चिटफंडिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इंदौर से मिली सूचना के मुताबिक अवैध तरीके से बैंकिंग कारोबार करने वाली सांई प्रसाद इंटरप्राइजेज चिटफंड कंपनी के सीएमडी पुष्पेंद्र सिंह बघेल को भोपाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने उसे इंदौर के राजेन्द्र नगर थाना क्षेत्र के एक होटल से उस दौरान गिरफ्तार किया जब वह अपने ड्राइवर के नाम से रजिस्टर्ड एक चिटफंड कंपनी से जुड़े एजेंटों को ठगी करने के तरीके बता रहा था.

बघेल की आधा दर्जन से अधिक अलग-अलग नाम की फर्मों पर देशभर में करीब 26 सौ करोड़ रुपए का घोटाले का आरोप है. जांच एजेंसी सेबी उसके स्वामित्व की कई चिटफंडी कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड घोषित कर चुकी है. इधर, पुष्पेन्द्र की गिरफ्तारी की भनक लगते ही प्रवर्तन निदेशालय की टीम भी सक्रिय हो गई है. सूत्रों की मानें तो साईं प्रसाद चिटफंड कंपनी आरबीआई के बिना अनुमति के संचालित थी.

साईं प्रसाद चिटफंड कंपनी ने पूरे भारत में करीब 26 सौ करोड़ का गोरखधंधा फैला रखा था. इसका मास्टरमाइंड पुणे का बाला साहब भापकर है ,जो कंपनी का प्रमुख कर्ताधर्ता है. इस कंपनी के कर्ताधर्ता लोगों को दोगुना रकम का लालच देकर फरार हो जाते थे. देशभर के छह राज्यों में इनका गोरखधंधा फैला था. पुष्पेन्द्र मूलत: शहडोल का रहने वाला है. चिटफंड कंपनी की शुरुआत उसने शहडोल, रीवा समेत उत्तरप्रदेश के कुछ जिलों से शुरू की थी. उसकी कंपनियों के गोरखधंधे की जांच नहीं हो सके, इसके लिए उसने कुछ साल पहले एक नेशनल न्यूज चैनल शुरू किया था. जो फिलहाल बंद बताया जा रहा है. प्लास किसान एग्रोटेक लिमिटेड, पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल, प्लस), सांई प्रकाश ग्रुप ऑफ कंपनी, सांई प्रसाद फूड्स लिमिटेड, सांई दीप, श्रद्धा इंडिया सेल्फ हेल्प ग्रुप सरल, जेकेवी मल्टी स्टेट कंपनी, डॉल्फिन कंपनी, वास्तव एलआर, रेनबो ऑफ ग्रुप कोलकाता वायर इंडस्ट्रीज लिमिटेड आदि चिटफंड कंपनिया करोड़ों रुपए लेकर प्रदेश से भाग चुकी हैं.

बघेल को बचाने के लिए हरियाणा से आ रहे नेताओं के फोन कॉल

साईं प्रकाश ऑर्गेनिक फूड्स लिमिटेड और साईं प्रकाश प्रॉपर्टी डेवलपमेंट लिमिटेड कंपनी के संचालक पुष्पेंद्र सिंह बघेल ने एक कंपनी के छोटे मुलाजिम के रूप में जिंदगी की शुरूआत की थी। देखते ही देखते वह करोड़ों रुपए का मालिक बन बैठा। देश के बड़े राजनेताओं से संपर्क की बदौलत वह इस मुकाम पर जा पहुंचा। अब वही राजनेता उसे छुड़ाने के लिए पुलिस पर दबाव बना रहे हैं। पुलिस ने उन लोगों की भी पड़ताल शुरू कर दी है, जिनके जरिए बघेल ने इतनी संपत्ति बना ली है।

अफसरों के पास ज्यादातर फोन हरियाणा से जुड़े राजनेताओं के आ रहे हैं। पुलिस मुख्यालय से लेकर जांच से जुड़े अफसरों को भी फोन किए जा चुके हैं, ताकि बघेल पर की जा रही कार्रवाई में नरमी बरती जाए। गुरुवार को इंदौर से गिरफ्तार किए गए पुष्पेंद्र पर केवल मप्र में ही तीन हजार लोगों से सौ करोड़ रुपए डिपॉजिट कराने का आरोप है। एमपी नगर पुलिस ने पुष्पेंद्र को शुक्रवार को अदालत में पेश किया। पूछताछ व रिकवरी का हवाला देते हुए उसे रिमांड पर दिए जाने की अपील पुलिस ने अदालत से की। इसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उसे 25 जून तक रिमांड पर भेजने के आदेश कर दिए।

मल्टी सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल में मुफ्त इलाज देने का दावा कर लोगों को ठगने वाले डॉक्टर हितेश शर्मा को भी पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में पेश कर एक दिन की रिमांड पर ले लिया। पुष्पेंद्र बघेल ने कहा कि कंपनी में उसने केवल 88 करोड़ रुपए का डिपॉजिट करवाया है। उसकी संपत्ति 200 करोड़ की है। करीब आठ महीने पहले उसने अपना न्यूज चैनल भी बंद कर दिया। उसका कहना है चैनल बेचकर सबकी रकम चुका दूंगा। बघेल ने कहा कि कुछ लोग मेरे पीछे पड़े हैं, मुझे उलझाना चाहते हैं।

