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आज के अखबार : गढ़ी हुई खबरों से बेशर्म हेडलाइन मैनेजमेंट और इजराइल यात्रा पर एकतरफा ‘खबर’  

विदेशी अखबारों की राय में, भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा गहरे रणनीतिक बदलाव का प्रतीक है।  भारत और इस्राइल के बीच अरबों डॉलर के सौदे को ही हाईलाइट करना इस यात्रा के मूल उद्देश्य को छिपाने जैसा है। फिर भी इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी अपने भाषण में भारत के साथ सैन्य साझेदारी का संकेत दिया है।

संजय कुमार सिंह

आज मेरे सभी अखबारों में पहली और दूसरी बड़ी खबर एनसीईआरटी की किताब पर सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान और प्रधानमंत्री की इजराइल यात्रा की खबर है। द हिन्दू और अमर उजाला में इजराइल यात्रा की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। दोनों अखबारों ने एनसीईआरटी से संबंधित खबर को लीड बनाया है। नवोदय टाइम्स में, “भ्रष्टाचार के अध्याय वाली किताब पर सुप्रीम प्रबंध” शीर्षक खबर लीड है तो इजराइल यात्रा की खबर बराबर में, छोटे फौन्ट वाले शीर्षक के साथ पर चार कॉलम में ही है।  देशबन्धु में इजराइल यात्रा छह कॉलम में है और शीर्षक है, इजराइल में चलेगा भारतीय यूपीआई। इसके नीचे तीन कॉलम की खबर एनसीईआरटी की किताब है, केवल माफी काफी नहीं, जिम्मेदारों की पहचान जरूरी। इंडियन एक्सप्रेस ने इजराइल यात्रा की खबर को लीड बनाया है और शीर्षक है, ‘असाधारण रूप से उत्पादक’ : भारत और इजराइल ने संबंध बेहतर किए। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है, सुप्रीम कोर्ट ने किताब पर प्रतिबंध लगाया। एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी किया। मुख्य शीर्षक है, एनसीईआरटी की किताब पर सीजेआई ने कहा, “(जिम्मेदार लोगों के खिलाफ) कार्रवाई होनी चाहिए : प्रधानमंत्री बीच में आए, चाहते हैं कि जिम्मेदारी तय की जाए”। इसके साथ छपी खबर का शीर्षक है, “न्यायपालिका को कमजोर और अपमानित करने की सोची-समझी साजिश, गहन जांच की जरूरत है: सुप्रीम कोर्ट”। खबरों के अनुसार, कैबिनेट की बैठक में मोदी ने पता किया, पाठ्यपुस्तकों का काम कौन देख रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। इन खबरों के साथ मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत का कहा हाईलाइट किया गया है, यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई तो जनता की नजर में न्यायपालिका की गरिमा धूमिल हो जाएगी…।

साफ है कि एप्सटीन फाइल में प्रधानमंत्री की पिछली इजराइल यात्रा से संबंधित चर्चा, अमेरिका से भारत के करार और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से मित्रता के क्रम में राहुल गांधी के आरोप और इसमें कंप्रोमाइज्ड होने पर सरकार की चुप्पी तथा बचाव में पुराने मामलों की चर्चा बताती है कि सब कुछ ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले, सरकार के दबाव की चर्चा और उदाहरण तथा असम के मुख्यमंत्री और बिहार के चुनाव पर प्रशांत किशोर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख और एनसीईआरटी की किताब के मामले में स्वतः संज्ञान लिया जाना – बताता है कि बहुत कुछ सामान्य नहीं है। ऐसे में आज हेमंत बिस्व सरमा को गुवाहाटी हाईकोर्ट से नोटिस किए जाने की खबर महत्वपूर्ण है लेकिन पहले पन्ने पर नहीं है। अकले द हिन्दू ने बताया है कि खबर अंदर के पन्ने पर है और इसके साथ ही इजराइल यात्रा की खबर भी अंदर होने की सूचना है। लेकिन एनसीईआरटी की किताब के मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई लीड है क्योंकि यही खबर है। बाकी कई अखबारों में ऐसा नहीं है तो यह हेडलाइन मैनेजमेंट का प्रभाव लगता है। संभव है यह अब बिना कहे या बिना किए हो जा रहा हो। हालांकि यह अलग मुद्दा है। और मैं तथ्यों के आधार पर बात कर रहा हूं।

