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फर्जी प्रमाणपत्र पर सांसद और झूठे हलफनामे पर मंत्री बने रहना मुमकिन है!!

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता का मामला अब साफ होता लग रहा है। 2004 से लेकर 2019 तक के चुनावी हलफमानों में उनकी शैक्षणिक योग्यता चर्चा का विषय रही है। उन पर झूठ बोलने के आरोप भी लगे। अब जब उन्होंने हलफनामे में मान लिया है कि स्नातक नहीं हैं तो सवाल उठता है कि क्या पिछली बार के चुनाव में गलत जानकारी देने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।? शुक्रवार को (12 अप्रैल) को कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाए कि स्मृति ईरानी ने अपनी वास्तविक शैक्षणिक जानकारियों को छिपाया और झूठ बोला। यह खबर 13 अप्रैल को दैनिक भास्कर में पहले पन्ने पर थी।

खबर के मुताबिक, कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने टीवी सीरियल क्यूंकि सास भी कभी बहु थी कि थीमलाइन पर ईरानी पर निशाना साधा और कहा एक नया सीरियल आने वाला है, क्योंकि मंत्री भी कभी ग्रेजुएट थीं। इसकी शुरुआती लाइन होगी- ‘क्वालिफिकेशन के भी रूप बदलते हैं, नए-नए सांचे में ढलते हैं। एक डिग्री आती है, एक डिग्री जाती है, बनते हलफनामे नए हैं…क्योंकि मंत्री भी कभी ग्रेजुएट थीं।’ यह साधारण मामला नहीं है। गलत हलफनामा बनवाना ही हलफनामे का महत्व खत्म कर देगा और फिर चुनाव के लिए भरे गए पर्चे की गलत जानकारी की पुष्टि के लिए गलत पर्चा भरा जाए तो मामला बहुत गंभीर है। हमारे देश में सारे नियम आम आदमी के लिए हैं। बड़े लोग कुछ भी करके बच सकते हैं।

द टेलीग्राफ का पहला पन्ना

इसलिए ऐसे मामलों में खबर को भी महत्व नहीं मिलता है। और तो और कांग्रेस के तंज पर स्मृति ईरानी ने कहा, ‘पिछले पांच सालों में उन्होंने मुझपर हर संभावित तरीके से हमला किया है। मेरा उन्हें केवल एक संदेश है कि आप मुझे जितना अपमानित और लज्जित करेंगे, मुझपर जितने हमले करेंगे उनता ज्यादा मैं अमेठी में कांग्रेस के खिलाफ काम करुंगी।’ पर इससे गलत हलफनामा देना सही नहीं हो जाएगा। यह मामला जितना गंभीर है उतना छपा नहीं है। और यह कोई पहला मामला नहीं है।

मध्यप्रदेश के बैतूल लोकसभा (एसटी) क्षेत्र से भाजपा सांसद ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाण-पत्र भी विवाद में है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले में सांसद को कई मौके दिए जाने के बाद भी जवाब नहीं मिलने पर सख्ती दिखाते हुए जांच के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश आलोक अराधे की एकलपीठ ने याचिका स्वीकार कर उच्च स्तरीय जांच समिति को आदेश देते हुए विधि अनुसार कार्यवाही के निर्देश दिए थे। अधिवक्ता शंकर पेंदाम की ओर से दायर मामले में 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में ज्योति धुर्वे ने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया था। उन्होंने अनुसूचित जन जाति वर्ग का जाति प्रमाण पत्र लगाया था। प्रमाण पत्र को कटघरे में रखते हुए उन्होंने चुनाव अधिकारी को छह अप्रैल 2009 को शिकायत दी, जो खारिज कर दी।

इसके खिलाफ उच्च स्तरीय जांच समिति में ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए शिकायत की गई। आखिरकार बैतूल कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने उनका प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया है। सरकार के जनजातीय कार्य विभाग की एक उच्चाधिकार छानबीन समिति ने सांसद ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने संबंधी अपने पिछले निर्णय को बरकरार रखा है। विभाग ने बैतूल जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए हैं। पर इसके आगे किसी कार्रवाई की सूचना नहीं है।

अमेठी लोकसभा सीट से अपने नामांकन में इस बार स्मृति ईरानी ने बताया है कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से 1994 में बैचलर ऑफ कॉमर्स पार्ट-1 की स्टूडेंट रही हैं और तीन साल के डिग्री कोर्स को पूरा नहीं किया। नेट पर उपलब्ध खबरों के अनुसार और यह सब वैसे भी चर्चा में रहा है कि 2004 से लेकर 2019 तक उनके बीए, बीकॉम और 12वीं पास का मसला जरूर अटका रहा है। इससे पहले 2004 में चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से नामांकन भरने के दौरान दौरान उन्होंने बताया था कि 1996 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ करेस्पॉन्डेंस से बैचलर ऑफ आर्ट किया है। जबकि, 2014 लोकसभा चुनाव में स्मृति ने बताया था कि उन्होंने 1994 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से बैचलर ऑफ कामर्स पार्ट-1 किया है। अब यहां कन्फ्यूजन की स्थिति हो गई थी कि ईरानी बैचलर ऑफ आर्ट्स की स्टूडेंट थीं या बैचलर ऑफ कॉमर्स की।

