
राहुल गौर-
खेल ख़त्म, पैसा हज़म! 38400 रुपये दो रातों के रिसोर्ट में ठहरने के के लिए! मतलब 18200 रुपये एक रात ठहरने के लिए ! आने जाने का अलग!
अगर आपसे पूछा जाए कि आप परिवार के साथ 38200 में कहाँ कहाँ घूमने जा सकते हैं , आपके दिमाग़ में सैकड़ों जगह आजाएँगी कि 38000 में तो पूरे परिवार के साथ ये जगह घूम के आ सकता हूँ , वो जगह घूम के आ सकता हूँ , परिवार को बेहतर समय दे सकता हूँ और ना जाने क्या क्या.
लेकिन जब हमारा सोचने का दायरा ख़त्म हो जाता है बस वहीं हम ठगे जाते हैं.
ये सोचने का दायरा ख़त्म होता नहीं कर दिया जाता है , ऐसा काम ठगों द्वारा किया जाता है ऐसी बातें करेंगे कि लगेगा कि ये मेरे अपने हैं बढ़िया संबंध हैं ये जो कह रहे हैं बिल्कुल सही है.
जैसे ही भरोसा होगा वैसे ही सोचने समझने की क्षमता ख़त्म हो जाएगी , लेकिन जब सोच विचार किया जाएगा तब तक देर हो चुकी होती है और ठगे महसूस होने लगता है.

पिछले साल आज ही के दिन ठगियों ने बड़ा ज़ाल फेंका. फ़ेसबुक ग्रुप ‘घुमक्कड़ी ज़िंदाबाद’ में 1 लाख सदस्य पूरे हुए , उसका जश्न उदयपुर में मनाने का प्लान किया , जिसमें लोगों को शामिल होने के एक रूम के 9100 रुपये रखे गये , आना जाना और बाक़ी खर्चे अलग.
अब भाई घुमक्कड़ी समूह के एक लाख सदस्य पूरे हुए तो ख़ुशी एडमिन मॉडरेटर , एक्सपर्ट की थी , उसमें सदस्यों का क्या लेना देना.
ऐसे मान लो किसी के घर में कोई जश्न का समारोह है तो आप किसी को शामिल करना चाहते हैं तो उसे अपने जश्न में बुलाने के पैसे लेंगे ??
लेकिन घुमक्कड़ी ज़िंदाबाद के ठगियों ने महीनों पहले से 1 लाख सदस्य पूरा होने का माहौल बनाया , बताया गया कि विश्व का सबसे बड़ा ग्रुप है , हम बहुत बड़े सेलिब्रेटी हैं , करोड़ों का बिज़नेस है , 100 करोड़ का अगला टारगेट है , भारत के सभी ट्रैवल कम्पनीज़ को पीछे छोड़ देंगे.

जब एक लाख हुए , ठगिये निकल पड़े ऐसी जगह की तलाश में जहाँ ये। जश्न मनाया जाये , हफ़्ते भर उस समूह के मालिक नीरज मुसाफ़िर और कमल रामवानी सारांश ने वो जगह खोज निकाली जहाँ से सबसे ज़्यादा ठगी की जा सकती थी.
कायदा ये होता है कि जब ऐसा प्रोग्राम करें भी तो हमसे जुड़े लोगों का फ़ायदा हो , किसी भी रिसोर्ट का सिलेक्शन भी करें वो तब करें जब उसका ऑफ सीज़न हो , दाम बहुत कम हों , जिससे जुड़े सदस्य उसका फ़ायदा उठा सकें.
लेकिन वहीं ठग क्या करेंगे , ऑफ सीजन में अपने क्लाइंट को जम कर निचोड़ सकें.
मुसाफ़िर और रामवानी दोनों ने रिसोर्ट खोजा जस्टा राजपूताना , ऑफ़ सीजन का दिमाग़ लगाया कि नवरात्र में ठीक रहेगा , ज़्यादातर लोग नवरात्र में घर पर माता को पीठ देकर कहीं नहीं जाते , उसवक्त रिसोर्ट ख़ाली पड़े रहते हैं.
ठगियों ने सस्ते मद्दे में वो पूरा रिसोर्ट बुक करवा लिया , अब अब उसदिन के लिए किसी भी वेबसाइट से बुक करेंगे तो फ़ुल दिखाएगा.
जो रूम 4000 में दो लोगों के रहने के लिए मिल सकता था उसकी क़ीमत सीधी 9100 कर दी.
पब्लिक को तो पहले ही ब्रेनवाश कर चुके थे , पब्लिक 9100 में भी तैयार!
अब जो लोग परिवार में 4 सदस्य थे उनको 2 रूम दिये गये , 18200 एक रात मात्र ठहरने के.
