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डीएपी की किल्लत में लुट रहे किसान, ऐसे कैसे विश्वगुरू बनेगा मोदी का हिंदुस्तान?

बदायूं | यह पिछले महीने की खबर है. उत्तर प्रदेश के बदायूं की. जिले के किसान डीएपी खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं। विदेशों में डंका बजा रहे मोदीजी को इस खबर से बाल बराबर भी फर्क नहीं पड़ेगा. फर्क यदि पड़ेगा तो देश के अन्नदाताओं पर।

7 से 24 अक्तूबर के दरम्यान अमर उजाला और हिंदुस्तान की रिपोर्टें बताती हैं कि बदायूं के ब्लाक सालारपुर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर स्थित साधन सहकारी केंद्र व इफ्को केंद्रों पर डीएपी खाद की कमी होने से किसान परेशान हैं। किसान बाजार में स्थित प्राइवेट दुकानों से महंगे दामों में खाद लेने को मजबूर हैं. किसानों का कहना है कि सरकारी केंदेरों में कई-कई दिनों तक चक्कर लगाने के बाद भी खाद नहीं मिल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि समिति पर डीएपी की बोरी 1350 रुपये की पड़ती है, जबकि प्राइवेट दुकानदार 1600 से 1700 रुपये वसूल रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने अमर उजाला की यह रिपोर्ट शेयर कर ट्वीट किया है कि- ये वो खबर है जिससे आपको कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन जिसमें किसान की बरबादी लिखी हुई है। एक ओर हरियाणा पंजाब और उत्तर प्रदेश में धान की फसल मंडियों में और मंडियों के आस पास की सड़कों पर सरकारी ख़रीद का इंतज़ार कर रही है, मजबूरी में घटी दरों पर व्यापारियों के गोदामों की शोभा बढ़ा रही है वहीं दूसरी तरफ़ गेहूं की बुआई के लिए डीएपी की तलाश में भटकते किसानों को अलग से लूटा जा रहा है।

मोदी जी की सरकार किसानों को सर उठाने का दंड दे रही है!

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