नई दिल्ली | 23 दिसंबर 2025- कोबरापोस्ट की एक विस्तृत जांच में देश के प्रतिष्ठित कारोबारी समूह मुरुगप्पा ग्रुप और उसकी प्रमुख वित्तीय इकाई चोलामंडालम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (CIFCL) से जुड़े 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है। यह जांच वैधानिक दस्तावेजों, कॉरपोरेट फाइलिंग और वित्तीय खुलासों के गहन विश्लेषण पर आधारित है।
जांच के अनुसार, पिछले छह वर्षों में CIFCL ने 14 बैंकों में करीब 25,000 करोड़ रुपये नकद जमा किए। इनमें 8 निजी और 6 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल हैं। कोबरापोस्ट के मुताबिक ये आंकड़े सार्वजनिक रिकॉर्ड पर आधारित अनुमान हैं और नियामक जांच में इनमें और वृद्धि संभव है।
संबंधित पक्ष लेन-देन की आड़ में धन का डायवर्जन?
जांच में सामने आया है कि मुरुगप्पा ग्रुप की कई कंपनियों के बीच बड़े पैमाने पर ऐसे लेन-देन किए गए, जिन्हें वर्क कॉन्ट्रैक्ट, प्रोफेशनल फीस और कमीशन के रूप में दिखाया गया, लेकिन इन्हें आवश्यक स्तर पर Related Party Transactions (RPT) के रूप में घोषित नहीं किया गया।
कोबरापोस्ट के अनुसार:
- CIFCL से CBSL (चोला बिजनेस सर्विसेज लिमिटेड) को 2015 से अब तक 4103 करोड़ रुपये मिले
- CMGICL (चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस) ने ग्रुप की 9 कंपनियों को 3040 करोड़ रुपये का भुगतान किया
- कुल मिलाकर लगभग 10,000 करोड़ रुपये के लेन-देन की पहचान हुई, जबकि आधिकारिक तौर पर सिर्फ 2161 करोड़ रुपये ही RPT के रूप में दिखाए गए
स्पेशल पर्पस व्हीकल बनती मुरुगप्पा मैनेजमेंट सर्विसेज
जांच में यह भी सामने आया है कि मुरुगप्पा मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड का इस्तेमाल कथित तौर पर 675 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन के लिए किया गया। इस कंपनी के जरिए ग्रुप की 17 कंपनियों से रकम निकाली गई और बाद में परिवार के सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों, रेटिंग एजेंसियों, खेल निकायों और अन्य संस्थाओं को भुगतान किया गया।
परिवार और टॉप मैनेजमेंट को करोड़ों का भुगतान
रिकॉर्ड के मुताबिक:
- मुरुगप्पा परिवार के सदस्यों और करीबी अधिकारियों को 353 करोड़ रुपये से अधिक मिले
- रविचंद्रन वी को तीन वर्षों में 55 करोड़ रुपये
- एमएम वेंकटचलम को 44 करोड़ रुपये से अधिक
- ग्रुप के एचआर हेड रमेश के.बी. मेनन को 54 करोड़ रुपये सैलरी के रूप में
रेटिंग एजेंसियों और एनजीओ को भी भुगतान
कोबरापोस्ट की जांच में यह भी सामने आया कि CIFCL ने:
- क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों और ऑडिट फर्मों को 100 करोड़ रुपये से अधिक की फीस दी
- ईशा फाउंडेशन सहित 21 गैर-लाभकारी और धार्मिक संगठनों को 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया, जिन्हें वर्क कॉन्ट्रैक्ट के तौर पर दिखाया गया
नियामकीय उल्लंघन की आशंका
जांच में इन लेन-देन को कंपनी एक्ट 2013, SEBI (LODR) नियम, IRDAI दिशानिर्देश और भारतीय लेखा मानकों के संभावित उल्लंघन के तौर पर चिन्हित किया गया है। खासकर बीमा कमीशन, लोन वितरण और संबंधित पक्ष लेन-देन के डिस्क्लोजर को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
कोबरापोस्ट ने भेजी प्रश्नावली, ग्रुप ने दी प्रतिक्रिया
कोबरापोस्ट ने रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले CIFCL के एमडी और अन्य लाभार्थियों को प्रश्नावली भेजी। इसके जवाब में चोला सेक्रेटेरिएट ने कहा कि सभी लेन-देन कानून और नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं और किसी भी प्रकार की बदनामी की कोशिश पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
सबसे बड़ा सवाल
कोबरापोस्ट का कहना है कि जब CIFCL का पूरा कारोबार बैंकों, संस्थानों और आम जनता से लिए गए करीब 2 लाख करोड़ रुपये के लोन पर टिका है, तो इस पैमाने के लेन-देन और आंशिक खुलासे कॉरपोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और निवेशकों के भरोसे पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
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