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अब साईं प्रसाद ग्रुप संकट में, सेबी ने पैसे लौटाने को कहा, चेक बाउंस होने से निवेशक उबले

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुंबई आफिस से जारी एक खबर के मुताबिक बाजार नियामक सेबी ने चिटफंड कंपनी साईं प्रसाद ग्रुप को निवेशकों से उगाहे गए अवैध पैसे लौटाने को कहा है. साईं प्रसाद समूह द्वारा दो कंपनियां बनाकर विभिन्न स्कीमों के तहत जनता से पैसे उगाहे जा रहे थे. साईं प्रसाद फूड्स लिमिटेड और साईं प्रसाद प्रापर्टीज लिमिटेड के नाम से बनाई गईं इन दो कंपनियों के जरिए साईं प्रसाद समूह ने जनता से अरबों रुपये लिए. जनता को विभिन्न किस्म के प्रलोभन दिए गए.

जब पूरे मामले की जानकारी सेबी को मिली तो सेबी ने तत्काल प्रभाव से इन दोनों कंपनियों के नाम से उगाही बंद करने के आदेश दिए. साथ ही इन दोनों कंपनियों को अगले तीन महीनों में जनता को पैसे लौटाने के आदेश दिए. साथ ही सेबी ने जनता को साईं प्रसाद ग्रुप की आकर्षक निवेश स्कीमों से बचने की सलाह दी. इस बाबत सेबी ने चेतावनी नोटिस जारी की है. नोटिस में साईं प्रसाद फूड्स लिमिटेड और साईं प्रसाद प्रापर्टीज लिमिटेड के निदेशकों और प्रमोटरों को निर्देश दिया गया है कि वे वर्तमान में चल रही कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम बंद करें और जनता से अब तक जितना भी पैसा लिया है, उसे लौटा दें. बताया जा रहा है कि साईं प्रसाद को सेबी के पास कुल 3000 करोड़ रुपये जमा कराने हैं. इतने पैसे जमा कराने के वास्ते साईं प्रसाद के प्रमोटरों को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं. इसी क्रम में साईं प्रसाद मीडिया का शटर गिरा दिया गया है यानि सेलरी सप्लाई रोक कर मीडिया वेंचर को अकाल मौत मरने के लिए छोड़ दिया गया है.

सूत्रों का कहना है कि साईं प्रसाद ग्रुप की गतिविधियों पर सेबी की पैनी नजर है. ये ग्रुप कभी साईं प्रसाद मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जनता से पैसे उगाहता है तो कभी नाम चेंज कर साईं प्रसाद फूड्स लिमिटेड के नाम से जनता के बीच उगाही के लिए जड़ें जमाता है. सेबी ने इस गोरखधंधे को लेकर आम जन को आगाह किया है. सेबी ने जनता को पैसे लौटाने के प्रमाण भी साईं प्रसाद ग्रुप से मांगे हैं. अगर साईं प्रसाद ग्रुप सेबी के आदेश का पालन नहीं करता है तो इनकी कंपनियों और ब्रांचों के खिलाफ धोखाधड़ी, चारसौबीसी समेत कई धाराओं में केस दर्ज करने का आदेश राज्य सरकारों को सेबी दे सकता है. यही नहीं, सेबी पैसे न लौटाने की स्थिति में साईं प्रसाद ग्रुप की कंपनियों पर ताले लगवाने और संपत्ति प्रापर्टी जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू करा सकता है.

ज्ञात हो कि सेबी की चपेट में पहले ही कई बड़ी चिटफंड कंपनियां आ चुकी हैं. सहारा, पीएसीएल, समृद्धि जीवन पर सेबी का डंडा पड़ा. बाद में मामला कोर्ट में गया और कई अन्य एजेंसीज ने इनके कारोबार की जांच पड़ताल शुरू की. इसी क्रम में साईं प्रसाद समूह का भी नाम जुड़ गया है. साईं प्रसाद के निवेशकों में भगदड़ की स्थिति है क्योंकि जगह-जगह चेक बाउंस हो रहे हैं और निवेशक बवाल कर रहे हैं.