कहने की जरूरत नहीं है कि एक मुख्यमंत्री की मनमानी, घृणा और डर फैलाने वाली बातें तथा कार्रवाई पर स्वतः संज्ञान तो नहीं ही लिया गया। हाईकोर्ट जाने के लिए कहा गया और इस दौरान मुख्यमंत्री की सत्ता और ताकत से डरे लोगों को कोई राहत नहीं मिली, कार्रवाई तो अभी भी नहीं हुई है जबकि जनहित में, सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई हो सकती थी। यह सब तब हुआ जब मुख्यमंत्री अपने खिलाफ शिकायत करने वालों को भी धमकाते परेशान करते रहे। फिर भी आज जब नोटिस की खबर है तो वह भी अंदर के पन्ने पर। अन्य कारणों के साथ इसका एक कारण प्रधानमंत्री का इजराइल दौरा और एनसीईआरटी की कार्रवाई है जिसे सरकार ने खुद गलत माना है। इससे जो संदेश गया वह यही कि हेमंत बिस्व सरमा कुछ भी करके बचे रह सकते हैं। कार्रवाई की मांग करने वालों को परेशान कर सकते हैं और पाठ्य पुस्तकों के लिए सामग्री तय करने वाले पेशेवर गलत काम कर रहे हैं या उनसे गलत काम कराया जा रहा है।  

इसके अलावा, आज टाइम्स ऑफ इंडिया, दि एशियन एज और द टेलीग्राफ में इजराइल यात्रा की खबर लीड है जबकि हिन्दुस्तान टाइम्स और द हिन्दू की लीड एनसीईआरटी की खबर है। हिन्दी में शीर्षक क्रम से इस प्रकार होगा, भारत, इजराइल ने संबंध बेहतर बेहतर किया; प्रधानमंत्री ने गजा शांति योजना का समर्थन किया। दि एशियन एज का शीर्षक है – मोदी, नेतन्याहु की वार्ता के बीच भारत, इजराइल ने 17 करार किए। द टेलीग्राफ की लीड का शीर्षक है, गजा के पुनर्निर्माण में भारत ने भूमिका देखी। एनसीईआरटी की किताब से संबंधित खबरों के शीर्षक लगभग वही हैं जो इंडियन एक्सप्रेस की खबर है। लेकिन इजराइल की प्रधानमंत्री की यात्रा महत्वपूर्ण और अलग है। इस लिहाज से आज के अखबारों की खबर सिर्फ प्रशंसा है या एकतरफा है। अखबारों में जो छपा है उससे अलग, दुनिया भर के विश्लेषक इसमें भारत की विदेश नीति में बदलाव देख रहे हैं। डीबी लाइव के संपादक राजीव श्रीवास्तव ने अपने कार्यक्रम, हमारी राय में मोदी के इजराइल दौरे को देश की किरकिसी कहा है। इसमें वे कहते हैं, “राहुल गांधी ने पहले ही बता दिया है कि नरेन्द्र मोदी फिर से देश के हितों के खिलाफ सौदा करके आएंगे। इसके सबूत खुद मोदी ने दिए हैं। भारत की जनता को इजराइल के सामने इजराइल के साथ खड़ा दिखाया है। मोदी ने कहा मैं भारत की जनता की ओर से हर खोई हुई जान के लिए गहरी संवेदना लेकर आया हूं हम आपका दुख साझा करते हैं। उन्होंने नेतन्याहू के इजराइली आतंकवाद का जिक्र तक नहीं किया जबकि खुद इजराइल की जनता अपनी सरकार के ऐसे बर्बर रवैये के खिलाफ है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मोदी के भाषण पर उन्हें इतिहास की याद दिलाते हुए लिखा है उनके संबोधन में मेजबान यानी नेतन्याहू का बेशर्म बचाव था इजराइल में बसकर यहूदियों ने जिस तरह फिलिस्तीन के लोगों को उनके ही घर से बेदखल करने की लगातार कोशिश की और इसमें अमेरिका ने जैसे इजराइल को बढ़ावा दिया भारत कभी भी उसके पक्ष में नहीं रहा इसलिए इजराइल और फिलिस्तीन दोनों राष्ट्रों को भारत ने मान्यता दी मगर इजराइल से एक दूरी बना कर रखी। नैतिकता के नाते भारत हमेशा फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहा। आज नरेंद्र मोदी इस समीकरण को पूरी तरह बदल चुके हैं मोदी की यात्रा को एप्सटीन फाइल से जोड़ते हुए राहुल गांधी ने कहा है कि मोदी की यात्रा भारत के हितों के खिलाफ है। कांग्रेस ने मोदी की यात्रा को अमेरिका और भारत ट्रेड डील से भी जोड़ा है। 

