जागरण के पत्रकार ने नोएडा के उप श्रमायुक्त की श्रम सचिव और श्रमायुक्त से की लिखित शिकायत

मजीठिया मामले में अपने को पूरी तरह से घ‍िरा पाकर दैनिक जागरण प्रबंधन इतना बौखला गया है कि अब वह हमला कराने, घूसखोरी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने पर उतर आया है। इस बात के संकेत उस जांच रिपोर्ट से मिल रहे हैं, जिसके लिए जागरण के पत्रकार श्रीकांत सिंह ने उप श्रम आयुक्त को प्रार्थना पत्र दिया था। जांच के लिए पिछले 21 फरवरी 2015 को श्रम प्रवर्तन अध‍िकारी राधे श्याम सिंह भेजे गए थे। यह अफसर इतना घूसखोर निकला कि उसने पूरी जांच रिपोर्ट ही फर्जी तथ्यों के आधार पर बना दी। उसने जांच रिपोर्ट में बतौर गवाह जिन लोगों के नाम शामिल किए हैं, उनमें से कोई भी घटना के मौके पर मौजूद नहीं था।

इस बात के पुख्ता प्रमाण श्रीकांत सिंह के पास हैं, क्योंकि उन्होंने मौके की फोटोग्राफी भी अपने स्मार्ट फोन से कर ली थी। इन गवाहों में दो लोग तो घटना के दिन बरेली में थे और एक सहयोगी अवकाश पर थे। नोएडा के उप श्रम आयुक्त कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार से लोगों में रोष व्याप्त है क्योंकि इसी विभाग पर सताए जा रहे श्रमिकों को राहत पहुंचाने की जिम्मेवारी होती है। यह जानकारी सीबीआई को भी दे दी गई है। अब देखना यह है कि इन भ्रष्ट अफसरों पर कब और कहां से कार्रवाई होती है। श्रम आयुक्त से जो श‍िकायत की गई है, वह मूल रूप में नीचे दी जा रही है। श्रम प्रवर्तन अध‍िकारी की जांच रिपोर्ट आप खुद देखें, सच का पता अपने आप चल जाएगा। 

सेवा में,
श्रम आयुक्त महोदय
विषय : दैनिक जागरण प्रबंधन के इशारे पर मुझे नौकरी से निकाले जाने की साजिश की गलत जांच रिपोर्ट देने के बारे में
मान्यवर,

निवेदन है कि मैं पिछले 20 वर्षों से दैनिक जागरण की नोएडा यूनिट में कार्य कर रहा हूं और इस समय मुख्य उपसंपादक के पद पर कार्यरत हूं। मजीठिया वेतन आयोग के अनुसार वेतन देने से बचने और इस संदर्भ में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन करने के लिए दैनिक जागरण प्रबंधन मुझे नौकरी से निकालने की साजिश रच रहा है। इस संदर्भ में मैंने जब नोएडा के उप श्रम आयुक्त कार्यालय में अर्जी दी तो उसकी गलत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। जब मैंने जांच रिपोर्ट पर एतराज जताया तो मुझे उप श्रम आयुक्त कार्यालय में अपमानित किया गया। इसलिए मजबूर होकर मुझे आपको आवेदन देना पड़ रहा है। आशा है मेरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अनुकंपा करेंगे। मामला इस प्रकार है-

1-28 दिसंबर 2013 को मेरा तबादला जम्मू कर दिया गया, लेकिन मेरे तबादले की कोई सूचना अथवा डाटा जम्मू नहीं भेजा गया और उसके लिए मुझे अप्रैल 2014 तक परेशान किया गया। इस दौरान मुझे कोई वेतन नहीं दिया गया, जिससे मेरी माली हालत बहुत खराब हो गई। परिवार और सामान के साथ जम्मू जाने के लिए मुझे न तो कोई खर्च दिया गया और न ही कोई पदोन्नति अथवा वेतन बढ़ोतरी दी गई। ऐसी हालत में परिवार के साथ जम्मू स्थानांतरित होना संभव नहीं था। मुझे इस समय मात्र 25 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है, जिसमें जम्मू का 10 हजार रुपये खर्च और बढ़ गया। मुझे इस आश्वासन के साथ जम्मू भेजा गया कि मेरी माली हालत सुधारने के लिए क्षतिपूर्ति की जाएगी, जिस पर आज तक कोई विचार नहीं किया गया।

2-नोएडा कार्यालय के इशारे पर मुझे जम्मू कार्यालय में उठवा लेने की धमकी दी गई और मुझे अशुद्ध पानी पीने के लिए मजबूर किया गया। मेरी तबीयत खराब होने लगी तो मैंने पानी की शुद्धता पर सवाल उठाया। इस पर वहां के महाप्रबंधक ने मुझे धमकाया और पानी के मामले में माफीनामा लिखवा लिया। यह बात मैंने नोएडा कार्यालय को बताई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस बात की जांच जम्मू कार्यालय के कर्मचारियों और मेरी मेडिकल जांच रिपोर्ट से की जा सकती है।

3-इसी बीच 7 फरवरी 2015 को जागरण प्रबंधन की प्रताड़ना के विरोध में नोएडा कार्यालय के कर्मचारियों ने काम बंद हड़ताल कर दी। हड़ताल वापस लेने के लिए दैनिक जागरण प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच समझौता हुआ। समझौते के तहत प्रताडि़त करने के लिए हाल में किए गए तबादले वापस लिए जाने थे। उसी के तहत मुझे 10 फरवरी 2015 को बातचीत के लिए बुलाया गया था। जब मैं कार्यालय में प्रवेश करने लगा तो गार्डों से मुझ पर हमला करा दिया गया और मेरी जेब से 36 हजार रुपये निकाल लिए गए। मैंने मौके पर पुलिस पीसीआर वैन बुला ली, लेकिन गार्डों ने कार्यालय का गेट अंदर से बंद कर लिया और पुलिस को जांच में कोई सहयोग नहीं दिया गया।

4-मेरे आवेदन पर उप श्रम आयुक्त कार्यालय, नोएडा से 21 फरवरी 2015 को श्रम प्रवर्तन अफसर राधे श्याम सिंह को जांच के लिए भेजा गया, लेकिन उन्होंने ठीक से पूछताछ किए बगैर दैनिक जागरण प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी और मेरी समस्या पर कोई विचार नहीं किया। मैंने दैनिक जागरण, नोएडा के महाप्रबंधक श्री नीतेंद्र श्रीवास्तव और कार्मिक प्रबंधक श्री रमेश कुमार कुमावत को मेल भेज कर अपने पक्ष से अवगत कराया, लेकिन मुझे न तो मेल का कोई जवाब दिया गया और न ही मुझे कार्यालय में प्रवेश करने दिया जा रहा है। इस प्रकार मुझे गैरहाजिर दिखा कर और वेतन से वंचित रखकर दैनिक जागरण प्रबंधन मुझे नौकरी से निकालने की साजिश रच रहा है।

भवदीय
श्रीकांत सिंह
मुख्य उपसंपादक
संपादकीय विभाग, दैनिक जागरण  
नोएडा

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