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मुख्य धारा में हेमेंद्र जैसे नॉन कम्प्रोमाइजिंग ईमानदार पत्रकार के लिए स्थान नहीं रह गया था

Gunjan Sinha : ”बिहार के ग्रामीण इलाकों में वर्ग संघर्ष की वारदातें कवर करके जब लौटते थे हमलोग (हेमेन्द्र, अरुण रंजन, अरुण सिन्हा) तो हेमेन्द्र का रुमाल आंसुओं से भीगा रहता था और सबकी जेबें खाली हो चुकी होती थीं.”

Gunjan Sinha : ”बिहार के ग्रामीण इलाकों में वर्ग संघर्ष की वारदातें कवर करके जब लौटते थे हमलोग (हेमेन्द्र, अरुण रंजन, अरुण सिन्हा) तो हेमेन्द्र का रुमाल आंसुओं से भीगा रहता था और सबकी जेबें खाली हो चुकी होती थीं.”

उपरोक्त बात अरुण रंजन जी ने कभी मुझे बताया था.

आँखों में आंसू लेकर और जेबें खाली करके लौटना, ये थी हेमेन्द्र की पत्रकारिता लेकिन उन्होंने आंसुओं की वजह से कभी भी तथ्यों को आँखों से ओझल नहीं होने दिया. जनपक्षीय पत्रकारिता करने के कारण न सिर्फ सर्कार की नजर में वे संदिग्ध हुए बल्कि पुलिस ने उन्हें बुरी तरह पीटा भी, छौड़ादानो, लालू प्रसाद के राज में. लेकिन हेमेन्द्र कभी न टूटे न समझौता किया. लेकिन वर्तमान दौर की मुख्य धारा में उनके जैसे नॉन कम्प्रोमाइजिंग ईमानदार पत्रकार के लिए स्थान नहीं रह गया था.

अलविदा.

वरिष्ठ पत्रकार गुंजन सिन्हा के फेसबुक वॉल से.


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