सहारा में उलटफेर : गौतम सरकार लुढ़के, राकेश की सेलरी कटी, बंका का बज रहा डंका, जैदी को नया कार्यभार, अशोक की वापसी

सहारा मीडिया में कुछ न कुछ चलता रहता है. कोई न कोई कांड होता रहता है. ताजी सूचना के मुताबिक सहारा मीडिया के सीओओ गौतम सरकार का तबादला लखनऊ में एचआर में कर दिया गया है. इसे एक तरह से पनिशमेंट पोस्टिंग कहा जा सकता है. आरोप है कि गौतम सरकार और ब्राडकास्ट इंजीनियरिंग वाले अन्य कुछ बड़े पदाधिकारियों ने मिलकर कुछ गड़बड़-घोटाला किया था. इस पर सहारा श्री सुब्रत राय ने एक्शन लेकर तीन को सैक कर दिया और गौतम सरकार को एचआर से अटैच कर दिया. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि उपेंद्र राय के आने के बाद गौतम सरकार को देर सबेर जाना ही था.

एक अन्य जानकारी के मुताबिक सहारा ग्रुप के पर्सनल विभाग के प्रमुख अधिकारी एए जैदी को सहारा मीडिया में एडमिन प्रिंट’ बनाए गए हैं. उधर, आई-नेक्स्ट लखनऊ से अशोक मिश्र ने इस्तीफा दे दिया है. वे फिर से राष्ट्रीय सहारा लौट आए हैं. बताया जाता है कि अशोक मिश्र लखनऊ में राष्ट्रीय सहारा अखबार में स्टेट क्राइम देखेंगे.

एक सूचना गोरखपुर से है. पता चला है कि राष्ट्रीय सहारा गोरखपुर के संपादक राकेश सिंह की एक दिन की सेलरी इसलिए काटी गई है क्योंकि उन्होंने खुद की फोटो फ्रंट पेज पर छाप ली थी. इस प्रकरण की जब भड़ास ने तहकीकात की तो पता चला कि राकेश के खिलाफ कई लोगों ने खुन्नस में साजिश कर बेमतलब बलि का बकरा बनाते हुए सेलरी कटवा दिया ताकि बदनाम कराया जा सके.

दरअसल जब सीएम योगी गोरखपुर के पत्रकारों से आनलाइन बात कर रहे थे तो उस बातचीत में गोरखपुर राष्ट्रीय सहारा के संपादक राकेश सिंह भी शरीक थे. इस बड़ी खबर की तस्वीर फ्रंट पेज पर जानी थी. योगी और संपादकों की तस्वीर छपी. इसी में राकेश की भी तस्वीर थी. ये एक तरह से न्यूज फोटो थी जो डिजर्व करती थी. लेकिन भाई लोगों ने इसे ‘खुद अपनी तस्वीर छपवाने’ टाइप मुद्दा बना दिया और घेरघार कर राकेश की एक दिन की सेलरी कटवा दी. दरअसल राकेश को जल्द ही गोरखपुर का संपादक बनाया गया है और इसे गोरखपुर से लेकर लखनऊ तक के ढेर सारे मठाधीश लोग पचा नहीं पा रहे हैं. इसलिए वे कुछ न कुछ मुद्दा निकालने के लिए रोजाना लेंस लेकर अखबार की समीक्षा करते रहते हैं.

वहीं गोरखपुर से एक अन्य सूचना है कि रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन पर यूनिट हेड की ड्यूटी बजा रहे पीयूष बंका की जन्मतिथि पासपोर्ट में कुछ और दर्ज है और दूसरे दस्तावेजों में कुछ अन्य है. बड्डे के इस अंतर का सकारात्मक इस्तेमाल करने हेतु पीयूष बंका ने अप्लीकेशन लगा दिया कि उनकी उमर तो अभी कम है, रिटायरमेंट में कुछ साल बाकी है. पर उनके कुछ ‘मित्रों’ ने बर्थडे फर्जीवाड़े के दस्तावेज सहारा के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दिए और पीयूष बंका का खेल खुल गया. सहारा का पुराना और निष्ठावान आदमी होने के नाते बंका पर कोई एक्शन तो नहीं हुआ लेकिन उन्हें हड़काया जरूर गया. बाद में उन्हें रिटायर करके एक्सटेंशन पर गोरखपुर यूनिट में बिठा दिया गया है.

वैसे, पीयूष बंका का गोरखपुर आफिस में इन दिनों बने रहना सहारा के उस आदेश का उल्लंघन है जिसमें लाकडाउन के इस दौर में साठ साल से उपर के लोगों को आफिस न बैठने के लिए निर्देश दिया गया है. राष्ट्रीय सहारा गोरखपुर के यूनिट प्रबंधक पीयूष बंका जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है, वे अस्थमा के भी मरीज हैं, संस्था व सरकार के निर्देश के बावजूद दफ्तर में आ रहे हैं. इससे वे खुद की और अन्य वर्करों की सेहत के लिए खतरा उत्पन्न कर रहे हैं.

पीयूष बंका पहले आफिस कम ही आते थे. वे ज्यादा समय गोरखपुर क्लब में रहते थे. ये क्लब के पदाधिकारियों में से एक हैं. पर इधर यहा नया संपादक आ जाने से इनको अपनी 25 साल की अपनी सल्तनत की जमीन खिसकती नजर आ रही है तो कोरोना लाकडाउन में वरिष्ठ नागरिक होने के बाद भी रोज दफ्तर आ रहे हैं जो चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि पीयूष बंका की यहां एक ऐसी टीम है जो किसी न किसी साजिश का शिकार यहाँ आने वाले संपादकों को बना ही देती है. फिलहाल चर्चा यही है कि राकेश सिंह कब तक यहां संपादक के रूप में टिके रहते हैं.



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One comment on “सहारा में उलटफेर : गौतम सरकार लुढ़के, राकेश की सेलरी कटी, बंका का बज रहा डंका, जैदी को नया कार्यभार, अशोक की वापसी”

  • इंसाफ , दिल्ली says:

    यहां तो हम्व्षा योग्य कर्मी का हिस्सा वरिष्ठ खा जाते है. कई उदहारण है.जिनका एच आर लखनऊ में तबादला हुआ उन्होंने पटना यूनिट हेड के १० हजार रुपये बढवा दिए. यही पटना ने उर्दू सेक्शन में एक रिपोर्टर के ५ हजार बढवा दिए. उच्च प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं है. काम कोई करता है उसके नाम पर उठता कोई और है. सहारा में सरप्लस कर्मी है पर extention धरले से मिल रहा है. मौजूदा समय में ६० पर कर्मी से काम न लेने का सर्कुलर जार है पर ६० वाले उपरी कमाई के लिए ऑफिस आ रहे हैं. कोई देखनेवाला नहीं है. यदि ६० वाले दम तोड़ दे तो कंपनी कि बदनामी के साथ ये लोग हर्जाना भी वसूल करेंगें. इस मामले में कंपनी को गंभीर होना चाहिए. कई कर्मी अपने डेस्क के पास ही मुंह हाँथ धोते है. कुल्ला करते है. जबकि सरकार ने सार्वजनिक स्थल पर थूकने पर जेल का प्रावधान किया है. ये कामचोर लोग गलत शिकायत कर वरिष्ठों के आंख पर पर्दा दल देते हैं. काम करनेवाले को कहां फुर्सत कि इन कामचोरों का असली चेहरा सामने रखे.

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