संजय कुमार सिंह
आज की खबरों के अनुसार प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का नया कीर्तिमान बना है। प्रधानमंत्री एक्स जैसे जीवंत प्लैटफॉर्म पर खुश हैं और चर्चा, बहस, अंतर्दृष्टि, आशीर्वाद, रचनात्मक आलोचना का आनंद लेते हैं। यह सब तब है जब आज के अखबारों में ट्रम्प पर हमले की खबर प्रमुखता से है। यह खबर आज मेरे सभी अखबारों में लीड है और यही होना था। आज की अन्य प्रमुख खबरें हैं –
- मोदी समेत दुनिया भर के नेताओं ने हत्या की कोशिश पर आश्चर्य जताया
- मणिपुर में संदिग्ध आतंकियों के हमले में एक जवान शहीद, तीन जख्मी
- कश्मीर में घुसपैठ की कोशिश नाकाम. तीन आतंकी मारे गये
- दिल्ली के अस्पताल में मरीज की गोली मार कर हत्या, रिश्तेदारों का कहना है गलत पहचान के कारण हुई यह हत्या
- गुजरात के अवैध कोयला खान में दम घुटने से तीन मरे
- तमिलनाडु के बसपा नेता की हत्या में गिरफ्तार आरोपी मुठभेड़ में मरा
- राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या घटकर 86 रह गई, राजग 101
- दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में चौथे दिन भी पानी का संकट बना रहा आदि
इन खबरों से समझा जा सकता है कि प्रशासन कितना चुस्त-दुरुस्त और सतर्क है तथा सब चंगा सी। आज की कुछ कम महत्वपूर्ण खबरें हैं
– जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार खुला, मिले रत्न स्ट्रांग रूम में सील
– गजारा भत्ते पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नामंजूर
– सीयूईटी-यूजी के 1000 अभ्यर्थियों की परीक्षा फिर होगी
– एक्स पर पीएम मोदी के फॉलोअर 10 करोड़ पार
– हर साल एक लाख से ज्यादा युवा जुड़ रहे हैं संघ से
– जलवायु संकट बच्चों की पढ़ाई भी चौपट कर रहा है
– विपक्ष का मुकाबला करने की कोशिश में संविधान के 75 वर्ष पर जश्न
– सरकारी दफ्तर से ई-नोटिस मिले तो सावधान।
इस अंतिम खबर से मैं चौंका, ई मेल से नोटिस का क्या मतलब? खबर में बताया गया है कि ऐसे नोटिस ठगी के लिए भेजे जाते हैं और यह खबर जनता को सतर्क करने के लिए है। पर मामला यह है कि सरकार लोगों के एक वर्ग को एक तरह की ठगी से बचाने के लिए सतर्क करती है दूसरा वर्ग नए तरीके ढूंढ़ लेता है। काश, ठगी के शिकार लोगों के लिए कुछ किया गया होता। मुझे लगता है कि आज की देसी खबरों में सबसे महत्वपूर्ण सीयूईटी-यूजी की परीक्षा फिर से होने की खबर है। इसका भी आयोजन एनटीए करता है और यह इसके निकम्मेपन की पराकाष्ठा है कि हर साल हर परीक्षा में गड़बड़ हो जाती है जबकि इसके गठन का घोषित उद्देश्य बहुत ही आदर्शवादी और कुछ नया तथा अच्छा करने का था। पर जो हो रहा है उससे तो लगता है कि मकसद ही कुछ और था। 1000 अभ्यर्थियों के लिए फिर से परीक्षा कराने का कारण दो कॉलम की इस खबर में नहीं लिखा है। जाहिर है, जो विज्ञप्ति आई छप गई। सवाल पूछने का रिवाज ही नहीं है और मन की बात प्रसारित करने पर कोई सवाल नहीं है। यह मीडिया की स्थित है। खबर के अनुसार 250 अभ्यर्थी हजारीबाग के ओएसिस स्कूल के हैं। खबर इतनी ही होती तो फिर भी ठीक था। इसमें बताया गया है कि अभ्यर्थियों ने शिकायत की थी कि जो भाषा उन्होंने चुनी नहीं उसमें प्रश्न पत्र दिये गये। यही नहीं, गलत प्रश्नपत्र भी दिये गये। जाहिर है यह परीक्षा आयोजित करने की बुनियादी जरूरतों में भी नाकाम रहना है। आप कह सकते हैं कि यह सेंटर का दोष है, एनटीए का नहीं पर नीट के मामले में खबर थी कि नियमानुसार परीक्षा सेंटर में सीसीटीवी होने चाहिये पर नहीं थे। यह सुनिश्चित करना किसका काम था और क्यों नहीं थे – यही पर्याप्त है, एनटीए को निकम्मा कहने के लिए। फिर भी उससे काम कराया जा रहा है तो जो हो रहा है वह कोई आश्चर्य नहीं है।