लोगों ने सोचा कि वहाँ जश्न भी हो जश्न भी हो जाएगा और परिवार के साथ उदयपुर घूमना भी हो जाएगा.
पर ऐसे लोगों ने दो दिन के लिए इस जश्न में हिस्सेदारी दी उनको 38400 रुपये देने पड़े.
बदले में मिला क्या , दोनों दिन सिर्फ़ होटल के अंदर रहना , इन ठगियों की ज़बरदस्ती बातें सुनना , ठगियों की तारीफ़ें करना.
भाई उदयपुर गये हो तो उदयपुर देखना भी तो बनता है लेकिन उदयपुर में कुछ देखने की जगह जस्टा राजपूताना रिसोर्ट देख कर आ गये.
रिसोर्ट में से चेक आउट करते ही सबकी अपनी अपनी वापसी की टिकट थी , चेक आउट करते ही कह दिया.
खेल ख़त्म पैसा हज़म !
तब याद आया कि इतने पैसे में तो हम ये घूम आते , हम वो घूम आते.
बाद में यही ठगिये यहाँ ठग कर वापस अपने परिवार के साथ घूमने गए.
मतलब उदयपुर का नाम लेकर लोगों को ऐसे फँसाया कि जैसे उदयपुर घुमाने के एक दिन के 9100 ले रहे हैं.
पर पता चला कि वो तो सिर्फ़ रिसोर्ट के हैं , आपको रिसोर्ट में ही रहना है , कहीं जाना नहीं.
अगर ख़ुद से परिवार के साथ उदयपुर की ट्रिप बनाते तो पूरा उदयपुर भी घूम आते और कुछ बचा भी लेते , पर ठगियों की बातों में आकर रिसोर्ट घूमने को ही उदयपुर समझ कर घूम आए.
अरे रिसोर्ट ही घूमना था तो दिल्ली से नैनीताल तक एक से एक बेहतर रिसोर्ट हैं वहाँ चले जाते , आने जाने का भाड़ा भी बच जाता.
देखो आप उदयपुर नहीं गये थे , ठगियों को उदयपुर में सबसे बढ़िया डील मिली थी इसलिए आपको वहाँ उदयपुर के नाम से ले ज़ाया गया.
उन्हें उदयपुर दिखाने से मतलब नहीं था उन्हें मतलब था कि एक लाख के नाम पर आपकी ज़ेब ज़्यादा से ज़्यादा ढीली कैसे हो.
अब जितु भैया का स्क्रीनशॉट पड़ा है 38400 देकर ये तो गये भी नहीं , ठगिये बिना गये इनके पैसे डकार गये.
आज ये बात इसलिए लिख रहा हूँ , कि ठगिये फिर से ऐक्टिव हो गये हैं , फिर से लोगों को लूटने का प्लान कर रहे हैं , फिर से झाँसा देंगे , हो सकता है इसबार आपको सिक्किम गोवाहाटी बोल कर बुकिंग करवा लें , बदले में किसी रिसोर्ट में बंद कर दें.
फिर चेक आउट कर के कह दें कि ख़ेल ख़त्म , पैसा हज़्म !
मेरी पोस्ट पढ़ कर ठगिये कहेंगे कि उसदिन जस्टा राजपूताना के रेट्स ज़्यादा थे.
अबे ज़्यादा थे तो कौनसा ब्याह का महूरत निकले जा रहा था , जिस वक़्त जस्टा राजपूताना अपने रेट डाउन करता तब बुक कर लेता.
पर असल बात तो ये है कि नवरात्र में रेट इससे भी सस्ते थे , जिसका फ़ायदा नीरज मुसाफ़िर और कमल रामवानी ने उठाया , लोगों को बेवकूफ़ बनाया.
सही है भाई
खेल ख़त्म , पैसा हज़म !




एक साल हो गया … पिछले साल आज ही के दिन उदयपुर में लूटा गया था , सबूतों के आधार पर ये एक ठगी इवेंट था , जिस में दिल खोल कर लूटा गया था.
इतनी लूट मचाई कि साल भर का कोटा पूरा उसी इवेंट से कर किया था , 3000 के रूम को 9600 रुपये में बेचा गया था , जिसके पास 9600 नहीं थे उसको एक रूम में अंजान व्यक्ति के साथ शेयरिंग करनी पड़ी.
जहाँ ख़ुद से रूम लेते रिसोर्ट में तो 3000 में पूरा रूम मिल जाता , लेकिन ठगों को 4800 रुपये देकर भी अंजान व्यक्ति के साथ रात बितानी पड़ी , कुछ लोग तो दूसरे के साथ रूम शेयरिंग में सहज महसूस नहीं कर रहे थे.
