दैनिक भास्कर मेरठ के मार्केटिंग प्रभारी हरिओम ठाकुर का ब्रेन हेमरेज से निधन

लियाकत मंसूरी-

मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई, पेतृक गांव टोड़ा कल्याणपुर में हुआ अंतिम संस्कार

मेरठ। दैनिक भास्कर मेरठ से जुड़े हरिओम ठाकुर का मंगलवार सुबह निधन हो गया। सोमवार सुबह उनको बे्रन हेमरेज आया था, परिजन तभी अस्पताल लेकर चले गए, लेकिन उनको बचाया नहीं जा सका। हरिओम ठाकुर मेरठ में मार्केटिंग प्रभारी थे, वे कई सालों तक मेरठ में दैनिक भास्कर ब्यूरो चीफ भी रहें। उनके अचानक निधन से मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

हरिओम ठाकुर बेहद मिलनसार व्यक्ति थे। हमेशा मुस्कुराते रहना उन्हें जिंदादिल बनाता था। मंगलवार सुबह जैसे ही उनके निधन का समाचार मिला तो किसी को यकीन नहीं आया। परिजनों ने बताया, सोमवार सुबह हरिओम स्नान करने के लिए बाथरूम गए थे, इसी दौरान वे बेहोश होकर गिर गए। तभी उनको बागपत रोड स्थित अस्पताल में ले जाया गया। हालत गंभीर देखते हुए यहां से उनको दूसरे अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया। गढ़ रोड स्थित एक अस्पताल में उनको भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने काफी प्रयास किया, लेकिन मंगलवार सुबह उनकी मृत्यु हो गई। हरिओम टीपी नगर क्षेत्र के सूर्यपुरम में परिवार के साथ रह रहे थे। वे अपने पीछे पत्नी के अलावा दो पुत्रों (15 व 7 वर्ष) को छोड़कर गए हैं। उनके निधन से जहां परिजनों में कोहराम मचा है, वहीं मीडिया जगत में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन उनको पेतृक गांव लेकर चले गए, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। 

कई अखबारों में संभाला मार्केटिंग का प्रभार

हरिओम ठाकुर जनपद मुजफ्फरनगर के शाहपुर स्थित गांव टोड़ा कल्याणपुर के रहने वाले थे। वे काफी समय से मेरठ में रह रहे थे। यहां उन्होंने कई अखबारों में मार्केटिंग का प्रभार देखा। दैनिक जागरण, अमर उजाला, नेशनल दुनिया, दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में काम किया। कई सालों तक मेरठ में दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ रहें। वर्तमान में वे दैनिक भास्कर में मार्केटिंग प्रभारी थें। उनके निधन पर मेरठ व गाजियाबाद कार्यालय में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए मौन रखा गया। 

हरिओम की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता: अशोक निर्वाण

दैनिक भास्कर नोएडा संस्करण के मुद्रक, प्रकाशक एवं संपादक अशोक निर्वाण ने बताया, हरिओम ठाकुर की कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता। हरिओम जिस संस्थान में भी रहें, हमेशा दिल लगाकर काम किया। दैनिक भास्कर को मेरठ में ऊंचाइयों पर पहुंचाने का श्रेय हरिओम को ही जाता है।



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