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दिलीप मंडल तो मोदी के बहुत बड़े भक्त बन गए, पढ़ें उनकी ये पोस्ट!

दिलीप मंडल-

वाह मोदी जी वाह! तो लगभग 75 साल से चली आ रही लैटरल एंट्री में सोशल जस्टिस और SC, ST, EWS तथा OBC को जोड़ने की व्यवस्था करने का काम एक ओबीसी पीएम को ही करना पड़ा। अब नया विज्ञापन आएगा।

पहले की कोई भी सरकार कर सकती थी। पर सब बोझ ओबीसी मोदी जी पर ही आ जाता है!

ओबीसी हमेशा से श्रमिक और उत्पादक रहा है। सब उसी को करना पड़ता है।

मोदी जी को ही संविधान दिवस समारोह भी शुरू करवाना पड़ा। 1950 से ये होना चाहिए था। अब जाकर सरकारी लेवल पर ये समारोह हो रहा है।

बाबा साहब के जीवन से जुड़े पंचतीर्थ भी उनको ही बनवाने पड़े। लंदन का बाबा साहब का घर ख़रीदकर म्यूज़ियम बनाया गया। वह भी इसी सरकार में हुआ।

NEET ऑल इंडिया सीट में ओबीसी कोटा कोई भी पीएम कर सकते थे। पर ये भी मोदी जी को ही करना पड़ा।

ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा 1993 में दिया जा सकता था, वह भी मोदी जी ही अपनी सरकार में करते हैं। पहली बार केंद्र में 27 ओबीसी मंत्री भी वही बनाते हैं।

भारत में पहला विश्व बौद्ध सम्मेलन भी वही करवाते हैं।

भारत को पहली बार एक आदिवासी राष्ट्रपति भी मोदी जी के कार्यकाल में ही मिलता है। करुणानिधि जी की स्मृति में सिक्के भी मोदी जी ही जारी करते हैं।

कलाकार कटेगरी से पहली बार एक दलित, और हमारे दौर के सर्वश्रेष्ठ संगीतकार इलैयाराजा मोदी के समय ही मनोनीत कटेगरी से राज्य सभा पहुँचते हैं।

इतने काम पेंडिंग रखे थे पिछली सरकारों ने। ये सब 2014 से पहले हो जाना था। ग़रीब सवर्णो का ख़्याल भी पहली बार मोदी जी ने ही किया और EWS को 10% दिया।

महिला आरक्षण संविधान संशोधन बिल भी उन्होंने ही पास कराया। एक प्रधानमंत्री के हिसाब से ये कुछ ज़्यादा नहीं हो गया?


लैटरल एंट्री के सिंगल पदों में आरक्षण न होना सपा समर्थित सांसद कपिल सिब्बल और कोलिजियम जजों के तमाम कुकर्मों में से एक है! अखिलेश यादव की एससी-एसटी बंटवारे पर चुप्पी और गोलमोल की वजह अकारण नहीं है.

लैटरल एंट्री के सिंगल पोस्ट में रिजर्वेशन 1998 के बाद से आज तक कोई भी सरकार नहीं दे पाई है. सुप्रीम कोर्ट का PGI Chandigarh vs. Faculty Association (1998) केस का सुप्रीम कोर्ट का फैसला संसद में पलटे बिना कोई सरकार आरक्षण दे भी नहीं सकती.

इससे पहले तक सरकार के Office Memorandum No. 3601 / 96-Estt. (Res) के कारण सिंगल पोस्ट पर भी रिजर्वेशन लागू था.

पर 1981 में इसके खिलाफ PGI चंडीगढ़ के कुछ प्रोफेसर कोर्ट में चले गए. 1998 में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बैंच ने फैसला दिया कि सिंगल पदों पर आरक्षण लागू नहीं होगा.

इस केस में आरक्षण के खिलाफ केस लड़ रहे थे कपिल सिब्बल. उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि सिंगल पदों पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता. कोर्ट में उनका दबदबा तब भी था.

मैं जजमेंट से कपिल सिब्बल की दलील यहां डाल रहा हूं, जिसे आप तमाम लॉ वेबसाइट और सुप्रीम कोर्ट की साइट से पढ़ सकते हैं –

“There cannot be any reservation either for initial appointment or for an appointment on promotion in respect of a single post cadre either directly or by the device of rotation or roster…”

“The question of adequacy of representation does not and cannot arise in a single post cadre because only one person can be accommodated against the single post, leaving no scope for adequate representation of any particular class in such single post….”

“Reservation cannot be and should not be made for posts in higher echelons where merit and expertise are essential and also necessary for discharging the duties and responsibilities of such positions in higher echelons of service.”

कपिल सिब्बल का तर्क है कि सिंगल पदों पर रिजर्वेशन देने से मेरिट का नुकसान हो जाएगा!

“Reservation of posts by applying the roster can be made only where there are more than one post and reservation of only one post cannot be made because such reservation would amount to 100% reservation thereby violating Article 16(1) and 16(4) of the Constitution.”

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारत सरकार की राय को रिजेक्ट कर दिया और कपिल सिब्बल की दलील के अनुसार फैसला कर दिया. ये सभी जज कोलिजियम से चुनकर आए थे.

जब ये केस हुआ और फैसला आया तब तक इन संस्थानों में ओबीसी आरक्षण नहीं था. सिर्फ एससी-एसटी ही इसकी लाभार्थी थे. सिब्बल इन वर्गों से नफरत करते हैं.

सिब्बल अब समाजवादी पार्टी के वोट से राज्य सभा में हैं. भारतीय इतिहास के वे एकमात्र कैबिनेट मंत्री हैं जिन्होंने आरक्षण के खिलाफ प्रेस कॉनफ्रेंस करके बयान दिया था.

(दिलीप मंडल कई बड़े मीडिया हाउसों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। वे सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर के रूप में काफ़ी चर्चित हैं.)

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1 Comment

1 Comment

  1. Vijay Rawat

    August 20, 2024 at 6:27 pm

    वैसे लिखा आपने सब सच है खासतौर पर सविंधान दिवस और पंचतीथ वाली बात.
    वर्ना यहाँ तो सबकुछ गांधीमय है उसके बाद समाजवादी

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