इस बीच, रांची से खबर है कि अधिक मुनाफे का लालच देकर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाली 28 चिटफंड कंपनियों की जांच सीबीआई से कराने का आदेश झारखंड हाईकोर्ट ने दिया है. झारखंड अगेंस्ट करप्शन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीएन पटेल की खंडपीठ ने मामले को गंभीर माना. आरोपी कंपनियों की सीबीआई जांच का आदेश देते हुए राज्य सरकार, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट तथा ईडी को जांच में सीबीआई का सहयोग करने को कहा. खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह सीबीआई को जांच के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए. जिन कंपनियों के विरुद्ध जांच होगी, उनके नाम इस प्रकार हैं- साईं प्रसाद प्रॉपर्टीज लिमिटेड, सुराहा माइक्रो फाइनांस, सन प्लांट एग्रो, प्रयाग इन्फो टेक हाई राईज लिमिटेड, फेडरल एग्रो कामर्शियल लिमिटेड, गुलशन निर्माण, इंडिया लिमिटेड, तिरुलबाजी राइजिंग रीयल इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, एल केमिस्ट इंफ्रा रियल्टी लिमिटेड, घनोलटी डेवलपर्स लिमिटेड, कोलकाता वियर इंडस्ट्री लिमिटेड, संकल्प ग्रुप ऑफ कंपनीज, वियर्ड इन्फ्रा स्ट्रक्चर कारपोरेशन लिमिटेड, रूफर्स मार्केटिंग लिमिटेड, सनराईज ग्लोबल एग्रो लिमिटेड, रमल इंडस्ट्री लिमिटेड, एक्सेला इन्फ्रा स्ट्रक्चर एण्ड डेवलपमेंट लिमिटेड, एमपीए एग्रो एनीमल्स प्रोजेक्ट लिमिटेड, युगांतर रियलिटी लिमिटेड, गीतांजलि उद्योग लिमिटेड, एटीएम ग्रुप ऑफ कंपनीज, कायर विजन म्यूचुअल बेनीफिट लिमिटेड, मातृभूमि मैन्यूफैक्चरिंग एंड मार्केटिंग लिमिटेड, रोज वैली होटल्स एण्ड इंटरटेनमेंट लिमिटेड, वर्धमान एम्मार वेलफेयर सोसायटी, अपना परिवार एग्रो फार्मिंग डेवलपर्स लिमिटेड, वारिस ग्रुप एंड अर्शदीप फाइनांस लिमिटेड जादूगोड़ा में काम करने वाली कंपनी कमल सिंह एंड कंपनी।

रीवा से खबर है कि चिटफंड कंपनी साईं प्रसाद के कार्यालय में घुस कर दर्जन भर लोगों ने मैनेजर के साथ मारपीट की फिर उसे पुलिस के हवाले कर दिया. मौके पर मौजूद दर्जनों लोगों का आरोप है कि उनके द्वारा कंपनी में फिक्स डिपाजिट किया गया था जिसकी समय अवधि पूरा होने के बाद दिए गए चेक कैश नहीं हो रहे हैं. उधर मैनेजर से पूछताछ करने पर किसी प्रकार का जबाव नहीं दिया जा रहा है. रीवा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के जॉन टावर में सार्इं प्रसाद चिटफंड कंपनी का कार्यालय संचालित है, जहां आम लोगों से रूपए जमा कराए जाते है. पीडि़त कैलाश गुप्ता ने बताया उनके साथ ही मौके पर मौजूद करीब दर्जन भर लोगों ने 15 से 20 हजार रूपए जमा किए थे, जिसके एवज में सभी को कंपनी के चेक दिए गए थे. निर्धारित समय पूरा होने के बाद इन चेकों को बैंक से कैश कराना था. पीडि़तों ने बताया कि समय अवधि पूरा होने के बाद जब चेकों को बैंक में लगाया तो शुरू के दो चेक कैश हो गए लेकिन उसके बाद के चेक बाउंस होने लगे. इसकी जानकारी लेने जब कंपनी के मैनेजर संदीप राउत निवासी जबलपुर हालमुकाम जॉनटावर से संपर्क किया तो उसने पहले तो सर्वर की समस्या बताई और उसके बाद जबाव देने से इंकार कर दिया. इससे आक्रोशित लोगों ने कार्यालय के अंदर ही पहले मैनेजर की धुनाई कर दी और उसके बाद सिविल लाइन थाने में लाकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया है. पीड़ितों की माने तो ठगी के शिकाल लोगों की संख्या करीब 1500 से ज्यादा है.

रतलाम से मिली खबर के मुताबिक साईं प्रसाद कंपनी में 100 लोगों के लाखों रुपए अटक गए हैं. साईं प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज की फिक्स डिपाजिट स्कीम में शहर के 100 से ज्यादा लोगों के लाखों रुपए उलझकर गए हैं. छह साल पहले इनसे रकम दोगुनी करने का वादा कर एजेंट्स के माध्यम से रुपए जमा कराए थे. कंपनी ने उपभोक्ताओं को बाकायदा दोगुनी राशि के चेक भी जारी किए लेकिन अब सभी बाउंस हो रहे हैं. अनुमान है अकेले रतलाम कार्यालय से संबद्ध ऐसे करीब 20 लाख रुपए के चेक बाउंस हो चुके हैं. ठगाए लोग रोज कंपनी दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं. साईं प्रसाद ग्रुप आफ कंपनीज का रतलाम में न्यू रोड सत्यम कॉम्प्लेक्स में आफिस है. फिलहाल यहां रोज सुबह से शाम तक कई लोग रुपए निकालने के लिए चक्कर लगा रहे हैं. साईं प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज के खिलाफ पहले भी इंदौर, भोपाल आदि शहरों में हितग्राहियों के रुपए उलझाने और भ्रामक जानकारी देने के मामले दर्ज हो चुके हैं. कंपनी के गोवा, पुणे और इंदौर में रीजनल आफिस हैं. इसके अलावा अन्य शहरों में ब्रांच है. कंपनी के प्रमोटर बाला साहेब भापकर, उनकी पत्नी वंदना भापकर, पुत्र शशांक भापकर, संजय राव और शिशुपाल यादव हैं. कंपनी के 7 प्रमुख बैंकों में खाते हैं. रतलाम में जितने लोगों की एफडी पूरी हो चुकी है, उन्हें आरबील (रत्नाकर बैंक लि.) स्टेशन रोड ब्रांच के चेक दिए हैं. साईं प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज के एजेंट्स ने उपभोक्ताओं से नियत छह साल में राशि दोगुनी होने का दावा कर एफडी कराई थी. तय समय अवधि बाद भी हितग्राहियों को राशि का भुगतान नहीं हो रहा है. ऐसे मामलों में कंपनी के खिलाफ मप्र हित संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.  इसके तहत प्रकरण दर्ज करने के बाद प्रशासन की ओर से कोर्ट में परिवाद दायर किया जाता है.

