पुलिस बर्बरता और अपराधियों को संरक्षण दे रही यूपी सरकार – रिहाई मंच

 लखनऊ : रिहाई मंच ने बाराबंकी में पत्रकार की मां के साथ थाने में बलात्कार करने के प्रयास में विफल होने के बाद एसओ राय साहब यादव और एसआई अखिलेश राय द्वारा जिंदा जला दिए जाने की घटना को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा बलात्कारी व अपराधी पुलिस अधिकारियों को खुला संरक्षण देने का नतीजा बताया है। मंच ने कानपुर में सपा उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन कानपुर ग्रामीण का बोर्ड लगे मकान के अंदर सेक्स रैकेट के खुलासे और उसमें सपा नेता दीपक गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद सपा के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और नेताओं के फार्म हाउसों तथा रिसार्ट पर छापा मारने की मांग की है।

रिहाई मंच नेता राजीव यादव ने कहा कि शाहजहांपुर में पत्रकार को जिंदा जला देने के बाद बाराबंकी में पत्रकार की मां के साथ थाने में बलात्कार करने का प्रयास और जिंदा जला देने की घटना साफ करती है कि प्रदेश के थाने बलात्कार करने के सेंटर में तब्दील हो चुके हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सपा से जुड़े कुछ प्रापर्टी डीलरों के लड़कों द्वारा कानपुर की कक्षा 10 की एक छात्रा के साथ 40 दिन तक बलात्कार होता है और जब 22 जून को लड़की बलात्कारियों अनिल यादव उर्फ पोलू यादव व उसके भाई अजित यादव पुत्र रामसिंह ग्राम कल्ली, व अनिल यादव के साले दिनेश यादव और पिंटू यादव पुत्र रामनरेश यादव उर्फ घुरू यादव ग्राम फत्तेखेड़ा, थाना मोहनलालगंज के ठिकानों से किसी तरह भागकर 100 नम्बर पर फोन करती है तब भी हफ्तों बाद एफआईआर दर्ज किया जाना और मेडिकल न होना साफ तौर से बलात्कारियों को बचाने का प्रदेश की पुलिस का खुला एलान लगता है। 

इसीलिए समाज देखता है कि कैसे सपा सरकार की पुलिस बलात्कार के आरोपियों को पकड़ने के बाद उनसे पैसे लेकर उन्हें छोड़ देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो मुलायम सिंह यादव बलात्कार को बच्चों की भूल कहते हैं उनकी लखनऊ के एसएसपी कार्यालय में फोटो लगना ही पूरे प्रदेश के बलात्कारियों को बलात्कार करने की खुली छूट का संदेश है। उन्होंने कहा कि एसएसपी को पुलिस कार्यालय की गरिमा को धूमिल नहीं करना चाहिए और अगर वे मुलायाम सिंह यादव के प्रति इस ओहदे पर बैठाए जाने के कारण कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हैं तो उन्हें उनकी तस्वीर अपने घर में लगानी चाहिए न कि कार्यालय में। अखिलेश यादव को बताना चाहिए कि उनके सरकार के विज्ञापनों या सरकारी आफिसों में उनके पिता और पत्नी की तस्वीरें किस हैसियत से लगाई जा रही हैं। रिहाई मंच नेता ने पत्रकार की मां के हत्यारे पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए इस घटना समेत पूरे सूबे में हो रही महिलाओं के साथ हिंसा पर उच्च स्तरीय जांच आयोग गठित करने की मांग करते हुए आगामी मानसून सत्र में महिलाओं की सुरक्षा पर विवेश सत्र आहूत करने की मांग की।

रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने मांग की कि प्रदेश के थानों, एसएसपी कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय समेत विभिन्न सरकारी दफ्तरों समेत सपा के कार्यलयों में सीसीटीवी कैमरा लगाकर सड़क पर स्क्रीन लगाई जाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को यह भ्रम त्याग देना चाहिए कि स्वजातीय अराजक व अपराधी तत्वों का संरक्षण कर वे जातीय ध्रुवीकरण करने में सफल हो जाएंगे। हमारा समाज और संस्कृति  महिलाओं को सम्मान देता है इसलिए बलात्कार की ऐसी घटनाओं के खिलाफ पूरा समाज जाति और धर्म से ऊपर उठकर अपराधियों की इस सरकार का मुहतोड़ जवाब देगा। रिहाई मंच प्रवक्ता ने राज्य महिला आयोग व सपा की महिला विधायकों और सांसद डिंपल यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे सूबे की महिलाओं के मान-सम्मान के साथ खड़ी है या फिर सपा के लंपट और महिला विरोधी सरकार के साथ।

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