
कन्हैया शुक्ला-
हसदेव बस नाम का हसदेव.. जहां देवता हंसते थे अब वहां सिर्फ़ एक भष्मासुर बिज़नेसमैन ही हंसेगा ..
छत्तीसगढ़ में हसदेव को अब अडानी की नज़र लग चुकी है.. दुनिया भर में अमीरों की सूची में अडानी आता है पर फिर भी ग़रीब बेबस रोते-बिलखते आदिवासियों को क्यों बर्बाद और कुचलने में लगा है ..जिस देश की राष्ट्रपति महिला आदिवासी समुदाय से है जिस राज्य का नेतृत्व आदिवासी समाज से आये मुख्यमंत्री के हाथों में हो ..वहां इस कदर आदिवासियों पर अत्याचार आदिवासी समाज के मुंह पर अडानी का तमाचा है ..!



सरकार बहुत दोगली किस्म की होती है जहां एक तरफ़ आम आदमी से पौधा रोपण की बकवास करती है वहीं बड़े कॉपरेट घरानों के चप्पलों पर नाक रगड़ती है ..अभी कुछ दिन पहले हमारे परम पूज्य भगवान के अवतार स्वरूपी बीजेपी के प्रधानमंत्री ने एक पेड़ माँ के नाम लगाने का ढ़कोसला किया था , जिस पर देश भर के सभी बीजेपी नेता अचानक से पर्यावरण प्रेमी बन गए थे ऐसा लग रहा था कि अब हरियाली ही हरियाली देश भर में होगी ..पर ये सत्ता का दोगलापन देश की जनता को बर्बाद कर रहा है ..पौधा-रोपण एक बहुत बड़ा भ्रष्टाचार का विषय है एक पौधा लगाने से ले के उसके ट्रांसपोर्ट और फिर देख-रेख का पूरा बजट बनता है जो मिल-बाँट के सब डकार जाते हैं ..जहां एक तरफ़ पौधा रोपण की बात कर रहे वहीं ये सरकार पूरा जंगल उजाड़ रहे हैं .. हे प्रभु पता नहीं ये अडानी का पेट कब भरेगा ..? मेरी तो भगवान से विनती है कि इस तरह का भूखा-नंगा गुजराती बिज़नेस मैन भारत में न पैदा करें ..क्योंकि ऐसे बिज़नेस मैन पर देशवासियों को गर्व कभी नहीं होगा ..क्योंकि भस्मासुर का पेट कभी भारत के लोग भर नहीं पाएंगे ..देश में टाटा जैसे ही लोग भेजना अडानी को नहीं ..!!
हसदेव एक बड़ा जंगल है और इस घने वन क्षेत्र के नीचे कुल पाँच अरब टन कोयला होने का अनुमान है.. हसदेव अरण्य क्षेत्र के नीचे कोयले का भंडार पाया गया है.. जिसके चलते यहां परसा ईस्ट केते बासेन खदान बनाया जा रहा है ..1 लाख 70 हजार हेक्टेयर में से लगभग 137 एकड़ जंगल के क्षेत्र के पेड़ों की कटाई हो चुकी है…बताइये ये कानून बताते हैं कि एक हरा पेड़ एक जीव हत्या के बराबर है ..
अब जंगल मे रहने वाले आदिवासी पेड़ कटने पर संघर्ष क्यों न करें ..? पर हसदेव में आदिवासियों के सामने आदिवासियों को ही खड़ा कर दिया गया है अब घर के अंदर एक-दूसरे से लड़ाई हो रही है ..जंगल बचाना सब चाहते हैं पर भस्मासुर के विपक्ष में बोलने की औकात नहीं है ..पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के हसदेव जंगलों में परसा कोयला खदान में पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले आदिवासियों पर पुलिस ने बेरहमी से लाठीचार्ज किया …इसमें छत्तीसगढ़ के 13 पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं.. इस मामले में भारत की आदिवासी महिला राष्ट्रपति से लेकर राज्य के आदिवासी मुख्यमंत्री को ये सोचना चाहिए कि वो गुजराती बिज़नेस मैन का पेट भरने के लिए क्या हजारों-लाखों आदिवासियों को बर्बाद कर देंगे ..? ख़ैर छोड़ो वो सोच के भी क्या ही कर लेंगे ..!
बीजेपी सिर्फ़ ढ़िढोरा पिटती है कि देश मे आदिवासियों को बहुत अहम स्थान दे रही है ..पर आगे आने वाले दिनों में ये भी सच रहेगा कि जिस समय छत्तीसगढ़ और देश के सर्वोच्च पद पर आदिवासी समाज से लोग बैठे थे उसी समय हसदेव में हजारों-लाखों आदिवासियों को बर्बाद किया गया था .?
चलो अब गमले में पौधा लगाते हैं ..!!
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