नई दिल्ली: दूरसंचार विभाग (DoT) ने Telecommunication Cyber Security (TCS) Rules, 2024 में बड़े संशोधन करते हुए मोबाइल आधारित धोखाधड़ी, पहचान चोरी और डिवाइस के दुरुपयोग पर काबू पाने के लिए नई सुरक्षा व्यवस्थाएं लागू की हैं। यह संशोधित नियमावली 22 अक्टूबर 2025 को अधिसूचना G.S.R. 771(E) के तहत जारी की गई।
सरकार का कहना है कि ये बदलाव भारत के बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे, खासकर तब जब मोबाइल नंबर और टेलीकॉम पहचानकर्ता वित्तीय सेवाओं, ई-कॉमर्स और शासकीय प्रणालियों का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन से बढ़ेगी डिजिटल सुरक्षा
नियमों में सबसे अहम बदलाव मोबाइल नंबर वेलिडेशन (MNV) प्लेटफॉर्म को औपचारिक रूप से लागू करना है। यह प्लेटफॉर्म सेवा प्रदाताओं को यह जांचने में मदद करेगा कि किसी ग्राहक के खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर वास्तव में उसी का है या नहीं।
सरकार के अनुसार, यह कदम—
- म्युले (फर्जी) खातों
- चोरी हुए नंबरों
- और पहचान की आड़ में किए जा रहे वित्तीय धोखों को रोकने में बेहद प्रभावी साबित होगा।
यह प्रणाली विकेंद्रीकृत और गोपनीयता-संगत है, जिससे डिजिटल लेनदेन में भरोसा मजबूत होगा।
चोरी और क्लोन किए गए मोबाइल फोन पर सख्त कार्रवाई
बढ़ते सेकेंड-हैंड मोबाइल बाजार को ध्यान में रखते हुए सरकार ने IMEI स्क्रबिंग अनिवार्य कर दी है।
अब किसी भी पुराने मोबाइल फोन की बिक्री से पहले उसका IMEI नंबर सरकारी डेटाबेस से मिलान करना होगा, ताकि वह— चोरी का, ब्लैकलिस्टेड, या क्लोन किया हुआ उपकरण न हो।
यह नियम उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखने के साथ पुलिस को चोरी हुए उपकरणों की ट्रैकिंग में मदद करेगा।
टेलीकॉम आइडेंटिफायर यूज़र एंटिटीज़ (TIUEs) का नया प्रावधान
संशोधित नियमों में एक नया नियामकीय वर्ग जोड़ा गया है—Telecom Identifier User Entities (TIUEs)। इनमें शामिल होंगे:
- बैंक
- ई-कॉमर्स कंपनियां
- फिनटेक संस्थान
- और वे सभी संगठन जो मोबाइल नंबर, IMEI या IP एड्रेस का इस्तेमाल सत्यापन या सेवा प्रदाय में करते हैं।
अब इन TIUEs को निर्धारित परिस्थितियों में सरकार के साथ टेलीकॉम पहचानकर्ता से जुड़े डेटा साझा करना होगा, ताकि साइबर फ्रॉड जांच में बेहतर सहयोग मिल सके। यह प्रावधान डेटा संरक्षण नियमों के अनुरूप होगा।
गजट नोटिफिकेशन की त्रुटि पर DoT की सफाई
DoT ने स्पष्ट किया कि TCS Amendment Rules, 2025 की अधिसूचना 22 अक्टूबर 2025 को सही तरीके से प्रकाशित हुई थी, लेकिन गलती से उसी नियमावली को 29 अक्टूबर 2025 को दोबारा प्रकाशित कर दिया गया।
इस त्रुटि को G.S.R. 863(E) (25 नवंबर 2025) के माध्यम से रद्द कर दिया गया है। सरकार ने कहा कि यह गलती नियमों की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं डालती और मूल नियम पूर्णतः प्रभावी हैं।
देश के टेलीकॉम सेक्टर के लिए बड़ा सुधार
इन तमाम संशोधनों के साथ भारत ने टेलीकॉम साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार का दावा है कि यह ढांचा नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए डिजिटल सेवाओं को अधिक विश्वसनीय बनाएगा।



