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मुंबई के पत्रकार धर्मेन्द्र ने ठोंका भास्कर पर 40 लाख का मजीठिया संबंधी क्लेम तो प्रबंधन मांगने लगा इस्तीफा

अपने कर्मचारियों को हमेशा तंग करने, कम भुगतान देने और उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बदनाम डीबी कोर्प ग्रुप के अखबार दैनिक भास्कर से एक बड़ी खबर आ रही है। इस अखबार के लिए मुम्बई में बतौर प्रिंसपल करस्पांडेंट कार्यरत तेजतर्रार पत्रकार धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने भास्कर प्रबंधन के खिलाफ मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 40 लाख रुपये का एरियर और अंतरिम राहत का ब्याज के साथ क्लेम किया है। इस मामले में एक नोटिस दैनिक भास्कर प्रबंधन को श्रम आयुक्त कार्यालय ने भी भेजा है जिस पर 14 जुलाई को श्रम आयुक्त कार्यालय मुम्बई शहर में सुनवाई होगी।

अपने कर्मचारियों को हमेशा तंग करने, कम भुगतान देने और उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बदनाम डीबी कोर्प ग्रुप के अखबार दैनिक भास्कर से एक बड़ी खबर आ रही है। इस अखबार के लिए मुम्बई में बतौर प्रिंसपल करस्पांडेंट कार्यरत तेजतर्रार पत्रकार धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने भास्कर प्रबंधन के खिलाफ मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 40 लाख रुपये का एरियर और अंतरिम राहत का ब्याज के साथ क्लेम किया है। इस मामले में एक नोटिस दैनिक भास्कर प्रबंधन को श्रम आयुक्त कार्यालय ने भी भेजा है जिस पर 14 जुलाई को श्रम आयुक्त कार्यालय मुम्बई शहर में सुनवाई होगी।

इस नोटिस के बाद भास्कर प्रबंधन में हड़कंप मच गया और अब धर्मेन्द्र प्रताप सिंह पर प्रबंधन त्यागपत्र देने के लिए तरह तरह से दबाव बना रहा है। मगर धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने साफ़ कह दिया है कि वे भास्कर प्रबंधन के आगे नहीं झुकेंगे और रिजाइन भी नहीं देंगे। खुद धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने इस खबर की पुष्टि की है और बताया है कि सोमवार को ठीक ४:३० बजे मेरे मोबाइल पर हमारे समूह संपादक कल्पेश यागनिक का फोन आया। वह बोले कि न्यूज़ क्यों नहीं भेज रहे हो? मैंने कहा कि आपको न्यूज़ का सोर्स चाहिए,  टाइम भी कि कब मैंने किससे बात करके न्यूज़ बनाई है, जो कि (सोर्स) दे पाना मेरे लिए संभव नहीं है।

इस दौरान (१३ मिनट ४८ सेकंड) बहुत-सी बातें हुईं। बातचीत के दौरान वह एक ही बात पर जोर दे रहे थे कि नैतिकता के लिहाज से इस्तीफा दे देना चाहिए। मैंने कहा कि आप मुझे नैतिकता पर भाषण मत दो। जब धर्मेंद्र इस्तीफे की कल्पेश याज्ञनिक की रट सुन-सुन कर तंग आ गए तो बोले कि आप यही मांग, इस्तीफा देने संबंधी, लिखकर दे दो, किंतु वह बात को घुमा-फिरा कर मुझसे ही इस्तीफा लिखने की बात पर अड़े रहे। धर्मेंद्र ने कहा कि आप मुझे इतना बुद्धू कैसे समझ रहे हैं कि आप कहें और मैं इस्तीफा दे दूं? आप कंपनी में अपना नंबर बढ़वाने के लिए जैसी बात कर रहे हैं, मानो अनाज आप ही खाते हैं। इस पर उन्होंने फोन काट दिया।

धर्मेन्द्र प्रताप सिंह मुम्बई के फ़िल्म पत्रकारों में काफी जुझारू पत्रकार माने जाते हैं और उन्होंने भास्कर प्रबंधन के खिलाफ माननीय सुप्रीम कोर्ट में केस भी दायर कर रखा है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
मुंबई
9322411335

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