साईं प्रसाद मीडिया के न्यूज चैनल ‘न्यूज एक्सप्रेस’ में कार्यरत रहे और कई महीनों से सेलरी संकट झेल रहे एक मीडियाकर्मी द्वारा तैयार किए शोध रिपोर्ट पर आधारित. अगर उपरोक्त रिपोर्ट के तथ्यों से किसी को कोई असहमति हो तो अपनी बात वह नीचे दिए गए कमेंट बाक्स में कह सकता है या फिर bhadas4media@gmail.com पर मेल कर सकता है.

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दो चिटफंड कंपनियों विश्वामित्र इंडिया परिवार और एसपी किसान प्रोड्यूसर्स पर छापे, 21 जेल भेजे गए

रांची से खबर है कि गरीबों की मेहनत की कमाई लूटने वाली दो नॉन बैंकिंग कंपनियों पर छापामार कार्रवाई की गई है और दोनों को सील कर दिया गया है. इसके 21 कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया है. रांची में एसपी किसान प्रोडय़ूसर्स कंपनी लिमिटेड और विश्वामित्र इंडिया परिवार के ऑफिस में छापा मारा गया. इस कार्रवाई में 32 अधिकारियों और कर्मचारियों को हिरासत में लेकर कागजात जब्त किए गए और उनसे पूछताछ की गई. इसके बाद 21 कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया. छापामारी के दौरान पैसा गिनने वाली मशीन और गनमैन की राइफल और एक फर्जी लाइसेंस भी जब्त किया गया.

रांची के पिस्का मोड़ के समीप इटकी रोड स्थित महावीर कांप्लेक्स के तीसरी मंजिल पर नन बैंकिंग कंपनी एसपी किसान प्रोडय़ूसर्स कंपनी लिमिटेड (पुणे) का दफ्तर है. इस पर गरीबों के पैसे को चार साल में दो गुना करने का झांसा देने का आरोप है. एसडीओ अमित कुमार ने पिस्का मोड़ के समीप पंडरा रोड स्थित नन बैंकिंग कंपनी विश्वामित्र इंडिया परिवार के ऑफिस में छापामारी की. इस दौरान कई तरह के कागजातों के साथ सवा लाख रुपए भी बरामद हुए हैं. मैनेजर ब्रजेंद्र चौधरी, कंप्यूटर ऑपरेटर सौरभ दास व पियून सागर कच्छप को गिरफ्तार कर पंडरा ओपी में रखा है.

विश्वामित्र इंडिया परिवार के ऑफिस में तीन घंटे तक चली छापामारी में कैश बुक समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए गए. तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया. यह कंपनी 4 नाम से चलती है. एसपी किसान प्रोडय़ूसर्स कंपनी लिमिटेड (पुणे), साईं प्रसाद फूड्स लिमिटेड (पुणे), साईं प्रसाद प्रोपर्टीज लिमिटेड (गोवा) और साईं प्रसाद फ्यूचर रेड्डी (पुणे) के नाम से कंपनी चल रही है. दो कंपनी को सेबी ने ब्लैक लिस्टेड भी किया है. छापामारी के दौरान फ्रंट ऑफिस में कार्यरत महिला कविता कुमारी, अनुज कुमार, गार्ड कमल नारायण पांडेय और एजेंट समेत 28 लोग मौजूद थे. इन्हें तत्काल हिरासत में लिया गया.  महिलाओं को सरकारी गवाह बनाया गया है.

