जीएसटी का सच (पार्ट 25 से 36 तक) : छोटे अखबारों पर डीएवीपी के जरिए जीएसटी की मार

जीएसटी का सच (27) आज एक कारोबारी की बात

संजय कुमार सिंह
sanjaya_singh@hotmail.com

जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की तारीख बार-बार क्यों बढ़ रही है? जुलाई के जीएसटीआर-1 की अंतिम तिथि पहले 5 सितम्बर 2017 थी उसे बढ़ा कर 10 सितम्बर और फिर 10 अक्तूबर 2017 किया गया। ऐसे ही अन्य सभी रिटर्न जैसे जीएसटीआर-2 की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर, जीएसटीआर-3 की 10 नवम्बर , जीएसटीआर-4 (जुलाई से सितम्बर) त्रैमासिक रिटर्न की डेट फिलहाल अपरिवर्तित (18 अक्तूबर 2017) जीएसटीआर-6 (जुलाई-17) की 13 अक्तूबर 2017, 30 जून 2017 तक के स्टाक पर दिए गये एक्साइज ड्यूटी के इनपुट क्लेम ट्रान्जेक्शन-1 की अंतिम तिथि जो कि 28 सितम्बर थी उसे बढ़ा कर 31 अक्तूबर 2017 तक कर दिया है। इशका मतलब यह हुआ कि इन दिनों को आपको सारा काम छोड़कर या करते हुए रिटर्न दाखिल करना भी सुनिश्चित करना है। भले ही उस तारीख को जीएसटी साइट न चले, कोशिश करने पर भी रिटर्न दाखिल न हो पाए और बाद में तारीख बढ़ा दी जाए।

सरकार ने नोटबंदी की ही तरह जीएसटी को भी बिना तैयारी भारी जंजाल के साथ लागू कर दिया है, और नोटबंदी की तरह संभाल नहीं पा रही है। उन दिनों 50 दिन में 100 से अधिक फैसले लिए गए थे वैसे ही जीएसटी में भी फैसले बदल जा रहे हैं और व्यापारी जीएसटी की चकरघिन्नी में पिस रहा है। दरअसल, जीएसटी लागू होने से पहली की जो बची खुची बिक्री रह गयी है सरकार उसपर दोहरा कर ले रही है। 30 जून 2017 तक की खरीद पर सरकार व्यापारियों से दोबारा जीएसटी वसूल रही है और उस स्टाक पर लगे एक्साइज और सीएसटी का समायोजन नहीं किया जा रहा है। इस कारण व्यापारी तय जीएसटी दर से जो भी कर बन रहा है, उसे जमा कर रहे हैं। कायदे से पहले दिए गए एक्साइज ड्यूटी को समायोजित करके जमा किए जाने वाले जीएसटी में से घटाया जाना चाहिए ना था पर वह समायोजन सरकार नहीं करना चाहती है। इसलिए 30 जून 2017 तक के स्टाक की डीटेल का ट्रांजैक्शन-1 रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि अब 30 अक्तूबर 2017 कर दी गयी है।

सरकार टैक्स मद में वसूली ज्यादा होने की बात कर रही है पर यह नहीं बता रही है कि कितने पैसे उसने जबरन वसूले हैं और जो ज्यादा आए हैं उसे लौटाने की नीयत उसकी है ही नहीं। जीएसटी लागू होने से पहले के स्टाक पर लगे एक्साइज का कायदे से समायोजन होना चाहिए। यह शुल्क कोई मामूली होता भी नहीं है पर तमाम अगर-मगर की आड़ लेकर इसका समायोजन टाला जा रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि जब “वैल्यू ऐडेड टैक्स” अर्थात वैट लागू हुआ था तो व्यापारियों को ऐसी कोई समस्या नहीं हुई थी। व्यापारियों के पुराने स्टाक पर लगा बिक्री कर छह महीने की किस्तों में समायोजित किया गया था।

नोटबंदी के बाद अब जीएसटी के जरिए सरकार व्यापारियों को हर तरह से परेशान कर रही है। यदि मैं अपनी ही बात करूँ तो ईद उल अज़हा के बाद प्रति दिन स्टाक का फिजिकल वेरीफिकेशन और फिर एक-एक सामान के बिल की डीटेल्स सब काम धाम छोड़कर कर निकलवा रह हूँ। यह सब इसलिए कि मुझे इस सरकार से इस स्टाक पर सात डीजिट में लगे एक्साइज ड्यूटी को वापस इनपुट लेना है। सरकार बिक्री पर अपनी तय दर से पूरी जीएसटी तो जमा करा रही है परन्तु मेरा पैसा वापस नहीं कर रही है। अब वह 1 जुलाई से लागू जीएसटी के 4 महीने तक ट्न्जेक्शन-1 फार्म लेगी फिर फिजिकल वेरीफिकेशन कराएगी फिर अंडर टेबल प्रक्रिया चलेगी, तब जाने कब वह हमारा दिया एक्साइज कर वापस करेगी और वह भी जाने कितनी शर्तों के साथ। मेरे जैसी स्थिति देश के सभी व्यापारियों की है। दोहरा कर वसूलकर सरकार ₹92 हजार करोड़ टैक्स वसूलने का दिखावा कर रही है। हकीकत यह है कि जितना बड़ा व्यापारी उसे उतना बड़ा नुकसान इस जीएसटी से हो रहा है।

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