
सत्येंद्र कुमार-
चुनाव जीतने के बाद रितेश मिश्रा ने पूरी कार्यकारिणी के साथ बाबा गोरखनाथ को छोड़कर मुबारक खान को चढ़ाई चादर, कई पत्रकारों में रोष
गोरखपुर। प्रेस क्लब के अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सेल से जुडे सदस्य और पत्रकार रितेश मिश्र ने अपनी पूरी कार्यकारिणी को लेकर मुबारक खां की दरगाह पर जाकर चादर चढ़ाई। इसे लेकर गोरखपुर के पत्रकारों में तरह-तरह की चर्चा और कुछ पत्रकारों में भारी रोष है।
गोरखनाथ मंदिर से जुडे पत्रकारों का कहना कि जो काम आज तक गोरखपुर का कोई प्रेस क्लब अध्यक्ष नहीं कर सका, वह काम पं. रीतेश मिश्रा ने चुनाव जीतने के बाद कर दिखाया।
पत्रकारों का कहना है कि वैसे होना तो यह चाहिए था कि प्रेस क्लब अध्यक्ष रितेश मिश्रा चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सेल का मेंबर और गोरखपुर का मूल निवासी होने के नाते शिव तुल्य बाबा गोरखनाथ के मंदिर अपनी पूरी कार्यकारिणी को ले जाकर पूजा करके आशीर्वाद लेते फिर कोई और काम करते। लेकिन पं. रीतेश मिश्र को यह बुद्धि किसने दिया कि वह बाबा गोरखनाथ को छोड़कर सीधे मुबारक खां को चदर चढाने अपनी पूरी कार्यकारिणी लेकर पहुंच गये। फिलहाल उनके इस कृत्य को लेकर पूर्वांचल की पूरी पत्रकारिता जगत थू-थू कर रही है। इसके साथ ही सीएम योगी से जुडे सभी पत्रकारों में इसे लेकर भारी रोष है।
सभी जानते हैं कि जब योगी गोरखपुर के सदर सांसद थे, तभी से गोरखपुर प्रेस क्लब पर सीएम योगी की अनुकंपा बनी रही है, लिहाजा हमेशा से चुनाव जीतने वाली कार्यकारिणी चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले मंदिर जाकर आशीर्वाद ग्रहण करती रही है । लेकिन पहली बार ऐसा कुछ हुआ है जिसे लेकर पत्रकारों के बीच खुसर फुसर का जबरदस्त दौर शुरू हो चुका है। खुसर फुसर यह है कि गोरखपुर प्रेस क्लब चुनाव के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के पैर चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले मंदिर में पड़ने की बजाय इस बार दरगाह पर क्यों पड़ गए? खुसर फुसर होनी लाज़िमी थी, क्योंकि मंदिर में पैर पड़ने की कोई फोटो सोशल मीडिया में तो दिखाई नही पड़ी लेकिन दरगाह पर भव्य स्वागत के वीडियो ने खूब सुर्खियाँ बटोरी हैं।
“प्रेस क्लब गोरखपुर” के चुनाव में जीतने के बाद जब प्रत्याशियों के कदम मंदिर जाने की बजाय दरगाह की ओर चल पड़े तब लगने लगा की जीत के बाद उनका ‘आध्यात्मिक रास्ता’ थोड़ा बदल सा गया है। अब चुनाव जीतने के बाद सीधे दरगाह की शरण में जाने के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। यह भी सुना गया है कि जब से सीएम साहब की नजरें वक्फ़ बोर्ड और उसकी संपत्तियों पर टेढ़ी हुई हैं तब से वक्फ़ सम्पत्तियों के नंबरदार मौसम के बिगड़ने का अंदाजा भांप कर छतरी की तलाश में लगे हैं, और शायद इसी छतरी की तलाश और आस की जुगलबंदी प्रत्याशियों के कदमों को सबसे पहले दरगाह की ओर मोड़ ले गयी।
बताया जा रहा है कि दरगाह के वर्तमान मुखिया वक्फ़ संपत्तियों के खासे नंबरदार की भूमिका शुरू से ही निभाते चले आ रहे हैं । वहीं दूसरी तरफ इस दरगाह पर पत्रकारों का एक खास हुजूम भी शुरू से ही अपने निजी हित साधने के लिए अपनी वफ़ादारी दर्ज कराता चला आ रहा है। दरगाह और पत्रकारिता की आड़ में वक्फ़ संपत्तियों के सेवक पत्रकारिता का चोला ओढ़े बखूबी मलाई काट रहे थे, लेकिन इसी बीच इन दरगाह सेवी पत्रकारों के बीच का एक शख़्स प्रेस क्लब कार्यकारिणी का चुनाव जीत गया।
बाकी पदाधिकारी कुछ भांप पाते इससे पहले ही कार्यकारिणी का चुनाव जीते हुए उस विशेष शख़्स ने पदाधिकारियों का ब्रेन वाश कर उनका रूख दरगाह की तरफ मोड़ दिया। दरगाह पर काफी कम समय मे पदाधिकारियों के भव्य इस्तक़बाल के भव्य इन्तजमात कर डाले गए थे जिससे पता चलता है कि सब कुछ पहले से प्री प्लांड था। नतीजा यह हुआ कि जो सीएम सिटी में कभी न हुआ वो प्रेस क्लब गोरखपुर की वर्तमान नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने कर दिखाया।
देखें वीडियो-
https://x.com/yashbhadas/status/1883893322009420025?s=46
अपडेट-
भड़ास पर खबर छपने के बाद प्रेस क्लब के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष भूपेंद्र द्विवेदी द्वारा भड़ास को फोन कर बताया गया कि नवनिर्वाचित कार्यकारिणी चुनाव जीतने के बाद मंदिर गयी थी। इस सम्बंध में मंदिर में नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के साथ ली गयी तस्वीर भी उनके द्वारा प्रेषित की गई है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि खबर के प्रकाशन से पूर्व इस संबंध में आपका वक्तव्य लेने के प्रयास के तहत कई बार फोन करने के बाद भी आपका फोन नहीं उठा। इस पर उपाध्यक्ष भूपेंद्र द्विवेदी का कहना था कि व्यस्तता की वजह से फोन नहीं उठा पाए।




