सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. रागिनी नायक और एबीपी न्यूज़ की एंकर चित्रा त्रिपाठी के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है।
मामला तब शुरू हुआ जब चित्रा त्रिपाठी ने रागिनी नायक को निशाने पर लेते हुए लिखा कि “ट्रोलर्स के कमेंट पढ़ने के कारण ही आपको बजीरपुर विधानसभा से 6 हज़ार वोट मिले थे, जबकि ज़मानत जब्त हो गई थी। जनता को आपकी आरती नहीं उतारनी चाहिए थी। बहुत बुरा हुआ आपके साथ।”
इस पर रागिनी नायक ने पलटवार करते हुए तीन बड़े बयान दिए—
“मैं कांग्रेस से प्यार करती हूँ और पार्टी ने मुझे चुनाव लड़ाया। हार के बावजूद मैं फिर लड़ूँगी क्योंकि अपने प्यार और जिम्मेदारी को निभाना मेरी आदत है।”
“मैं किसी की आरती उतारने जैसे बयान नहीं दूँगी, ये मेरे संस्कार नहीं हैं।”
“मेरे साथ अच्छा हो या बुरा, भाजपा की दलाली कभी नहीं करूँगी।”
रागिनी नायक की यह प्रतिक्रिया अब तेजी से वायरल हो रही है और कांग्रेस समर्थक इसे उनका “स्पष्ट राजनीतिक रुख” बता रहे हैं। वहीं, पत्रकारों और विपक्षी खेमे में इस बहस को लेकर तीखी चर्चाएं जारी हैं।
गुरप्रीत गैरी वालिया-
ये है रागिनी नायक और चित्रा त्रिपाठी। इन दोनों के बीच X पर भयंकर वॉर चल रही है।
रागिनी : चित्रा जी अपने Tweet के Comments पढ़िए, आपको पता चल जाएगा कि ‘बुरे दिन’ किस के आए हैं
चित्रा: ट्रोलर्स के कमेंट पढ़ने के कारण ही आपको वजीरपुर विधानसभा से 6 हज़ार वोट मिले थे, ज़मानत ज़ब्त हो गई थी.
चित्रा दीदी कांग्रेस ने रागिनी को टिकट तो दिया आप तो ईमानदारी से मेहनत करती है फिर आपको टिकट या राज्य सभा क्यों नहीं मिलती? क्या कमी है आपकी मेहनत में?
पवन सिंह-

एक पार्टी प्रवक्ता और एक खबरांग्नाबाई के बीच लफड़ा अब सोशल मीडिया पर आ गयेला है भिड़ू…!! इकडे़ सोशल मीडिया ने मेंन स्ट्रीम मीडिया की वाट लगाय ली है..!! भिड़ू अब लड़ाई Oyo के लेबिल को छू रयेली हय..!! अपुन का मगज सोच रयेला हय कि चारकोप नाका मदे झोंटम-पैजार कब हो रयेला हय..!! अपुन को देखना मांगता हय.. बोले तो ढिचैक जर्नलिज़्म
अपूर्व भारद्वाज-
विवाद की शुरुआत तो चित्रा ने की थी।
रागिनी नायक राजनीति का वो नाम हैं जिन्होंने छात्र राजनीति से लेकर विधायक तक का सफ़र बिना किसी “गॉडफ़ादर” के तय किया। मेहनत, संघर्ष और जनता के विश्वास से पहचान बनाई।
लेकिन चित्रा…
पिछले दरवाज़े से राजनीति में आने की चाह ने इन्हें इतना अंधा कर दिया कि चाटुकारिता का नया कीर्तिमान गढ़ दिया। पत्रकारिता को गिराने का कोई मेडल होता तो अब तक इन्हें मिल चुका होता।
टीवी स्टूडियो में बैठकर घंटों डिबेट करना आसान है।
क्योंकि वहाँ एसी चलता है, मेकअप होता है और कैमरे की रोशनी चमकती है।
लेकिन जनता के बीच जाकर पसीना बहाना, धूप में खड़े होकर वोट माँगना और असली समस्याओं से जूझना—ये काम हर किसी के बस का नहीं है।
चित्रा जी! अगर राजनीति का इतना ही शौक है तो उतरिए मैदान में…
छोड़िए ये लाखों की सेलरी और दिखाइए जनता को अपनी असली औक़ात।
और याद रखिए—
निर्दलीय लड़ीं तो जमानत ज़ब्त।