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‘प्रजातंत्र लाइव’ के मीडियाकर्मियों ने कैंडल मार्च निकाल कर अपने चिटफंडिये मालिक को ललकारा

विवादित चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन द्वारा संचालित न्यूज चैनल लाइव इंडिया के अखबार ‘प्रजातंत्र लाइव’ के छंटनी के शिकार कर्मचारियों ने कैंडल मार्च निकाल कर अपना गुस्सा प्रकट किया और अपने चिटफंडिये मालिकों को ललकारा. हिंदी दैनिक अखबार प्रजातंत्र लाइव के प्रबंधन पर कर्मचारियों ने प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. दिल्ली पत्रकार संघ का समर्थन पाकर उत्साहित आंदोलनकारी कर्मियों ने लाइव इंडिया कार्यालय से जंतर मंतर तक कैंडल मार्च निकाला. मार्च में बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों ने भाग लिया. लाइव इंडिया प्रबंधन ने 12 मई 2015 को लगभग 50 कर्मचारियों को बिना कारण बताए संस्थान में प्रवेश पर रोक लगा दी थी. मार्च में शामिल पत्रकारों को डीजेए महसचिव आनंद राणा और प्रेस एसोसिएशन के सचिव (पीआईबी) मनोज वर्मा और डीजेए अध्यक्ष अनिल पांडे ने भी संबोधित किया.

दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस रिलीज इस प्रकार है….

लाइव इंडिया परिसर में कैंडिल मार्च के बाद प्रबंधन मुंह छिपाकर भागा

लाइव इंडिया (चैनल) ग्रुप के दैनिक समाचार पत्र ‘प्रजातंत्र लाइव’ में कार्यरत करीब 50 पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों पर प्रबंधन द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ दिल्ली पत्रकार संघ के आह्वाहन पर लाइव इंडिया ग्रुप के कार्यालय 1, मंदिर मार्ग, नई दिल्ली से जंतर मंतर तक कैंडिल मार्च निकाला गया। कैंडिल मार्च में लगभग बड़ी संख्या में पत्रकारों और गैर पत्रकारों  ने भाग लिया। लाइव इंडिया प्रबंधन ने 12 मई 2015 को लगभग 50 कर्मचारियों को बिना कारण बताए संस्थान में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। उसी दिन से ये कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश करने और बकाया वेतन देने की मांग कर रहे हैं।

मार्च में शामिल पत्रकारों को डीजेए महसचिव आनंद राणा ने संबोधित किया। उन्होंने पीडि़त कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि उनके इस संघर्ष में दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन उनके साथ है तथा इस लड़ाई पर लाइव इंडिया प्रबंधन को झुकना पड़ेगा और सभी मांगें माननी पडेंगी। उन्होंने कर्मचारियों के रोके गए वेतन तथा प्रवेश पर लगी रोक को तुरंत हटाने और वेतन देने की मांग की तथा चेतावनी दी कि पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ हमारी लड़ाई लंबी चलने वाली है।  प्रेस एसोसिएशन के सचिव (पीआईबी) मनोज वर्मा ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया और कहा कि पूरे मीडिया जगत में अब इस तरह का माहौल बन गया है कि कुछ स्वार्थी पत्रकार प्रबंधन के साथ मिलकर साथी पत्रकारों का शोषण करते हैं। वे भूल जाते हैं कि वो भी पत्रकार हैं परंतु अपने निजी हितों के लिए वो किसी भी स्तर पर गिरने के लिए उतारू रहते हैं।

डीजेए के अध्यक्ष अनिल पांडे ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि दिल्ली पत्रकार संघ न केवल पीडि़त कर्मचारियों के साथ है बल्कि ये आश्वासन भी देता है कि दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन सभी स्तरों पर कर्मचारियों के हितों के लिए जारी इस संघर्ष में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएगा। कर्मचारियों द्वारा कैंडिल मार्च आयोजित करने की सूचना पाकर कंपनी के मालिक और तथाकथित पत्रकार बसंत झा मुंह छिपाकर भाग खड़े हुए। कर्मचारियों ने परिसर पर जमकर नारे बाजी की तथा प्रबंधन मुर्दाबाद के नारे लगाए।

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चिटफंडिया ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ की मददगार बनी अखिलेश सरकार, निष्कासित मीडियाकर्मी संघर्ष की राह पर

पुणे से संचालित एवं पूरे देश में लूट का कारोबार फैला रखा ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ अब सेबी के डंडे से बचने के लिए राजनीतिक मदद तलबगार हो चुकी है। बताया जा रहा है कि राजनीति के घाट पर जुगाड़ बैठाने के लिए ही बसंत झा नामक प्राणी को संपादक की कुर्सी दी गई है। इस बीच समृद्ध जीवन फाउंडेशन से संचालित ‘मेसर्स प्रजातंत्र लाइव न्यूज पेपर, लाइव इंडिया’ (ब्रेनवर्क्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड) के खिलाफ नोएडा में डिप्टी लेबर कमिश्नर को पीड़ित-निष्कासित कर्मचारियों ने शिकायत पत्र दिया है। बताया गया है कि 30 अप्रैल 2015 से उनकी सेवाएं गैरकानूनी तरीके से समाप्त कर दी गई हैं। कंपनी ने उन्हें अप्रैल माह का अर्जित वेतन भी नहीं दिया है। 