कुछ लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पाये थे , उन्होंने बताया जिसके साथ रूम शेयर किया वो व्यक्ति ट्रेन में खर्राटे लेते हैं वैसे ले रहा था , उतने पैसे भी गये और नींद भी पूरी नहीं हुई.
नीरज कुमार और कमल रामवानी सारांश दोनों ने मिल कर लोगों को ठगा , जिसने भी आवाज़ उठाई उसे ब्लॉक कर दिया.
इससे पहली पोस्ट में मैंने बताया भी कि ठगों की क्या प्लानिंग रही , कैसे इवेंट को लेकर भोकाल मचाया , इन ठगियों के गिरोह को पता था कि नवरात्र में लोग अपने घर में देवी माता की पूजा पाठ करते हैं , बहुत ही कम लोग घर से निकलते हैं , हमारे यहाँ तो कहते हैं माता को पीठ देकर घर से कभी नहीं जाते नवरात्र में ,
तो नवरात्र में स्वाभाविक है कि ट्रैवल इंडस्ट्री का ऑफ सीज़न हो जाता है.
मुसाफ़िर के गिरोह ने नवरात्र के ऑफ सीजन का फ़ायदा उठाया , सबसे सस्ता रिसोर्ट लेकर घुमक्कड़ी ज़िंदाबाद के सदस्यों को 3 गुने महँगे में बेच दिया.
मतलब 3000 का रूम 9600 में , लोगों को लगा कि उदयपुर जा रहे हैं उदयपुर घूमेंगे , वहाँ पता चला कि रिसोर्ट घूम कर आ गये , चार सदस्यों की फ़ैमिली से दो रातों के 38400 रुपये लिये गये , इसमें घूमने के लिए क्या मिला ?? सिर्फ़ रिसोर्ट.
घर से हल्ला मचा कर गये थे कि उदयपुर जा रहे हैं , सोचे थे कि घूमेंगे , वहाँ तो माहौल ही अलग था , पैसे भी गये , समय भी गया , ख़ुद से वहाँ रहने जाते तो 3000 में भी उस रिसोर्ट का आनंद मिल जाता और बाहर उदयपुर घूमना भी हो जाता.
चलो छोड़ो ये बातें.
नई बात ये है कि इन ठगों को पिछली बार की तरह फिर से लोगों को ठगना है , फिर से मोटी कमाई करनी है , इसलिए फिर से ऐक्टिव हो गये हैं , फिर से माहौल बनाया जा रहा है.
क़ोशिश इन्होंने मिल कर ख़ूब की पर जहाज़ी ने इनकी पोल खोल चालू रखी तो कर नहीं पाये , चूँकि अब इनके कान में किसी ने फूंक मार दी है कि बिना ठगे घर में फाँके के लाले पड़ जाएँगे इसलिए ठगना ज़रूरी है.
कमल रामवानी सारांश तो कह फाहा है कि इवेंट शानदार रही ,, 120 लोग रिसोर्ट में रहे , 30 लोग दिन में विज़िट के किए आये , हालाँकि दिन में विज़िट वालों को भी इनसे मिलने के नाम पर लूटा , मतलब ये ठग क़तई सेलिब्रिटी हो रहे थे , इनसे मिलने के लिए पैसे देने पड़े लोगों को.
अब आप कमल रामवानी सारांश का स्क्रीनशॉट देखिए कि उसके फिर से भोकाल मचाती पोस्ट पर 39 likes आये हैं , मतलब 150 लोग वहाँ गए थे वो भी इस पोस्ट से दूरी बनाये हुए हैं , अब कोई नहीं कर रहा वाहवाही.
ठगियों के किए ये यादगार इसकिये था कि इन्होंने जम कर लूटा , वहाँ जाने वालों के लिए इसलिए यादगार हो गया कि जम कर लुट गये.
जिसने मेरी कल रात वाली पोस्ट नहीं पढ़ी उसे पढ़ो मज़ा आएगा , कल देर रात डाली थी , आपकी आँखें खुली रह जायेंगी ठगों के बारे में जान कर.
जो लोग उदयपुर गये थे उनको जब आज ये पता लगेगा कि जिस रूम के 9600 दिये थे उसकी क़ीमत 3000 से कम है तो ख़ुद के मूर्ख बनने पर शरम आएगी , जिनको शरम नहीं आये वो अपनी प्रॉपर्टी ठगियों को दान में दे दे हमें क्या , लेकिन 3000 में पूरा रूम लेकर दो लोग रह सकते है तो 9600 देकर रहना बेवकूफ़ी ही है.


