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आयोजन

आयोजन था पत्रकारिता का, दिग्विजय सिंह ने अपना पॉलिटिकल चौका मार दिया!

विनोद पुरोहित-

एआई पर मंथन और निर्गुणी के मोती…

इंदौर में भारतीय पत्रकारिता महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव के नाम में पत्रकारिता जरूर था…बैकड्रॉप में पत्रकारिता के सप्त ऋषियों के फोटो और नाम लगाए गए थे, लेकिन पत्रकारिता के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई। न अतीत की, न भविष्य की और न ही वर्तमान पत्रकारिता की गति-मति पर कोई मंथन हुआ। दरअसल, आयोजकों ने इसका विषय एआई तय कर रखा था। यानी तीनों दिन पत्रकारिता के एक टूल एआई पर ही वैचारिक चिंतन-मनन करेंगे।

पहले दिन का तो पता नहीं लेकिन दूसरे और तीसरे दिन तकनीकी सत्र अपने निर्धारित समय से देर से चले और देर तक चले। सत्रों का प्रारूप लगभग तय था। अतिथियों का स्वागत-सत्कार, फिर सत्र के विषय पर बुलाए गए विशेषज्ञों के उदबोधन और बीच-बीच में या बाद में पत्रकारों का सम्मान।

दूसरे दिन राज्य के चुनिंदा पत्रकारों को सम्मानित किया गया। तीसरे दिन अन्य सूबों के पत्रकारों को अलंकृत किया गया। दूसरे दिन शिक्षा और एआई विषय पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। दिल्ली आप वाले मनीष सिसोदिया भी इस सत्र में बोले। शाम को शिवाजी महाराज पर महानाट्य खेला गया। हालांकि यह महानाट्य सिर्फ 30 मिनट का था।

तीसरे दिन शुरुआती सत्र में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह बोले। उन्होंने एआई के बहाने वह बोला जो वे बोलना चाहते थे। वे ईवीएम की खराबी और वन नेशन, वन इलेक्शन पर बोले। यानी पत्रकारिता के टूल पर चर्चा को भी अपनी बात रखने का टूल बना लिया। बेशक, दिग्विजयसिंह खांटी राजनेता हैं। वे जानते हैं कि अवसर का फायदा कब, कहां और कैसे उठाया जाए…जो उन्होंने किया। इसके बाद तकनीक सत्र हुआ।

एआई और रचनात्मकता के खतरे विषय पर विशेषज्ञों में कुछ अच्छा बोले, कुछ खूब बोले और कुछ बोले। शाम को एआई पर चर्चा के लिए अजहरुद्दीन मंच पर थे। वे मंचासीन थे लेकिन हम पहचान न सके। जब उनकी तमाम उपलब्धियों के साथ नाम पुकारा गया तो पता चला… अरे ये क्रिकेटर अजहर है।

क्रिकेट के दृश्य-परिदृश्य से वे क्यों गायब हुए…सब जानते होंगे। बहरहाल, वे भी वक्ता थे। उन्होंने बताया कि उन्हें खूब फॉलोअप किया गया तो वे यहां आए। मंच पर एक स्वामी जी भी थे। तय किए गए बड़े पत्रकारों का उनसे सम्मान करवाया गया। श्री महेश श्रीवास्तव जी को सबसे बड़ा सम्मान दिया गया। हालांकि वे आए नहीं और उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।

शाम को विदुषी कलापिनी कोमकली ने ख्यात कुमार गंधर्व के निर्गुण भजनों को अपनी सुमधुर आवाज में सुनाया। कुछ उनकी अपनी कंपोजिशन भी थीं। ये उत्कृष्ट कार्यक्रम था…जिसे एआई से प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

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