रंगनाथ सिंह-
कुख्यात यौन अपराधी और विख्यात वामपंथी विद्वान की दोस्ती क्या कहती है?
भाकपा-माले की पूर्व नेता कविता कृष्णन ने नोम चोमस्की और कुख्यात यौन अफराधी एपस्टीन के रिश्तों पर एक लेख लिखा। कविता कृष्णन द्वारा स्टालिन द्वारा किए गए नरसंहार इत्यादि पर सवाल उठाने के बाद विवाद हुआ और उन्हें पार्टी से विदा होना पड़ा। चोमस्की पर उनके लेख पर कोई खास विवाद नहीं हुआ था क्योंकि भारतीय लेफ्ट-लिबरल बुद्धिजीवियों ने चोमस्की प्रसंग पर वैसे ही चुप्पी साध ली जैसे खुद चोमस्की ने एपस्टीन पर साधी थी।
एक पत्रकार ने जब चोमस्की से सीधा सवाल किया तो उनका जवाब था कि उन्हें उसके अपराधों से वास्ता नहीं, वह कई महत्वपूर्ण लोगों से एपस्टीन की वजह से मिल पाए थे। अब यह मामला फिर से ऊपर आ गया है क्योंकि एपस्टीन फाइल्स से लीक गयी तस्वीरों में से एक तस्वीर नोम चोमस्की की भी है। एपस्टीन के कुख्यात द्वीप पर चोमस्की गये थे या नहीं, अभी तक पता नहीं चला है मगर चोमस्की ने यह माना है कि एपस्टीन से उनकी दोस्ती तब हुई जब वह इन आरोपों से जुड़े एक मामले में छोटी सजा काट चुका था।
यानी उसका यौन शोषण अपराधी वाला चरित्र दुनिया के सामने आ चुका था। बाद में उससे जुड़े दर्जनों मामले और सामने आए और वह अमेरिकी इतिहास के कुख्यात आपराधिक मामलों में शुमार हो गया।
छोटी-छोटी बच्चियों और बच्चों के संग विकृत युवाओं, अधेड़ों और बूढ़ों द्वारा किये जाने वाले यौन अपराध के प्रति लेफ्टविंग और लिबरल विंग की सहिष्णुता जुगुप्सा पैदा करती है। ब्रिटेन में हजारों बच्चियों को सेक्स-स्लेव की तरह ट्रीट करने के मुद्दे पर भी लेफ्टविंग-लिबरलविंग चुप है। छोटे बच्चों के संग दुनिया भर में हुए यौन अपराधों पर लेफ्टविंग और लिबरलविंग चुप रहता है। आजकल वह भारतीय सुप्रीम कोर्ट में बच्चियों के सहमति की उम्र कम कराने में लगा हुआ है जिसका सीधा नतीजा ये होगा कि अगर कोई किसी 15-16 साल की बच्ची को फुसला ले तो उसे कानूनी रूप से अपराधी न कहा जा सके।
बड़ा सवाल ये है कि यौन विकृतियों और नाबालिगों के संग किए जाने वाले यौन अपराधों के प्रति लेफ्ट-लिबरल-विंग इतना उदार क्यों है?
सलमान अहमद-
ये हैं नास्तिकों के भगवान और अल्लाह/ईश्वर/क्रिएटर को नकारने वाले मशहूर साइंटिस्ट “स्टीफ़न हॉकिंग”
Stephen Hawking को 21 साल की उम्र में ALS बीमारी हो गई थी। बीमारी धीरे धीरे बढ़ी, 1970 के बाद चलना फिरना और हाथ पाँव काम करना बंद हो गया था।
1985 के बाद बोल भी नहीं पाते थे, कंप्यूटर से बात करते थे। जिस्म लगभग पूरा अपाहिज था, लेकिन दिमाग़ आख़िरी दम तक पूरी तरह तेज़ और एक्टिव रहा।
स्टीफन हॉकिंग की ये फ़ोटो भी एप्सटीन फाइल्स में ही लीक हुई थी। शायद टापू पर कुछ स्पेशल फिज़िक्स के बारे में रिसर्च करने गए थे।

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