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फ़िल्मफेयर में प्रकाशित खबर का टाइम्स ऑफ इंडिया को अगली ही सुबह खंडन करना पड़ा!

पंकज शुक्ला-

एक पब्लिकेशन हाउस के दो समाचार! फ़िल्मफेयर में बीती शाम प्रकाशित समाचार का टाइम्स ऑफ इंडिया ने अगली ही सुबह खंडन कर दिया! यही है आज की फ़िल्म पत्रकारिता..! जहां समाचार प्रकाशित करने से पहले उस लेखक से बात तक करने की कोशिश नहीं की गई, जिसके लिखे पर एक फ्रेंचाइज़ी डेवलप होने की बात कही जा रही है।

रणवीर सिंह इन दिनों हिंदी सिनेमा के उन सितारों में गिने जा रहे हैं जिनके खाते में ‘धुरंधर’ और इसकी सीक्वल को लेकर बने माहौल की क्रेडिट अब भी ठीक से दर्ज़ नहीं हो पाई है। सारा का सारा क्रेडिट इन दोनों फ़िल्मों के निर्देशक आदित्य धर के खाते में जमा हो रहा है।

ऐसे में, रणवीर सिंह को फिर से बड़े कैनवास के ‘इवेंट स्टार’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश शुरू हुई है। अमेरिकी मनोरंजन पत्रिका वैरायटी के इंडिया वर्ज़न ने सबसे पहले ये ‘पीआर स्टोरी’ एक्सक्लूसिव के टैग के साथ ब्रेक की। कौआ कान ले गया, की तर्ज़ पर बाक़ी न्यूज़ और एंटरटेनमेंट पोर्टल भी इसके पीछे भागे। किसी पोर्टल या इसके रिपोर्टर ने इसकी पुष्टि के लिए अमीश त्रिपाठी को फ़ोन या मैसेज किया हो, ऐसा कुछ पता चला नहीं।

ख़बर ने वहां से ट्विस्ट लिया जब फ़िल्म दर्शकों के बीच अरसे से एक प्रतिष्ठित पत्रिका का दर्जा रखने वाली मैगज़ीन फिल्मफेयर ने यह खबर प्रकाशित की कि रणवीर सिंह अमीश त्रिपाठी के चर्चित उपन्यास ‘द इम्मॉर्टल्स ऑफ मेलुहा’ पर आधारित एक महत्त्वाकांक्षी त्रयी करने जा रहे हैं, सोशल मीडिया से लेकर ट्रेड सर्किट तक इस खबर ने तुरंत हलचल पैदा कर दी।

दिलचस्प बात यह रही कि खबर सिर्फ एक संभावित फिल्म की नहीं थी, बल्कि उसे ऐसे प्रस्तुत किया गया मानो रणवीर सिंह अब हिंदी सिनेमा की अगली सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ी रेस के केंद्र में आ चुके हों। ‘धुरंधर’ के बाद ‘मेलुहा’ जैसा विशाल पौराणिक-फैंटेसी संसार उनके खाते में जाना इस नैरेटिव को मजबूत करता कि रणवीर अब फिर से निर्माताओं की पहली पसंद बन रहे हैं।

हिंदी सिनेमा में इस तरह की ‘मोमेंटम बिल्डिंग’ नई बात नहीं है। किसी बड़े सितारे की बाजार में मांग और प्रभाव का माहौल बनाने के लिए अक्सर संभावित परियोजनाओं की खबरें समय से पहले मीडिया में प्लांट की जाती रही हैं।

