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उत्तर प्रदेश

नोएडा और कानपुर पुलिस की खुली परतें, फर्जी मुठभेड़ के कंकाल एक-एक करके निकल रहे हैं!

प्रकरण 1:
वर्ष 2020 | कानपुर नगर पुलिस

एक व्यक्ति को पिस्टल के साथ पकड़ा गया, मुठभेड़ दिखाई गई और पैर में गोली मारी गई।

लेकिन सच्चाई?

जिस पिस्टल को बरामद दिखाया गया, वो पहले ही 2007 की एक और मुठभेड़ में जब्त हो चुकी थी। कोर्ट में पेशी के दौरान खुलासा हुआ—पिस्टल पर अंकित था: “1CMM KNR 13.05.2014″।

यानी पुलिस ने वही पुरानी जब्त पिस्टल फिर से “बरामद” कर ली! अब वही पुलिस अधिकारी फर्ज़ी मुठभेड़ और अवैध हथियार रखने का मुकदमा झेलेंगे।


प्रकरण 2:
वर्ष 2022 | नोएडा पुलिस

दिल्ली से एक बीटेक छात्र को उठाया गया, फर्ज़ी मुठभेड़ में पैर में गोली मारी गई, और फिर उसे एक हत्या के केस में फंसा दिया गया।

पर सीसीटीवी और पुख़्ता सबूतों ने साजिश की पोल खोल दी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच के बाद न्यायालय के आदेश से एफआईआर दर्ज हुई।

अब इन फर्जीवाड़ों के किरदार सलाखों की तरफ बढ़ रहे हैं। जब सज़ा मिलेगी, तब इनमें से अधिकतर अधिकारी रिटायर हो चुके होंगे—और जो बचेंगे, वे बूढ़े और लाचार होंगे।

कोई मदद को नहीं आएगा, क्योंकि पुलिस की साख वहीं है जहाँ ये कहानियाँ जन्म लेती हैं।

ईश्वर करे, पुलिस को सद्बुद्धि मिले।

– सुलखान सिंह, पूर्व DGP उत्तर प्रदेश (फेसबुक वॉल से)

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