नॉर्वे की पत्रकार का प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछना और मोदी का बिना जवाब दिए चुपचाप निकल जाना, ये बात दुनिया भर में चर्चा का विषय है। सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत में पत्रकारों की हालत का सच बयान करना शुरू कर दिया है।
यूजर्स मजाकिया अंदाज में लिख रहे हैं कि अगर वही पत्रकार भारत में होतीं, तो सबसे पहले नगर निगम की टीम उनके घर पहुंचती और बालकनी नापना शुरू कर देती — “मैडम, ये डेढ़ इंच ज्यादा बाहर निकली हुई है…”
उसके बाद बुलडोजर एंट्री मारता और टीवी चैनलों पर ब्रेकिंग चलती — “राष्ट्रविरोधी बालकनी पर बड़ी कार्रवाई!” और क्या क्या होता.. नीचे पढ़िए
अगर वह भारत में पत्रकार होतीं, तो सबसे पहले उनके घर की जांच के लिए अधिकारी भेजे जाते कि कहीं उनकी बालकनी तय सीमा से बाहर तो नहीं बनी है। फिर उसे गिराने के लिए बुलडोजर पहुंच जाता।
जिस मीडिया संस्थान में वह काम करतीं, उस पर उन्हें नौकरी से निकालने का दबाव बनाया जाता। अगर संस्थान मना करता, तो अब तक ED उसके दफ्तर पहुंच चुकी होती।
संभव है कि उनका फोन Pegasus जैसे स्पाइवेयर से निगरानी में रखा जाता।2014 का कोई पुराना ट्वीट निकालकर उसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता दिया जाता।
हर शाम टीवी पर पेशेवर नाराजगी विशेषज्ञों की पूरी फौज बैठती और समझाती कि सवाल पूछना दरअसल विदेशी साजिश का हिस्सा है।
एक ही बयान को लेकर तीन अलग-अलग राज्यों में नई FIR दर्ज हो जाती।
उनके पासपोर्ट की स्थिति अचानक राष्ट्रीय चिंता का विषय बना दी जाती।
अगर वह यूट्यूब पर चली जातीं, तो कुछ ही घंटों में उनका चैनल किसी नीति उल्लंघन के नाम पर कार्रवाई झेलता।
और आखिर में उन्हें बेहद विनम्रता से समझाया जाता कि “भारत में अभिव्यक्ति की पूरी आजादी है”…
बस शर्त इतनी है कि आपकी बात पहले से मंजूरशुदा हो।
-कपिल
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