Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

हर्षा रिछारिया ने फिर से संन्यास ले लिया!

प्रवीण दुबे-

पहले न्यूज़ एंकर, फिर मॉडल, फिर कुंभ की वायरल साध्वी, फिर अध्यात्म मार्ग की बुराई गिनाने के बाद ग्लैमर की दुनिया में वापसी का ऐलान करने वाली हर्षा रिछारिया ने आज फिर उज्जैन में संन्यास ले लिया..

अपना पिंडदान भी कर दिया..

संन्यास का मोटा मोटा अर्थ होता है “सम्यक नाश” कामनाओं,वासनाओं, मान ,अपमान, सांसारिक संबंध, सुख दुख,सभी का नाश.. देह में रहते हुए भी विदेह रहना..

आशा है कि हर्षा ये सब मन से कर पाएं..

वैसे वो वायरल प्रयाग कुंभ से हुई थीं, अब सिंहस्थ आने वाला है.. कहीं ये फिर प्रचार की भूख तो नहीं… यदि वाकई सांसारिक विरक्ति है, तो ये बहुत दुष्कर और कठिन कार्य तो है लेकिन सीधा मोक्ष की तरफ ले जाता है..


जो मन से विरक्ति या निष्काम कर्म का भाव नहीं लाता, वह जंगल/ पहाड़/ आश्रम या दुनिया के किसी एकान्त कोने में चला जाए, वहां अपना संसार खड़ा कर लेता है।
अक्सर हम लोग आपस में बातें करते हैं या सोचते हैं कि घर परिवार से दूर वानप्रस्थ गमन हमें वैराग्य और मन की शांति दे सकता है। जबकि वैराग्य और मन की शांति वहां तब तक संभव नहीं है जब तक हम वहां भी अपना कोई नया संसार खड़ा करने के प्रति आसक्ति न पालें। इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी आश्रम में न जाएं अथवा खुद का आश्रम या कुटिया न बनाएं। इसका अर्थ यह है कि जिस तरह सांसारिक जीवन में रहते हुए भी अपने भीतर निष्काम कर्म का भाव पैदा करके हम बिना कहीं जाए बैरागी हो सकते हैं, उसी तरह कर्ता कोई और है, और हम निमित्त मात्र हैं का भाव लाकर ही वानप्रस्थ गमन मन की शांति और बैराग का जीवन दे सकता है।

-अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन