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सियासत

चुनाव आयोग राज्यसभा की प्रत्येक सीट के लिए अलग-अलग चुनाव करा सकता है!

चुनाव आयोग यदि भविष्य में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाओं में प्रत्येक सीट के लिए अलग अलग चुनाव कराये तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अभी तक द्विवार्षिक चुनाव सभी सामान्य रिक्तियों के लिए एक साथ कराये जाते हैं। अभी तक अलग अलग वर्षों के चुनाओं में जीते लोगों के इस्तीफे या किसी अन्य कारणों से रिक्त सीटों का अलग अलग चुनाव कराया जाता रहा है क्योंकि इनकी मूल रिक्तियों का चुनावी वर्ष अलग अलग होता था लेकिन पहली बार सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचने के लिए चुनाव आयोग गुजरात की राजयसभा के लिए एक ही चुनावी वर्ष की दो रिक्तियों का चुनाव एक साथ करने के बजाय अलग अलग करने जा रहा है ताकि भाजपा को दोनों सीटों पर विजय मिल सके।

गुजरात में राज्यसभा की खाली हुईं दो सीटों पर एक साथ चुनाव की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय पहुंची कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। उच्चतम न्यायालय के जस्टिस संजीव खन्ना एवं जस्टिस बी आर गवयी की पीठ ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए चुनाव आयोग को दोनों सीटों पर अलग-अलग चुनाव कराने को हरी झंडी दे दी है। अमित शाह और स्मृति इरानी के लोकसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुईं दोनों सीटों के लिए 5 जुलाई को वोटिंग होगी लेकिन दोनों सीटों के लिए अलग-अलग वोटिंग होगी। गुजरात की दो राज्यसभा सीटों पर होने जा रहे चुनाव को गुजरात कांग्रेस ने असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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चुनाव आयोग की ओर से 15 जून को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दोनों सीटों के लिए चुनाव 5 जुलाई को ही होने हैं। दोनों सीटों पर चुनाव अलग-अलग हो रहे हैं, लिहाजा विधायक एक बार में ही दोनों सीटों के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे। आयोग के इस फैसले को गुजरात कांग्रेस के नेता परेश भाई धनानी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बीजेपी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ओबीसी नेता जुगलजी ठाकोर को अपना उम्मीदवार बनाया है। आज ही नॉमिनेशन की आखिरी तारीख है।

गुजरात विधानसभा में बीजेपी के 100 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 77। यहां राज्यसभा सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 61 वोटों की जरूरत होगी। अगर दोनों रिक्तियों को भरने के लिए एक साथ चुनाव होते और विधायक सिर्फ एक बार में वोट देते तो कांग्रेस के पास एक सीट जीतने का मौका होता। लेकिन अब दोनों सीटों के लिए अलग-अलग वोटिंग होगी, जिसमें बीजेपी दोनों सीटों को जीत सकती है क्योंकि विधानसभा में उसका बहुमत है।

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चुनाव आयोग का कहना है कि राज्यसभा सहित दोनों सदनों की सभी रिक्तियों पर उपचुनाव के लिए उन्हें ‘अलग-अलग रिक्तियां’ माना जाएगा और अलग-अलग अधिसूचना जारी की जाएगी। चुनाव भी अलग-अलग होंगे। हालांकि इनका कार्यक्रम समान हो सकता है। चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट के 1994 और 2009 के दो फैसलों का भी जिक्र किया है, जो उसके फैसले का समर्थन करते हैं।

कांग्रेस की दलील है कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले इस मामले में लागू नहीं होते क्योंकि वे अलग-अलग वर्षों (1989 और 1990) में खाली हुईं दो सीटों से जुड़े थे और उनका कार्यकाल अलग-अलग समय पर खत्म हुआ था, जबकि मौजूदा मामले में दोनों ही सीटों का चुनाव एक साथ एक ही वर्ष में हुआ था और दोनों ही सीटे एक साथ खाली हो रही हैं।

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उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन में दखल देने से इनकार कर दिया।कोर्ट ने कहा कि आप (कांग्रेस) इसे चुनाव के बाद हाईकोर्ट में चुनौती दें। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आप चुनाव के बाद चुनाव याचिका दाखिल कर सकते हैं। ये आपका कानूनी अधिकार है। आयोग की अधिसूचना में दखल देना सही नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद चुनावी याचिका यानी इलेक्शन पेटिशन के जरिए ही इसे चुनौती दी जा सकती है। चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही हम चुनाव याचिका के रूप में सुनेंगे लेकिन इस समय नहीं। कोर्ट ने कहा कि रेगुलर वैकेंसी भरने के लिए एकसाथ चुनाव होते हैं। लेकिन आकस्मिक यानी कैजुअल वैकेंसी के लिए एक साथ चुनाव कराने की कोई बाध्यता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अभी निर्वाचन आयोग के सामने याचिका दाखिल करें।

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

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