
सुजीत सिंह प्रिंस-
यूपी में भ्रष्टाचार किस विभाग में चरम पर नहीं है, यह यक्ष प्रश्न है जिसका तुरंत जवाब दे पाना किसी के लिए भी मुश्किल होगा. बिजली विभाग तो गजब ही भ्रष्ट है. उपर से लेकर नीचे तक लुटेरे बैठे हैं. स्वास्थ्य विभाग का हाल किसी से छुपा नहीं है. झांसी वाला बच्चा कांड सबके सामने है. पुलिस और राजस्व विभाग के क्या कहने. जितना कहो उतना ही कम. पर जो कम भ्रष्ट और शांत विभाग माने जाते हैं, वहां भी भ्रष्टाचार का परनाला बह रहा है. बेसिक शिक्षा विभाग में प्रदेश के एक सीमावर्ती और उपेक्षित जिले का हाल जानकर आप पूरे प्रदेश में होने वाले भ्रष्टाचार का अंदाजा लगा सकते हैं. इस विभाग में उगाही के लिए एकमात्र शिकार बनते हैं शिक्षक.
जिला गाजीपुर में जिला स्तरीय खेलकूद कराने के लिए शासन से पैसा आया है लेकिन बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव अपने गुर्गों के जरिए पूरे जिले में मास्टरों के बीच उगाही अभियान चलवाए हुए हैं. सूत्र बताते हैं कि एक करोड़ रुपये का टारगेट है. इसमें आराम से पचास साठ लाख रुपये अफसर बचाकर उपर नीचे आपस में बांटकर पी जाते हैं.
गाजीपुर जिले के किसी भी प्राइमरी और मिडिल स्कूल के शिक्षक से पूछ लीजिए. वे बताएंगे कि उन्हें इस महीने खेलकूद के नाम पर पांच सौ रुपये देना है. पांच सौ रुपये फिक्स नहीं है. किसी ब्लाक में ये राशि हजार रुपये है तो किसी में पंद्रह सौ. कहीं कहीं पांच सौ रुपये हैं. अनुचरों को भी पांच सौ रुपये देने हैं. अनुचर माने चपरासी.
गाजीपुर जिले में करीब दस हजार शिक्षक हैं. पांच सौ रुपये से पंद्रह सौ रुपये तक प्रति शिक्षक उगाही का अगर एवरेज भी कर दें, हजार रुपये प्रति शिक्षक तो उगाही राशि एक करोड़ रुपये बैठती है. शिक्षकों के वाट्सअप ग्रुपों में बाकायाद लिख लिख कर उगाही की रकम देने की अपील की जा रही है. कुछ स्क्रीनशाट देखें-

कृपया सहयोग राशि को उगाही राशि पढ़ें.

जिले के शिक्षकों के वाट्सअप ग्रुपों में बाकायाद निर्देश जारी कर पैसे की वसूली की जा रही है.

पत्र को ध्यान से पढ़ें, प्रति शिक्षक हजार रुपये और प्रति अनुचर पांच सौ रुपये.
अफसरशाही के चक्रब्यूह में फंसे शिक्षक बेचारे इतने पीड़ित प्रताड़ित होते हैं कि उनकी हिम्मत नहीं कि वे उगाही की राशि देने से मना कर सकें. बेसिक शिक्षा विभाग के जिला के छोटे बड़े अफसरों के उगाही के सहयोगी हाथ भी इन्हीं शिक्षकों में से ही कुछ दलाल किस्म के शिक्षक बन जाते हैं.
पता चला है कि एक अफसर के यहां कुछ शिक्षक नेता सब्जी छीलते, रोटी पकाते पाए जाते हैं. ऐसे शिक्षक नेताओं से क्या उम्मीद करेंगे जो अफसरों की तेल मालिश से लेकर उनका किचन संभालने तक का काम करते हैं.
वहीं जो शिक्षक नेता शिक्षकों की समस्याओं पर लड़भिड़ सकते हैं उनके बीच अफसरों ने फूट डाल रखी है या उन्हें डरा रखा है. पिछले एक बरस में आधा दर्जन शिक्षक नेताओं को विभिन्न कारणों से सस्पेंड किया गया. ये वो शिक्षक नेता हैं जो रीढ़ सीधी रखते हैं और सच को सच की तरह बोल कह देते हैं. तो ऐसे सत्यवादी लोग शिक्षा विभाग के अफसरों को पसंद नहीं. उन्हें तो प्रतिदिन वसूली कराने वाले, तेल-मक्खन लगाने वाले और शिक्षकों की मुखबिरी करने वाले शिक्षक नेता पसंद हैं.
पिछले दिनों एक शिक्षक नेता को बिना वजह सस्पेंड कर दिया गया. पता चला कि ब्लाक लेवल के एक शिक्षा अधिकारी ने बिना पिटे ही आरोप लगा दिया कि उन्हें पीटा गया है. वहीं शिक्षकों का कहना है कि अगर सही में पिटाई हो गई होती तो शिक्षा अधिकारी इलाके में दिखाई ही नहीं देते. सस्पेंसन बिना वजह केवल डराने के लिए किया गया है ताकि अफसरों की चौतरफा वसूली में कोई कमी न आए.
जिला स्तरीय एक करोड़ रुपये महावसूली अभियान को लेकर स्थानीय पोर्टलों-अखबारों में खबरें छपी हैं लेकिन इन खबरों से कोई फरक नहीं पड़ता क्योंकि शिक्षा अफसरों ने बड़े अखबारों और बड़े चैनलों के स्थानीय कर्ताधर्ताओं को सेट कर रखा है. छुटभैये पोर्टलों और छोटे अखबारों पर प्रकाशित खबरों को उतना व्यापक असर नहीं हो पाता. इसलिए वसूली के महाभियान पर कहीं से कोई संकट क्रिएट होता नहीं दिख रहा है.
ये बात सिर्फ गाजीपुर जिले का नहीं है. बस्ती जिले में भी ऐसा ही कुछ वसूली अभियान चला. मीडिया में इसकी खबरें भी आईं, देखें ये स्क्रीनशाट-

