- कायाकल्प व ईको फ्रेंडली अवार्ड धनराशि खर्च करने में हुई अनियमितता का पर्दाफाश
- सीएमएस ने ईको फ्रेंडली अवार्ड में मिली धनराशि से 7.91 लाख का किया दुरुपयोग
- तत्कालीन सीएमएस, वर्तमान सीएमएस, वरिष्ठ सहायक व लेखाकार दोषी
- अपर निदेशक ने जांच पूरी कर कमिश्नर को सौंपी रिपोर्ट

सुमित सक्सेना-
पीलीभीत | स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध अस्पताल, पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) में फैली अव्यवस्थाओं व भ्रष्टाचार को लेकर आवाज मुखर करने वाले 2 टूक संवाददाता सुमित सक्सेना पर सीएमएस डॉ.राजेश कुमार ने सरकारी कार्य में बाधा डालने का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। अब वही डॉ. राजेश कुमार वित्तीय अनियमितता व सरकारी धन के गबन में दोषी पाए गए हैं। मरीजों के हक का सरकारी धन अस्पताल के जिम्मेदार डकार गए, जब शिकायत हुई तो जांच में पर्दाफाश हो गया है। जिला महिला अस्पताल, पीलीभीत के कार्यवाहक सीएसएस डॉ. राजेश कुमार द्वारा करीब 7.91 लाख रुपये नियमों के विपरीत खर्च करने की रिपोर्ट कमिश्नर, बरेली को सौंपी गई है। यह धनराशि ईको फ्रेंडली अवार्ड के रूप में अस्पताल को मिली थी।
दरअसल वित्तीय वर्ष 2021-22 में जिला महिला अस्पताल को कायाकल्प अवार्ड योजना के अंतर्गत दो पुरस्कार राशि मिली थीं। 8 लाख रुपये कायाकल्प पुरस्कार व 10 लाख रुपये ईको फ्रेंडली अवार्ड के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ओर से दिए गए। इस बजट को खर्च करने के लिए गाइडलाइन भी भेजी गई। बीते 15 अगस्त 2024 को महिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने शहर के एक होटल में ईको फ्रेंडली अवार्ड समारोह 2021-22 का आयोजन किया। आयोजन पर सवाल खड़े हुए, क्योंकि यह आयोजन 4 नवंबर 2022 को तत्कालीन सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया करा चुकी थीं।


मामले में पत्रकार सुमित सक्सेना ने शिकायत की तो प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच के आदेश हुए। पीलीभीत के डीएम संजय कुमार सिंह ने जांच कराई, जिसमें कार्यवाहक सीएमएस द्वारा आयोजित कार्यक्रम गाइडलाइन के विपरीत पाया गया। तत्कालीन एडीएम (न्यायिक) अजीत परेश ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्राथमिक रूप से स्पष्ट होता है कि कार्यक्रम राज्य स्तर से सलाह लेकर किया जाना चाहिए था, परंतु कार्यवाहक सीएमएस डॉ. राजेश कुमार के द्वारा राज्य स्तर से सलाह नहीं ली गई। प्रकरण में प्राप्त धनराशि से जिला अस्पताल में आने वाले रोगियों के हितार्थ कार्य कराया जाना चाहिए था। प्रथम दृष्टया यह कार्यक्रम नियमविरुद्ध प्रतीत होता है।
इधर, कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने अपर निदेशक (एडी) चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को समिति गठित कर पूरे मामले में गहनता से जांच के आदेश दिए। एडी हेल्थ की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति ने पांच माह तक जांच की। दोषियों को चिन्हित कर 27 पेज की रिपोर्ट कमिश्नर को सौंपी गई है।
क्या कहती है अपर निदेशक की जांच रिपोर्ट
अंकित बयानों व साक्ष्यों की समीक्षा के उपरांत जांच कमेटी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि कायाकल्प अवार्ड धनराशि 8 लाख के सापेक्ष 809541 रुपये का व्यय तत्कालीन सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया के कार्यकाल में वित्तीय वर्ष 2022-23 में किया गया। 9541 रुपये अधिक व्यय किये गये। लर्निंग रिसोर्स मेटेरियल तथा कायाकल्प एवं एनक्वास प्रमाणित चिकित्सा इकाई में एक्पोजर विजिट हेतु आवश्यक व्यय नहीं किया गया।
25 की जगह 40 फीसद खर्च कर दी धनराशि
समिति ने रिपोर्ट में कहा कि उक्त धनराशि का लगभग 40 प्रतिशत व्यय कायाकल्प एवं इको फ्रेंडली सम्मान समारोह, पुरस्कार वितरण एवं प्रोत्साहन राशि वितरण हेतु किया गया जबकि कायाकल्प की गाइडलाइन के अनुरूप यह व्यय 25 प्रतिशत (2 लाख रुपये) से अधिक नहीं होना चाहिये था।
