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सियासत

महापड़ाव : फिर उठी ‘किसान लहर’

अमरीक-

पंजाब और हरियाणा से एक बार फिर किसान लहर उठी है। मोहाली और पंचकूला चंडीगढ़ की सीमा से सेट हैं। दोनों प्रदेशों के हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर वहां डटे हुए हैं। यह मोर्चा दिल्ली सीमा पर लगे व्यापक किसान मोर्चे की याद दिलाता है। पंजाब की 33 और हरियाणा की 17 किसान जत्थेबंदियां आंदोलनरत किसानों की अगुवाई कर रही हैं। पंचकूला के सेक्टर- 5 में धरने पर बैठे किसानों से मिलने वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों के संयम का इम्तिहान न लिया जाए।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत मोहाली जाकर पंजाब के किसानों से भी मिले और उनके रोष-प्रदर्शन में शामिल हुए। वहां उन्होंने कहा कि किस सरकार से खैरात नहीं बल्कि अपना हक मांग रहे हैं और किसान अपना हक लेकर रहेंगे। सरकार किसानों की जमीन हड़प कर देश को मजदूरों का मुल्क बनना चाहती है लेकिन अन्नदाता ऐसा नहीं होने देंगे।

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गौरतलब है कि चंडीगढ़ की सीमाओं पर डटे किसानों की मुख्य मांगों में शुमार है कि फसलों (विशेष रूप से दालों) की एमएसपी तय की जाए। तत्काल इसकी घोषणा की जाए। दिल्ली आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज पर्चे रद्द किए जाएं। आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों में से किसी एक सदस्य को नौकरी दी जाए और परिवार को पूरा मुआवजा। किसानों के कर्ज निपटारे के लिए वन टाइम सेटलमेंट स्कीम घोषित की जाए। साठ की उम्र से ज्यादा वाले किसानों को प्रति माह दस हजार रुपए पेंशन सुनिश्चित की जाए। आवारा पशुओं और कुत्तों पर नकेल के लिए सरकारी तौर पर नीति बनाई जाए। बेरोजगारी के चलते युवा नशे की दलदल में जा रहे हैं, इसे रोकने के लिए उन्हें रोजगार दिया जाए। गन्ने की फसल को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री ने बीते हफ्ते जो वादा किसान संगठनों से किया था; तत्काल उसे पूरा किया जाए। लखीमपुर खीरी घटना के दोषियों को सजा और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र की कैबिनेट से छुट्टी तथा जेल भेजने की मांग भी किसान कर रहे हैं।

भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के सचिव रणवीर सिंह के मुताबिक, “पंजाब के किसान अपने साथ दो महीने का राशन लेकर आए हैं। यह आंदोलन लंबा चल सकता है। जैसे दिल्ली बॉर्डर पर हुआ था। किसानों के नहाने के लिए गर्म पानी तक का इंतजाम कर लिया गया है। पक्के मोर्चे की तैयारी है।” वरिष्ठ किसान नेता रुलदु सिंह के अनुसार इस बार किसान आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। किसी बहकावे में नहीं आएंगे। किसान नेता महेंद्र सिंह कहते हैं, “केंद्र और राज्य सरकारों ने दिल्ली बॉर्डर पर लगे कामयाब किसान मोर्चे से कोई सबक हासिल नहीं किया। बेशक हम मर जाएं लेकिन चंडीगढ़ मोर्चा दिल्ली मोर्चे की तरह अहिंसक रहेगा।” किसानों ने अपने मोर्चे को ‘महापड़ाव’ का नाम दिया है। संस्कृतिकर्मियों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग इस महापड़ाव में शिरकत के लिए आ रहे हैं। मूल कपूरथला के रहने वाले शैलविंदर सिंह लंदन में रहते हैं। वह वहां की एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर कार्यरत थे और कुछ समय पहले रिटायर हुए हैं। उन्होंने बताया कि किसानों के इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए वह विशेष रूप से इंग्लैंड से आए हैं।

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जिक्रेखास है कि किसानों के महापड़ाव के समर्थन में सोशल मीडिया पर सैकड़ों पेज बन गए हैं। लाखों की तादाद में लोग उन्हें लाइक कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक राज्य और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां चंडीगढ़ सीमा पर डटे किसानों की गतिविधियों पर पैनी निगाहें रखे हुईं हैं। आंदोलन में किसानों की आमद जारी है। महिलाएं और बुजुर्ग भी बड़ी तादाद में चंडीगढ़ किसान मोर्चे में शामिल हो रहे हैं। हरियाणा की तरफ से भी ऐसी खबर है। मोहाली और पंचकूला में हजारों ट्रैक्टर ट्रालियां पहुंच चुकी हैं। यह सिलसिला जारी है। इस बीच इप्टा ने किसान संघर्ष को हिमायत देने की घोषणा की है। इप्टा पंजाब के अध्यक्ष और नाटककार संजीवन सिंह ने बाकायदा चंडीगढ़ किसान मोर्चे में शमूलियत करते हुए कहा कि अपनी मांगे मनवाने के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष वक्त की जरूरत है। इप्टा इस किसान आंदोलन का खुला समर्थन करती है। वह कहते हैं, “इप्टा से वाबस्ता लोग पूरे देश में आंदोलन कर रहे किसानों के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं। लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले हर राजनीतिक दल और आम लोगों को किसानों का साथ देना चाहिए।”

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