मुख्तार अंसारी दहशत के मारे बैरक से बाहर नहीं निकल रहे!

Manoj Kumar Mishra : खबर आ रही है कि बाँदा जेल में बंद कभी दहशत का पर्याय रहे मुख्तार अंसारी माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी के बागपत जेल में धराशायी होने के बाद मारे दहशत के अपने बैरक से बाहर ही नही निकल रहे ..जेल में उपलब्ध कराया जा रहा खाने पीने का सामान भी उन्हें अब संदिग्ध नज़र आ रहा है जिसकी वजह से भूख प्यास भी मर गयी है। वर्ष 2003-07में मुलायम सिंह सरकार को समर्थन देने वाले मुख्तार अंसारी पर कथित रूप से 2005 में मऊ में हुए भीषण दंगो को खुली जीप में घूम घूम कर भड़काने के भी आरोप लगे थे।

Navneet Mishra : ”जो बनते थे शेर सिकंदर – घुस गए अंदर, घुस गए अंदर……. ये वही हैं जो जिनके खौफ से लोग घरों में दुबक जाते थे, ये आज खुद खौफ में दुबके हुए हैं।” मुन्ना की मौत के बाद खौफ के साये में जी रहे मुख्तार पर शलभमणि त्रिपाठी का मजेदार तंज।

सौजन्य : फेसबुक

मुन्ना के बाद अब निशाने पर मुख्तार

पूर्वांचल के सबसे बड़े डॉन को निपटाने की तैयारी से पुलिस महकमे में हडक़ंप… खुफिया विभाग को अंदेशा कि जेल में मुख्तार पर कराया जा सकता है हमला… एडीजी जेल ने जेल के अफसरों को किया सचेत और दिए निर्देश… माफिया बृजेश और मुख्तार के बीच चल रही जंग के और तेज होने की उम्मीद… गैंगवार में एसटीएफ के कुछ अफसरों के चरित्र पर उठे गंभीर सवाल

लखनऊ से 4पीएम के संपादक संजय शर्मा की रिपोर्ट

लखनऊ। यूपी के सबसे बड़े डॉन मुख्तार अंसारी को जेल में निपटाने की सूचना ने पुलिस महकमे और माफियाओं के बीच हडक़ंप मचा दिया है। हिन्दी फिल्मों की तरह जिस तरह मुख्तार के सबसे करीबी डॉन मुन्ना बजरंगी को जेल में गोलियों से भून दिया गया उसने इस पटकथा के पहले सीन का टे्रलर दिखा दिया है। मुन्ना की तरह मुख्तार भी अपनी जान का खतरा बता चुके हैं। माना जा रहा है कि मुख्तार भी अपनी धमक कायम रखने के लिए बृजेश गैंग के किसी बड़े सिपहसालार को निपटाने की रणनीति बना सकते हैं। जाहिर है कि अब पूर्वांचल में गोलियों की तड़तड़ाहट फिर सुनाई पड़ेगी। मुख्तार के लिए यह परेशानी का सबब भी है और चिंता की बात भी कि उनक सबसे बड़े दुश्मन के संबंध एसटीएफ के बड़े अफसरों से हैं, जिससे उसके हौसले बुलंद हैं। उधर सरकार के लिए यह परेशानी का सबब है कि जेल में हत्या के बाद कानून व्यवस्था पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है।

मुख्तार अंसारी

पूर्वांचल में बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के नाम से लोग कांपते थे। आमतौर पर क्षत्रिय माफिया बृजेश सिंह के साथ थे मगर मुन्ना बजरंगी और अभय सिंह ने मुख्तार अंसारी का दामन थाम लिया था। इन तीनों का गठजोड़ लंबे समय से बृजेश सिंह गैंग के ऊपर भारी पड़ रहा था। यूपी में सरकार बदलने के बाद बृजेश गुट प्रभावशाली हुआ और उसी का नतीजा था कि पहले मुन्ना बजरंगी के साले और फिर मुन्ना के करीबी तारिक की गोमती नगर में हत्या कर दी गई। तारिक की हत्या के जिम्मेदार जिन लोगों का नाम एफआईआर में दर्ज हुआ वह एसटीएफ के एक बड़े अफसर के बेहद करीबी हैं।

बृजेश गुट जानता था कि मुन्ना के रहते मुख्तार पर हाथ डालना आसान नहीं होगा। मुन्ना के बाद अब इस गुट के निशाने पर मुख्तार अंसारी हैं। माफियाओं के इस तरह सक्रिय होने की सूचना ने पुलिस महकमे में हडक़ंप मचा दिया है। मुख्तार को यह भी डर है कि जिस तरह दाऊद के सबसे करीबी नूरा को जेल से कचहरी लाते समय पुलिस ने यह कह कर मार दिया था कि यह भागने की फिराक में था। ऐसी ही कोई कहानी उसके साथ न बना दी जाए।

सरकार भी नहीं चाहती कि जेल के भीतर कोई ऐसा कांड हो जाए जिससे उसकी साख पर कोई सवाल खड़ा हो। इसलिए एडीजी जेल चन्द्र प्रकाश ने जेल के अफसरों को सुरक्षा के कड़े निर्देश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि मुख्तार के कुछ चेले भी जेल में उसके साथ हैं जो उसकी सुरक्षा का प्रबन्ध देख रहे हैं।

खुफिया विभाग ने रिपोर्ट दी है कि पूर्वांचल में एक बार फिर गैंगवार छिड़ सकती है। सभी की निगाह इस बात पर है कि इन दोनों माफियाओं में कौन भारी पड़ेगा। माफियाओं की यह जंग हजारों करोड़ के ठेकों पर खत्म होती है। ऐसे में पूर्वांचल में अस्सी व नब्बे दशक की गैंगवार की जंग का एक और नया संस्करण सबको देखने को मिले तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी।

क्या एसटीएफ के अफसरों की भूमिका की होगी जांच

मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने लगभग दस दिन पहले आरोप लगाया था कि उसके पति की हत्या एसटीएफ के एक बड़े अफसर कुछ बड़े प्रभावशाली लोगों के साथ करा सकते हैं और यह बात सच भी साबित हो गई। पुलिस महकमे के बड़े अफसर भी जानते हैं कि एसटीएफ के कुछ अफसर किस तरह इस गैंगवार में अपनी सक्रिय भूमिका अदा कर रहे हैं। ऐसे में बड़ी बात यह है कि क्या ऐसे अफसरों को चिंहित करके उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी या नहीं।

बड़े माफियाओं ने बढ़ाया अपना सुरक्षा घेरा

मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद कुछ बड़े माफियाओं ने अपना सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया है। बरेली जेल में बंद बबलू श्रीवास्तव से लेकर धनंजय सिंह, अभय सिंह, अतीक अहमद जैसे बाहुबलियों ने अपने सुरक्षा तंत्र को और मजबूत कर लिया है। उनको आशंका है कि इस गैंगवार से कभी वे भी निशाने पर आ सकते हैं लिहाजा सभी लोग अपने-अपने तंत्र को मजबूत करने में जुट गए हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को कोई खतरा न हो। अपने-अपने गुट के अपराधियों का एक दूसरे के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है, जिससे दूसरे गुट का मुकाबला किया जा सके।

लखनऊ से 4पीएम के संपादक संजय शर्मा की रिपोर्ट

सौजन्य : 4पीएम

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