लेकिन, कहानी ने दिलचस्प मोड़ तब लिया जब आज सुबह उसी मीडिया समूह के अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में अमीश त्रिपाठी के हवाले से खबर प्रकाशित हुई कि ‘शिवा ट्रिलॉजी’ के अधिकार अब भी उनके पास हैं और किसी के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। अमीश त्रिपाठी ने रणवीर सिंह के प्रति सम्मान जताते हुए साफ कहा कि अभी कोई डील साइन नहीं हुई। बस, यहीं पूरी बनाई गई हवा अचानक बैठती हुई नजर आई।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वैरायटी इंडिया और फिल्मफेयर जैसी प्रतिष्ठित मनोरंजन पत्रिकाएं इस खबर को इतने आत्मविश्वास के साथ प्रकाशित कर रही थीं, तो क्या उन्होंने अमीश त्रिपाठी से अधिकारिक पुष्टि लेने की कोशिश नहीं की? क्योंकि किसी साहित्यिक कृति के अधिकारों से जुड़ी खबर में सबसे अहम पक्ष लेखक या अधिकार धारक ही होता है।

इन दिनों मनोरंजन पत्रकारिता में अक्सर स्टार कैंप, स्टूडियो सूत्रों या पीआर एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर खबरें चला दी जाती हैं, खासकर तब जब किसी बड़े प्रोजेक्ट की ‘बज़ वैल्यू’ बनानी हो। लेकिन, यहां वही जल्दबाज़ी सवालों के घेरे में आ गई।

फिल्म उद्योग के जानकार मानते हैं कि यह पूरा घटनाक्रम रणवीर सिंह के लिए ‘पोस्ट-धुरंधर इमेज बिल्डिंग’ का हिस्सा भी हो सकता है। पिछले कुछ समय से रणवीर की फिल्मों का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन अस्थिर रहा है और ऐसे में उन्हें फिर से एक बड़े फ्रेंचाइज़ स्टार के रूप में स्थापित करना उनके ब्रांड के लिए जरूरी माना जा रहा है। ‘मेलुहा’ जैसी बहुचर्चित पौराणिक संपत्ति के साथ उनका नाम जुड़ते ही यह संदेश गया कि उद्योग अब भी उन पर बड़े दांव लगाने को तैयार है।

लेकिन, अमीश त्रिपाठी के सार्वजनिक खंडन ने इस पूरे नैरेटिव को झटका दे दिया। इससे न सिर्फ खबर की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, बल्कि यह भी साफ हुआ कि हिंदी फिल्म उद्योग में ‘घोषित परियोजना’ और ‘वास्तव में साइन हुई परियोजना’ के बीच काफी बड़ा अंतर होता है। संभव है कि बातचीत चल रही हो, रुचि दिखाई गई हो या प्रारंभिक स्तर पर कुछ सहमति बनी हो। लेकिन जब तक अधिकारिक हस्ताक्षर न हों, तब तक किसी महत्वाकांक्षी फ्रेंचाइज़ी को तय मान लेना जोखिम भरा ही माना जाएगा।

फिलहाल इतना जरूर है कि इस पूरे प्रकरण ने रणवीर सिंह को एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया है। चाहे यह एक सुनियोजित पीआर रणनीति रही हो या समय से पहले बाहर आ गई उद्योग-चर्चा, लेकिन कुछ घंटों के लिए ही सही, हिंदी फिल्म उद्योग में यह माहौल जरूर बन गया था कि ‘धुरंधर’ के बाद रणवीर सिंह अब भारतीय पौराणिक सिनेमाई ब्रह्मांड के भी सबसे बड़े दावेदार बनने जा रहे हैं।

दिलचस्प यह भी है कि ‘द इम्मॉर्टल्स ऑफ मेलुहा’ का नाम पहली बार किसी फिल्म या वेब सीरीज रूपांतरण से नहीं जुड़ा है। इससे पहले भी करण जौहर की कंपनी इस उपन्यास श्रृंखला को बड़े परदे पर लाने की कोशिशों से जुड़ी रही थी। बाद में संजय लीला भंसाली के नाम को लेकर भी चर्चाएं चलीं कि वह इस विशाल पौराणिक संसार को सिनेमाई रूप देना चाहते हैं। इसके बाद शेखर कपूर ने भी ‘शिवा ट्रिलॉजी’ पर आधारित एक वेब सीरीज बनाने की घोषणा भी की थी।

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