हेमंत तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस UPWJU के प्राथमिक सदस्य नहीं, ये लोग IFWJ के बारे में भ्रम फैला रहे

लखनऊ : ​उत्तर प्रदेश वर्किंग जर्नालिस्ट यूनियन के अध्यक्ष श्री हसीब सिद्दीकी ने अपने लिखित व्यक्तव्य में आज स्पष्ट किया है की उसके राष्ट्रीय संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स में यू.पी. से केवल तीन ही सदस्य है, श्री के विक्रम राव गत वर्ष सीधे मतदान में राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे, जबकि मार्च 2016 में बेंगलुरू के राष्ट्रीय अधिवेशन में श्री श्यामबाबू को कोषाध्यक्ष और संतोष चतुर्वेदी को मंत्री बनाया गया था|

संतोष चतुर्वेदी ने बताया कि यह स्पष्टिकरण इसलिये ज़रूरी था क्यूँकि कल कुछ फ़र्ज़ी लोगों ने IFWJ का letter pad इस्तेमाल कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को एक ज्ञापन दिया था। इस ज्ञापन में Majithia वेतनमान के रपट का ज़िक्र किया गया था। इन तथाकथित फ़्रॉड लोगों को ये पता नहीं है की IFWJ कि यू.पी. एकाई ने ४ माह पहले ही इस सम्बंध में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को अवगत करा दिया था और उत्तर प्रदेश सूचना विभाग रपट तैयार करने के निर्देश भी जारी कर चुका है।

इस ज्ञापन को देने वाले दो व्यक्ति अपने आप को IFWJ का पदाधिकारी बता रहे है, जबकि सत्यता में ये दोनो की संगठन विरोधी गतिविधियों के कारण निस्काषित किये गये थे। ये दोनो, हेमंत तिवारी और सिद्दार्थ कलहंस यू.पी.डब्लू.जे.यू. के प्राथमिक सदस्य नहीं है| अतः इनका आइ.एफ.डब्लू.जे. का पधाकारी होने का सवाल ही नहीं उठता| ये हमारे संगठन Indian Federation of Working Journalists का नाम इस्तेमाल कर, फ़र्ज़ी ख़बर भेज रहें है।

​मजीठिया जैसे संवेदनशील मसले पर आइ.एफ.डब्लू.जे. बहुत पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन दे चुका है, जिस पर उत्तर प्रदेश सूचना विभाग ने उच्चतम न्यायालय में रपट पेश करने की प्रक्रिया 1 माह पहले ही चालू कर दी थी| जिसका ज़िक्र मुख्यमंत्री ने भी किया जब इन तथाकथित लोग उन्हें ज्ञापन दे रहे थे। मुख्यमंत्री के शब्द थे “ये बहुत पुराना मामला है, आप लोग बहुत देर से जागे”।

मेरा आपसे अनुरोध है की इन फ़र्ज़ी लोगों द्वारा प्रचारित की गई ख़बर का खंडन आप अपने अख़बार में छापने की कृपा करें।

एक पृथक वक्तव्य में आइ.एफ.डब्लू.जे. के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मजीठिया वेतनमान मसले को गंभीरता से लेने का आग्रह किया था | उन्होंने कहा की मुख्यमंत्री ने काबिना की बैठक के बाद सचिवालय के गलियारे में कतिपय लोगों द्वारा ज्ञापन में केवल तीन वाक्य ही कहे “मजीठिया वेतनमान का मामला बहुत पुराना है, आप लोग (ज्ञापनकर्ता) देर से जागे, मुख्य सचिव इस ज्ञापन पर विचार करेंगे|”

इस टिपण्णी पर श्री के विक्रम राव ने कहा की मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव को अपने श्रम विभाग को कसना चाहिये तथा वेतनमान न लागू करने वालों के बारे में सर्वूच न्यायालय को अवगत करना चाहिये।

संतोष चतुर्वेदी
राष्ट्रीय सचिव (उत्तर)
IFWJ

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