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उत्तराखंड

इन नामालूम से रीजनल न्यूज़ चैनलों पर धामी सरकार ने जनता का करोड़ों रुपये लुटा दिया, देखें लिस्ट

राहुल कोटियाल-

धामी जी जब से मुख्यमंत्री बने हैं, इतना ज़बरदस्त काम कर रहे हैं लेकिन फिर भी लोग हैं कि मानने को ही तैयार नहीं. इसलिए मजबूरी में उन्हें करोड़ों रुपए फूंकने पड़ रहे हैं लोगों को अपना काम दिखाने के लिए. अब आप नीचे दी गई ये सूची ही देखिए. प्रदेश के उन सभी चैनल्स को, जिनकी लोकप्रियता ऐसी भयंकर है कि उत्तराखंड का बच्चा-जवान-बूढ़ा हर कोई इन चैनल्स को रोज़ देखता है, सुबह-शाम प्रदेश के हर घर में, हर टीवी और हर मोबाइल की स्क्रीन पर बस यही चैनल देखे जाते हैं. इसीलिए धामी जी ने अपनी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए इन चैनलों को चुना और इन्हें करोड़ों के विज्ञापन बांटे ताकि जनता का भला हो सके. अब जनता इसके बाद भी अपना भला नहीं करवा पा रही तो बेचारे धामी जी की क्या गलती. उनकी मेहनत में कोई कमी हो तो बताइए….

इंडिया वॉइस : 8.38 करोड़
स्वराज एक्सप्रेस : 8.50 करोड़
चढ़दी कला टाइम टीवी : 8.67 करोड़
न्यूज़ स्टेट उत्तराखंड/ उत्तर प्रदेश : 8.81 करोड़
टीवी 100 : 8.90 करोड़
साधना प्लस न्यूज़ : 9.70 करोड़
नेट्वर्क 10 : 12.81 करोड़
न्यूज़ 18 उत्तर प्रदेश/ उत्तराखंड : 12.94 करोड़
न्यूज़ इंडिया : 13.52 करोड़
दूरदर्शन उत्तराखंड : 31.66 करोड़.

गौर कीजिएगा, ये सिर्फ़ क्षेत्रीय टीवी चैनलों की सूची है. राष्ट्रीय चैनलों को बांटे गए विज्ञापन अलग हैं. और स्थानीय अख़बार, पत्रिकाएँ, पोर्टल वो भी अलग हैं. उनकी सूची भी जल्द आने वाली है.

(ये आँकड़े 2021-22 से लेकर 2024-25 तक के हैं. इस दौरान शुरुआती तीन महीनों तक तीरथ सिंह रावत मुख्यमंत्री रहे और उनके बाद धामी जी. ये आँकड़े न्यूज़लॉंड्री के पत्रकार बसंत कुमार ने कई महीनों की मेहनत से सूचना के अधिकार के अंतर्गत जुटाए हैं.)


वाह! धामी जी की ‘मेहनत’ को मेरा सलाम, उत्तराखंड की जनता की आंखें इतनी कमजोर हैं कि उन्हें सरकार का ‘ज़बरदस्त काम’ खुद दिखाई नहीं दे रहा था। बेचारे मुख्यमंत्री को करोड़ों की रोशनी (विज्ञापन) फेंकनी पड़ी, ताकि लोगों को दिख सके कि ‘विकास’ कितनी तेज़ी से हो रहा है। यह सूची साबित करती है कि 122 करोड़ खर्च करके, सरकार ने अंततः यह तय कर लिया है कि काम करना उतना ज़रूरी नहीं है, जितना काम ‘दिखाना’ ज़रूरी है। और दिखाने के लिए, उन चैनलों को चुना गया जिनकी ‘भयंकर लोकप्रियता’ इतनी भयंकर है कि उन्हें खुद को करोड़ों के विज्ञापन की खुराक देनी पड़ी। तो अब यह मत पूछिए कि सड़कों पर गड्ढे क्यों हैं, या स्वास्थ्य सेवाएँ कैसी हैं। बस यह देखिए कि ₹13 करोड़ पाने वाला ‘न्यूज़ इंडिया’ आपको कितनी ज़बरदस्त खबरें दिखा रहा है। जनता का भला तो विज्ञापनों से ही होना है, क्योंकि सच्चा विकास तो बस स्क्रीन पर ही आता है! -Rajesh Takkal


याद रखना ये ही चैनल ही है सबसे बड़े दुश्मन उत्तराखंड के युवाओं के लिए और उत्तराखंड की जनता को गर्त में धकेलने के लिए….. यही क्रोनोलॉजी केंद्र में भी चल रही वही देखा देखी में धाकड़ जी भी कर रहे है…तभी हो रही है तय भाजपा जय भाजपा…. -Jatin Pandey

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1 Comment

1 Comment

  1. Singh

    October 5, 2025 at 12:23 am

    सबसे खास बात तो ये है कि मैं खुद इंडिया वॉयस में काम कर चुका हूं… इतने मोटे सरकारी एड के बाद भी सैलरी डेढ़ महीने लेट है… धामी सरकार से पहले नमन है चैनल प्रबंधन को…

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