इधर दुनिया के कई अरब विश्लेषकों की निगाह मोदी के दौरे पर है अरब मीडिया का कवरेज इस बात पर भी फोकस कर रहा है कि भारत का मौजूदा स्टैंड इजराइल और फिलिस्तीनियों के संबंध में उसके पारंपरिक स्टैंड से अलग जा रहा है। पूरी दुनिया के अखबार लिख रहे हैं। अल जजीरा अरेबिक में इजराइल और फिलिस्तीन मामलों के जानकार अजाम अबु अल अदस ने लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा गहरे रणनीतिक बदलाव का प्रतीक है भारत और इस्राइल के बीच अरबों डॉलर के सौदे को ही हाईलाइट करना इस यात्रा के मूल उद्देश्य को छिपाने जैसा है इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी अपने भाषण में भारत के साथ सैन्य साझेदारी का संकेत दिया। इससे साफ है कि इस क्षेत्र में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के संभावित गठबंधन को चुनौती पेश करने के लिए भारत और इस्राइल सहयोगी देशों के रूप में नजदीक आ रहे हैं। भारत में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए मोदी सरकार हिंदू राष्ट्रवाद का सहारा ले रही है। संयुक्त अरब अमीरात के गल्फ न्यूज ने लिखा है कि ये भारत की पहले की विदेश नीति से अलग अप्रोच को भी दिखाता है। भारत  ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीनियों को समर्थन देता रहा है और 1992 तक इजराइल के साथ भारत के पूर्ण कूटनीतिक रिश्ते तक नहीं थे लेकिन हाल के सालों में दोनों देश एक दूसरे के बहुत नजदीक पहुँचे हैं। गल्फ न्यूज ने भी यही लिखा है कि अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद इस्राइल के कई देशों से संबंध खराब हो गए थे और कई यूरोपीय देशों ने भी गजा में उसके हमलों की कड़ी आलोचना की थी। ऐसे में नेतन्याहू को उम्मीद है कि मोदी की यात्रा इस्राइल के प्रति अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ाने में मददगार साबित होगी। लंदन के द न्यू अरब ने लिखा है कि मोदी एक कट्टर हिंदू राष्ट्रवादी नेता हैं वो दुनिया के उन चंद नेताओं में शुमार हैं जिन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद सबसे पहले इजराइल के साथ एकजुटता दिखाई थी। अरबी भाषा के डिजिटल न्यूज वेबसाइट न्यूज रूम ने लिखा है 7 अक्टूबर के हमले के बाद कई पश्चिमी नेता इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मिलने जा चुके हैं लेकिन ग्लोबल साउथ के नेताओं की यात्राएं बहुत सीमित रही हैं। विश्लेषकों के अनुसार इस लिहाज से मोदी की यात्रा विशेष महत्व रखती है। ये टिप्पणियां बता रही हैं अलग अलग अखबारों की ये अलग अलग विश्लेषकों की कि दुनिया भी इस बात को नोटिस कर रही है कि मोदी भारत की विदेश नीति को पूरी तरह बदल रहे हैं। सवाल यही है कि आखिर ये सब किस कीमत पर हो रहा है और किसके कहने पर हो रहा है यानी किसके इशारे पर हो रहा है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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1 Comment

1 Comment

  1. Shambhu Arya

    February 28, 2026 at 8:04 am

    कुछ भी हो लेकिन हो बहुत बड़ा ” द्ल्ला ” पत्रकारिता से अच्छा होता घर को ” चकला घर ” बना लिया होता।

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