एकता और उनकी मां शोभा कपूर पर प्रोडक्शन हाउस की वेब सीरीज ‘गंदी बात’ के एक एपिसोड में नाबालिग लड़कियों को लेकर कथित तौर पर अश्लील कंटेंट दिखाने के लिए पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने एकता कपूर, शोभा कपूर और ऑल्ट बालाजी फर्म के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत यह मामला दर्ज किया है.
वहीं, एकता के ऑल्ट बालाजी टेलीफिल्म लिमिटेड की ओर से जारी बयान में कहा गया है, वेब सीरीज ‘गंदी बात’ के बारे में विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में, एएलटी डिजिटल मीडिया एंटरटेनमेंट लिमिटेड (कंपनी) यह स्पष्ट करती है कि वह पॉक्सो एक्ट सहित सभी लागू कानूनों का पूरी तरह से अनुपालन करती है और कंपनी पर नाबालिगों के संदर्भ में लगाया गया आरोप बिल्कुल गलत है.
बयान में कहा गया, यह भी स्पष्ट किया जाता है कि शोभा कपूर और एकता कपूर कंपनी के दैनिक कार्यों में शामिल नहीं हैं और इसे अलग-अलग टीमों द्वारा मैनेज किया जाता है, जिसमें कंटेंट भी शामिल है.
आगे कहा, “कंपनी को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वह जांच में अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है. चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए कंपनी टिप्पणी करने से बचती है.”
रिपोर्ट के अनुसार ऑल्ट बालाजी टेलीफिल्म लिमिटेड की एकता कपूर और उनकी मां शोभा कपूर के खिलाफ 20 अक्टूबर को पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था. मां-बेटी की जोड़ी को 22 अक्टूबर को पहले दौर की पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों को 24 अक्टूबर के दिन आगे की पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया गया था, जिसमें उनके अधिवक्ता ने कुछ दस्तावेज भी सौंपे हैं.

कनुप्रिया-
पिछले दिनों एकता कपूर पर Pocso के तहत केस दर्ज़ होने की ख़बर है कि उन्होंने अपनी सिरीज़ “गंदी बात” में एक नाबालिग से अश्लील दृश्य करवाए.
ये वही एकता कपूर हैं जिन्होंने दो दशक तक इस देश मे नारी संस्कार बेचे, मंगलसूत्र, बिंदी, करवाचौथ को संस्कारी स्त्री के व्यक्तित्व का अहम पहलू बताया और इसी नाते स्त्रियों की निजी चॉइस. इन्होंने इस बात को enforce किया कि पितृसत्ता का पूरा चक्र स्त्रियों द्वारा ही चलाया जाता है, वही सती है वही षड्यंत्र करती मंथरा, पुरुष महज मूक दर्शक है, जो ये सब होते देखता है, कुछ कहता नहीं, उसके हाथ मे कुछ है ही नहीं. इन एकता जी ने दशकों दर्शकों के कचरा निगलने के अभ्यास को धार दी, अपनी सहज बुद्धि के abuse को ignore करना सिखाया. और फिर संस्कार बेचकर मिली पूँजी से semi porn की दुकान खोल ली.
पूँजी का और उसके एजेंडे का यही मज़ा है, आप एक ही दुकान पर धर्म और अश्लील साहित्य बेच सकते हैं, ज़्यादा आपत्ति हो तो अगल बगल में दुकान खोल सकते हैं.
आप एक ही दुकान पर राम उसी पर दंगा बेच सकते हैं. आप उसी पर विकास और उसी पर पर्यावरण बेच सकते हैं. उसी पर मानवाधिकार और उसी पर हथियार बेच सकते हैं. उसी पर देशभक्ति और उसी पर देश के संसाधन बेच सकते हैं.
आपको ग्राहक बनाने आने चाहिएँ, जिन्हें सोचना अपराध लगता हो या फिर सबसे फ़ालतू काम, उसके बाद सबकुछ बिक सकता है, बिकता है.
बहरहाल एकता कपूर बड़ा नाम हैं और अब न्याय देवी को आँखों की पट्टी सरकाने की जहमत उठाने की ज़रूरत भी नहीं, वो खोलकर किनारे रखी जा चुकी है.