चिटफंड कंपनी ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ के स्वामित्व में ‘लाइव इंडिया’ न्यूज चैनल, ‘लाइव इंडिया’ और ‘प्रजातंत्र लाइव’ नाम से अखबार प्रकाशित किए जाते हैं। बसंत झा इस चिटफंडिया मीडिया तंत्र के नए संपादक हैं, जिनकी हरकतों से इन दिनो मीडिया कर्मियों में भारी रोष है। कंपनी का पाप ढो रहे ये वही बसंत झा हैं, जिन्हें भास्कर रांची ने पैसे के गोलमाल में निकाल दिया था और मौर्या टीवी में तो एक लड़की का शोषण करने के कारण मारे-पीटे गए थे। इनमें इतनी हिम्मत कहां थी कि वह एक साथ 40-50 लोगों की नौकरी खा जाते। मजीठिया प्रकरण के जोर पकड़ते ही मालिकानों के साथ इनकी भी सेटिंग बैठ गई। उसने मालिकों को खुलकर आश्वस्त किया कि अखिलेश सरकार हमारे खिलाफ कुछ नहीं कर सकती है। हमने उसका मुंह बंद कर रखा है। 

लाइव इंडिया से निकाले जाने के विरोध में जब कर्मचारियों ने हंगामा किया तो लखनऊ सचिवालय के आदेश पर पुलिस की जिप्सी इस चिटफंडिये ग्रुप की सुरक्षा में लगा दी गयी। इसके पीछे हाथ अनिरुद्ध सिंह का बताया गया है, जो खुद को मुलायम सिंह का रिश्तेदार बताते हैं। उन्होंने हाल ही में इस चिटफंडिया समूह को ज्वॉइन किया है। इसके साथ ही नॉएडा के चिटफंडिया चैनल लाइव इंडिया में गार्ड  की संख्या भी बढ़ा दी गयी गई है। 

यहाँ संपादक के केबिन तक पहुंचने के लिए तीन जगह गार्ड लगाये गये हैं। साथ में मारुती पाण्डेय उर्फ़ ‘मारुती आठ सौ’ भी हैं, जो लाइव इंडिया की सेक्सी साइट का कथित संपादक हैं। उनके साथ दो और पत्रकार चौरसिया और मधुरेन्द्र भी हैं, जो इंडस्ट्री में एक पहचान तो रखते हैं पर इस फर्जी आदमी के साथ शायद सिर्फ मोटी सैलरी के लालच में जुड़े हुए हैं। उन्हें किसी बात से कोई मतलब नहीं है। प्रजातंत्र अख़बार के सारे कर्मचारियों को लगभग निकाल दिया गया। सिर्फ इस बिनाह पर कि उनको काम नहीं आता था। उनमें कई दिग्गज पत्रकार  राकेश थपलियाल, विमल झा, रास बिहारी शामिल हैं। निष्कासन के समय उनसे प्रबंधन का तो कोई मिलने को ही तैयार नहीं हुआ।

बस बहाना बना कर उन्हें मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया। और भी लोग, जिनका या तो कॉन्ट्रैक्ट नहीं ख़त्म हुआ है या जो परमानेंट कंपनी के साथ जुड़े थे, उनका  ट्रांसफर कर दिया गया। बिना अपेक्षित देय के भुगतान के कहा गया कि आप मुंबई जाकर तीन दिन में ज्वॉइन करें। जब उन लोगों ने जाने के लिए खर्चे की मांग की तो मैनेजमेंट साफ़ मुकर गई। यहाँ तक कि अभी पिछले महीने की सैलरी भी सभी लोगों की रोक दी गई है, जिसके आने की उम्मीद कम ही है। अब इस क्रम में आखिर कोई कर्मचारी परेशान होकर कोई गलत कदम उठा ले तो कौन जिम्मेदार होगा। ये चिटफंडिये ग्रुप का मालिक महेश मोतेवार या सुप्रिया कांसे, जो कहने को सीईओ हैं, जिनसे बात करने पर कहा जाता है कि जैसा बसंत चाहते हैं, वैसा ही कीजिए।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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‘लाइव इंडिया’ न्यूज चैनल के मालिकों के फ्रॉड पर सेबी ने लगाई रोक

सेबी (SEBI) यानि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने लाइव इंडिया न्यूज चैनल चलाने वाले मालिकों की एक कंपनी पेल (PAIL) यानि प्रास्परटी एग्रो इंडिया लिमिटेड के फर्जीवाड़े पर रोक लगा दी है। सेबी के आदेश के बाद अब इस कंपनी के लोग निवेशकों से पैसे नहीं उगाह सकेंगे। अपने आदेश में सेबी ने कंपनी के निदेशकों संतोष श्रवण माली, संतोष कालूराम, वानश्री तुकाराम, ह़षिकेश वसंत, दत्‍तारेय माधव यादव को कई आदेशों का पालन करने को कहा है।

