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हिंदी के संपादक हीनता बोध के शिकार हैं : विष्णु नागर

Vishnu Nagar : हमारे हिंदी के अखबारों के मालिक और उनकी लगभग गुलामी करने वाले संपादक किस हद तक हीनताबोध के शिकार हैं, इसका पता खासकर उनके तथाकथित मनोरंजन पृष्ठों से चलता है। वे दिल्ली को दिल्ली नहीं लिख सकते, डेल्ही लिखेंगे।

मोटरसाइकिल लिखने में उन्हें शर्म आती है, बाइक लिखेंगे।लड़कों को ब्वायज और लड़कियों को गर्ल्स लिखेंगे। समारोह को फेस्ट, आधुनिक को माडर्न, ध्यान को मेडिटेशन। ऐसा सड़ा अखबार जरा अंग्रेजी में निकालकर दिखाओ। हिंदी को लेकर अगर ऐसी ग्रंथि है तो निकालो अंग्रेजी अखबार और ऐसा जबर्दस्त मुनाफा और अन्य गलत फायदे बटोरकर दिखाओ तो जानें। कोई धेलेभर को नहीं पूछेगा।

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार विष्णु नागर की एफबी वॉल से.

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