कायाकल्प अवार्ड धनराशि 8 लाख रुपये के 75 प्रतिशत भाग को भी कायाकल्प अवार्ड की गाइडलाइन के अनुसार जिला महिला चिकित्सालय पीलीभीत के कायाकल्प से संबंधित गैप क्लोजर हेतु अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा उचित प्रकार से खर्च नहीं किया गया।
सीएसएस राजेश ने फर्जी ढंग से खर्च कर डाले 7.91 लाख रुपये
चार सदस्यीय समिति ने कहा कि ईको फ्रेंडली अवार्ड धनराशि 10 लाख रुपये के सापेक्ष 791577 रुपये का व्यय कार्यवाहक सीएमएस डॉ. राजेश कुमार के कार्यकाल में वित्तीय वर्ष 2024-25 में किया गया। मिशन निदेशक एनएचएम की ईको फ्रेंडली गाइडलाइन के विपरीत 137 अधिकारियों/कर्मचारियों को पीएफएमएस के माध्यम से 545 रुपये प्रति व्यक्ति कुल 74665 रुपये का भुगतान किया गया। इनमें से भी 31 ऐसे व्यक्तियों को पीएफएमएस द्वारा 16895 रुपये का भुगतान किया गया जिनका रिकार्ड प्रस्तुत किये गये चिकित्सालय अभिलेखों में नहीं है।
गाइडलाइन के विपरीत कार्यक्रम और सामान
कमिश्नर को भेजी रिपोर्ट में बताया गया कि 15 अगस्त 2024 को आयोजित सम्मान समारोह गाइडलाइन के विपरीत किया गया। इस धनराशि से खरीदा गया सामान भी उक्त गाइडलाइन के अनुरूप नहीं था। इस धनराशि का व्यय डॉ. राजेश कुमार द्वारा अपने विवेकानुसार किया गया। इस व्यय हेतु ईको फ्रेंडली चिकित्सा इकाई के नवीन आयामों से संबंधित मिशन निदेशक एनएचएम की गाइडलाइन का अनुपालन डॉ. राजेश कुमार द्वारा नहीं किया गया। ईको फ्रेंडली अवार्ड धनराशि के व्यय से पूर्व कायाकल्प अवार्ड धनराशि 8 लाख रुपये के व्यय की पत्रावली का अवलोकन भी डॉ. राजेश कुमार के द्वारा नहीं किया गया।
ये अधिकारी व कर्मचारी पाए गए दोषी
समिति ने रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा कि दोनों पुरस्कार धनराशियों के व्यय हेतु मिशन निदेशक एनएचएम की गाइडलाइन का शत-प्रतिशत अनुपालन न करने एवं वित्त के दुरूपयोग में, जिला महिला चिकित्सालय पीलीभीत में कार्यरत तत्कालीन सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया, वर्तमान कार्यवाहक सीएमएस डॉ.राजेश कुमार, वरिष्ठ सहायक लक्षमण सिंह बिष्ट एवं एनएचएम लेखाकार हैदर अली वित्तीय अनियमितता एवं पदीय दायित्वों के प्रति लापरवाही के दोषी प्रतीत होते है।
क्यों कराई पत्रकार पर एफआईआर, पीसीआई से मानवाधिकार तक फिर पड़ी फटकार
बीते 5 मई 2024 को रात करीब 10 बजे मेडिकल कॉलेज पीलीभीत के महिला अस्पताल में एक सात माह की गर्भवती बेहोश हालत में इलाज कराने पहुंची, लेकिन उसे अस्पताल के अंदर नहीं लिया गया। डॉक्टर व स्टाफ ने बेहोश गर्भवती को देखे बिना ही निजी अस्पताल ले जाने को कहा। इस दौरान वह अस्पताल गेट पर बेहोश पड़ी रही। पत्रकार सुमित सक्सेना ने इस पूरे मामले को कैमरे में कैद कर लिया। इस दौरान उन्होंने खुद अंदर जाकर मरीज को भर्ती करने के बाबत डॉक्टर-स्टाफ से कहा लेकिन किसी ने नहीं सुनी। पैसे के अभाव में गर्भवती पूरी रात घर पर बेहोश पड़ी रही। अगले दिन सात माह की गर्भवती पूनम की उसके अजन्में बच्चे के साथ मौत हो गई। इस मामले को पत्रकार सुमित सक्सेना ने पुरजोर ढंग से उठाया, जिससे जिला प्रशासन समेत अस्पताल के अधिकारी तिलमिला गए।
इससे पहले भी सुमित लगातार अस्पताल की अव्यवस्थाओं को उजागर करते चले आ रहे थे। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की काफी फजीहत हुई, जिस वजह से पत्रकार सुमित सक्सेना के विरुद्ध सीएमएस डॉ. राजेश कुमार ने झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। मामले में सुमित ने प्रेस काउंसिल का दरवाजा खटखटाया, जिस पर काउंसिल ने यूपी के गृह सचिव, पीलीभीत के डीएम, एसपी, मेडिकल कॉलेज प्राचार्या, सीएमएस समेत आठ को नोटिस जारी किया। पीसीआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मुकदमा प्रेस की स्वतंत्रता पर अतिक्रमण/कुठाराघात है। गर्भवती की मौत पर मानवाधिकार आयोग ने सीएमएस डॉ. राजेश कुमार समेत चिकित्सक-स्टाफ को दोषी पाया व पीड़ित परिवार को ढाई लाख रुपये देने के आदेश प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को दिए।
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