महाराजगंज जिले में जब ऐसा ही वसूली महाभियान शुरू हुआ तो बीएसए ने एक आदेश जारी कर ऐसी किसी वसूली से इनकार किया और शिक्षकों से पैसा न देने की अपील की. देखें आदेश का स्क्रीनशाट-

वहीं गाजीपुर जिले के बीएसए महोदय को भड़ास की तरफ से अड़तालीस घंटे पहले वाट्सअप पर इस वसूली महाभियान के बारे में कुछ बोलने कुछ बताने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है. जैसे ही उनका जवाब आ जाता है, इस खबर में जोड़ दिया जाएगा.

बीएसए हेमंत राव : भ्रष्टाचार की मुस्कान!
अब देखें गाजीपुर के लोकल पोर्टलों-अखबारों में छपी खबरों का स्क्रीनशाट-







एक भाई ने तो इस लूटकांड को लेकर यूट्यूब पर वीडियो भी बनाकर डाल दिया है, देखें-
गाजीपुर के शिक्षकों के वाट्सअप ग्रुप में एक शिक्षक लिखते हैं-
”इस साल भी कायदे से वसूला जाएगा. फिर उसके बाद छिटपुट पेपरबाजी होगी. फिर जांच कर कार्रवाई करने की बात सामने आएगी. और सब कुछ रद्दी की टोकरी में चला जाएगा. खेल के नाम पर यह खेला चलता रहेगा और हम लोग व्हाट्सएप व्हाट्सएप खेलते रहेंगे.”
वाट्सअप ग्रुप में ही एक अन्य शिक्षक की टिप्पणी-
“‘सैदपुर (गाजीपुर) में भी सभी अध्यापकों से 500 खेलकूद प्रतियोगिता आयोजन के लिए लिया जा रहा है जो कि बिल्कुल गलत है. इसके लिए शासन से पर्याप्त बजट आता है.”
सवाल है कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टारलेंस की नीति पर खुलेआम चूना लगा रहे इन भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ शासन स्तर से कोई जांच, कोई कार्रवाई होगी या इन्हें यूं ही नंगई करने के लिए बेलगाम छोड़ दिया जाएगा?
इस प्रकरण को लेकर गाजीपुर के सोशल एक्टिविस्ट उमेश श्रीवास्तव कहते हैं- गाजीपुर प्रदेश में एक कोने में पड़ा हुआ खबरों से दूर का जिला है. यहां जो अफसर आता है, दबा कर दोनों हाथ कमाता है और फिर एक दिन अपने मायाजाल समेत ट्रांसफर ले लेता है. रह जाती हैं यहां उसके भ्रष्टाचार की अंतहीन कहानियां. वर्तमान बीएसए हेमंत राव के आफिस में और घर में, जितने लोग काम करते हैं, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष, केवल उनकी जांच करा दी जाए, पता चल जाएगा कि किस लेवल पर खेल चल रहा है. शिक्षा विभाग आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा विभाग है. किसी की हैसियत नहीं जो इन भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई कर दे क्योंकि इनके भ्रष्टाचार के हाथ बहुत लंबे हैं, बहुत उपर तक हैं और बहुत मखमली हैं. ऐसे में शासन कोई हो, भ्रष्टाचारी अफसरों का जैजै चलता रहता है.
जारी…
अगले भाग में गाजीपुर में बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की कुछ अन्य कहानियां पढ़ने के लिए इंतजार करें!
गाजीपुर से भड़ास संवाददाता सुजीत सिंह प्रिंस की रिपोर्ट. संपर्क- 9451677071
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