जब ईरानी 2011 में राज्यसभा सदस्य के तौर पर संसद पहुंच रहीं थीं, तब उन्होंने अपनी प्रोफाइल में बताया था कि उन्होंने दिल्ली के होली चाइल्ड एक्ज़िलियम स्कूल से शिक्षा हासिल की है और डीयू से करेस्पॉन्डेंस की शिक्षा ले रही हैं। स्कूल की पढ़ाई को लेकर उनकी तारीख और साल एक ही है। वर्तमान चुनावी हलफनामे में ईरानी ने जानकारी दी है कि उन्होंने 1991 में हाईस्कूल और 1993 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है। स्मृति ईरानी के 2004 के अलावा बाकी हलफनामों में लगभग एक ही जानकारी दी गई है। चुनावों में शैक्षणिक योग्यता को लेकर गलत जानकारी देने के मामले में पहली बार कांग्रेस ने उन्हें कटघरे में खड़ा किया था। उस दौरान 2014 में मोदी सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय जैसा बड़ा और अहम पोर्टफोलियो सौंपा था। इस दौरान कांग्रेस नेता अजय माकन ने ट्वीट करके कहा था कि स्मृति ईरानी ग्रेजुएट तक नहीं हैं। ईरानी का इस मसले पर कभी भी संतोषजनक जवाब नहीं रहा है।

स्मृति ईरानी के हलफनामें में शिक्षा को लेकर गुमराह करने का मामला कई बार तूल पकड़ चुका है। 2016 में उनके खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में मामला भी दर्ज कराया गया। इस दौरान जज ने शिकायतकर्ता की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अगर स्मृति ईरानी मंत्री नहीं होतीं, तो उन्हें तंग नहीं किया जाता। इस दौरान तमाम एक्टिविस्ट ने सूचना के अधिकार के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय से उनकी शैक्षणिक जानकारियां हासिल करने की कोशिश कीं। लेकिन, मुख्य सूचना आयुक्त को दिल्ली के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग ने जानकारी दी कि ईरानी (तत्कालीन मानव संधान एवं विकास मंत्री) ने उन्हें जानकारी साझा करने से मना किया है।

ईरानी के येल यूनिवर्सिटी से भी डिग्री हासिल करने का मामला मीडिया में उछला था, लेकिन इस चुनावी हलफनामें में येल यूनिवर्सिटी का जिक्र नहीं है। ऐसे में अब चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने के आरोप में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। मामला लखनऊ के कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष तौहीद सिद्दीकी ने दायर किया है। सिद्दीकी ने अपनी शिकायत में कहा, ‘स्मृति ईरानी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन के समय कहा था कि उन्होंने 1994 में दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ कॉमर्स में अपनी डिग्री पूरी की थी, लेकिन अब 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अपने हलफनामे में यह उल्लेख किया गया है कि उन्होंने अपनी डिग्री पूरी नहीं की है।’

केंद्रीय मंत्री पर चुनाव आयोग से झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए, सिद्दीकी ने कहा, ‘उन्होंने चुनाव आयोग से झूठ बोला है और अपने झूठ का हलफनामा भी प्रस्तुत किया है जो पूर्ण रूप से जालसाजी प्रतीत होता है और विश्वासघात का कार्य है।’ सिद्दीकी ने स्मृति ईरानी के खिलाफ उचित जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मांग की कि मैं आपके नोटिस लाना चाहता हूं कि मैं स्मृति जुबिन ईरानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रहा हूं और आपसे अनुरोध करता हूं कि उनके खिलाफ उचित जांच करें और उचित कार्रवाई करें।
केंद्रीय मंत्री ईरानी ने गुरुवार को लोकसभा चुनाव के लिए अमेठी संसदीय क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल किया था। अमेठी से तीन बार के सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। 2014 के आम चुनावों में, राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी को लगभग एक लाख वोटों से हराया था। इसलिए सरकार और सत्तारूढ़ दल की दिलचस्पी कानून के पालन में कम और चुनाव जीतने में ज्यादा है। फर्जी हलफनामे के जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री ने राहुल गांधी की डिग्री पर सवाल उठाया है और वह अखबारों में ठीक से छपा है।

ऐसे में मैं फ्रांस के एक अखबार की उस रिपोर्ट का क्या जिक्र करूं जिसमें कहा गया है कि रफाल सौदे के बाद अनिल अंबानी की कंपनी को टैक्स में छूट दी गई। यह खबर किस अखबार में कैसे छपी है, देखते हुए पता चला कि दैनिक हिन्दुस्तान ने इसका शीर्षक लगाया है, “विवाद रिलायंस को फ्रांस में टैक्स माफी पर कांग्रेस ने सवाल उठाए”। कहने की जरूरत नहीं है कि इतनी बड़ी खबर को कांग्रेस के आरोप के रूप में छापा गया है। और इस खबर का खंडन रक्षा मंत्रालय ने किया है। द टेलीग्राफ ने लिखा है कि खंडन तो प्रधानमंत्री या प्रधानमंत्री कार्यालय से आना चाहिए। पर और सुबह-सुबह भास्कर में पढ़ने को मिला, “जब वन रैंक वन पेंशन दिया है तो सेना का गौरव गान क्यों नहीं : मोदी”। ऐसे में खबर यही है कि अनिल अंबानी की कंपनी ने भी फ्रांस के अखबार की खबर का खंडन किया है।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट।

https://www.youtube.com/watch?v=YNAiMVfSAWA
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