
संजय कुमार सिंह
आज अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, ‘धनखड़ का इस्तीफा मंजूर’। यही खबर दूसरे कई अखबारों में लीड या पहले पन्ने पर है और सबके शीर्षक में भी अलग ‘खबर’ है। उदाहरण के लिए नवोदय टाइम्स में भी यह लीड है और खबर है, धनखड़ का विदाई समारोह नहीं। देशबन्धु में यह लीड नहीं है। तीन कॉलम की खबर का शीर्षक है, “धनखड़ का इस्तीफा किसी और वजह से : कांग्रेस”। अंग्रेजी अखबारों में कोलकाता के द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, मोदी ने इसे कुछ ही शब्दों में कह दिया। फ्लैग शीर्षक है, मोदी ने धनखड़ को मु़ख्तसर विदाई दी। कोई विदाई समारोह नहीं, तरह-तरह की चर्चा। दि एशियन एज में लीड का शीर्षक है, सरकार ने इस्तीफे को कम महत्व देने की कोशिश की तो विपक्ष बड़े कारणों की जांच कर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, एक संक्षिप्त पोस्ट को छोड़कर सामूहिक चुप्पी तनावपूर्ण अलगाव का संकेत देती है। द हिन्दू का शीर्षक है,धनखड़ का जाना अधिसूचित, लेकिन प्रमुख सवाल कायम हैं। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है, जज के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए विपक्ष का नोटिस स्वीकार करना सरकार को बुरा लगा। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, धनखड़ के इस्तीफे के अगले दिन विवाद बढ़ना जारी।
आज की इस लीड खबर में पत्रकारिता और खासकर हिन्दी पत्रकारिता के लिए खास बात नवोदय टाइम्स का उपशीर्षक है, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने की राष्ट्रपति से मुलाकात, (अमित) शाह मिले (लोक सभा अध्यक्ष ओम) बिरला से। राष्ट्रपति को पुष्पगुच्छ (बुके) देते हरिवंश की फोटो मेरे नौ अखबारों में तीन – नवोदय टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू में पहले पन्ने पर है। अमर उजाला के अलावा अंग्रेजी में टाइम्स ऑफ इंडिया, द टेलीग्राफ, एशियन एज और हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर नहीं है। देशबन्धु में सिंगल कॉलम में आधी फोटो है। इसके अलावा, टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने के पीछे वाले हिस्से में एक खबर छापी है। इसका शीर्षक है, राष्ट्रपति भवन में धनखड़ की चौंकाने वाली उपस्थिति ने कर्मचारियों को सकते में डाल दिया। इसमें बताया गया है कि अगले दिन राज्यसभा के उपाध्यक्ष हरिवंश ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। उन्होंने राज्य सभा की दिन की कार्यवाही की अध्यक्षता की थी। अखबार ने बताया है, राष्ट्रपति भवन ने इस मुलाकात की तस्वीर एक्स पर साझा की। इसमें लिखा था, राज्यसभा के उपाध्यक्ष हरिवंश (नारायण सिंह) ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। हालांकि, धनखड़ से राष्ट्रपति की मुलाकात की कोई तस्वीर सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है। हरिवंश की फोटो आज इंडियन एक्सप्रेस, द हिन्दू और नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर लीड के साथ प्रमुखता से छपी है।
उल्लेखनीय है कि जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करते हुए समाजवादी पार्टी की सदस्य जया बच्चन को जया अमिताभ बच्चन बुलाया तो जय बच्चन ने एतराज किया था। इस पर धनवखडड और कहा था कि वे वही नाम बुला रहे हैं जो रिकार्ड में है और अगर जया बच्चन चाहें तो अपना नाम नियमानुसार बदल सकती हैं और वे खुद पूर्व में ऐसा कर चुके हैं। अब जब धनखड़ से राष्ट्रपति की मुलाकात की फोटो नहीं है और हरिवंश जी की फोटो जारी की गई है तो उन्हें सिर्फ हरिवंश लिखा गया है तो यह मुद्दा पाठकों के लिए सामान्य ज्ञान का हो सकता है। एआई को हरिवंश का पूरा नाम पता है लेकिन जया बच्चन को वह जया बच्चन ही लिख रहा है। राज्यसभा उपाध्यक्ष लिखने पर उसने बताया कि वे सिर्फ हरिवंश के नाम से जाने जाते हैं। जो नहीं जानते हैं उन्हें बताया जा सकता है कि वे पत्रकार रहे हैं और अंतिम नौकरी झारखंड आधार वाले अखबार प्रभात खबर के संपादक की कर रहे थे जो एक उद्योग समूह का अखबार है और इसके संस्करण पटना व कोलकाता से भी हैं।