सेबी ने कंपनी को दिए अपने आदेश में कहा है किसी स्‍कीम से निवेशकों से अब धन नहीं जुटाएंगे। धन जुटाने के लिए कोई नई स्‍कीम अथवा नया प्‍लान लॉन्‍च नहीं करेंगे। इसके साथ ही कोई नई कंपनी भी शुरू नहीं करेंगे। कंपनी द्वारा जुटाए गए धन से बनाई गई सभी संपत्तियों की सूची तुरंत जमा करेंगे। जुटाए गए धन से खरीदी गई संपत्तियों और अन्‍य सामान को किसी भी तरह से ठिकाने लगाने की कोशिश नहीं करेंगे। बैंक खाते में जमा धन, कंपनी की निगरानी में रखे धन अथवा लोगों से बड़े पैमाने पर जुटाए गए धन को इधर-उधर नहीं करेंगे। ऐडवर्टाइजमेंट और सेल्‍स प्रमोशन पर हुए खर्चों का पूरा ब्‍योरा पेश करेंगे। इसके अलावा मूल कंपनी Samruddha Jeevan Foods India Limited से PAIL यानि Prosperity Agro India Limited को ट्रांसफर किए गए सभी अकाउंट का पूरा ब्‍योरा पेश करेंगे। इसके अलावा PAIL से Samruddha Jeevan Multi- State and Multi Purpose Co-operative Society Limited को ट्रांसफर किए गए सभी खातों का पूरा ब्‍योरा पेश करेंगे। आदेशों में यह भी कहा गया है कि उक्‍त दिशा निर्देशों को तुरंत प्रभाव से प्रभावी माना जाएगा और अगले आदेश तक यही प्रभावी रहेंगे।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में HDIL Infra Projects को Broadcast Initiatives से Live India चैनल खरीदने के लिए ऑफर दिया था। बाद में इस चैनल को Prosperity Agro के मालिक महेश मोटवार को बेच दिया गया था। वह इस कंपनी में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्‍टर थे।  Prosperity Agro India को कंपनी अधिनियम 1956 के अनुसार 5 फरवरी 2010 को रजिस्‍ट्रार ऑफ कंपनी, पुणे में रजिस्‍टर्ड किया गया था। कंपनी इस समय पशुओं के प्रजनन और उनके चारे आदि के व्‍यवसाय से जुड़ी हुई है। गुजरात और कर्नाटक समेत कई राज्‍यों में यह कंपनी काम कर रही है। इसके अलावा कंपनी इसमें चारा, बीज, पौधे, सब्‍जी, फल आदि के कारोबार में भी उतरने की योजना बना रही है। महेश मोटवार कई सरकारी एजेंसियों की जांच के निशाने पर हैं। इन पर फर्जी तरीके से लोगों से धन उगाहने का आरोप है।

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पीएसीएल के निवेशक परेशान, भंगू ने सम्मन फेंका कूड़ेदान में, एजेंसियां लाचार

पीएसीएल के हजारों करोड़ रुपये के फ्राड के पीड़ित धीरे धीरे सामने आ रहे हैं लेकिन पूरे तंत्र को भंगू ने इस तरह साध लिया है कि कहीं पीड़ितों की आवाज तक नहीं उठ रही है. सहारा उगाही मामले में सेबी और सुप्रीम कोर्ट ने भले तल्ख रुख दिखाकर सुब्रत राय को अंदर कर दिया लेकिन भंगू मामले में सारी मशीनरी असहाय दिख रही है. भारतीय सेना के रिटायर अधिकारी केएल शर्मा ने अपनी बिटिया की शादी के मकसद से पीएसीएल में अपनी सेविंग को इनवेस्ट कर दिया था. यह बात 2007 की है. बीते साल यह निवेश मेच्योर हो गया. उन्होंने कुल पौन तीन लाख रुपये लगाए थे. कंपनी ने मेच्योरिटी पर जो देने का वादा किया था, उसे तो छोड़िए, सेना के इस रिटायर अधिकारी को अपना मूल धन वापस नहीं मिल रहा. इस अधिकारी ने धन डबल होने के लालच में पैसा लगा दिया था.

राजस्थान के रहने वाले केएल शर्मा कहते हैं कि उन्होंने अपने गांव के एक एजेंट के लोकलुभाव वादों में आकर पीएसीएल में निवेश कर दिया था पर अब मैं स्तब्ध हूं. कहीं से पैसे मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है. ज्ञात हो कि पीएसीएल पर किसी भी तरह का पैसा उगाहने पर रोक है लेकिन इसके एजेंट अब भी बैकडोर से भोले भाले लोगों से पैसे जमा करा रहे हैं. सहारा की तरह पीएसीएल में भी जिन लोगों ने पैसे लगाए हैं और वापसी की मांग कर रहे हैं, उन्हें पैसे वापस मिलने में कई साल लग जाएंगे और कई किस्म की कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा. 

बात सिर्फ पीएसीएल की ही नहीं है. ऐसी दर्जनों कंपनियों का मामला सेबी और अन्य एजेंसियों के पास पड़ा है लेकिन इनके खिलाफ सहारा जैसी सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है. इन चिटफंड कंपनियों के आका पूरे सिस्टम को साधने में सफल हो जाते हैं और इस तरह लाख कोशिश के बावजूद सेबी की लाचारी नजर आने लगती है. पीएसीएल का प्रकरण सबसे ज्यादा ज्वलंत और सामयिक है लेकिन यह पूरा मामला मीडिया से इस कदर गायब हुआ पड़ा है कि लोगों कई बार मीडिया की तरफ शक की नजर से देखते हैं. साथ ही अन्य एजेंसीज के कर्ताधर्ता भी शक के दायरे में आते हैं. आखिर क्या वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पीएसीएल के कर्ताधर्ता अब तक सींखचों के बाहर हैं. उधर, हजारों करोड़ डूबने की आशंका से निवेशक परेशान हैं और मारे-मारे घूम रहे हैं.

