लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया एडवाइजर मृत्युंजय कुमार को लेकर इन दिनों सियासी और मीडिया हलकों में जबरदस्त चर्चाएं हैं। अफ़वाहें फैल रही हैं कि या तो उनसे इस्तीफा ले लिया गया है, या उन्होंने खुद इस्तीफा दे दिया है। कुछ लोगों का कहना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई तय है और उन्हें इसकी सूचना भी दे दी गई है, हालांकि अब तक कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है। वहीं कुछ अन्य का कहना है सीएम का मीडिया एडवाइजर वाला सभी पद खत्म कर दिया गया है। कुल मिलाकर जितने मुँह उतनी बातें हैं।
मृत्युंजय कुमार का नाम मीडिया की दुनिया में एक सम्मानित और जमीनी पत्रकार के तौर पर जाना जाता है। वे अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबार में संपादक रह चुके हैं और कई अन्य अखबारों में भी उच्च पदों पर कार्य कर चुके हैं। मीडिया एडवाइजर के रूप में उनकी छवि एक ऐसे व्यक्ति की रही है जो आम पत्रकारों से संवाद और संपर्क में रहते हैं।
इन चर्चाओं के बीच जब मृत्युंजय कुमार के कुछ करीबियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा:
“वे रोज़ की तरह ऑफिस जाते हैं और वहीं अपने ऑफिस में बैठते हैं। उन्हें भी ख़ुद के इस्तीफे की बातें लोगों से ही सुनने को मिल रही हैं। फिलहाल उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना या आदेश नहीं मिला है और वे अपना काम अनवरत जारी रखे हुए हैं!”
उनके समर्थकों का दावा है कि यह पूरा विवाद एक राजनीतिक साज़िश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य योगी सरकार और उससे जुड़े लोगों की छवि को नुकसान पहुँचाना है। उनके अनुसार यह आरोप “झूठे, निराधार और पूर्व नियोजित” हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में मृत्युंजय कुमार के पद को लेकर कोई फैसला हुआ है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि वे इस समय चर्चाओं के केंद्र में हैं और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
ठीक इसी तरह की चर्चाएं एक अन्य सूचना सलाहकार रहीस सिंह को लेकर भी सामने आ रही हैं। सूत्रों का कहना है कि रहीस सिंह के इस्तीफे की अटकलें तेज़ हो गई हैं। हालाँकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं की गई है, लेकिन सत्ता और मीडिया के गलियारों में हलचल ज़रूर देखने को मिल रही है। अंदरूनी सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि आगामी दिनों में इस मुद्दे पर कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है।