नरेन्द्र मोदी की सरकार अपने सबसे बड़े संकट में है। भाजपा में इस्तीफे नहीं होते के बावजूद कुछ तो हुए ही हैं पर यह इस्तीफा नहीं, नामुमिकन का मुमकिन होना है। अखबारों की खबरों से पता चल रहा है खबर कुछ नहीं है और सब अटकलें ही हैं। पर मेरी चिन्ता वह नहीं है। हमेशा की तरह मुझे आज भी लग रहा है कि ‘धनखड़ का इस्तीफा मंजूर’की आड़ में कई महत्वपूर्ण खबरें छूट जा रही है और इसके लिए चुनाव आयोग बिहार में एसआईआऱ का प्रचार कर रहा है जो घर पर है उनका नाम दर्ज करने के लिए मतदाता की नागरिकता की शर्त पूरी करना सुनिश्चित करने के अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कर रहा है और बाहर रह रहे मतदाताओं को वोटर बनने के लिए देश भर के अखबारों में विज्ञापन छपवाकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि एसआईआर के खिलाफ खबर न छपे। ऐसे में आज देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, बिहार मतदाता सूची मामले पर संसद में हंगामा। कहने की जरूरत नहीं है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण बिल्कुल मनमाना है और चुनाव आयोग के मुखिया की नियुक्ति ही जब विवाद में है तो उनके इस काम का फैसला नियुक्ति के विवाद के बाद निपटाया जाता तो बात ही अलग होती। संभव है, नियुक्ति का मामला निपट जाता तो यह विवाद ही नहीं होता पर सुप्रीम कोर्ट की अपनी प्राथमिकताएं और कार्यशैली है। ऐसे में यह खबर तो निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है और देश को पता होना चाहिये कि बिहार में एसआईआर का विवाद है तो क्या है और क्यों है। खासकर इसलिये कि इसे दूसरे राज्यों में भी लागू किया जाना है और चुनाव आयोग अपने कर्तव्य को भूलकर जो अधिकार बता रहा है वह असल में उसके कर्तव्यों में नहीं है। कभी नहीं रहा और वैसे भी, बिहार के गांवों में जहां वहां के निवासी नहीं रह पाते हैं कोई विदेशी क्यों और किसलिये रहेगा और रहेगा तो वह सिर्फ वोटर बनने के लिए नहीं रहेगा पर उसे देखा नहीं जा रहा है और दूसरी ओर चुनाव आयोग कह चुका है कि जो मतदाता नहीं बनेंगे वे नागरिक बन सकते हैं या हो सकते हैं। अगर ऐसा है तो बिना सुनिश्चित किये किसी को मतदाता नहीं बनाना सरसार अन्याय है। पर खबर नहीं है तो चिन्ता की बात है। ऐसी खबर अंदर कहीं कोने पर डाल देना नहीं होने के बराबर है।

भाजपा सांसद का बेटा सेट दिल्ली के हिन्दी अखबारों में अगर एसआईआर पर संसद में हंगामे की खबर नहीं है तो यह उम्मीद कौन करेगा कि भाजपा नेता के लाड़ले, विकास की खबर होगी। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार यौन उत्पीड़न के आरोपी, जमानत पर चल रहे भाजपा सांसद के बेटे को हरियाणा में विधि अधिकारी नियुक्त किया गया है। खबर है कि यौन उत्पीड़न केस के आरोपी विकास बराला को हरियाणा का एएजी यानी असिस्टेंट एडवोकेट जनरल बनाया गया है। विकास भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुभाष बराला का बेटा है। उस पर साल 2017 में एक आईएएस अधिकारी की बेटी का पीछा करने और अपहरण करने की कोशिश के आरोप हैं, जिनके चलते वह जेल भी जा चुका है और जमानत पर बाहर हैं। फिलहाल, यह मामला चंडीगढ़ की अदालत में लंबित है। 18 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, विकास का नाम 97 नई नियुक्तियों में शामिल है। केस के समय वह कानून का छात्र था और दिसंबर 2017 में हाईकोर्ट ने उसे कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में होने वाली परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी थी।