मिलेनियम पोस्ट नामक वेबसाइट पर पीएसीएल और इसके मालिक भंगू के बारे में छपी खबर यह बताने के लिए पर्याप्त है कि किस तरह बड़े लुटेरों पर सत्ता-सिस्टम मेहरबान हो जाता है और इनका कुछ भी नहीं बिगड़ता. झेलता सिर्फ गरीब आदमी है. सीरियस फ्राड इनवेस्टीगेशन आफिस यानि एसएफआईओ की तरफ से दर्जनों नोटिस और सम्मन पीएसीएल के मालिक भंगू को भेजे गए लेकिन भंगू ने सबको डस्टबिन में फेंक दिया. पूरी स्टोरी यूं है….

PACL founder Bhangoo not responding to SFIO summons

New Delhi : Pearl Agrotech Corporation Limited’s (PACL) founder Nirmal Bhangoo is not responding to ‘couple of summons’ sent by Serious Fraud Investigation Office (SFIO), an organisation that probes financial frauds. It was found that the company continues to be involved in collecting money ‘illegally’ despite an ongoing CBI inquiry, which is monitored by the Supreme Court.

SFIO has sent letters to Bhangoo’s office in Delhi and Chandigarh on January 28 and February 2 and asked him to respond to it at the earliest. The probe agency, which falls under the Ministry of Corporate Affairs (MCA) asked Bhangoo to explain over his ‘agents’ continued involvement in collecting money mainly from the rural areas.

“He has failed to provide any explanation to us. We have sent reminders but (got) no reply,” sources said.

It was learnt that SFIO wanted to have the exact figures of PACL’s collection and funds mobilised during the period of April 1, 2012 to February 25, 2013. Also, he was asked to provide details of funds collected during April 2013 to August 2013 and in December 2013 to February 2014.

“This is the period, which are crucial in terms of his collection as we are anticipating that the figures could be more. So, far as per our total amount mobilised by the company, by its own admission comes to a whopping Rs 49,100 crore. But we suspect that this could be more and therefore, we have asked for his explanation,” sources said.

Earlier, on November 14, 2014, the SEBI has written an ‘alert letter’ to the MCA and requested it to take action against Company’s agents involved in such activities. Probe revealed that they are mainly targeting people living in the rural areas of South India and some parts of Uttar Pradesh, Bihar and Jharkhand.

Meanwhile, CBI and Serious Fraud Investigation Office (SFIO) made contact with its Australian counterparts to get ‘every single’ piece of information about his other investments.

CBI Chief Anil Sinha had recently claimed that they have formed four separate teams to go deep in to the case. It was learnt that one of the teams, was asked to look in to foreign affairs of Bhangoo and already they are in touch with the Australian authorities in getting details of Bhangoo’s dubious investment in real estate, hotels, sports and remittance business. Also, Indian sleuths are also in touch with the Australasian Consumer Fraud Taskforce (ACFT) to strengthen their case against Bhangoo.

There are reports that Bhangoo has made some investments in Dubai too and that the probe agency will take on with its Dubai counterparts soon. “If required we will also take help from the Interpol to unearth how he came in contact with the notorious fugitive Christopher Skase, who died in 2001.

Bhangoo’s Pearls Australasia Company paid $62 million cash for the luxurious Sheraton Mirage Resort and Spa to Skase, and spent another $20 million on its renovations. There must be some middleman who broke the deal and we need those information,” sources said. (मिलेनियम पोस्ट में प्रकाशित सुजीत नाथ की रिपोर्ट.)

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सहारा वालों ने बिहार के सीएम के गांव की बूढ़ी लाचार महिला का सवा तीन लाख रुपये हड़पा

Regarding SAHARA maturity not paid to investor

Yashwant Sir,

Editor, www.Bhadas4Media.com

My mother Saroj Singh 70 years old is illeterate. Her SAHARA a/c control no- 20719201775, date 15-12-2003 maturity amount Rs 320000/-. Without her permission by keeping her in dark maturity amoung fixed in other scheme Receipt no-034005534023-43, Date 19-09-2014, Amount Rs 320000/-. This is the case of Bihar CM village Harnauth branch code (2071). branch Manager Mr Vijay Singh-09939205612, 09471004666.

Regarding this when I contact Mr Rajesh Singh Media Head TV, Noida on his Mobile no 09811170008 on 05-04-2015 at 9 am with my wife and friend he says “SAHARA main humse puch kar paisa jama karaye the, Main kuch nahi kar sakta. Main para banking main nahi hoon. paise lene ke liye sidhe tareke se baat karoo” After that his mobile switch off.

Yashwant g please help so that I may get back hard earned money without interest.

Regard,
Saroj Singh
Mother of Dinkar Prasad Singh
09891136359
dinkarprasadsingh@gmail.com

दिनकर प्रसाद सिंह द्वारा भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित.

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